Stockal विवाद: भारतीय निवेशकों के अमेरिकी शेयर बिना अनुमति बेचे जाने का आरोप, ₹100 करोड़ से ज्यादा के नुकसान का दावा
करीब 30 भारतीय निवेशकों ने Stockal पर बिना अनुमति अमेरिकी शेयर बेचने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि बिक्री से मिली रकम से कम कारोबार वाले शेयर खरीदे गए। शुरुआती अनुमान में कुल नुकसान ₹100 करोड़ से अधिक बताया गया है।
अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश करने वाले भारतीय ग्राहकों के सामने एक गंभीर मामला सामने आया है। बेंगलुरु की फिनटेक कंपनी Stockal Securities से जुड़े खातों में कथित तौर पर बिना अनुमति शेयरों की खरीद-बिक्री की गई। निवेशकों का आरोप है कि उनके Apple, Tesla, Amazon और Nvidia जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर बेचकर उस पैसे से दूसरी छोटी कंपनियों के शेयर खरीद लिए गए।
यह मामला 15 अक्टूबर 2026 का है। करीब 30 निवेशकों ने इस तरह के लेनदेन की शिकायत की है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस मामले में नुकसान ₹100 करोड़ से ज्यादा हो सकता है। हालांकि, यह अंतिम और स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया गया आंकड़ा नहीं है। विवाद में Stockal की पैरेंट कंपनी Borderless Investing और उसकी अमेरिकी ब्रोकरेज पार्टनर DriveWealth ने एक-दूसरे से अलग दावे किए हैं।
Stockal विवाद क्या है? निवेशकों के अमेरिकी शेयर कैसे बेचे गए?
निवेशकों के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 को उनके Stockal खातों में ऐसे लेनदेन हुए जिनकी उन्होंने अनुमति नहीं दी थी। आरोप है कि उनके पोर्टफोलियो में मौजूद बड़ी अमेरिकी कंपनियों के शेयर पहले बेचे गए और फिर उस पैसे से कम ट्रेडिंग वाले माइक्रोकैप शेयर खरीदे गए।
जिन कंपनियों के शेयर बेचे जाने की शिकायत है, उनमें Apple, Tesla, Amazon, Alphabet, Nvidia और AMD शामिल हैं। ये अमेरिकी शेयर बाजार की जानी-मानी कंपनियां हैं।
निवेशकों का कहना है कि उन्होंने न तो अपने पुराने शेयर बेचने का आदेश दिया था और न ही दूसरी कंपनियों के शेयर खरीदने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद उनके पोर्टफोलियो में बड़े नाम वाली कंपनियों के शेयरों की जगह कम कारोबार वाली कंपनियों के शेयर आ गए।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 30 निवेशकों ने शिकायत की है। शुरुआती तौर पर सामने आए निवेशकों के दावों के आधार पर इस मामले में ₹100 करोड़ से ज्यादा की रकम प्रभावित होने की बात कही गई है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि प्रभावित निवेश और वास्तविक नुकसान एक ही बात नहीं हैं। अंतिम नुकसान का आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।

एक निवेशक के खाते से 10 अमेरिकी कंपनियों के शेयर बेचने का आरोप
इस मामले में सामने आए एक निवेशक की शिकायत से कथित लेनदेन का पूरा ब्योरा मिलता है। भारत की एक प्रमुख पेय पदार्थ कंपनी में वरिष्ठ पद पर काम करने वाले इस निवेशक के मुताबिक, उसके खाते में मौजूद 10 अमेरिकी कंपनियों के शेयर बिना अनुमति बेच दिए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, इन शेयरों की बिक्री से कुल 3,35,768 डॉलर यानी करीब ₹3.19 करोड़ मिले। बेचे गए शेयरों में Apple, Tesla, Palantir, Amazon, Alphabet, AMD, Gilead Sciences, Nvidia, Delta Air Lines और Lemonade शामिल थे।
निवेशक का आरोप है कि शेयर बेचने से मिली रकम का इस्तेमाल चीन की कंपनी Zhibao Technology Inc. के शेयर खरीदने में किया गया। उसके शिकायत संबंधी दस्तावेजों के अनुसार, इस कंपनी के 3 लाख शेयर करीब 1.05 डॉलर प्रति शेयर की औसत कीमत पर खरीदे गए। अमेरिकी बाजार में इस कंपनी का शेयर ZBAO नाम से कारोबार करता है।
निवेशक ने दावा किया कि बाद में Zhibao Technology के शेयर की कीमत गिरने से उसे करीब 4.5 लाख डॉलर यानी लगभग ₹4.26 करोड़ का नुकसान हुआ।
हालांकि, इस लेनदेन के आंकड़ों में एक अंतर है। 3 लाख शेयरों को 1.05 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से खरीदने पर कुल रकम 3,15,000 डॉलर होती है, जबकि पहले बेचे गए शेयरों से 3,35,768 डॉलर मिले थे। उपलब्ध जानकारी में इस अंतर की वजह स्पष्ट नहीं है। इसलिए 4.5 लाख डॉलर के नुकसान को निवेशक का अनुमान ही माना जाना चाहिए। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरे निवेशक के करीब ₹29 करोड़ के शेयर बेचने का आरोप
इस विवाद में एक अन्य निवेशक ने भी बड़े पैमाने पर बिना अनुमति शेयर बेचे जाने की शिकायत की है।रिपोर्ट के अनुसार, इस निवेशक के खाते में मौजूद करीब 31 लाख डॉलर यानी लगभग ₹29 करोड़ के शेयर 15 अक्टूबर को बेच दिए गए।
निवेशक का कहना है कि उसका पूरा पोर्टफोलियो करीब दो मिनट में बेच दिया गया। इसके बाद लगभग 15 मिनट के भीतर कम कारोबार वाले एक शेयर के 30.5 लाख शेयर खरीद लिए गए।
उसने आरोप लगाया कि इस दौरान न तो उसे कोई पहले से जानकारी दी गई और न ही लेनदेन की पुष्टि मांगी गई। निवेशक के मुताबिक, घटना के बाद उसका खाता पहले जैसी स्थिति में वापस नहीं आया और उसे नुकसान की भरपाई भी नहीं मिली।
इस मामले में बेंगलुरु में FIR दर्ज कराई गई है। इसमें Stockal Securities, उसकी पैरेंट कंपनियों Borderless Softech Private Limited और Borderless Investing Inc. के साथ अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी DriveWealth LLC का नाम शामिल है।
FIR में HDFC Securities का भी जिक्र है। हालांकि, Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, HDFC Securities ने स्पष्ट किया है कि उसे इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है।
Stockal की पैरेंट कंपनी Borderless ने क्या जवाब दिया?
निवेशकों के आरोपों के बाद Stockal की पैरेंट कंपनी Borderless Investing ने 4 नवंबर 2026 को अपना पक्ष रखा।
कंपनी के मुताबिक, 15 अक्टूबर को अमेरिकी शेयर बाजार में कारोबार के दौरान कुछ खातों में बिना अनुमति लेनदेन हुए थे। DriveWealth ने 16 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद प्रभावित खातों पर कुछ पाबंदियां लगाई गईं ताकि आगे किसी तरह का नुकसान रोका जा सके।
Borderless ने बताया कि उसकी शुरुआती जांच में 26 ग्राहकों के खातों तक किसी बाहरी व्यक्ति की पहुंच के संकेत मिले हैं। इनमें से 13 खातों में बड़ी अमेरिकी कंपनियों के शेयर बेचकर कम कारोबार वाले माइक्रोकैप शेयर खरीदे गए।
कंपनी ने कहा कि उसकी जांच में Stockal के प्लेटफॉर्म, तकनीकी ढांचे या आंतरिक सिस्टम में किसी तरह की सेंध का सबूत नहीं मिला है। उसके मुताबिक, किसी बाहरी व्यक्ति ने ग्राहकों की सही लॉगिन जानकारी का इस्तेमाल करके खातों तक पहुंच बनाई हो सकती है।
Borderless ने आशंका जताई कि ग्राहकों की ईमेल और लॉगिन जानकारी फिशिंग या सोशल इंजीनियरिंग के जरिए हासिल की गई हो सकती है। फिशिंग में धोखेबाज नकली ईमेल या मैसेज भेजकर लोगों की निजी जानकारी हासिल करते हैं। वहीं, सोशल इंजीनियरिंग में लोगों को झांसा देकर उनसे पासवर्ड या दूसरी जरूरी जानकारी ली जाती है।
कंपनी ने यह भी कहा कि अब तक की जांच में प्रभावित खातों से पैसे निकालने का कोई मामला सामने नहीं आया है। ग्राहकों के खातों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त जांच और सुरक्षा उपाय भी लागू किए गए हैं।
हालांकि, Borderless ने साफ किया कि ग्राहकों की मदद करना अपनी गलती स्वीकार करना नहीं है। कंपनी के मुताबिक, इस मामले में असली वजह और अलग-अलग कंपनियों की जिम्मेदारी अभी तय नहीं हुई है।
DriveWealth और Stockal के बीच जिम्मेदारी को लेकर विवाद
इस मामले में Stockal की अमेरिकी ब्रोकरेज पार्टनर DriveWealth की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। दोनों कंपनियों ने इस घटना को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं।
DriveWealth ने 30 अक्टूबर 2026 को एक प्रभावित निवेशक को भेजे पत्र में कहा कि बिना अनुमति खातों तक पहुंच Stockal के प्लेटफॉर्म के जरिए बनाई गई थी। कंपनी ने सुरक्षा में किसी संभावित चूक की जिम्मेदारी Stockal पर डाली।
DriveWealth के मुताबिक, उसने प्रभावित खातों को सुरक्षित करने और आगे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कुछ कदम उठाने की कोशिश की थी। हालांकि, कंपनी का आरोप है कि Stockal के निर्देशों के कारण कुछ कदम नहीं उठाए जा सके।
दूसरी ओर, Borderless ने अपने प्लेटफॉर्म में किसी तरह की सेंध लगने से इनकार किया है। उसका कहना है कि शुरुआती जांच में ग्राहकों की लॉगिन जानकारी का गलत इस्तेमाल होने के संकेत मिले हैं।
इस तरह दोनों कंपनियां एक-दूसरे की भूमिका पर सवाल उठा रही हैं। फिलहाल किसी स्वतंत्र जांच या नियामक संस्था ने यह तय नहीं किया है कि इस घटना के लिए किस कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था जिम्मेदार थी। DriveWealth का पत्र भी उसका अपना पक्ष है, अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं।
सितंबर में DriveWealth के डेटा में भी हुई थी सेंध
Stockal विवाद के बीच DriveWealth के सितंबर 2026 के साइबर सुरक्षा मामले का भी जिक्र सामने आया है। कंपनी के आधिकारिक नोटिस के मुताबिक, 4 और 5 सितंबर को उसके नेटवर्क तक किसी बाहरी व्यक्ति ने पहुंच बनाई थी।
DriveWealth की जांच 28 सितंबर को पूरी हुई थी। कंपनी ने बताया कि इस घटना में कुछ ग्राहकों की निजी जानकारी उसके नेटवर्क से बाहर गई थी।
हालांकि, कंपनी के मुताबिक, सितंबर की इस घटना में ब्रोकरेज खातों से पैसे निकालने, बिना अनुमति शेयरों की खरीद-बिक्री करने या निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव का कोई सबूत नहीं मिला था।
Borderless ने आशंका जताई है कि अक्टूबर में प्रभावित खातों तक पहुंच बनाने के लिए किसी दूसरी कंपनी के डेटा में हुई सेंध से मिली जानकारी का इस्तेमाल हुआ हो सकता है।
लेकिन सितंबर में DriveWealth के डेटा में हुई सेंध और 15 अक्टूबर के लेनदेन के बीच सीधा संबंध अभी साबित नहीं हुआ है। यह जांच का विषय है कि क्या सितंबर की घटना में उजागर हुई जानकारी का इस्तेमाल Stockal के ग्राहकों के खाते खोलने के लिए किया गया था।

HDFC Securities का Stockal से क्या संबंध था?
इस विवाद में HDFC Securities का नाम आने की वजह Stockal के साथ उसकी पुरानी साझेदारी है।
HDFC Securities ने 2019 में Stockal के साथ मिलकर GlobalInvesting.in प्लेटफॉर्म शुरू किया था। इसके जरिए भारतीय ग्राहकों को अमेरिकी और दूसरे विदेशी शेयर बाजारों में निवेश की सुविधा दी गई थी।
हालांकि, दोनों कंपनियों के बीच यह साझेदारी जुलाई 2024 में समाप्त हो गई थी। यानी अक्टूबर 2026 में हुए इस विवाद के समय दोनों कंपनियों के बीच यह साझेदारी सक्रिय नहीं थी।
Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC Securities ने कहा कि उसने ग्राहकों को विदेशी शेयरों में निवेश की सुविधा से परिचित कराया था और उन्हें Stockal के प्लेटफॉर्म पर भेजा था। कंपनी का कहना है कि ग्राहकों के खाते खोलने और शेयरों की खरीद-बिक्री में उसकी सीधी भूमिका नहीं थी।
FIR में HDFC Securities का नाम आने के बावजूद कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसे आरोपी नहीं बनाया गया है।
Stockal Investment Platform कैसे काम करता है?
Stockal एक फिनटेक प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए भारतीय निवेशक अमेरिकी शेयरों, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF और दूसरे विदेशी निवेश विकल्पों में पैसा लगा सकते हैं।
- इस प्रक्रिया में भारतीय प्लेटफॉर्म और अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी की अलग-अलग भूमिकाएं होती हैं।
1- Stockal Securities: यह भारतीय ग्राहकों को प्लेटफॉर्म और निवेश से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती है।
2- DriveWealth: यह अमेरिका की ब्रोकरेज कंपनी है, जो अमेरिकी शेयरों की खरीद-बिक्री और उन्हें सुरक्षित रखने से जुड़ी सेवाएं देती है।
3- निवेशक: ग्राहक प्लेटफॉर्म के जरिए अपने खाते में पैसा जमा करके अमेरिकी शेयर खरीदने और बेचने के निर्देश देते हैं।
इस तरह Indian Investors US Stocks में निवेश करने के लिए भारतीय और अमेरिकी कंपनियों की संयुक्त व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं।
इस प्रक्रिया में निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि उनका खाता कौन संभालता है, शेयरों की खरीद-बिक्री कौन करता है और निवेश किए गए शेयरों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसकी है।
क्या विदेशी शेयरों में निवेश करने वाले भारतीय निवेशक सुरक्षित हैं?
Stockal विवाद ने विदेशी शेयरों में पैसा लगाने वाले भारतीय निवेशकों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
विदेशी बाजारों में निवेश करने से लोगों को अलग-अलग देशों और कंपनियों में पैसा लगाने का मौका मिलता है। लेकिन इस प्रक्रिया में कई भारतीय और विदेशी कंपनियां शामिल हो सकती हैं। इसलिए निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि उनके शेयर किसके पास हैं और बिना अनुमति लेनदेन होने पर शिकायत कहां करनी है।
किसी प्लेटफॉर्म या ब्रोकर का SEBI में रजिस्ट्रेशन होना जरूरी जानकारी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि निवेश से जुड़े सभी जोखिम खत्म हो जाते हैं।
विदेशी शेयरों में निवेश करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें:
- जिस भारतीय ब्रोकर या कंपनी के जरिए निवेश कर रहे हैं, उसका SEBI रजिस्ट्रेशन जांचें।
- पता करें कि अमेरिकी शेयरों की खरीद-बिक्री किस ब्रोकरेज कंपनी के जरिए होती है।
- समझें कि आपके खरीदे गए शेयरों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किस कंपनी की है।
- मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें। इसमें लॉगिन के समय पासवर्ड के अलावा एक और सुरक्षा जांच होती है।
- अपने खाते में होने वाले लेनदेन और ईमेल अलर्ट की नियमित जांच करें।
- बिना अनुमति किसी भी तरह का लेनदेन दिखने पर तुरंत संबंधित कंपनी को लिखित शिकायत दें।
यह मामला बताता है कि विदेशी शेयरों में निवेश करते समय केवल मुनाफे के अवसर देखना काफी नहीं है। खाते की सुरक्षा और शिकायत का समाधान कैसे होगा, यह जानना भी जरूरी है।
बिना अनुमति शेयर बेचे जाने पर निवेशक कहां शिकायत कर सकते हैं?
अगर किसी निवेशक के खाते में उसकी अनुमति के बिना शेयरों की खरीद-बिक्री होती है, तो उसे तुरंत संबंधित कंपनियों और जरूरत पड़ने पर नियामक संस्थाओं को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
- 1- Stockal Securities: निवेशक कंपनी के आधिकारिक शिकायत विभाग में लिखित शिकायत कर सकते हैं।
- 2- SEBI SCORES: SEBI का यह पोर्टल भारतीय प्रतिभूति बाजार में रजिस्टर्ड कंपनियों और ब्रोकर से जुड़ी शिकायतों के लिए उपलब्ध है। हालांकि, विदेशी शेयरों से जुड़े मामलों में SEBI के अधिकार सीमित हो सकते हैं।
- 3- US Securities and Exchange Commission (SEC): अमेरिकी शेयर बाजार और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ शिकायत के लिए निवेशक SEC से संपर्क कर सकते हैं।
- 5- पुलिस और साइबर क्राइम सेल: खाते में बिना अनुमति पहुंच बनाने या वित्तीय धोखाधड़ी की आशंका होने पर स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
शिकायत करते समय निवेशकों को शेयरों की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, ईमेल, लॉगिन अलर्ट और कंपनी के साथ हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखने चाहिए। इन दस्तावेजों से मामले की जांच में मदद मिल सकती है।
किसी भी शिकायत से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट पर उसकी शिकायत प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र की जानकारी जरूर जांचें।
निष्कर्ष
Stockal विवाद ने विदेशी शेयरों में निवेश करने वाले भारतीय ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि निवेशकों के खातों तक बिना अनुमति पहुंच कैसे बनाई गई और इस मामले में किस कंपनी की गलती थी।
Borderless और DriveWealth के बीच भी जिम्मेदारी को लेकर मतभेद हैं। अब जांच के नतीजे और निवेशकों के नुकसान की भरपाई को लेकर कंपनियों के अगले कदम महत्वपूर्ण होंगे।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Stockal विवाद क्या है और भारतीय निवेशकों ने क्या आरोप लगाए हैं?
करीब 30 भारतीय निवेशकों ने आरोप लगाया है कि 15 अक्टूबर 2026 को उनके अमेरिकी शेयर बिना अनुमति बेच दिए गए। उनका कहना है कि शेयर बेचने से मिले पैसे से कम कारोबार वाली दूसरी कंपनियों के शेयर खरीदे गए।
Stockal पर अमेरिकी शेयर बिना अनुमति बेचने का आरोप क्यों लगा है?
निवेशकों का आरोप है कि उनके खातों तक बिना अनुमति पहुंच बनाई गई और उनके शेयर बेच दिए गए। Stockal की पैरेंट कंपनी Borderless के मुताबिक, किसी बाहरी व्यक्ति ने ग्राहकों की लॉगिन जानकारी का इस्तेमाल करके 26 खातों तक पहुंच बनाई हो सकती है।
Stockal मामले में भारतीय निवेशकों को कितने करोड़ रुपये का नुकसान हुआ?
शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस मामले में नुकसान ₹100 करोड़ से अधिक हो सकता है। हालांकि, यह अंतिम और स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया गया नुकसान नहीं है।
Stockal Investment Platform कैसे काम करता है?
Stockal भारतीय निवेशकों को अमेरिकी शेयरों और ETF में पैसा लगाने की सुविधा देता है। इसके लिए अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी DriveWealth की सेवाएं भी ली जाती हैं।
बिना अनुमति शेयर बेचने के खिलाफ निवेशक कहां शिकायत कर सकते हैं?
निवेशक Stockal के शिकायत विभाग, SEBI SCORES, अमेरिकी SEC और जरूरत पड़ने पर FINRA या स्थानीय साइबर क्राइम सेल में शिकायत कर सकते हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए आंकड़े, बाजार से जुड़ी जानकारी, कंपनियों के प्रदर्शन और निवेश संबंधी तथ्य उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों और विश्वसनीय रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, ETF, बॉन्ड, सोना या किसी अन्य निवेश में बाजार जोखिम शामिल होता है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकार या योग्य वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह लें। यह लेख किसी भी तरह की निवेश सलाह, खरीदने या बेचने की सिफारिश अथवा भविष्य में रिटर्न की गारंटी नहीं है। बाजार की स्थिति और आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए निवेश से पहले नवीनतम जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।