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US Myanmar Secret Talks : अमेरिका ने म्यांमार की सैन्य सरकार से की दूसरी गुप्त बैठक, क्या रेयर अर्थ है असली वजह?

अमेरिका ने म्यांमार की सैन्य समर्थित सरकार से टोक्यो में गुप्त बातचीत की। उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन ठगी केंद्रों पर कार्रवाई और एक कारोबारी की रिहाई है। म्यांमार के रेयर अर्थ मिनरल्स तक पहुंच भी अमेरिकी रणनीतिक हितों से जुड़ी है।

US Myanmar Secret Talks : अमेरिका ने म्यांमार की सैन्य सरकार से की दूसरी गुप्त बैठक, क्या रेयर अर्थ है असली वजह?

US Myanmar Secret Talks 2026: अमेरिका ने म्यांमार की सैन्य समर्थित सरकार के साथ टोक्यो में एक और दौर की गोपनीय बातचीत की है। रॉयटर्स की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने के भीतर दोनों पक्षों की यह दूसरी बैठक थी। अमेरिका का जोर अपने नागरिकों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन ठगी केंद्रों पर कार्रवाई कराने और एक अमेरिकी कारोबारी की रिहाई पर है। बातचीत में म्यांमार के रेयर अर्थ मिनरल्स तक पहुंच का मुद्दा भी आगे चलकर अहम हो सकता है। 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद सैन्य नेतृत्व से दूरी बनाने वाले अमेरिका का यह रुख उसकी म्यांमार नीति में बदलाव का संकेत देता है। हालांकि, टोक्यो में हुई बैठक के पूरे एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

एक महीने में दूसरी बैठक, 2021 के तख्तापलट के बाद बदला अमेरिकी रुख

रॉयटर्स के मुताबिक, सितंबर के मध्य में अमेरिकी अधिकारियों ने म्यांमार की राजधानी नेपीडॉ में सैन्य नेता से राष्ट्रपति बने मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की थी। उस बातचीत का प्रमुख उद्देश्य अमेरिकी कारोबारी की रिहाई सुनिश्चित करना और अमेरिकियों को ठगने वाले स्कैम सेंटरों पर कार्रवाई करना था। इसके बाद टोक्यो में हुई बैठक से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन सैन्य समर्थित सरकार के साथ संवाद जारी रखना चाहता है।टोक्यो की बैठक में अमेरिकी विदेश विभाग के इंटेलिजेंस एंड रिसर्च ब्यूरो के सहायक सचिव माइकल वेंस ने फिर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। एक सूत्र के अनुसार, बैठक में अमेरिका के एक दर्जन से अधिक अधिकारी शामिल थे। हालांकि, म्यांमार की ओर से कौन-कौन प्रतिनिधि मौजूद थे, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि म्यांमार पर नीति बनाने और उसे लागू करने की मुख्य जिम्मेदारी उसके ईस्ट एशियन एंड पैसिफिक अफेयर्स ब्यूरो की है। इंटेलिजेंस एंड रिसर्च ब्यूरो नीति निर्माताओं को जानकारी देता है, लेकिन नीति का नेतृत्व नहीं करता। विभाग ने संवेदनशील बातचीत के विवरण पर टिप्पणी करने से इनकार किया। जापान के विदेश मंत्रालय ने भी बैठक की मेजबानी से जुड़ी विशिष्ट राजनयिक बातचीत पर जानकारी नहीं दी।

म्यांमार  के सैन्य नेता से राष्ट्रपति बने मिन आंग ह्लाइंग (बाएँ) और  अमेरिकी विदेश विभाग के इंटेलिजेंस एंड रिसर्च ब्यूरो के सहायक सचिव माइकल वेंस  (दाएं)
म्यांमार के सैन्य नेता से राष्ट्रपति बने मिन आंग ह्लाइंग (बाएँ) और अमेरिकी विदेश विभाग के इंटेलिजेंस एंड रिसर्च ब्यूरो के सहायक सचिव माइकल वेंस (दाएं)

अमेरिकियों को ठगने वाले स्कैम सेंटर बंद कराना प्राथमिकता

अमेरिका की बातचीत के पीछे एक बड़ा कारण म्यांमार में चल रहे ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क हैं। इन केंद्रों के जरिए रोमांस स्कैम और दूसरी तरह की धोखाधड़ी की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन नेटवर्कों ने अमेरिकी नागरिकों से अरबों डॉलर ठगे हैं। अमेरिका चाहता है कि म्यांमार की सैन्य समर्थित सरकार ऐसे केंद्रों को बंद कराने में सहयोग करे।हालांकि, इस काम में बड़ी बाधाएं हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, कई ठगी केंद्र ऐसे इलाकों में चलते हैं, जहां सेना समर्थित मिलिशिया का नियंत्रण है। कुछ मामलों में ठगी से होने वाली कमाई सैन्य तंत्र तक पहुंचने के आरोप भी हैं। इससे सवाल उठता है कि सैन्य समर्थित सरकार इन नेटवर्कों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई करेगी।
म्यांमार की सरकार का कहना है कि वह स्कैम सेंटरों पर रोक लगाने के लिए बहुराष्ट्रीय प्रयासों में हिस्सा ले रही है। अमेरिका के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम है, क्योंकि सीमा पार होने वाली साइबर ठगी पर कार्रवाई उसके नागरिकों की सुरक्षा और आर्थिक हितों से सीधे जुड़ी है।

इलेक्ट्रिक कारों और विंड टर्बाइन में काम आते हैं म्यांमार के रेयर अर्थ मिनरल्स

अमेरिका की दिलचस्पी केवल साइबर ठगी तक सीमित नहीं है। म्यांमार में भारी रेयर अर्थ मिनरल्स के बड़े भंडार हैं, जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन और दूसरी आधुनिक तकनीकों में होता है। इन खनिजों तक पहुंच अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है।रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई चेन में चीन की मजबूत पकड़ है और म्यांमार इन खनिजों का एक अहम स्रोत है। ऐसे में अमेरिका की कोशिश दूसरे स्रोतों तक पहुंच बढ़ाने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को लेकर अपनी निर्भरता कम करने की हो सकती है।
लेकिन यहां भी चुनौतियां कम नहीं हैं। म्यांमार के कई प्रमुख खनिज भंडार उन इलाकों में हैं, जहां सैन्य सरकार से लड़ रहे जातीय सशस्त्र समूहों का नियंत्रण है। इसके अलावा, म्यांमार के रेयर अर्थ मिनरल्स का प्रमुख खरीदार चीन है। ऐसे में वहां अमेरिकी भूमिका बढ़ने पर चीन की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। लोवी इंस्टीट्यूट के दक्षिण-पूर्व एशिया निदेशक हंटर मार्स्टन के मुताबिक, म्यांमार के महत्वपूर्ण खनिज और रेयर अर्थ मिनरल्स अमेरिका के लिए वहां की सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्तियों में शामिल हो सकते हैं।

प्रतिबंधों के बावजूद सैन्य सरकार से बातचीत

म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद अमेरिका ने सैन्य नेतृत्व पर प्रतिबंध लगाए थे। मिन आंग ह्लाइंग पर भी मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं। इनमें निर्वाचित सरकार को हटाने, उसके बाद हुए जनविद्रोह को दबाने और 2016-17 में रोहिंग्या मुसलमानों की सामूहिक हत्याओं तथा जबरन विस्थापन में उनकी भूमिका से जुड़े आरोप शामिल हैं। अमेरिका ने रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा को नरसंहार घोषित किया था।संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, तख्तापलट के बाद शुरू हुए व्यापक गृहयुद्ध में म्यांमार की सेना के हवाई हमलों में हजारों लोग मारे गए हैं। ऐसे हालात में सैन्य समर्थित सरकार से बातचीत करना अमेरिका की पुरानी नीति से अलग कदम है।
हाल ही में अमेरिका ने म्यांमार के एक कारोबारी की बेटी पर लगे प्रतिबंध हटाए। उस कारोबारी पर देश की सेना का समर्थन करने के आरोप हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस फैसले को म्यांमार में अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए नई रणनीति का हिस्सा बताया। विभाग के मुताबिक, इस रणनीति में गृहयुद्ध से जुड़े सभी पक्षों के साथ बातचीत और अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने के पुराने तरीकों की दोबारा समीक्षा शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर जोर देने के साथ-साथ अमेरिकी हितों से जुड़े ठोस परिणाम हासिल करने पर भी ध्यान दे रहा है। हालांकि, बातचीत का मतलब यह नहीं है कि म्यांमार के सैन्य नेतृत्व पर लगे सभी प्रतिबंध खत्म हो गए हैं या अमेरिका ने उसके शासन को औपचारिक मान्यता दे दी है।

म्यांमार में चीन का प्रभाव कम करना भी रणनीति का हिस्सा

म्यांमार लंबे समय से चीन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। वहां खनिज संसाधनों और व्यापार के अलावा चीन का आर्थिक प्रभाव भी मजबूत है। अमेरिका यदि म्यांमार के रेयर अर्थ मिनरल्स तक पहुंच बढ़ाता है, तो इससे महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक सप्लाई चेन में चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश को मदद मिल सकती है। लेकिन गृहयुद्ध, खनिज क्षेत्रों पर अलग-अलग सशस्त्र समूहों का नियंत्रण और चीन की मौजूदा कारोबारी स्थिति इस रणनीति को मुश्किल बनाते हैं।इस बीच, जापान भी म्यांमार के साथ संपर्क बढ़ाने के संकेत दे रहा है। जापान के कार्यवाहक दूत ने सैन्य समर्थित सरकार के विदेश मंत्री से मुलाकात की थी। इससे पहले जापान की सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद हिरोमिची वातानाबे ने नेपीडॉ का दौरा किया था। उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग और विकास सहायता फिर शुरू करने के लिए माहौल तैयार करने की बात कही।
हालांकि, जापान ने म्यांमार की सैन्य सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है। जापान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कार्यवाहक दूत ने जापानी नागरिकों की सुरक्षा और जापानी कंपनियों को समर्थन देने जैसे मुद्दे उठाए थे। वातानाबे का दौरा उनकी व्यक्तिगत सांसद की हैसियत से था और इससे जापान सरकार की आधिकारिक नीति तय नहीं होती।
जापान ने 2021 के तख्तापलट की निंदा की थी, लेकिन अमेरिका और कुछ अन्य पश्चिमी देशों की तरह सैन्य नेतृत्व तथा सेना से जुड़ी संस्थाओं पर व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाए। जापान की व्यापार संवर्धन एजेंसी जेट्रो के अनुसार, म्यांमार में अब भी करीब 300 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जबकि 2020 में इनकी संख्या 400 से अधिक थी।
कुल मिलाकर, इस बातचीत में अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा, ऑनलाइन ठगी पर कार्रवाई और रेयर अर्थ मिनरल्स तक पहुंच जैसे मुद्दे अहम हैं। लेकिन म्यांमार में जारी गृहयुद्ध, मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप और चीन का प्रभाव इस नई कूटनीतिक पहल के सामने बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। टोक्यो बैठक में क्या ठोस सहमति बनी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

US ने Myanmar की Military-Backed Government के साथ Tokyo में Secret Talks क्यों कीं?

अमेरिका की बातचीत का प्रमुख उद्देश्य अमेरिकी कारोबारी की रिहाई सुनिश्चित करना और अमेरिकियों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन ठगी केंद्रों को बंद कराने में म्यांमार का सहयोग हासिल करना है। रेयर अर्थ मिनरल्स तक पहुंच का मुद्दा भी भविष्य की बातचीत में शामिल हो सकता है।

US और Myanmar के बीच बातचीत में American Businessman की रिहाई का मुद्दा क्यों अहम है?

म्यांमार में एक अमेरिकी कारोबारी की रिहाई सितंबर में हुई बातचीत के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल थी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में उसकी रिहाई को लेकर कोई अंतिम नतीजा घोषित नहीं किया गया है।

Myanmar के Scam Centres को बंद करने में US की क्या दिलचस्पी है?

इन केंद्रों से रोमांस स्कैम और दूसरी ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए अमेरिकी नागरिकों से अरबों डॉलर ठगे जाने की खबरें हैं। अमेरिका चाहता है कि म्यांमार की सरकार ऐसे नेटवर्कों को बंद कराने में मदद करे।

Myanmar के Rare Earth Minerals अमेरिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन और आधुनिक तकनीकों में होता है। अमेरिका इनकी आपूर्ति के नए स्रोतों तक पहुंच बढ़ाना चाहता है, ताकि चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सके।

2021 के Military Coup के बाद US-Myanmar Relations में क्या बदलाव आया है?

2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद अमेरिका ने म्यांमार के सैन्य नेतृत्व पर प्रतिबंध लगाए और उससे दूरी बनाई। अब अमेरिकी प्रशासन ठगी रोकने, नागरिकों की सुरक्षा और रणनीतिक खनिजों जैसे मुद्दों पर सैन्य समर्थित सरकार से बातचीत कर रहा है। इसके बावजूद मिन आंग ह्लाइंग पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं।

Myanmar की Military-Backed Government के साथ बातचीत पर US Sanctions का क्या असर पड़ सकता है?

बातचीत से कुछ व्यावहारिक मुद्दों पर सहयोग का रास्ता खुल सकता है, लेकिन इससे सभी प्रतिबंध अपने आप खत्म नहीं होते। अमेरिका ने हाल ही में म्यांमार के एक कारोबारी की बेटी पर लगे प्रतिबंध हटाए हैं, जबकि सैन्य नेतृत्व पर प्रतिबंध जारी हैं।

Myanmar में China के प्रभाव को लेकर US की क्या रणनीतिक चिंताएं हैं?

चीन म्यांमार के रेयर अर्थ मिनरल्स का प्रमुख खरीदार है और महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी बड़ी भूमिका है। अमेरिका म्यांमार के खनिज संसाधनों तक पहुंच बढ़ाकर आपूर्ति के विकल्प बढ़ाना चाहता है, लेकिन गृहयुद्ध और खनिज क्षेत्रों पर सशस्त्र समूहों के नियंत्रण से यह काम कठिन है।

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