Zelenskyy Russia Europe Security Deal : ईरान के परमाणु ठिकानों की जानकारी के लिए अमेरिका ने रखा 20 मिलियन डॉलर का इनाम, क्या वैज्ञानिक भी हैं निशाने पर?
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने ट्रंप के प्रस्तावित रूस-यूरोप सुरक्षा समझौते को खतरनाक बताते हुए कहा कि पहले रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर बात होनी चाहिए। इस बीच, अमेरिका की मध्यस्थता में 10-11 नवंबर को अबू धाबी में त्रिपक्षीय वार्ता होगी।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित यूरोप के नए सुरक्षा ढांचे को लेकर चिंता जताई है। 6 नवंबर को CNN को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने पर ठोस बातचीत किए बिना यूरोप की नई सुरक्षा व्यवस्था बनाने की कोशिश खतरनाक हो सकती है। जेलेंस्की के मुताबिक, इसका असर केवल यूक्रेन पर नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ (EU) और क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका की मध्यस्थता में यूक्रेन और रूस के बीच 10-11 नवंबर को अबू धाबी में बातचीत होनी है।जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें ट्रंप के प्रस्तावित सुरक्षा ढांचे की पूरी जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्हें चिंता है कि रूस युद्ध खत्म करने के बजाय यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर नई बातचीत शुरू करना चाहता है। उन्होंने कहा कि अगर युद्ध को समाप्त करने के सवाल को पीछे छोड़कर नई सुरक्षा संरचना पर चर्चा होती है, तो इससे यूरोप के लिए गंभीर मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
जेलेंस्की बोले- युद्ध खत्म करने की बात पहले होनी चाहिए
CNN के इंटरव्यू में जेलेंस्की से पूछा गया कि क्या उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत जारेड कुशनर की इस बात पर भरोसा है कि किसी भी समझौते में हर देश की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। इस पर उन्होंने कहा कि यूक्रेन को कई प्रस्ताव मिले हैं और अलग-अलग स्तरों पर बातचीत जारी है। इनमें से कुछ चर्चाएं उपयोगी और महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने दोहराया कि यूक्रेन युद्धविराम और तनाव कम करने के पक्ष में है, लेकिन रूस की ओर से अब तक ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं मिला है, जिससे लगे कि वह युद्ध समाप्त करने के लिए वास्तविक कदम उठाने को तैयार है।
है।

जेलेंस्की ने कहा कि रूस के साथ बातचीत में सबसे पहले यह तय होना चाहिए कि युद्ध कैसे खत्म होगा। इसके बाद ही यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की सुरक्षा गारंटी पर चर्चा की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, युद्ध जारी रहते हुए रूस और यूरोप के बीच नई सुरक्षा संरचना बनाने की बातचीत शुरू करना जोखिम भरा हो सकता
ट्रंप ने कहा- नया समझौता पूरे यूरोप को शामिल कर सकता है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 नवंबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव से मुलाकात के बाद यूरोप की सुरक्षा को लेकर एक बड़े समझौते की संभावना जताई थी। उन्होंने कहा था कि यह समझौता केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें पूरा यूरोप शामिल हो सकता है। हालांकि, ट्रंप ने इसकी शर्तों या प्रस्ताव के विस्तृत ब्योरे का खुलासा नहीं किया।इसी दौरान ट्रंप के दामाद और अमेरिकी वार्ताकार जारेड कुशनर ने सोशल मीडिया पर यूरोप की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य सभी पक्षों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करना, भविष्य में संघर्ष का खतरा कम करना और क्षेत्र में स्थिरता लाना होना चाहिए।
कुशनर ने रूस और यूरोप के बीच सैन्य गतिविधियों में अधिक पारदर्शिता और तनाव कम करने के लिए एक-दूसरे की ओर से उठाए जाने वाले कदमों की भी बात कही। हालांकि, CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप के कई अधिकारियों को इस प्रस्ताव की पूरी जानकारी नहीं थी। जर्मनी के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन के नए विचार पिछले कई महीनों से चल रही बातचीत पर आधारित हैं।
इस प्रस्ताव का कोई अंतिम मसौदा या आधिकारिक समझौता सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के लिए कौन-सी शर्तें रखी जा सकती हैं।
यूक्रेन को डर- कहीं फिर न हो जाए याल्टा समझौते जैसी स्थिति
जेलेंस्की ने यूरोप को पुराने भू-राजनीतिक समझौतों के आधार पर बांटने की किसी भी कोशिश का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन नहीं चाहता कि रूस के साथ किसी समझौते में उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नजरअंदाज किया जाए।उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1945 में हुए याल्टा सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि यूक्रेन यूरोप के बंटवारे जैसी स्थिति दोबारा नहीं देखना चाहता। याल्टा सम्मेलन में तत्कालीन सोवियत संघ, अमेरिका और ब्रिटेन के नेताओं ने युद्ध के बाद यूरोप की व्यवस्था और जर्मनी के भविष्य सहित कई मुद्दों पर चर्चा की थी। जेलेंस्की का कहना था कि यूक्रेन को रूस के साथ किसी ऐसे समझौते में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें उसकी सहमति और स्वतंत्र फैसले लेने के अधिकार को नजरअंदाज किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन अभी न तो यूरोपीय संघ का सदस्य है और न ही NATO का, हालांकि वह EU की सदस्यता पाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके बावजूद यूरोप की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी फैसला पूरे क्षेत्र के देशों को प्रभावित कर सकता है। जेलेंस्की के मुताबिक, किसी भी स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश के लिए उसकी संप्रभुता और सीमाओं की अखंडता का सम्मान होना जरूरी है।
10-11 नवंबर को अबू धाबी में होगी अमेरिका, रूस और यूक्रेन की बातचीत
इस बीच, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के तहत अमेरिका तीनों देशों के अधिकारियों के बीच कामकाजी स्तर की बातचीत कराने जा रहा है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बताया कि यह बैठक 10 और 11 नवंबर को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में होगी। बातचीत में अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।जेलेंस्की ने 4 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया था कि उन्होंने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर के साथ करीब डेढ़ घंटे तक विस्तृत बातचीत की। इसमें अगली त्रिपक्षीय बैठक की तैयारियों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन, अमेरिका और रूस के प्रतिनिधियों के बीच टीम स्तर की बातचीत एक सप्ताह के भीतर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।
विटकॉफ के मुताबिक, अबू धाबी में होने वाली बातचीत में युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था, तनाव कम करने के उपाय, मानवीय मुद्दों और शांति समझौते की दिशा में आगे के कदमों पर चर्चा होगी। इससे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि ब्रसेल्स में फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और NATO के अधिकारियों से भी मिले। वहां यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी, यूरोप की भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था और युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक मदद पर बातचीत हुई।
हालांकि, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त करने की शर्तों को लेकर अब भी मतभेद बने हुए हैं। इसलिए अबू धाबी की बैठक को शांति समझौते की दिशा में एक और कूटनीतिक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
रूस के हमलों में ऊर्जा ठिकानों को बनाया गया निशाना
इस बीच, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के तहत अमेरिका तीनों देशों के अधिकारियों के बीच कामकाजी स्तर की बातचीत कराने जा रहा है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बताया कि यह बैठक 10 और 11 नवंबर को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में होगी। बातचीत में अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।जेलेंस्की ने 4 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया था कि उन्होंने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर के साथ करीब डेढ़ घंटे तक विस्तृत बातचीत की। इसमें अगली त्रिपक्षीय बैठक की तैयारियों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन, अमेरिका और रूस के प्रतिनिधियों के बीच टीम स्तर की बातचीत एक सप्ताह के भीतर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।
विटकॉफ के मुताबिक, अबू धाबी में होने वाली बातचीत में युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था, तनाव कम करने के उपाय, मानवीय मुद्दों और शांति समझौते की दिशा में आगे के कदमों पर चर्चा होगी। इससे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि ब्रसेल्स में फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और NATO के अधिकारियों से भी मिले। वहां यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी, यूरोप की भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था और युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक मदद पर बातचीत हुई।
हालांकि, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त करने की शर्तों को लेकर अब भी मतभेद बने हुए हैं। इसलिए अबू धाबी की बैठक को शांति समझौते की दिशा में एक और कूटनीतिक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
रूस के हमलों में ऊर्जा ठिकानों को बनाया गया निशाना
कूटनीतिक बातचीत की तैयारी के बीच यूक्रेन पर रूसी हमले भी जारी हैं। जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने एक बड़े हमले में 289 अटैक ड्रोन, 17 बैलिस्टिक मिसाइल और 59 क्रूज मिसाइलें दागीं। उनके मुताबिक, हमलों का मुख्य निशाना ऊर्जा से जुड़ा बुनियादी ढांचा था। इसमें बिजली उत्पादन केंद्र और सब-स्टेशन शामिल थे।यूक्रेन के ओडेसा, चेरकासी, झाइटोमिर, विनित्सिया, खार्किव, निप्रो, चेर्निवत्सी, चेर्निहाइव और रिव्ने क्षेत्रों में ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद कई इलाकों में आपातकालीन बिजली कटौती करनी पड़ी। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों के कारण यूक्रेन की तीन थर्मल पावर प्लांट इकाइयों में बिजली उत्पादन भी प्रभावित हुआ।
ऐसे हालात में अबू धाबी में होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। जेलेंस्की की मुख्य मांग है कि किसी भी व्यापक यूरोपीय सुरक्षा समझौते से पहले रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने और यूक्रेन की संप्रभुता की रक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था तय की जाए।
FAQ (Frequently Asked Questions):
वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस-यूरोप सुरक्षा समझौते को खतरनाक क्यों बताया?
जेलेंस्की का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर ठोस बातचीत किए बिना नई यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था बनाने की कोशिश जोखिम भरी हो सकती है। उन्हें आशंका है कि इससे यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दे पीछे छूट सकते हैं।
रूस और यूरोप के बीच प्रस्तावित सुरक्षा समझौता क्या है?
यह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सामने रखा गया यूरोप की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा विचार है। इसमें रूस और यूरोप की सुरक्षा चिंताओं, सैन्य पारदर्शिता और तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की बात कही गई है। हालांकि, इसका पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
जेलेंस्की ने यूरोपीय संघ की सुरक्षा को लेकर क्या चेतावनी दी?
जेलेंस्की ने कहा कि रूस के साथ युद्ध खत्म करने की बात किए बिना नई सुरक्षा व्यवस्था पर बातचीत यूरोपीय संघ के लिए भी खतरनाक हो सकती है। उनके मुताबिक, यूरोप की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी फैसला पूरे क्षेत्र को प्रभावित करेगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध का यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
युद्ध के कारण यूरोप में सैन्य तनाव, सुरक्षा चिंताएं और देशों के बीच कूटनीतिक मतभेद बढ़े हैं। युद्ध के बाद की सुरक्षा गारंटी, NATO की भूमिका और रूस के साथ संबंध यूरोप की भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रमुख मुद्दे हैं।
अमेरिका की नई यूरोपीय सुरक्षा योजना में क्या प्रस्ताव दिया गया है?
ट्रंप ने ऐसे समझौते की संभावना जताई है, जिसमें यूक्रेन के साथ पूरा यूरोप शामिल हो सकता है। जारेड कुशनर ने व्यापक सुरक्षा ढांचे, सैन्य गतिविधियों में पारदर्शिता और तनाव कम करने के लिए आपसी कदम उठाने की बात कही है। योजना की विस्तृत शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं।