Iran Speaker to Skip BRICS Meet: BRICS बैठक में क्यों नहीं आएंगे ईरानी स्पीकर? पश्चिम एशिया का तनाव या भारत से मतभेद
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ 26-27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाली BRICS संसदीय बैठक में शामिल नहीं होंगे। ईरानी दूतावास ने अप्रत्याशित परिस्थितियों को वजह बताया है। इस बीच, भारत से ईरान तक जीवनरक्षक दवाइयों की सीधी उड़ान को लेकर दोनों देशों में असहमति सामने आई है।
Iran Speaker to Skip BRICS Meet : ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS संसदीय मंच की बैठक में शामिल नहीं होंगे। ईरान के दूतावास ने 24 अक्टूबर को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण गालिबाफ यात्रा नहीं कर पाएंगे। हालांकि, ईरान का संसदीय प्रतिनिधिमंडल बैठक में हिस्सा लेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भारत से ईरान तक दवाइयां पहुंचाने के लिए सीधी उड़ान की अनुमति को लेकर दोनों देशों के बीच असहमति की खबरें आई हैं।ईरान चाहता है कि भारत से दवाइयों की सप्लाई के लिए दिल्ली-तेहरान के बीच सीधा हवाई मार्ग उपलब्ध कराया जाए। वहीं, भारत का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क में चुनौतियां पैदा हुई हैं और भारत जीवनरक्षक दवाइयां पहुंचाने में मदद जारी रखे हुए है। भारतीय अधिकारियों ने यह भी कहा है कि ईरान को आर्मेनिया और ओमान जैसे तीसरे देशों के रास्ते दवाइयां भेजने का विकल्प उपलब्ध है।
गालिबाफ की जगह ईरानी प्रतिनिधिमंडल करेगा बैठक में शिरकत
ईरानी दूतावास के बयान के मुताबिक, गालिबाफ BRICS सदस्य देशों की संसदों के अध्यक्षों की बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे। हालांकि, दूतावास ने यह नहीं बताया कि उनके शामिल न होने की वजह क्या है। उसने ईरान की ओर से BRICS की बैठकों और शिखर सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी जारी रखने की बात कही है।

नई दिल्ली में होने वाला यह 12वां BRICS संसदीय मंच है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इसकी मेजबानी करेंगे। बैठक में सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। चर्चा का मुख्य विषय लोगों पर केंद्रित विकास है। इसके अलावा संसदों की भूमिका, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल बदलाव, वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और सतत विकास जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा।गालिबाफ की अनुपस्थिति को दवाइयों की सप्लाई से जुड़े विवाद के बीच देखा जा रहा है, लेकिन ईरानी दूतावास ने अपने बयान में दोनों घटनाओं के बीच कोई सीधा संबंध नहीं बताया। भारत के अधिकारियों ने भी कहा है कि गालिबाफ की यात्रा रद्द होने और दवाइयों की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों को एक ही मामला नहीं माना जाना चाहिए।

दवाइयों की सीधी सप्लाई पर क्यों अटका मामला
विवाद 19 अक्टूबर को सामने आया, जब ईरान एयर के प्रबंध निदेशक ताहेर अब्दोलहाय ने तेहरान में बताया कि एयरलाइन भारत और सिंगापुर से दवाइयां लाने के लिए जरूरी उड़ान अनुमति हासिल नहीं कर पाई है। उनके मुताबिक, भारत से दवाइयां लाने के लिए मुंबई मार्ग से कार्गो उड़ान का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन अनुमति नहीं मिली।ईरान का कहना है कि दवाइयां मानवीय सहायता का हिस्सा हैं और उन पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू नहीं होने चाहिए। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, भारत से सीधे उड़ान के जरिए दवाइयां करीब तीन घंटे में तेहरान पहुंच सकती हैं। इसके उलट, तीसरे देश के रास्ते हवाई और सड़क परिवहन से सप्लाई पहुंचाने में 24 से 48 घंटे लग सकते हैं।
ईरानी पक्ष ने यह भी दावा किया कि आर्मेनिया के रास्ते पहले भेजी गई कुछ दवाइयां लंबी यात्रा और बार-बार माल चढ़ाने-उतारने के दौरान खराब हो गई थीं। खासकर ऐसी दवाइयों को नुकसान हुआ, जिन्हें तय तापमान पर रखना जरूरी होता है। ईरान के मुताबिक, सीधे हवाई संपर्क से इस तरह की दिक्कतों को कम किया जा सकता है।
ईरानी अधिकारियों ने यह आशंका भी जताई कि भारत में कुछ बड़ी कंपनियां अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के डर से ईरान के साथ कारोबार करने से बच रही हैं। हालांकि, यह ईरानी पक्ष का आरोप है; इसे भारत सरकार की ओर से स्वीकार किए गए तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत ने कहा- जीवनरक्षक दवाइयों की सप्लाई जारी
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्टूबर को कहा कि भारत ईरान तक जीवनरक्षक दवाइयां पहुंचाने में मदद कर रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने दोनों देशों के बीच उड़ानों के संचालन को मुश्किल बनाया है और इस मुद्दे पर ईरानी अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है।भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, ईरान को भारत से दवाइयां आर्मेनिया या ओमान जैसे तीसरे देशों में भेजकर वहां से सड़क मार्ग के जरिए मंगाने का विकल्प दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि भारतीय दवा कंपनियां सप्लाई के लिए तैयार हैं और यह तय करना ईरान पर निर्भर है कि वह किस रास्ते से सामान मंगाना चाहता है।
इस मामले में अमेरिकी प्रतिबंध भी एक अहम चिंता हैं। भारतीय अधिकारियों ने आशंका जताई है कि ईरान की प्रतिबंधित एयरलाइनों को भारतीय हवाई अड्डों पर सेवाएं देने की अनुमति देने से एयरपोर्ट संचालकों और विमानन कंपनियों के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। हालांकि, भारत ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि दवाइयों की उड़ान अनुमति से जुड़ा हर फैसला केवल अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण लिया गया है।
मानवीय सहायता और प्रतिबंधों के बीच संतुलन की चुनौती
ईरान का तर्क है कि दवाइयां किसी देश के लिए जरूरी मानवीय जरूरत हैं और उन्हें पहुंचाने में देरी से मरीजों को नुकसान हो सकता है। उसका कहना है कि भारत और ईरान दोनों BRICS के सदस्य हैं और उनके पुराने सांस्कृतिक संबंध भी हैं, इसलिए दवाइयों की सप्लाई के लिए सीधा हवाई मार्ग प्राथमिकता के आधार पर चालू किया जाना चाहिए।भारत की ओर से अब तक सार्वजनिक रूप से यही कहा गया है कि जीवनरक्षक दवाइयों की आपूर्ति में मदद जारी है और मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष ने हवाई संपर्क को प्रभावित किया है। इसलिए इस विवाद को केवल दवाइयों पर प्रतिबंध लगाने के मामले के रूप में देखना सही नहीं होगा। इसमें उड़ान अनुमति, क्षेत्रीय सुरक्षा, अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका और दवाइयों को सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की चुनौती भी शामिल है।
फिलहाल गालिबाफ की नई दिल्ली यात्रा रद्द होने की आधिकारिक वजह “अप्रत्याशित परिस्थितियां” बताई गई है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल BRICS संसदीय मंच की बैठक में हिस्सा लेगा। दूसरी ओर, भारत और ईरान के बीच दवाइयों की सप्लाई के लिए सीधी उड़ान को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन उपलब्ध बयानों से यह स्पष्ट नहीं है कि इस मार्ग को कब तक अनुमति मिल पाएगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Iran के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf BRICS Parliamentary Forum में शामिल क्यों नहीं होंगे?
ईरानी दूतावास के मुताबिक, कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण गालिबाफ 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। दूतावास ने उनकी अनुपस्थिति की विस्तृत वजह नहीं बताई है। ईरान का संसदीय प्रतिनिधिमंडल बैठक में हिस्सा लेगा।
Iran ने भारत से Humanitarian Aid के लिए Bilateral Air Route की मांग क्यों की है?
ईरान चाहता है कि भारत से दवाइयां सीधे तेहरान पहुंचाई जा सकें। उसके मुताबिक, सीधी उड़ान से दवाइयां लगभग तीन घंटे में पहुंच सकती हैं, जबकि तीसरे देशों के रास्ते हवाई और सड़क परिवहन में 24 से 48 घंटे लग सकते हैं। इससे तापमान नियंत्रित रखने वाली दवाइयों के खराब होने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
India-Iran Humanitarian Air Route विवाद क्या है?
विवाद भारत से ईरान तक दवाइयां ले जाने के लिए सीधी उड़ान की अनुमति को लेकर है। ईरान एयर के प्रमुख ने कहा था कि जरूरी अनुमति नहीं मिली, जबकि भारत ने कहा है कि वह जीवनरक्षक दवाइयों की सप्लाई में मदद जारी रखे हुए है। भारत ने तीसरे देशों के रास्ते सप्लाई पहुंचाने का विकल्प भी बताया है।
Iran Air को भारत से दवाइयां ले जाने की अनुमति मिलने में क्या समस्या आई?
ईरान एयर के प्रबंध निदेशक के मुताबिक, दवाइयां लाने के लिए कार्गो उड़ान की अनुमति नहीं मिली। भारतीय अधिकारियों ने क्षेत्रीय संघर्ष और प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइनों के साथ काम करने से जुड़ी संभावित मुश्किलों का उल्लेख किया है। हालांकि, सभी उड़ान अनुमति संबंधी फैसलों की विस्तृत आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
US Sanctions का India-Iran Medicine Supply पर क्या असर पड़ रहा है?
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की कुछ एयरलाइनों के साथ कारोबार करने पर अन्य देशों की कंपनियों को अतिरिक्त जोखिम हो सकता है। भारत के अधिकारियों ने भी ऐसे जोखिमों को लेकर चिंता जताई है। इससे दवाइयों की ढुलाई के लिए सीधे हवाई मार्ग के इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है, हालांकि भारत ने सप्लाई में मदद जारी रखने की बात कही है।
भारत ने ईरान तक दवाइयां पहुंचाने के लिए कौन-सा वैकल्पिक रास्ता सुझाया है?
भारत ने आर्मेनिया और ओमान जैसे तीसरे देशों के जरिए दवाइयां पहुंचाने का विकल्प बताया है। इस व्यवस्था में दवाइयां पहले संबंधित देश तक हवाई मार्ग से भेजी जा सकती हैं और फिर सड़क मार्ग से ईरान पहुंचाई जा सकती हैं।
क्या Iran Speaker का BRICS बैठक छोड़ना भारत के साथ तनाव का संकेत है?
इसकी पुष्टि नहीं हुई है। ईरानी दूतावास ने गालिबाफ के बैठक में शामिल न होने की वजह अप्रत्याशित परिस्थितियां बताई है और भारत के आतिथ्य की सराहना भी की है। दवाइयों की सप्लाई को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद जरूर सामने आए हैं, लेकिन आधिकारिक बयानों में यात्रा रद्द होने को सीधे इस विवाद से नहीं जोड़ा गया है।