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उमर अब्दुल्ला को घर में ही लगा बड़ा झटका! श्रीनगर सांसद आगा रुहुल्लाह ने छोड़ी नेशनल कॉन्फ्रेंस, 24 साल का साथ खत्म

जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी पर 2024 के जनादेश और कश्मीरियों की उम्मीदों से विश्वासघात करने का आरोप लगाया है।

उमर अब्दुल्ला को घर में ही लगा बड़ा झटका! श्रीनगर सांसद आगा रुहुल्लाह ने छोड़ी नेशनल कॉन्फ्रेंस, 24 साल का साथ खत्म

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Aga Ruhullah Resignation 2026 के साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख शिया चेहरे और श्रीनगर के लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी से अपना 24 साल पुराना रिश्ता तोड़ लिया है। उन्होंने संसद की सदस्यता छोड़ने का भी ऐलान किया है। रुहुल्लाह ने अपने इस्तीफे के साथ पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि 2024 के विधानसभा चुनाव में जनता से मिले भारी जनादेश के बाद पार्टी अपने वादों और संघर्ष के रास्ते से पीछे हट गई।

पिता की 26वीं पुण्यतिथि पर किया इस्तीफे का ऐलान

Aga Syed Ruhullah Mehdi has resigned as Srinagar MP and from the party.
Aga Syed Ruhullah Mehdi has resigned as Srinagar MP and from the party.

आगा रुहुल्लाह ने बडगाम में आयोजित एक भावुक कार्यक्रम के दौरान इस्तीफे की घोषणा की। यह कार्यक्रम उनके पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित किया गया था। उनका यह फैसला नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ करीब 24 साल के राजनीतिक जुड़ाव का अंत है। उन्होंने पार्टी छोड़ने के साथ लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दिया है। हालांकि, श्रीनगर में उपचुनाव का रास्ता तभी साफ होगा, जब लोकसभा अध्यक्ष उनका इस्तीफा स्वीकार करेंगे। रुहुल्लाह ने अपने फैसले के साथ पार्टी नेतृत्व को चार पन्नों का पत्र भी लिखा, जिसमें उन्होंने अपने राजनीतिक मतभेदों और नाराजगी की वजह विस्तार से बताई।

Aga Ruhullah Resignation 2026: नेशनल कॉन्फ्रेंस पर क्यों भड़के सांसद?

अपने पत्र में रुहुल्लाह ने आरोप लगाया कि 2024 के विधानसभा चुनाव में जनता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को अपना गुस्सा, भावनाएं और भारी जनादेश सौंपा था, लेकिन चुनाव खत्म होते ही पार्टी ने अपना रुख बदल लिया। उन्होंने लिखा कि 2019 में अनुच्छेद 370 और 35-ए को हटाना कश्मीरियों के अधिकारों पर बड़ा हमला था। उनके मुताबिक, इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष और आंदोलन का अवसर भी पैदा किया था। रुहुल्लाह का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि नेशनल कॉन्फ्रेंस इस संघर्ष का नेतृत्व करेगी। इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने पार्टी के साथ अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई और 2024 के विधानसभा चुनाव में उसके लिए पूरी ताकत से प्रचार किया। लेकिन उनके आरोप के मुताबिक, चुनाव के बाद पार्टी ने जनता की उम्मीदों के अनुरूप संघर्ष करने के बजाय सरकार चलाने और राज्य का दर्जा बहाल होने के अस्पष्ट वादे तक खुद को सीमित कर लिया।

अनुच्छेद 370, आरक्षण और राजनीतिक बंदियों पर भी मतभेद

रुहुल्लाह लंबे समय से अनुच्छेद 370 की बहाली, राजनीतिक बंदियों के मुद्दे और आरक्षण व्यवस्था के युक्तिकरण जैसे विषयों पर मुखर रहे हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे में इन मुद्दों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की निष्क्रियता को भी पार्टी से अलग होने की प्रमुख वजह बताया। उनका आरोप है कि जब उन्होंने पार्टी के रुख पर सवाल उठाए तो नेतृत्व के साथ मतभेद बढ़ने लगे। उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत असहमति नहीं, बल्कि कश्मीर के लोगों की राजनीतिक उम्मीदों से जुड़ा मुद्दा बताया। रुहुल्लाह ने पत्र में लिखा कि जम्मू-कश्मीर के लोग कई तरह के बदलावों से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में राजनीति से पीछे हटना और जनता के अधिकारों के संघर्ष को छोड़ देना क्षेत्र के राजनीतिक अस्तित्व को कमजोर कर सकता है। उन्होंने साफ कहा कि वह इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते।

अब आगे क्या करेंगे आगा रुहुल्लाह?

आगा रुहुल्लाह के करीबी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल उनकी किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की तत्काल योजना नहीं है। इसके बजाय वह युवाओं के नेतृत्व में एक नया सामूहिक राजनीतिक मंच तैयार करना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य उमर अब्दुल्ला सरकार को अस्थिर करना नहीं है। उनका कहना है कि वह अपने सिद्धांतों और जनता के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर आगे की राजनीतिक राह तय करेंगे। अपने इस्तीफे के पत्र के अंत में रुहुल्लाह ने भावुक अंदाज में कहा कि वह अपने लोगों की सेवा के लिए नया रास्ता तलाशेंगे और अपने विश्वास, मूल्यों तथा पूर्वजों से मिली सीख के मुताबिक सिद्धांतों पर कायम रहेंगे।

निष्कर्ष

Aga Ruhullah Resignation 2026 ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी के एक प्रमुख सांसद का 24 साल बाद अलग होना सिर्फ संगठनात्मक झटका नहीं, बल्कि अनुच्छेद 370, राज्य के दर्जे और कश्मीर की राजनीतिक दिशा जैसे मुद्दों पर अंदरूनी असहमति को भी सामने लाता है। अब यह देखना अहम होगा कि रुहुल्लाह का प्रस्तावित युवा राजनीतिक मंच कितना प्रभावी होता है और उनके इस्तीफे का क्षेत्र की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

श्रीनगर के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा क्यों दिया?

उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद जनता की उम्मीदों और अधिकारों के संघर्ष से दूरी बना ली। अनुच्छेद 370, आरक्षण और राजनीतिक बंदियों के मुद्दों पर पार्टी की निष्क्रियता भी उनके मतभेद की वजह बनी।

आगा रुहुल्लाह ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा कब दिया?

उन्होंने 4 नवंबर 2026 को अपने पिता की 26वीं पुण्यतिथि पर बडगाम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पार्टी और संसद से इस्तीफे की घोषणा की। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद ही सीट खाली होने की प्रक्रिया पूरी होगी।

आगा रुहुल्लाह और उमर अब्दुल्ला के बीच मतभेद की मुख्य वजह क्या थी?

मुख्य मतभेद जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक अधिकारों, अनुच्छेद 370 की बहाली और राज्य का दर्जा वापस पाने के मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के रुख को लेकर थे।

आगा रुहुल्लाह ने अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस पर क्या आरोप लगाए?

उन्होंने आरोप लगाया कि 2019 में अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाए जाने के बाद पार्टी को अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष करना चाहिए था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उसने इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए।

आगा रुहुल्लाह के इस्तीफे का जम्मू-कश्मीर की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?उनके इस्तीफे से नेशनल कॉन्फ्रेंस को राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौती मिल सकती है। उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक, वह युवाओं के नेतृत्व में नया राजनीतिक मंच बनाने की योजना रखते हैं, हालांकि उन्होंने उमर अब्दुल्ला सरकार को अस्थिर नहीं करने की बात कही है।

उनके इस्तीफे से नेशनल कॉन्फ्रेंस को राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौती मिल सकती है। उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक, वह युवाओं के नेतृत्व में नया राजनीतिक मंच बनाने की योजना रखते हैं, हालांकि उन्होंने उमर अब्दुल्ला सरकार को अस्थिर नहीं करने की बात कही है।

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