UAE Houthi Covert Alliance : UAE पर हूतियों की मदद का आरोप, क्या सऊदी अरब से बढ़ेगा तनाव?
ड्रॉप साइट न्यूज की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि UAE से जुड़े यमनी सैन्य कमांडर हूतियों को सऊदी समर्थित बलों की खुफिया जानकारी दे रहे हैं। UAE और हूती नेताओं ने आरोपों को खारिज किया है। अगर इनकी पुष्टि होती है, तो सऊदी अरब और UAE के बीच तनाव बढ़ सकता है।
UAE Houthi Covert Alliance : यमन में सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर हूतियों को खुफिया जानकारी और सैन्य ठिकानों की जानकारी देने में मदद करने का आरोप लगा है। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट ड्रॉप साइट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE से जुड़े यमनी सैन्य कमांडर हूतियों को सऊदी समर्थित बलों को निशाना बनाने में मदद कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अबू धाबी को इस कथित संपर्क की जानकारी है और उसने इसे जारी रहने दिया है। हालांकि, UAE से जुड़े अधिकारियों और हूती नेताओं, दोनों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
UAE पर हूतियों को खुफिया जानकारी देने का आरोप
ड्रॉप साइट न्यूज ने दो सूत्रों के हवाले से दावा किया कि UAE ने यमन की राजधानी सना में मौजूद हूती नेतृत्व तक बड़ी मात्रा में खुफिया जानकारी पहुंचाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में सक्रिय UAE समर्थित कुछ सैन्य कमांडरों के साथ हूतियों के संपर्क चैनल भी बने हुए हैं।रिपोर्ट में यमन के एक ऐसे सूत्र का हवाला दिया गया है, जिसे इस कथित संपर्क की जानकारी है। उसके मुताबिक, UAE ने सना स्थित सरकार को काफी खुफिया जानकारी दी है और दोनों पक्षों के बीच संपर्क अब भी बना हुआ है। यहां सना स्थित सरकार से आशय हूती प्रशासन से है, जो यमन की राजधानी पर नियंत्रण रखता है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हूतियों ने UAE के प्रति वफादार सैन्य कमांडरों के साथ अपने स्तर पर संपर्क बनाए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट में यह अंतर भी बताया गया है कि कथित खुफिया मदद यमन के भीतर सऊदी समर्थित बलों को निशाना बनाने तक सीमित हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि UAE हूतियों को सऊदी अरब के भीतर हमले करने में भी मदद दे रहा है।
सऊदी अरब की तेल रिफाइनरी पर हमले का दावा
यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब हूतियों ने सऊदी अरब में तेल और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावे किए हैं। 27 अक्टूबर को हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि संगठन ने सऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। उनके मुताबिक, हमले के बाद परिसर में आग लग गई। रास तनुरा की तेल प्रसंस्करण क्षमता करीब 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन है और यहां एक अहम तेल शिपिंग टर्मिनल भी मौजूद है। सऊदी अधिकारियों ने शुरुआत में इस हमले की पुष्टि नहीं की थी।हूतियों ने नजरा एयरपोर्ट पर सैन्य विमानों, खमिस मुशैत के एयरबेस, रियाद में सऊदी रक्षा मंत्रालय की इमारत और आभा एयरपोर्ट को भी निशाना बनाने का दावा किया। संगठन ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास सऊदी समर्थित बलों की बढ़त रोकने की बात भी कही।
सऊदी अरब के मुताबिक, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रियाद की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया। उनके मलबे से एक इमारत, निर्माण स्थल और वाहन को नुकसान पहुंचा, हालांकि तत्काल किसी की मौत की सूचना नहीं दी गई। हूतियों के सभी हमलों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रास तनुरा पर हमले का दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सऊदी अरब के लगभग सभी तेल निर्यात मुख्य रूप से दो बंदरगाहों रास तनुरा और लाल सागर के किनारे स्थित यानबू से होते हैं। इन ठिकानों पर हमलों से तेल की सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
सऊदी अरब और UAE के रिश्तों में क्यों बढ़ा तनाव
UAE और सऊदी अरब 2015 में यमन के गृहयुद्ध में एक ही पक्ष में शामिल हुए थे। दोनों देशों ने हूतियों के खिलाफ यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया था। हूतियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। यमन की मान्यता प्राप्त सरकार का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब की राजधानी रियाद से काम करता रहा है।

हालांकि, समय के साथ दोनों देशों के हित अलग होने लगे। यमन में UAE और सऊदी अरब ने अलग-अलग स्थानीय सैन्य और राजनीतिक समूहों को समर्थन दिया। ड्रॉप साइट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल दिसंबर में दक्षिणी यमन में UAE समर्थित बलों और सऊदी समर्थित सैन्य इकाइयों के बीच झड़पें हुई थीं। इसके बाद UAE का यमन में प्रभाव कमजोर हुआ और उसे वहां से पीछे हटना पड़ा।रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि UAE समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) से जुड़े कुछ कमांडरों ने हूतियों के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। इससे दक्षिणी यमन के अल-दाले और लहज प्रांतों में सैन्य अभियान धीमे पड़ने का दावा किया गया है। ये इलाके ताइज प्रांत के आसपास हैं।
सूत्रों के मुताबिक, यमन में अपना प्रभाव दोबारा बढ़ाने की कोशिश में UAE स्थानीय सैन्य कमांडरों के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, यह रिपोर्ट का दावा है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
UAE और हूतियों ने आरोपों को नकारा
UAE से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने ड्रॉप साइट न्यूज से कहा कि सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल के हूतियों के साथ कोई संपर्क चैनल नहीं हैं। उन्होंने इस आरोप को भी खारिज किया कि STC के लड़ाके हूतियों से मुकाबला करने से बच रहे हैं।STC के अध्यक्ष के विशेष प्रतिनिधि अम्र अल-बैध ने कहा कि संगठन की नीति उत्तर यमन में सैन्य अभियान में शामिल नहीं होने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे हूतियों के खिलाफ लड़ने से इनकार करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर हूती दक्षिण की ओर बढ़ते हैं, तो दक्षिणी सशस्त्र बल उनका विरोध करेंगे।
हूतियों ने भी UAE से मदद मिलने के आरोपों को खारिज किया। वरिष्ठ हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने कहा कि अमीरात ने यमन में न तो सऊदी अरब के खिलाफ और न ही यमन के भीतर उसके समर्थित गुटों के खिलाफ किसी तरह की मदद दी है। उन्होंने दावा किया कि UAE तटस्थ रुख बनाए हुए है और सऊदी अरब के दबाव के बावजूद हूतियों के खिलाफ अभियान में दोबारा शामिल नहीं हुआ है।
अमेरिका को कथित गुप्त मदद की जानकारी मिलने का दावा
ड्रॉप साइट न्यूज की रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने UAE को कथित गुप्त मदद के बारे में जानकारी होने की बात कही और अबू धाबी से इसे रोकने को कहा। रिपोर्ट में इस कथित चेतावनी की स्वतंत्र पुष्टि या अमेरिका की ओर से सार्वजनिक बयान का उल्लेख नहीं है।UAE अमेरिका और इजराइल का प्रमुख क्षेत्रीय सहयोगी है, जबकि हूतियों के ईरान से करीबी संबंध हैं। ऐसे में UAE और हूतियों के बीच कथित संपर्क की खबर क्षेत्रीय समीकरणों को लेकर सवाल खड़े करती है। यदि यमन के भीतर सऊदी समर्थित बलों को निशाना बनाने के लिए खुफिया जानकारी साझा किए जाने के आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे सऊदी अरब और UAE के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
यमन का संघर्ष अब केवल स्थानीय सत्ता की लड़ाई नहीं रह गया है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अहम रास्ता है, जबकि सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमलों से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम है। फिलहाल UAE और हूतियों ने कथित सहयोग से इनकार किया है, इसलिए आरोपों और उनकी पुष्टि के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
UAE पर Houthis को गुप्त मदद देने के क्या आरोप लगे हैं?
ड्रॉप साइट न्यूज की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि UAE ने यमन के भीतर सऊदी समर्थित सरकारी बलों को निशाना बनाने के लिए हूतियों को खुफिया जानकारी दी। UAE से जुड़े अधिकारियों और हूती नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया है।
UAE कथित तौर पर Yemen में Saudi-backed Forces की जानकारी Houthis तक कैसे पहुंचा रहा है?
रिपोर्ट में दो सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि UAE समर्थित कुछ यमनी सैन्य कमांडरों के साथ हूतियों के संपर्क चैनल बने हुए हैं। हालांकि, जानकारी साझा करने के तरीके और इसकी स्वतंत्र पुष्टि के बारे में सार्वजनिक रूप से पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
UAE और Saudi Arabia के बीच Yemen को लेकर मतभेद क्यों बढ़ रहे हैं?
दोनों देश 2015 में हूतियों के खिलाफ एक ही गठबंधन में शामिल हुए थे, लेकिन यमन में उनके राजनीतिक और सैन्य हित धीरे-धीरे अलग हुए। दोनों ने अलग-अलग स्थानीय गुटों का समर्थन किया और दक्षिणी यमन में उनके समर्थित बलों के बीच झड़पें भी हुईं।
Houthis और Ansarallah कौन हैं और उन्हें Iran का समर्थन क्यों मिलता है?
हूती यमन का एक सशस्त्र राजनीतिक-धार्मिक आंदोलन है, जिसे अंसारल्लाह भी कहा जाता है। संगठन ईरान के साथ करीबी संबंध रखता है और यमन की राजधानी सना सहित देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण करता है। ईरान के साथ उसके संबंधों में राजनीतिक और क्षेत्रीय हित भी शामिल हैं।
UAE और Houthis के बीच कथित सहयोग Middle East की राजनीति को कैसे प्रभावित कर सकता है?
अगर आरोपों की पुष्टि होती है, तो इससे UAE और सऊदी अरब के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। इसका असर यमन के सैन्य संघर्ष, लाल सागर के समुद्री रास्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
क्या UAE ने Saudi Arabia के अंदर हमलों के लिए Houthis को Intelligence दी है?
उपलब्ध रिपोर्ट में कथित खुफिया मदद को यमन के भीतर सऊदी समर्थित बलों को निशाना बनाने से जोड़ा गया है। रिपोर्ट यह पुष्टि नहीं करती कि UAE ने सऊदी अरब के अंदर हमलों के लिए हूतियों को खुफिया जानकारी दी। UAE और हूतियों ने कथित सहयोग से इनकार किया है।
Yemen War में Saudi Arabia और UAE के हित अलग-अलग कैसे हो सकते हैं?
सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि UAE ने दक्षिणी यमन के कुछ अलग राजनीतिक और सैन्य गुटों के साथ संबंध बनाए हैं। इन गुटों के अलग-अलग लक्ष्य और क्षेत्रीय प्रभाव की प्रतिस्पर्धा दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़ा सकती है।