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Swiggy-Zepto के डिलीवरी पार्टनर्स को मिलेगी सामाजिक सुरक्षा? सरकार ने बनाया नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड !

केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा के लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी की है। बोर्ड बीमा, स्वास्थ्य, मातृत्व और वृद्धावस्था सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की सिफारिश और निगरानी करेगा।

Swiggy-Zepto के डिलीवरी पार्टनर्स को मिलेगी सामाजिक सुरक्षा? सरकार ने बनाया नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड !

भारत में तेजी से बढ़ती गिग अर्थव्यवस्था के बीच केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कदम उठाया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी की।

इसका उद्देश्य ऐसे कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करना और उनके क्रियान्वयन की निगरानी करना है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, श्रमिक संगठनों, नागरिक समाज और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रावधान है।

इस फैसले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि Swiggy, Zepto, Zomato और Rapido जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवर्स के लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना सुरक्षा और वृद्धावस्था में आर्थिक सहायता जैसे मुद्दे लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। हालांकि, सरकार की अधिसूचना में इन सभी कंपनियों के नाम अलग-अलग प्रतिनिधियों के रूप में घोषित नहीं किए गए हैं।

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड क्या है और यह कैसे काम करेगा ?

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड एक वैधानिक निकाय है, जिसे Code on Social Security, 2020 के तहत असंगठित श्रमिकों के कल्याण से जुड़े मामलों में काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस संहिता के सेक्शन 6 में बोर्ड के गठन और उसकी सामान्य सदस्य संरचना का प्रावधान है।

वहीं सेक्शन 114(6) के अनुसार यही बोर्ड गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण से जुड़े मामलों को भी देखता है। हालांकि, ऐसे मामलों में इसकी सदस्य संरचना में कुछ बदलाव किए जाते हैं।

बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव उपाध्यक्ष होंगे। इसका कार्यकाल तीन साल निर्धारित किया गया है। बोर्ड की बैठक साल में कम से कम तीन बार आयोजित की जाएगी।


इसका मुख्य काम सरकार को श्रमिकों की अलग-अलग श्रेणियों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बनाने की सलाह देना और मौजूदा योजनाओं की निगरानी करना है।

बोर्ड में किन लोगों को प्रतिनिधित्व मिलेगा?

बोर्ड में सरकार, कंपनियों और श्रमिक संगठनों को प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा से जुड़े फैसलों में संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

  • Code on Social Security, 2020 के सेक्शन 114(6) के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स से जुड़े मामलों में सदस्य संरचना में निम्नलिखित प्रतिनिधियों का प्रावधान है:

• एग्रीगेटर कंपनियां: केंद्र सरकार की ओर से नामित पांच प्रतिनिधि।• गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स: केंद्र सरकार की ओर से नामित पांच प्रतिनिधि।
• ESIC: कर्मचारी राज्य बीमा निगम के महानिदेशक।
• EPFO: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त।
• विशेषज्ञ सदस्य: केंद्र सरकार की ओर से नामित विशेषज्ञ।
• राज्य सरकारें: रोटेशन के आधार पर पांच राज्यों के प्रतिनिधि।
• श्रम मंत्रालय: मंत्रालय के संयुक्त सचिव को सदस्य सचिव बनाया जाएगा।

यह कानूनी प्रावधान सदस्य नामित करने की व्यवस्था बताता है। इसे सभी प्रतिनिधियों की नियुक्ति पूरी होने की पुष्टि नहीं समझना चाहिए।

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गिग वर्कर्स कौन होते हैं और Swiggy-Zepto के पार्टनर्स इसमें कैसे आते हैं?

गिग वर्कर्स वे लोग होते हैं जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर रहकर अस्थायी, काम आधारित या प्रोजेक्ट आधारित सेवाएं देते हैं। इन्हें आमतौर पर नियमित मासिक वेतन के बजाय पूरे किए गए काम के आधार पर भुगतान मिलता है।

वहीं प्लेटफॉर्म वर्कर्स वे लोग होते हैं जो किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या डिजिटल ऐप के माध्यम से सेवाएं देते हैं। दोनों श्रेणियों में अंतर है, लेकिन कई प्लेटफॉर्म वर्कर्स गिग वर्कर्स की श्रेणी में भी आते हैं।

  • इसे उदाहरणों से समझ सकते हैं:

• Swiggy और Zomato: खाना डिलीवर करने वाले पार्टनर्स।• Zepto और Blinkit: किराने और अन्य सामान की डिलीवरी करने वाले पार्टनर्स।
• Rapido और Uber: बाइक टैक्सी और कैब ड्राइवर्स।
• Urban Company: घर पर सफाई, ब्यूटी और मरम्मत जैसी सेवाएं देने वाले प्रोफेशनल्स।

इन कामगारों को काम के समय में लचीलापन मिलता है, लेकिन उनकी कमाई नियमित नहीं होती। दुर्घटना, बीमारी या काम बंद होने की स्थिति में उन्हें आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि Social Security for Gig Workers का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।

गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कौन-कौन से फायदे मिल सकते हैं ?

Code on Social Security, 2020 के सेक्शन 114 के तहत केंद्र सरकार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अधिसूचित कर सकती है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित सुविधाएं शामिल हैं:

  • जीवन और दिव्यांगता बीमा

कामगार की मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में उसे या उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए योजनाएं बनाई जा सकती हैं।

  • दुर्घटना बीमा

डिलीवरी पार्टनर्स और कैब ड्राइवर्स जैसे कामगारों को काम के दौरान सड़क दुर्घटना का जोखिम रहता है। दुर्घटना बीमा ऐसी स्थिति में आर्थिक सहायता का माध्यम बन सकता है।

  • स्वास्थ्य सुविधाएं

बीमारी और इलाज के खर्च से जुड़ी आर्थिक चुनौतियों को कम करने के लिए स्वास्थ्य संबंधी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बनाई जा सकती हैं।

  • मातृत्व लाभ

महिला गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए मातृत्व संबंधी सुविधाओं का प्रावधान किया जा सकता है।

  • वृद्धावस्था सुरक्षा

नियमित पेंशन व्यवस्था से बाहर रहने वाले कामगारों के लिए बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं बनाई जा सकती हैं।

  • बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच सुविधा

कामगारों के बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच जैसी सुविधाओं को भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल किया जा सकता है।

हालांकि, ये कानून में निर्धारित संभावित लाभों की श्रेणियां हैं। बोर्ड के गठन से इन सभी सुविधाओं का लाभ तुरंत मिलना शुरू नहीं होगा। इसके लिए सरकार को संबंधित योजनाओं, उनकी पात्रता और क्रियान्वयन की प्रक्रिया अधिसूचित करनी होगी।

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गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा के लिए फंडिंग कैसे होगी?

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लागू करने के लिए वित्तीय व्यवस्था भी जरूरी है। Code on Social Security, 2020 के सेक्शन 114 के तहत इन योजनाओं के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, एग्रीगेटर कंपनियों और अन्य निर्धारित स्रोतों से फंडिंग की जा सकती है।

कानून के सेक्शन 114(4) के अनुसार सातवीं अनुसूची में निर्धारित श्रेणी के एग्रीगेटर से उसके सालाना टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत तक योगदान लिया जा सकता है। इसकी वास्तविक दर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जानी है।

हालांकि, किसी एग्रीगेटर का योगदान उसके गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भुगतान की गई या देय राशि के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। इसके अलावा योगदान शुरू होने की तारीख भी केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित की जानी है।


इस व्यवस्था का उद्देश्य कंपनियों की भागीदारी के जरिए गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

भारत में कितने गिग वर्कर्स हैं और इनकी संख्या क्यों बढ़ रही है?

डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन शॉपिंग, फूड डिलीवरी और कैब सेवाओं के विस्तार से भारत में गिग अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ा है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में देश में गिग वर्कर्स की संख्या लगभग 77 लाख थी। वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर करीब 1.20 करोड़ हो गई। यानी इस अवधि में इसमें लगभग 55 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2029-30 तक गैर-कृषि कार्यबल में गिग वर्कर्स की हिस्सेदारी 6.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं नीति आयोग की जून 2022 की रिपोर्ट में 2029-30 तक देश में गिग वर्कर्स की संख्या 2.35 करोड़ होने का अनुमान लगाया गया था।

इस वृद्धि के पीछे स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार प्रमुख कारण हैं।
बढ़ती संख्या के साथ इन कामगारों के लिए आय की स्थिरता, स्वास्थ्य सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक तैयारी भी महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं।

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बोर्ड क्या करेगा?

इस फैसले का दायरा केवल ऐप आधारित कामगारों तक सीमित नहीं है। इसमें निर्माण मजदूरों, घरेलू कामगारों और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के कल्याण से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

  • बोर्ड की प्रमुख जिम्मेदारियां निम्नलिखित होंगी:

• अलग-अलग श्रेणियों के असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करना।• सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रशासन से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार को सलाह देना।
• केंद्र सरकार की ओर से संचालित सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी करना।
• राज्य स्तर पर श्रमिकों के रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था की समीक्षा करना।
• सामाजिक सुरक्षा फंड और खातों से होने वाले खर्च की समीक्षा करना।
• केंद्र सरकार की ओर से सौंपी गई अन्य जिम्मेदारियों को पूरा करना।

इस तरह Unorganised Workers Welfare India के तहत असंगठित क्षेत्र के कामगारों की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

क्या गिग वर्कर्स को अब तुरंत मिलने लगेगा बीमा और पेंशन?

नहीं। बोर्ड के गठन का मतलब यह नहीं है कि Swiggy, Zepto, Zomato और Rapido जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े सभी कामगारों को तुरंत बीमा, पेंशन या स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगेंगी।

यह फैसला सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश, सलाह और निगरानी के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार करता है। वास्तविक लाभ संबंधित योजनाओं की अधिसूचना, पात्रता और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।

इसलिए गिग वर्कर्स के लिए सरकारी सहायता की दिशा में यह एक प्रशासनिक कदम है, न कि सभी सुविधाएं तत्काल लागू होने की घोषणा।

निष्कर्ष

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन असंगठित क्षेत्र और गिग अर्थव्यवस्था से जुड़े कामगारों की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार योजनाओं को कितनी प्रभावी तरीके से लागू करती है और उनका लाभ पात्र कामगारों तक कैसे पहुंचता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड किस उद्देश्य से बनाए हैं?

केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश, निगरानी और प्रशासन से जुड़े मामलों में सलाह देने के उद्देश्य से बोर्ड का गठन किया है।

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को इन बोर्डों से क्या लाभ मिल सकता है?

उन्हें जीवन बीमा, दुर्घटना सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, मातृत्व लाभ और वृद्धावस्था सुरक्षा जैसी योजनाओं का लाभ मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ संबंधित योजनाओं और पात्रता पर निर्भर करेंगे।

गिग वर्कर्स कौन होते हैं?

गिग वर्कर्स वे लोग हैं जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर रहकर अस्थायी, काम आधारित या प्रोजेक्ट आधारित सेवाएं देते हैं। डिलीवरी पार्टनर्स और कैब ड्राइवर्स इसके उदाहरण हैं।

गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा क्यों जरूरी है?

इनकी आय नियमित नहीं होती और इन्हें हर स्थिति में पारंपरिक कर्मचारियों जैसी बीमा, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलतीं। दुर्घटना, बीमारी और वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए सामाजिक सुरक्षा जरूरी है।

इन बोर्डों के जरिए श्रमिकों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिल सकती हैं?

Code on Social Security, 2020 के तहत जीवन और दिव्यांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा तथा क्रेच जैसी सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इनका लाभ सरकार की ओर से अधिसूचित योजनाओं और पात्रता पर निर्भर करेगा।

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