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AI से बैंकों पर साइबर हमला, चीन से जुड़े टूल्स का खुलासा! हैकर्स ने कंपनियों के अपने पेमेंट सिस्टम को बनाया हथियार

भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने वित्तीय संस्थानों पर एआई आधारित साइबर हमलों के पीछे 'Crafty Falcon' नाम के हैकिंग समूह की पहचान की है। एजेंसी ने चार AI टूल्स का खुलासा किया है, जिनमें से कम से कम दो को सुरक्षा शोधकर्ताओं ने चीन से जोड़ा है। हैरानी की बात यह है कि हमलावर कंपनियों के अपने पेमेंट सिस्टम के जरिए ही पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं।

AI से बैंकों पर साइबर हमला, चीन से जुड़े टूल्स का खुलासा! हैकर्स ने कंपनियों के अपने पेमेंट सिस्टम को बनाया हथियार

साइबर अपराध की दुनिया में अब हैकर्स के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। पहले जहां किसी बैंक या वित्तीय कंपनी के सिस्टम में सेंध लगाने के लिए लंबी तैयारी और तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती थी, वहीं अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस प्रक्रिया को ज्यादा तेज और स्वचालित बना दिया है। भारत में हाल के हफ्तों में बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और फिनटेक संस्थानों पर हुए साइबर हमलों के बीच एक नया खुलासा हुआ है। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल यानी CERT-In ने ऐसे हमलों में इस्तेमाल हो रहे चार AI टूल्स और 'Crafty Falcon' नाम के समूह का जिक्र किया है। इससे AI-Driven Cyberattacks on Indian Financial Firms को लेकर चिंता बढ़ गई है।

CERT-In ने किस हैकिंग ग्रुप और किन AI टूल्स का किया खुलासा?

भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने बुधवार को जारी एक एडवाइजरी में बताया कि 'Crafty Falcon' नाम का समूह गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), फिनटेक कंपनियों और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों को निशाना बना रहा है। एजेंसी ने इस समूह के हमलों में इस्तेमाल किए जा रहे चार टूल्स की पहचान की है:

ARTEX

PentAGI

Cairn

CyberStrikeAI

इनमें से कम से कम दो टूल्स को साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने चीन से जोड़ा है। हालांकि, CERT-In ने यह नहीं बताया कि इन हमलों के पीछे कौन व्यक्ति या संगठन है और यह समूह किस देश से संचालित होता है। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि प्रभावित कंपनियां कौन-कौन सी हैं और इन हमलों में कुल कितनी रकम चोरी हुई है। यानी खतरे की पहचान तो की गई है, लेकिन हमलों के पूरे दायरे और जिम्मेदार लोगों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

Chinese-Linked AI Hacking Tools: क्या चीन से जुड़ा है साइबर हमलों का नेटवर्क?

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा ARTEX टूल को लेकर है। साइबर सुरक्षा कंपनी CrowdStrike के अनुसार, चीन में विकसित इस टूल का इस्तेमाल सितंबर के अंत से दक्षिण कोरिया के बैंकों पर हुए साइबर हमलों में किया गया था। इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने बताया कि चीन से जुड़े एक समूह ने जासूसी अभियान के दौरान ARTEX का इस्तेमाल 14 से अधिक देशों में 200 से ज्यादा संगठनों को निशाना बनाने के लिए किया था। दक्षिण कोरिया के बैंकिंग संस्थानों पर हुए हमलों के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ARTEX के डेवलपर ने पिछले महीने इसे निजी कर दिया था। इससे पहले इस टूल को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया था। हालांकि, किसी टूल का चीन में विकसित होना या किसी चीन-लिंक्ड समूह द्वारा उसका इस्तेमाल किया जाना अपने आप में किसी सरकार की संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। CERT-In ने इन हमलों को किसी देश की सरकार द्वारा प्रायोजित हमला घोषित नहीं किया है। इसलिए फिलहाल इसे चीन से जुड़े टूल्स और साइबर गतिविधियों के संदर्भ में देखना ज्यादा सही होगा।

AI-Powered Hacking Tools कैसे बना रहे हैं बैंकों के लिए खतरा?

CERT-In के मुताबिक, हमलावर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI टूल्स की मदद से बेहद तेज गति से सिस्टम में सेंध लगा रहे हैं। एजेंसी ने इस खतरे को सक्रिय और लगातार जारी रहने वाला बताया है। इन हमलों का एक बेहद गंभीर पहलू यह है कि हैकर्स केवल बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगाकर डेटा चुराने तक सीमित नहीं हैं। वे प्रभावित कंपनियों के अपने पेमेंट और डिस्बर्समेंट सिस्टम का इस्तेमाल करके पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं। यानी जिस सिस्टम का इस्तेमाल कंपनियां ग्राहकों को भुगतान या लोन की रकम भेजने के लिए करती हैं, उसी को हमलावर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। एजेंसी के अनुसार, हमलावर छुट्टियों, सप्ताहांत और ऐसे समय को निशाना बनाते हैं, जब कंपनियों की निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है। इससे साइबर हमले का पता चलने में देरी हो सकती है। एक और गंभीर बात यह है कि जिन कंपनियों ने पहले मिली चेतावनियों के बाद सुरक्षा खामियों को ठीक किया था, उन्हें भी दोबारा निशाना बनाया गया। CERT-In के अनुसार, अधूरे सुधार के बाद हमलावरों ने उन्हीं कमजोरियों का फिर फायदा उठाया।

भारतीय बैंकों और NBFCs पर पहले भी हो चुके हैं साइबर हमले

CERT-In की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब भारत के वित्तीय क्षेत्र में कई साइबर सुरक्षा घटनाएं सामने आई हैं। रॉयटर्स की पिछली रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में मुंबई स्थित दो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को कथित तौर पर करीब 20 लाख डॉलर का नुकसान हुआ था। पुलिस शिकायत के अनुसार, 8 और 9 अक्टूबर को ICICI बैंक के खातों से 700 से अधिक अनधिकृत इंस्टेंट ट्रांसफर किए गए थे। शिकायत में कहा गया था कि हैकर्स ने एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) को निशाना बनाया। API वह सॉफ्टवेयर कड़ी होती है, जिसके जरिए बैंक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और फिनटेक संस्थानों से जुड़कर लोन वितरण जैसे निर्देशों पर काम करते हैं। इसके अलावा, देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने पिछले महीने डार्क वेब पर 3,897 ग्राहकों के रिकॉर्ड लीक होने की जानकारी दी थी। वहीं, NBFC Spandana Sphoorty Financial ने 1 नवंबर को अपने बैंक खाते से अनधिकृत डेबिट की सूचना दी थी। AU Small Finance Bank ने भी संभावित ग्राहक डेटा लीक की जांच शुरू की थी। इन घटनाओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी वित्तीय संस्थानों की साइबर सुरक्षा जांच सख्त की है। इससे स्पष्ट है कि अब बैंकिंग और फिनटेक क्षेत्र में डिजिटल सुरक्षा को लेकर दबाव बढ़ रहा है।

निष्कर्ष

AI-Driven Cyberattacks on Indian Financial Firms का बढ़ता खतरा बताता है कि साइबर अपराधी अब केवल नई तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर रहे, बल्कि वित्तीय संस्थानों की मौजूदा भुगतान व्यवस्था को ही निशाना बना रहे हैं। CERT-In द्वारा Crafty Falcon और चार AI टूल्स की पहचान एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। हालांकि, हमलों के पीछे किसी देश की सरकार की भूमिका अभी प्रमाणित नहीं हुई है। ऐसे में बैंकों, NBFCs और फिनटेक कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे अपने API, भुगतान प्रणालियों और साइबर सुरक्षा निगरानी को लगातार मजबूत करें।

FAQ (Frequently Asked Questions):

भारतीय वित्तीय संस्थानों पर साइबर हमले में किन AI टूल्स की पहचान हुई?

CERT-In ने ARTEX, PentAGI, Cairn और CyberStrikeAI नाम के चार टूल्स की पहचान की है। इनमें से कम से कम दो को सुरक्षा शोधकर्ताओं ने चीन से जोड़ा है।

क्राफ्टी फाल्कन (Crafty Falcon) हैकिंग ग्रुप क्या है?

Crafty Falcon वह नाम है, जिसका इस्तेमाल CERT-In ने वित्तीय संस्थानों पर AI आधारित साइबर हमले करने वाले समूह के लिए किया है। यह समूह NBFCs, फिनटेक कंपनियों और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों को निशाना बना रहा है।

साइबर हमलों को स्वचालित बनाने में AI टूल्स का उपयोग कैसे किया जा रहा है?

AI टूल्स की मदद से हमलावर सिस्टम की कमजोरियों का पता लगाने और उनमें सेंध लगाने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। CERT-In के अनुसार, हमलावर इन टूल्स के जरिए मशीन की गति से साइबर हमले कर रहे हैं।

CERT-In ने वित्तीय संस्थानों को क्या चेतावनी दी है?

CERT-In ने खतरे को सक्रिय और लगातार जारी रहने वाला बताया है। एजेंसी ने यह भी चेताया है कि हमलावर कम निगरानी वाले समय को निशाना बनाते हैं और अधूरी सुरक्षा मरम्मत के बाद दोबारा हमला कर सकते हैं।

क्या इन साइबर हमलों के पीछे किसी देश की सरकार की भूमिका की पुष्टि हुई है?

कम से कम दो AI टूल्स को शोधकर्ताओं ने चीन से जोड़ा है, लेकिन CERT-In ने किसी देश की सरकार को इन हमलों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है। हमलों के पीछे मौजूद लोगों या संगठन की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की गई है।

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