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India's Research Publications by State : देश के कुल रिसर्च पेपर में 5 राज्यों की 70% हिस्सेदारी, जानिए कौन सबसे आगे और कौन पीछे?

नीति आयोग के इंडिया S&T स्कोरबोर्ड के मुताबिक, 2024-25 में भारत के करीब 70% रिसर्च पेपर सिर्फ पांच राज्यों से प्रकाशित हुए। तमिलनाडु 44,611 पेपर के साथ पहले स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली भी टॉप-5 में शामिल हैं।

India's Research Publications by State : देश के कुल रिसर्च पेपर में 5 राज्यों की 70% हिस्सेदारी, जानिए कौन सबसे आगे और कौन पीछे?

India's Research Publications by State : भारत में रिसर्च और वैज्ञानिक शोध का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा राज्यों में केंद्रित है। नीति आयोग के नए इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी (S&T) स्कोरबोर्ड के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में देश में प्रकाशित कुल 2,23,005 रिसर्च पेपर में से करीब 70% सिर्फ पांच राज्यों से आए। इनमें तमिलनाडु पहले स्थान पर है, जबकि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली भी टॉप-5 में शामिल हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, इन पांच राज्यों ने मिलकर 1,55,243 रिसर्च पेपर प्रकाशित किए। यानी देश के कुल शोध प्रकाशनों में इनकी हिस्सेदारी करीब 69.6% रही। खास बात यह है कि टॉप-5 में तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक दक्षिण में विंध्य पर्वतमाला के दक्षिण वाले क्षेत्र से आते हैं। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में रिसर्च की गतिविधियों के बीच अंतर भी सामने आता है।

तमिलनाडु से सबसे ज्यादा 44 हजार से अधिक रिसर्च पेपर

नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में तमिलनाडु से सबसे ज्यादा 44,611 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए। इसके बाद उत्तर प्रदेश 29,298 पेपर के साथ दूसरे और महाराष्ट्र 28,947 पेपर के साथ तीसरे स्थान पर रहा। कर्नाटक 27,970 पेपर के साथ चौथे और दिल्ली 24,417 पेपर के साथ पांचवें स्थान पर है।टॉप-5 के बाद पश्चिम बंगाल 18,280 पेपर के साथ छठे, पंजाब 15,565 के साथ सातवें और तेलंगाना 15,253 के साथ आठवें स्थान पर है। उत्तराखंड से 11,169 और गुजरात से 10,503 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए।
इस सूची में राजस्थान 9,490 रिसर्च पेपर के साथ 14वें स्थान पर है। यानी रिसर्च प्रकाशनों के मामले में राजस्थान अभी शीर्ष राज्यों से पीछे है।

पेटेंट आवेदन में भी तमिलनाडु सबसे आगे

रिसर्च पेपर के अलावा पेटेंट आवेदन भी किसी राज्य की वैज्ञानिक और तकनीकी गतिविधियों का अहम संकेतक हैं। पेटेंट किसी नए आविष्कार या तकनीक पर कानूनी अधिकार हासिल करने के लिए किया जाने वाला आवेदन होता है।2024-25 में तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 16,048 पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए। महाराष्ट्र 8,567 आवेदनों के साथ दूसरे, कर्नाटक 8,413 के साथ तीसरे, उत्तर प्रदेश 5,375 के साथ चौथे और तेलंगाना 5,200 आवेदनों के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
इस सूची में अगले पांच स्थानों पर आंध्र प्रदेश, पंजाब, गुजरात, दिल्ली और राजस्थान हैं। यानी रिसर्च पेपर के मामले में पांचवें स्थान पर रहने वाली दिल्ली पेटेंट आवेदन के टॉप-5 में नहीं है। वहीं, तेलंगाना पेटेंट आवेदन की सूची में दिल्ली की जगह पांचवें स्थान पर पहुंच गया।

67% रिसर्च पेपर केंद्रीय संस्थानों से, लेकिन 95% छात्र राज्य विश्वविद्यालयों में

नीति आयोग के सदस्य (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) अभय करंदीकर ने बताया कि देश के करीब 67% रिसर्च पेपर IIT और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की प्रयोगशालाओं जैसे केंद्रीय संस्थानों से आते हैं। जबकि इन संस्थानों में देश के कुल छात्रों में से करीब 5% ही पढ़ते हैं। इसके उलट, लगभग 95% छात्र राज्य विश्वविद्यालयों में नामांकित हैं।उन्होंने इस अंतर की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि राज्य विश्वविद्यालयों में रिसर्च की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। वर्ष 2001 से 2020 के बीच IITs ने देश के कुल रिसर्च प्रकाशनों में करीब 16% योगदान दिया था। वहीं, CSIR और केंद्रीय विश्वविद्यालयों का योगदान अलग-अलग 10% से ज्यादा रहा। परमाणु ऊर्जा विभाग के संस्थानों से भी करीब 8% रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने स्कोरबोर्ड जारी करते हुए कहा कि राज्यों को विज्ञान और रिसर्च के क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इससे राज्य अपनी ताकत और कमियों की पहचान कर सकेंगे और एक-दूसरे के अनुभव से सीखकर बेहतर योजनाएं बना सकेंगे।

1,260 शिक्षण संस्थानों और 38 हजार से ज्यादा डीप-टेक स्टार्टअप का डेटा शामिल

इंडिया S&T स्कोरबोर्ड में देश के विज्ञान और तकनीक से जुड़े इकोसिस्टम की जानकारी भी शामिल की गई है। इसमें 1,260 उच्च शिक्षा संस्थान, 356 केंद्र सरकार से वित्तपोषित रिसर्च संस्थान, 38,553 डीप-टेक स्टार्टअप, 7,246 अटल टिंकरिंग लैब और 390 इनक्यूबेटर शामिल हैं।यह स्कोरबोर्ड सिर्फ रिसर्च पेपर और पेटेंट की संख्या नहीं बताता, बल्कि शोध की गुणवत्ता, दूसरे देशों के साथ सहयोग, जर्नल में प्रकाशन और अलग-अलग क्षेत्रों में तकनीकी विकास जैसे संकेतकों को भी शामिल करता है। इसके आंकड़े Web of Science और InCites के जरिए रिसर्च प्रकाशनों तथा Clarivate के Derwent World Patents Index के जरिए पेटेंट आवेदनों का विश्लेषण करते हैं।
रिसर्च के विषयों की बात करें तो फार्मा, मेडिकल टेक्नोलॉजी और हेल्थ क्षेत्र में सबसे ज्यादा 59,633 प्रकाशन दर्ज किए गए। इसके बाद क्रिटिकल मिनरल्स और माइनिंग में 44,630 तथा AI और साइबर फिजिकल सिस्टम्स में 20,505 प्रकाशन हुए। ये विषय-आधारित आंकड़े अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज हैं और एक रिसर्च पेपर एक से ज्यादा क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।

रिसर्च पर खर्च और सरकारी प्रक्रियाएं भी बड़ी चुनौती

रिपोर्ट में भारत के रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) क्षेत्र की कुछ पुरानी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। इनमें रिसर्च के लिए सीमित फंडिंग, सरकारी मंजूरियों में देरी, खरीद प्रक्रिया की जटिलता और फंड जारी करने से जुड़े नियम शामिल हैं। कई बार शोधकर्ताओं का काफी समय रिसर्च के बजाय प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करने में खर्च होता है।भारत के R&D खर्च को लेकर भी लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। इस साल की शुरुआत में उपलब्ध सरकारी आंकड़ों में यह खर्च GDP का करीब 0.6% से 0.7% बताया गया था। हालांकि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के जुलाई 2026 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में भारत का कुल R&D खर्च GDP का 0.84% रहा। यह आंकड़ा बताता है कि खर्च बढ़ा है, लेकिन रिसर्च में निवेश और उसकी प्रभावशीलता पर काम करने की जरूरत बनी हुई है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

भारत में सबसे ज्यादा रिसर्च पेपर किस राज्य से प्रकाशित होते हैं?

नीति आयोग के इंडिया S&T स्कोरबोर्ड के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में तमिलनाडु से सबसे ज्यादा 44,611 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए।

NITI Aayog की रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्च पेपर में कौन से पांच राज्य आगे हैं?

रिसर्च पेपर प्रकाशित करने में तमिलनाडु पहले, उत्तर प्रदेश दूसरे, महाराष्ट्र तीसरे, कर्नाटक चौथे और दिल्ली पांचवें स्थान पर है।

भारत के कुल रिसर्च पेपर में पांच राज्यों की हिस्सेदारी कितनी है?

भारत के कुल 2,23,005 रिसर्च पेपर में से 1,55,243 पेपर इन पांच राज्यों से प्रकाशित हुए। इनकी हिस्सेदारी करीब 69.6% यानी लगभग 70% है।

दक्षिण भारत के कौन से राज्य रिसर्च पेपर प्रकाशित करने में आगे हैं?

टॉप-5 में तमिलनाडु और कर्नाटक दक्षिण भारत के राज्य हैं। महाराष्ट्र भी विंध्य पर्वतमाला के दक्षिण में स्थित है और टॉप-5 में तीसरे स्थान पर है।

भारत में सबसे ज्यादा रिसर्च पेपर किस विषय पर प्रकाशित हुए?

नीति आयोग के स्कोरबोर्ड के मुताबिक, फार्मा, मेडिकल टेक्नोलॉजी और हेल्थ क्षेत्र में सबसे ज्यादा 59,633 रिसर्च प्रकाशन दर्ज किए गए। एक पेपर एक से अधिक रिसर्च क्षेत्रों में भी गिना जा सकता है।

India S&T Scoreboard क्या है?

यह नीति आयोग का एक प्लेटफॉर्म है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के रिसर्च पेपर, पेटेंट आवेदन, उच्च शिक्षा संस्थान, डीप-टेक स्टार्टअप और अन्य विज्ञान-तकनीक से जुड़े आंकड़े शामिल हैं।

रिसर्च पेपर और पेटेंट के मामले में कौन सा राज्य पहले स्थान पर है?

तमिलनाडु दोनों मामलों में पहले स्थान पर है। 2024-25 में यहां से 44,611 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए और 16,048 पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए।

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