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India China Trade Deficit 2026 : भारत के साथ व्यापार संबंध सुधारने को तैयार हुआ चीन, क्या कम होगा 105 अरब डॉलर का घाटा?

चीन ने भारत के साथ व्यापार संबंध सुधारने और आर्थिक चिंताओं का समाधान निकालने की इच्छा जताई है। निर्मला सीतारमण ने चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों की सीमित पहुंच पर सवाल उठाए। जनवरी-सितंबर 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 105.93 अरब डॉलर पहुंच गया।

India China Trade Deficit 2026 : भारत के साथ व्यापार संबंध सुधारने को तैयार हुआ चीन, क्या कम होगा 105 अरब डॉलर का घाटा?

India China Trade Deficit 2026: भारत और चीन के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर बयानबाजी के बीच चीन ने कहा है कि वह दोनों देशों की आर्थिक और व्यापार संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार है। यह बयान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों को पर्याप्त पहुंच नहीं मिलने को द्विपक्षीय व्यापार की बड़ी बाधा बताया था। चीन के कस्टम्स के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 105.93 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि से 20.7% ज्यादा है।

चीन बोला- व्यापार में सरप्लस हमारा लक्ष्य नहीं

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने शुक्रवार को कहा कि चीन का उद्देश्य व्यापार सरप्लस हासिल करना नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर दोनों देशों की आर्थिक और व्यापार संबंधी चिंताओं का संतुलित समाधान निकालना और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है।माओ निंग ने इस मुद्दे पर विस्तृत सवालों के लिए संबंधित चीनी अधिकारियों से संपर्क करने को कहा। चीन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत लगातार चीनी बाजार में अपने उत्पादों के लिए ज्यादा अवसर देने और व्यापार घाटा कम करने की मांग उठा रहा है।

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग

सीतारमण बोलीं- नॉन-टैरिफ बाधाएं सबसे बड़ी परेशानी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकॉक, थाईलैंड में IMF और वर्ल्ड बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत में कहा कि भारत और चीन के बीच व्यापार में नॉन-टैरिफ बाधाएं सबसे बड़ी रुकावट हैं। उनके मुताबिक, भारत करीब एक दशक से चीनी बाजार में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस दिशा में सीमित प्रगति हुई है।

भारत कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
भारत कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

नॉन-टैरिफ बाधाएं वे नियम और शर्तें हैं, जो आयात पर सीधे शुल्क लगाए बिना दूसरे देश के उत्पादों की बाजार में एंट्री मुश्किल बना सकती हैं। इनमें तकनीकी मानक, प्रमाणन और स्वास्थ्य या पौधों से जुड़े नियम शामिल हो सकते हैं। सीतारमण ने चीन की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले फाइटोसैनिटरी उपायों और दूसरी गैर-शुल्क पाबंदियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मुद्दों को जांच और बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि भारत ने व्यापार घाटा कम करने के लिए दूसरे देशों पर दंडात्मक टैरिफ लगाने का रास्ता नहीं अपनाया, बल्कि बातचीत को प्राथमिकता दी है। हालांकि, लंबे समय से बातचीत के बावजूद व्यापार में असंतुलन बढ़ना भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
सीतारमण ने जिन क्षेत्रों का उल्लेख किया, उनमें जेनेरिक दवाएं, पशु-मांस, सब्जियां और जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद शामिल हैं। भारत की मांग है कि इन उत्पादों को चीनी बाजार में बेहतर पहुंच मिले, ताकि भारतीय कंपनियों और किसानों को निर्यात के अधिक अवसर मिल सकें।

9 महीने में भारत-चीन व्यापार घाटा 105.93 अरब डॉलर

चीन के कस्टम्स विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच दोनों देशों का कुल व्यापार 25.4% बढ़कर 144.45 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान चीन से भारत को होने वाला निर्यात 23.3% बढ़कर 125.19 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत का चीन को निर्यात 40.7% बढ़कर 19.26 अरब डॉलर पहुंच गया।भारत का निर्यात तेजी से बढ़ने के बावजूद व्यापार घाटा कम नहीं हुआ, क्योंकि चीन से आयात की कुल कीमत भारत के निर्यात से कहीं ज्यादा रही। दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20.7% बढ़कर 105.93 अरब डॉलर हो गया। इसका मतलब है कि भारत ने चीन से जितने मूल्य का सामान खरीदा, उसके मुकाबले वहां भारतीय सामान की बिक्री काफी कम रही।
भारत चीन से इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी, रसायन और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी उत्पाद आयात करता है। इनकी जरूरत मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे विनिर्माण क्षेत्रों में पड़ती है। वहीं, भारत चीन को अधिक सामान बेचने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी, दवा और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में बेहतर बाजार पहुंच की मांग करता रहा है।

व्यापार संबंध सुधारने के लिए बातचीत जारी

भारत सरकार की ओर से भी चीन के साथ व्यापार संबंध सुधारने के संकेत दिए गए हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसी सप्ताह कहा था कि भारत चीन के साथ संबंधों को फिर से बेहतर बनाने पर काम कर रहा है, हालांकि इसका नतीजा अभी निश्चित नहीं है।वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत चल रही है। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, उन्होंने कहा कि लगातार चर्चा से दोनों देशों के व्यापार संबंध बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
चीन की ओर से सहयोग की इच्छा जताने के बावजूद भारत की मुख्य मांग यही है कि भारतीय उत्पादों को चीनी बाजार में ज्यादा अवसर मिलें और व्यापार घाटे को कम करने के लिए ठोस प्रगति हो। फिलहाल दोनों देशों के बयान बातचीत जारी रखने की संभावना दिखाते हैं, लेकिन व्यापार असंतुलन दूर करने के लिए किन कदमों पर सहमति बनेगी, यह स्पष्ट नहीं है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Nirmala Sitharaman ने China के साथ बढ़ते Trade Deficit पर क्या कहा?

निर्मला सीतारमण ने कहा कि चीन में भारतीय उत्पादों को पर्याप्त बाजार पहुंच नहीं मिलना और नॉन-टैरिफ बाधाएं दोनों देशों के व्यापार में बड़ी रुकावट हैं। उन्होंने जेनेरिक दवाओं, कृषि उत्पादों और दूसरी वस्तुओं के लिए बेहतर पहुंच की मांग की।

China ने India के साथ Trade Surplus को लेकर क्या बयान दिया है?

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन का उद्देश्य व्यापार सरप्लस हासिल करना नहीं है। उन्होंने भारत के साथ दोनों देशों की आर्थिक और व्यापार संबंधी चिंताओं को संतुलित तरीके से दूर करने की इच्छा जताई।

India-China Trade Deficit 2026 में कितना हो गया है?

चीन के कस्टम्स के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 105.93 अरब डॉलर रहा। यह पिछले साल की समान अवधि से 20.7% ज्यादा है।

China के Non-Tariff Barriers से Indian Exporters को क्या परेशानी होती है?

नॉन-टैरिफ बाधाओं में तकनीकी मानक, प्रमाणन और स्वास्थ्य या पौधों से जुड़े नियम जैसी शर्तें शामिल हो सकती हैं। अगर इन नियमों के कारण भारतीय उत्पादों को चीनी बाजार में प्रवेश मिलने में मुश्किल होती है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए वहां कारोबार बढ़ाना कठिन हो सकता है।

India को China के बाजार में Market Access मिलने में क्या बाधाएं हैं?

सीतारमण के मुताबिक, जेनेरिक दवाओं, पशु-मांस, सब्जियों और जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए बाजार पहुंच एक बड़ी चुनौती है। भारत ने इन क्षेत्रों में बेहतर अवसर देने की मांग की है, लेकिन करीब एक दशक की कोशिशों के बावजूद प्रगति सीमित रही है।

India और China के बीच Trade Imbalance कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

दोनों देश बाजार तक पहुंच से जुड़ी बाधाओं पर बातचीत कर सकते हैं, तकनीकी और स्वास्थ्य मानकों से जुड़े विवादों की जांच कर सकते हैं और भारतीय उत्पादों के निर्यात के लिए स्पष्ट नियम तय कर सकते हैं। भारत ने फिलहाल दंडात्मक टैरिफ के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देने की बात कही है।

India-China Trade Deficit का घरेलू Manufacturing Industry पर क्या असर पड़ता है?

चीन से इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों, मशीनरी और रसायनों का आयात भारतीय विनिर्माण उद्योग की जरूरतें पूरी करता है। लेकिन आयात लगातार निर्यात से ज्यादा रहने पर व्यापार घाटा बढ़ता है। घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और भारतीय उत्पादों के निर्यात के अवसर सुधारने से इस असंतुलन को कम करने में मदद मिल सकती है।

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