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₹306 की LED लाइट ₹11,800 में, ₹5 का फिनाइल ₹33,500 में! सरकारी खरीद पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों की सरकारी खरीद में भारी मूल्य अंतर सामने आया है। तीन साल में ₹1,134 करोड़ के खर्च और ₹250 करोड़ की संभावित बचत के अनुमान के बीच अधिकारियों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

₹306 की LED लाइट ₹11,800 में, ₹5 का फिनाइल ₹33,500 में! सरकारी खरीद पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश में सरकारी खरीद को लेकर ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Madhya Pradesh Civic Procurement Irregularities 2026 के तहत सामने आए खरीद विश्लेषण में कहीं 60 वॉट की एलईडी लाइट ₹306 में खरीदी गई, तो भोपाल में इसी तरह की लाइट की दर्ज कीमत ₹11,800 बताई गई। इसी तरह, एक नगरीय निकाय में फिनाइल की कीमत ₹5 प्रति लीटर बताई गई, जबकि दूसरे स्थान पर समान उत्पाद की कीमत ₹33,500 दर्ज की गई।नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे का अधिकारियों को चेतावनी देते हुए एक वीडियो बुधवार से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। बैठक में मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (MPSEDC) के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक अंशुमान राज की प्रस्तुति में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई खरीद में कीमतों के बड़े अंतर को सामने रखा गया।

तीन साल में ₹1,134 करोड़ खर्च, ₹250 करोड़ की बचत का अनुमान

AI-generated image used for representational purpose only
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प्रस्तुति के अनुसार, मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने पिछले तीन वर्षों में GeM पोर्टल के माध्यम से लगभग ₹1,134 करोड़ की खरीदारी की। विश्लेषण में अनुमान लगाया गया कि यदि सामान औसत दरों पर खरीदा जाता, तो करीब ₹250 करोड़ की बचत संभव थी।हालांकि, संभावित बचत का यह अनुमान अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है। कीमतों में अंतर की वास्तविक वजह जानने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता, तकनीकी विशेषताओं, खरीदी गई मात्रा, स्थापना लागत और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी। Madhya Pradesh Government Purchase Scam जैसे आरोपों पर निष्कर्ष निकालने से पहले खरीद प्रक्रिया और दस्तावेजों का सत्यापन अहम है।

₹306 की एलईडी लाइट और ₹33,500 का फिनाइल क्यों चर्चा में?

प्रस्तुति में फिनाइल की कीमतों में बड़ा अंतर दिखाया गया। एक नगरीय निकाय में फिनाइल की कीमत ₹5 प्रति लीटर बताई गई, जबकि दूसरे निकाय में समान उत्पाद की कीमत ₹33,500 दर्ज होने का उल्लेख किया गया। इन दोनों कीमतों के बीच अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।इसी तरह, एक स्थान पर 60 वॉट की एलईडी लाइट ₹306 में खरीदे जाने की जानकारी दी गई, जबकि भोपाल में इसकी दर्ज कीमत ₹11,800 बताई गई। भोपाल में इस खरीद का कुल मूल्य ₹3.78 लाख था।इन आंकड़ों से खरीद प्रक्रिया पर सवाल जरूर उठते हैं, लेकिन सही तुलना के लिए यह देखना होगा कि दोनों जगह खरीदे गए उत्पादों की गुणवत्ता और तकनीकी विशेषताएं समान थीं या नहीं। यह भी जांचना जरूरी है कि दर्ज कीमत में अतिरिक्त उपकरण या स्थापना का खर्च शामिल था या नहीं।

कचरा वाहन की कीमत में ₹4 लाख का अंतर

संजय दुबे ने कचरा संग्रहण वाहनों की खरीद का उदाहरण भी दिया। प्रस्तुति के अनुसार, एक नगरीय निकाय ने एक वाहन ₹2 लाख में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने चार डस्टबिन के साथ दिए गए समान वाहन पर ₹6 लाख खर्च किए।दुबे ने अतिरिक्त वस्तुओं के नाम पर लागत बढ़ाए जाने की आशंका जताई और यह सवाल भी उठाया कि क्या खरीदारी चुनिंदा पक्षों के माध्यम से कराई जा रही थी। हालांकि, इन आशंकाओं की पुष्टि के लिए वाहनों की तकनीकी विशेषताओं, डस्टबिन की लागत, खरीद आदेश और भुगतान रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।

इन मदों पर करोड़ों रुपये हुए खर्च

प्रस्तुति में पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रमुख खरीद मदों पर खर्च का विवरण भी दिया गया:

कचरा ढोने वाले टिपर और डंपर: लगभग ₹65 करोड़

स्ट्रीट लाइट: लगभग ₹49 करोड़

अष्टकोणीय खंभे: लगभग ₹27 करोड़

कीटाणुनाशक पदार्थ: लगभग ₹18 करोड़

यह खर्च प्रतिस्पर्धी दरों पर खरीद, उत्पादों की गुणवत्ता की जांच और पारदर्शी प्रक्रिया की जरूरत को रेखांकित करता है।

संजय दुबे की चेतावनी, अब अनियमितताओं पर होगी कार्रवाई

बैठक में संजय दुबे ने कथित तौर पर अधिकारियों को बताया कि विभाग इस बात पर नजर रख रहा है कि प्रत्येक नगरीय निकाय क्या खरीद रहा है और उसके लिए कितनी कीमत चुका रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष विभाग ने नरम रुख अपनाया था, लेकिन अब खरीद में अनियमितताएं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। Madhya Pradesh Civic Procurement Irregularities 2026 के मामले में अब अहम सवाल यह है कि कीमतों में सामने आए अंतर के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और क्या खरीद नियमों का पालन किया गया था। दस्तावेजों की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों की खरीद में सामने आए मूल्य अंतर ने सरकारी खर्च की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। Madhya Pradesh Civic Procurement Irregularities 2026 के मामले में संभावित बचत का अनुमान महत्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र और दस्तावेज-आधारित जांच जरूरी होगी। जहां नियमों का उल्लंघन या गड़बड़ी प्रमाणित हो, वहां जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करना सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए अहम होगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

मध्य प्रदेश में ₹11,800 की एलईडी लाइट और ₹33,500 के फिनाइल का मामला क्या है?

सरकारी खरीद की समीक्षा में एक स्थान पर 60 वॉट की एलईडी लाइट ₹306 में खरीदे जाने और भोपाल में इसकी दर्ज कीमत ₹11,800 होने का उल्लेख किया गया। इसी तरह, फिनाइल की कीमतों में भी बड़ा अंतर सामने आया।

मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने तीन साल में कितनी खरीदारी की?

प्रस्तुति के अनुसार, 374 नगरीय निकायों ने तीन वर्षों में GeM पोर्टल के माध्यम से लगभग ₹1,134 करोड़ की खरीदारी की।

₹250 करोड़ की बचत का अनुमान कैसे लगाया गया?

विश्लेषण में अनुमान लगाया गया कि यदि सामान औसत दरों पर खरीदा जाता, तो करीब ₹250 करोड़ की बचत संभव थी। यह एक अनुमान है, प्रमाणित बचत का आंकड़ा नहीं।

GeM पोर्टल क्या है?

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) भारत में सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थाओं के लिए वस्तुओं और सेवाओं की खरीद का ऑनलाइन मंच है।

क्या कीमतों में अंतर भ्रष्टाचार का प्रमाण है?

कीमतों में अंतर अपने आप में भ्रष्टाचार साबित नहीं करता। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता, तकनीकी विशेषताओं, मात्रा, स्थापना लागत, खरीद आदेश और भुगतान रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

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