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National Social Security Board for Gig Workers: डिलीवरी पार्टनर्स और कैब ड्राइवरों के लिए केंद्र का नया बोर्ड, क्या अब मिलेगी PF-पेंशन जैसी सुविधा?

केंद्र सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को गिग, प्लेटफॉर्म और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी की। श्रम मंत्री की अध्यक्षता वाला यह बोर्ड जोमैटो, स्विगी और ओला जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मचारियों के लिए बीमा, स्वास्थ्य और बुढ़ापे की सुरक्षा जैसी योजनाओं की सिफारिश और निगरानी करेगा। हालांकि, बोर्ड बनने से तुरंत PF, पेंशन या बीमा का लाभ मिलना शुरू नहीं होगा। इसके लिए सरकार को अलग-अलग योजनाएं और उनकी पात्रता तय करनी होगी।

National Social Security Board for Gig Workers: डिलीवरी पार्टनर्स और कैब ड्राइवरों के लिए केंद्र का नया बोर्ड, क्या अब मिलेगी PF-पेंशन जैसी सुविधा?

National Social Security Board for Gig Workers: केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों असंगठित कर्मचारियों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड फॉर अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स एंड गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स (National Social Security Board for Gig Workers) के गठन की अधिसूचना जारी की। यह बोर्ड सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत काम करेगा। इसका उद्देश्य ऐसे कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाने और उन पर नजर रखने में सरकार की मदद करना है, जिन्हें आमतौर पर पारंपरिक नौकरी की तरह PF, पेंशन और दूसरी सुविधाएं नहीं मिलती हैं।इस फैसले का असर जोमैटो, स्विगी, ओला और उबर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवरों के साथ-साथ दूसरे गिग वर्कर्स पर भी पड़ सकता है। हालांकि, बोर्ड के गठन का मतलब यह नहीं है कि इन सभी कर्मचारियों को तुरंत पेंशन, बीमा या PF मिलना शुरू हो जाएगा। इसके लिए सरकार को अलग-अलग योजनाएं बनाकर उन्हें लागू करना होगा।

श्रम मंत्री होंगे बोर्ड के अध्यक्ष, कई क्षेत्रों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, सामाजिक संगठनों, श्रमिक यूनियनों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स के संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।इस तरह बोर्ड में सरकार, कंपनियों और कर्मचारियों से जुड़े पक्षों को जगह दी गई है। इसका मकसद अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों की जरूरतों को समझना और उनके लिए उपयोगी योजनाओं की सिफारिश करना है। बोर्ड की बैठक साल में कम से कम तीन बार होगी। बैठकों का समय, स्थान और कामकाज से जुड़े नियम केंद्र सरकार तय करेगी।

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बोर्ड के पास होंगी ये अहम जिम्मेदारियां

बोर्ड का मुख्य काम असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बनाने की सिफारिश करना होगा। यह केंद्र सरकार को बताएगा कि अलग-अलग तरह के कर्मचारियों के लिए किस तरह की योजनाओं की जरूरत है।इसके अलावा, बोर्ड सामाजिक सुरक्षा संहिता के लागू होने से जुड़े मामलों में सरकार को सलाह देगा। केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी करना भी इसकी जिम्मेदारी होगी। बोर्ड राज्य स्तर पर कर्मचारियों का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था की समीक्षा करेगा। साथ ही, सामाजिक सुरक्षा के लिए बनाए गए फंड और खातों से हुए खर्च की भी जांच करेगा।
केंद्र सरकार समय-समय पर बोर्ड को दूसरी जिम्मेदारियां भी दे सकती है। यानी यह बोर्ड केवल योजनाओं की सिफारिश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके कामकाज और खर्च की समीक्षा में भी भूमिका निभाएगा।

गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स में क्या अंतर है?

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में पहली बार गिग वर्कर और प्लेटफॉर्म वर्कर की अलग-अलग परिभाषा दी गई है। गिग वर्कर ऐसा व्यक्ति होता है, जो पारंपरिक कर्मचारी और नियोक्ता के रिश्ते से बाहर किसी काम या व्यवस्था के तहत कमाई करता है। इसमें फ्रीलांसर, स्वतंत्र रूप से काम करने वाले लोग और अलग-अलग प्रोजेक्ट के आधार पर काम करने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।वहीं, प्लेटफॉर्म वर्कर वह व्यक्ति होता है, जो किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम करता है। उदाहरण के लिए, जोमैटो और स्विगी के डिलीवरी पार्टनर्स या ओला-उबर के ड्राइवर। इन प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहक और सेवा देने वाले व्यक्ति आपस में जुड़ते हैं और काम के बदले भुगतान होता है।
इस तरह हर प्लेटफॉर्म वर्कर गिग वर्कर की श्रेणी में आ सकता है, लेकिन हर गिग वर्कर का किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ा होना जरूरी नहीं है।

बीमा, स्वास्थ्य और बुढ़ापे में आर्थिक मदद का प्रावधान

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 114 के तहत केंद्र सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए कई तरह की योजनाएं बना सकती है। इनमें जीवन और दिव्यांगता बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा और बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सरकार जरूरत के हिसाब से दूसरी सुविधाएं भी तय कर सकती है।इन योजनाओं का खर्च केंद्र सरकार, राज्य सरकार, एग्रीगेटर कंपनियों या लाभार्थियों के योगदान से पूरा किया जा सकता है। कुछ योजनाओं में इन सभी स्रोतों से मिलकर भी पैसा जुटाया जा सकता है।
संहिता में एग्रीगेटर कंपनियों के योगदान का भी प्रावधान है। इसके तहत तय श्रेणी की कंपनियों को अपने सालाना टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत तक योगदान देना पड़ सकता है। हालांकि, यह योगदान उनके गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को किए गए या किए जाने वाले भुगतान के 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता। योगदान की वास्तविक दर और इसे शुरू करने की तारीख केंद्र सरकार की अधिसूचना से तय होगी।

क्या जोमैटो और स्विगी के कर्मचारियों को मिलेगा PF और पेंशन?

बोर्ड के गठन से गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं तैयार करने का रास्ता मजबूत हुआ है, लेकिन इससे सभी कर्मचारियों को अपने आप PF या पेंशन मिलने की गारंटी नहीं है। सामाजिक सुरक्षा संहिता में जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ तथा बुढ़ापे की सुरक्षा जैसे प्रावधान हैं। PF का लाभ किसे और किन शर्तों पर मिलेगा, यह अलग नियमों और लागू योजनाओं पर निर्भर करेगा।इसलिए जोमैटो, स्विगी, ओला और उबर जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मचारियों को वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब सरकार संबंधित योजनाओं की शर्तें, पात्रता और उन्हें लागू करने की व्यवस्था तय करेगी।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को 21 नवंबर 2025 से लागू किया गया था। अब राष्ट्रीय बोर्ड के गठन के बाद गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए योजनाओं की सिफारिश, निगरानी और उनके क्रियान्वयन से जुड़े काम को संस्थागत आधार मिलेगा। आने वाले समय में इन योजनाओं के नियम और पात्रता तय होने पर ही साफ होगा कि कितने कर्मचारियों को किस तरह का लाभ मिलेगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

केंद्र सरकार ने Gig और Platform Workers के लिए कौन-सा Social Security Board बनाया है?

केंद्र सरकार ने नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड फॉर अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स एंड गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स का गठन अधिसूचित किया है। यह सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत काम करेगा और इन कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश और निगरानी करेगा।

Gig Workers और Platform Workers में क्या अंतर है?

गिग वर्कर वह व्यक्ति है, जो पारंपरिक नौकरी के रिश्ते से बाहर काम करके कमाई करता है। प्लेटफॉर्म वर्कर वह व्यक्ति है, जो किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सेवा देता है। जोमैटो और स्विगी के डिलीवरी पार्टनर्स इसके उदाहरण हैं।

Zomato, Swiggy और Ola के कर्मचारियों को इस बोर्ड से क्या फायदा हो सकता है?

इन कंपनियों के डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवरों के लिए दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य, मातृत्व और बुढ़ापे से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बनाई जा सकती हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ सरकार की ओर से अधिसूचित योजनाओं और उनकी पात्रता शर्तों पर निर्भर करेगा।

Code on Social Security के तहत Gig Workers को कौन-कौन से लाभ मिल सकते हैं?

इस संहिता के तहत जीवन और दिव्यांगता बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा और बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच जैसी सुविधाओं का प्रावधान है। सरकार जरूरत के अनुसार दूसरे लाभ भी तय कर सकती है।

क्या नए बोर्ड के गठन से Gig Workers को Pension, Insurance और PF मिलेगा?

बोर्ड बनने से इन सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं बनाने और उनकी निगरानी का रास्ता मजबूत हुआ है। लेकिन सभी गिग वर्कर्स को तुरंत पेंशन, बीमा या PF मिलना शुरू नहीं होगा। इसके लिए सरकार को योजनाएं और पात्रता की शर्तें अधिसूचित करनी होंगी।

National Social Security Board की बैठक साल में कितनी बार होगी?

बोर्ड की बैठक साल में कम से कम तीन बार होगी। बैठकों का समय, स्थान और कामकाज से जुड़े नियम केंद्र सरकार तय करेगी।

National Social Security Board में किन लोगों को शामिल किया गया है?

बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों, एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, सामाजिक संगठनों, श्रमिक यूनियनों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स के संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

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