RBI ने ₹23,000 करोड़ की ट्रेजरी बिल नीलामी में सभी 224 बोलियां ठुकराईं, बढ़ती यील्ड से क्यों बढ़ा दबाव ?
RBI Treasury Bill Auction में 21 अक्टूबर को 91, 182 और 364 दिन के ट्रेजरी बिलों की सभी 224 बोलियां अस्वीकार कर दी गईं। सरकार की इस नीलामी से ₹23,000 करोड़ जुटाने की योजना थी। बढ़ती यील्ड और सरकारी बॉन्ड बाजार में दबाव के बीच यह फैसला आया। हालांकि, RBI ने आधिकारिक नतीजों में बोलियां अस्वीकार करने का कारण नहीं बताया।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 21 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार के ट्रेजरी बिलों की नीलामी में कोई बोली स्वीकार नहीं की। सरकार ने इस नीलामी के जरिए कुल ₹23,000 करोड़ जुटाने की योजना बनाई थी। लेकिन 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन के तीनों ट्रेजरी बिलों में कोई आवंटन नहीं हुआ।
RBI के नीलामी परिणामों के अनुसार, कुल 205 प्रतिस्पर्धी बोलियां और 19 गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां मिलीं। इस तरह बोलियों की कुल संख्या 224 रही। दोनों श्रेणियों में किसी भी बोली को स्वीकार नहीं किया गया और किसी ट्रेजरी बिल की कट-ऑफ यील्ड भी तय नहीं हुई।
यह घटनाक्रम ऐसे समय आया, जब बाजार में अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड बढ़ रही थी। बाजार के जानकारों ने निवेशकों की अधिक रिटर्न की मांग को नीलामी में आवंटन नहीं होने की संभावित वजह बताया। हालांकि, यह RBI की ओर से घोषित आधिकारिक कारण नहीं है।

RBI ने ₹23,000 करोड़ की नीलामी में कितनी राशि जुटाने की योजना बनाई थी ?
RBI ने तीन अवधि के ट्रेजरी बिलों के जरिए उधारी जुटाने का कार्यक्रम रखा था।
| ट्रेजरी बिल की अवधि | प्रस्तावित | |
|---|---|---|
| राशि | ||
| 91 दिन | ₹8,000 करोड़ | |
| 182 | ||
| दिन | ₹8,000 करोड़ | |
| 364 | ||
| दिन | ₹7,000 करोड़ | |
| कुल | ₹23,000 | |
| करोड़ |
नीलामी में बोलियां मिलीं, लेकिन कोई आवंटन नहीं हुआ। यानी सरकार को इस नीलामी से नियोजित राशि नहीं मिली। इसका अर्थ यह नहीं है कि सरकार की पूरी उधारी योजना रुक गई है।
RBI ने सभी 224 बोलियां क्यों ठुकराईं?
RBI ने अपने नीलामी परिणामों में इसका स्पष्ट कारण नहीं बताया। Reuters और Business Standard की रिपोर्टों के अनुसार, निवेशकों की ओर से मांगी जा रही यील्ड RBI की अपेक्षा से अधिक होने की संभावना थी।
- निवेशक ज्यादा यील्ड मांग रहे थे
ट्रेजरी बिल की यील्ड निवेशक को मिलने वाले रिटर्न को दर्शाती है। जब निवेशक भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका करते हैं, तो वे सरकारी प्रतिभूतियां खरीदने के लिए अधिक रिटर्न मांग सकते हैं।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में आगे ब्याज दरें बढ़ने की आशंकाओं के कारण निवेशकों की बोली लगाने की रणनीति अधिक सतर्क हो गई थी। ऐसे माहौल में RBI ने ऊंची यील्ड पर आवंटन करने के बजाय सभी बोलियां अस्वीकार कर दीं। यह बाजार के जानकारों की व्याख्या है, RBI की आधिकारिक पुष्टि नहीं।
- Treasury Bill Yield में तेज बढ़ोतरी
9 सितंबर से 14 अक्टूबर 2026 के बीच तीनों अवधि के ट्रेजरी बिलों की कट-ऑफ यील्ड में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
| ट्रेजरी बिल | यील्ड में बढ़ोतरी | |
|---|---|---|
| 91 दिन | 64 बेसिस पॉइंट | |
| 182 | ||
| दिन | 83 बेसिस पॉइंट | |
| 364 | ||
| दिन | 69 बेसिस पॉइंट |
एक बेसिस पॉइंट 0.01 प्रतिशत अंक के बराबर होता है। इसलिए 182 दिन के ट्रेजरी बिल की यील्ड में 83 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अर्थ 0.83 प्रतिशत अंक की वृद्धि है।
14 अक्टूबर की पिछली नीलामी में 91 दिन के बिल की यील्ड 5.73%, 182 दिन के बिल की 6.29% और 364 दिन के बिल की 6.49% थी।
- बाजार में नकदी और ब्याज दरों का दबाव
बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध नकदी, सरकारी प्रतिभूतियों की मांग और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की अपेक्षाएं भी अल्पकालिक बाजार दरों को प्रभावित करती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग सिस्टम में शुद्ध नकदी अधिशेष 20 अक्टूबर को ₹48,303 करोड़ रहा। इसके अलावा, RBI की सात दिन की वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी में ₹50,000 करोड़ की अधिसूचित राशि के मुकाबले ₹93,241 करोड़ की बोलियां मिलीं। ये आंकड़े बैंकिंग सिस्टम में नकदी की मांग का संकेत देते हैं, हालांकि इन्हें ट्रेजरी बिल नीलामी रद्द होने का अकेला कारण नहीं माना जा सकता।

10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.44% तक पहुंची
ट्रेजरी बिल नीलामी में आवंटन नहीं होने के बीच सरकारी बॉन्ड बाजार में भी दबाव देखने को मिला।
भारत के बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 21 अक्टूबर को बढ़कर 7.44% पर पहुंच गई। यह 4 नवंबर 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। इससे पिछले कारोबारी सत्र में यील्ड 7.39% थी।
रिपोर्ट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में तेजी को भी बाजार पर दबाव डालने वाले कारकों के रूप में बताया गया।
ध्यान रहे, बॉन्ड की यील्ड बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि पुराने बॉन्ड पर तय कूपन ब्याज अपने आप बढ़ गया। आम तौर पर बाजार में बॉन्ड की कीमत घटने पर उसकी यील्ड बढ़ती है।
91-Day, 182-Day और 364-Day Treasury Bills क्या हैं?
ट्रेजरी बिल केंद्र सरकार के अल्पकालिक उधारी साधन हैं। सरकार अपनी अस्थायी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इन्हें जारी करती है और RBI इनके लिए नीलामी आयोजित करता है।
• 91-Day Treasury Bills: लगभग तीन महीने में परिपक्व होते हैं।• 182-Day Treasury Bills: लगभग छह महीने में परिपक्व होते हैं।
• 364-Day Treasury Bills: लगभग एक साल में परिपक्व होते हैं।
ट्रेजरी बिल आम तौर पर अंकित मूल्य से कम कीमत पर जारी किए जाते हैं। परिपक्वता पर निवेशक को अंकित मूल्य मिलता है और खरीद मूल्य तथा परिपक्वता राशि का अंतर उसका रिटर्न होता है।
Government Borrowing पर क्या असर पड़ सकता है?
इस नीलामी में सरकार को नियोजित ₹23,000 करोड़ नहीं मिले। यदि आने वाली नीलामियों में भी निवेशक अधिक यील्ड मांगते हैं, तो सरकार को नई उधारी अधिक लागत पर जुटानी पड़ सकती है।बाजार में यील्ड बढ़ने से पुराने निश्चित ब्याज वाले बॉन्ड की कीमतों पर भी दबाव आ सकता है।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों की फंडिंग लागत तथा निवेश के फैसले प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी बैंक लोन की ब्याज दरें तुरंत बढ़ जाएंगी या सरकार की भुगतान क्षमता पर संकट आ गया है।
निष्कर्ष
RBI ने 21 अक्टूबर 2026 की ट्रेजरी बिल नीलामी में सभी 224 बोलियां अस्वीकार कर दीं, जिससे सरकार की ₹23,000 करोड़ जुटाने की योजना इस नीलामी में पूरी नहीं हुई। बढ़ती यील्ड और निवेशकों की अधिक रिटर्न की मांग संभावित वजहें थीं, लेकिन RBI ने आधिकारिक कारण नहीं बताया। इस घटनाक्रम के बीच 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी 7.44% तक पहुंच गई।
FAQ (Frequently Asked Questions):
RBI Treasury Bill Auction 2026 में सभी 224 बोलियां क्यों ठुकराई गईं?
RBI ने आधिकारिक कारण नहीं बताया। बाजार रिपोर्टों के अनुसार, निवेशकों की अधिक यील्ड की मांग और बढ़ती अल्पकालिक ब्याज दरें संभावित वजहें थीं।
Treasury Bills क्या होते हैं और RBI इन्हें क्यों जारी करता है?
ट्रेजरी बिल केंद्र सरकार के अल्पकालिक उधारी साधन हैं। सरकार इन्हें जारी करती है और RBI नीलामी की प्रक्रिया संचालित करता है।
RBI ने ₹23,000 करोड़ की नीलामी में कितनी राशि जुटाने की योजना बनाई थी?
सरकार ने 91 दिन के बिल से ₹8,000 करोड़, 182 दिन के बिल से ₹8,000 करोड़ और 364 दिन के बिल से ₹7,000 करोड़ जुटाने की योजना बनाई थी।
91-Day, 182-Day और 364-Day Treasury Bills में क्या अंतर है?
इनमें मुख्य अंतर परिपक्वता अवधि का है। ये क्रमशः लगभग तीन महीने, छह महीने और एक साल से कम अवधि के लिए जारी किए जाते हैं।
सभी बोलियां ठुकराने से Government Borrowing पर क्या असर पड़ेगा?
इस नीलामी से सरकार को नियोजित ₹23,000 करोड़ नहीं मिले। भविष्य की उधारी लागत बाजार की यील्ड और आगामी नीलामियों पर निर्भर करेगी।
Treasury Bill Yield बढ़ने से निवेशकों और वित्तीय बाजार पर क्या असर पड़ता है?
यील्ड बढ़ने से नई सरकारी उधारी महंगी हो सकती है और पुराने निश्चित ब्याज वाले बॉन्ड की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर बैंकिंग लागत और निवेश के फैसलों पर भी पड़ सकता है।