DeepSeek AI Security Investigation : चीन के AI टूल DeepSeek पर दुनियाभर में सख्ती, आखिर डेटा सुरक्षा को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने 19 अक्टूबर 2026 को संघीय नागरिक एजेंसियों के IT सिस्टम से DeepSeek हटाने और इसके नए प्रोडक्ट खरीदने पर रोक लगाने का आदेश दिया। डेटा सुरक्षा और चीन में जानकारी स्टोर होने की चिंताओं के बीच ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों ने भी इस AI टूल पर प्रतिबंध या जांच जैसे कदम उठाए हैं।
DeepSeek AI Security Investigation : चीन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी डीपसीक की डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर कई देशों की सरकारें और नियामक सख्ती बढ़ा रहे हैं। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने संघीय नागरिक एजेंसियों के IT सिस्टम से डीपसीक के प्रोडक्ट हटाने और उनसे जुड़े नए प्रोडक्ट खरीदने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों में भी इस चीनी AI टूल के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ चुके हैं।डीपसीक जनवरी 2025 में तब चर्चा में आया था, जब कंपनी ने दावा किया कि उसने कम लागत में ऐसा AI मॉडल विकसित किया है, जो ChatGPT जैसे लोकप्रिय टूल्स को टक्कर दे सकता है। लेकिन इसकी लोकप्रियता के साथ ही यूजर्स के डेटा, संवेदनशील सरकारी जानकारी और चीन में डेटा स्टोरेज को लेकर चिंताएं भी बढ़ीं।
अमेरिका ने सरकारी IT सिस्टम से DeepSeek हटाने का आदेश दिया
अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने 19 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के तहत संघीय नागरिक एजेंसियों के IT सिस्टम से डीपसीक और उससे जुड़े प्रोडक्ट हटाने का निर्देश दिया। यह रोक उन थर्ड-पार्टी सेवाओं पर भी लागू होती है, जो डीपसीक के AI मॉडल का इस्तेमाल करती हैं। सरकारी एजेंसियों को ऐसे प्रोडक्ट और सेवाएं खरीदने से भी रोका गया है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन टूल्स से संवेदनशील जानकारी चीन तक पहुंचने, अमेरिकी संस्थानों के बारे में खुफिया जानकारी जुटाए जाने और AI मॉडल में संभावित साइबर सुरक्षा कमजोरियों का खतरा हो सकता है। हालांकि, ये सरकार की ओर से जताई गई आशंकाएं हैं; इन्हें इस बात का सार्वजनिक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए कि डीपसीक ने अमेरिकी सरकारी डेटा चुराया है। यह आदेश संघीय नागरिक एजेंसियों के सिस्टम पर केंद्रित है।इससे पहले अमेरिका का वाणिज्य विभाग, नौसेना और न्यूयॉर्क, टेनेसी तथा वर्जीनिया जैसे राज्य भी सरकारी डिवाइस पर डीपसीक के इस्तेमाल पर रोक लगा चुके हैं। अप्रैल 2026 में द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया था कि ट्रम्प प्रशासन डीपसीक की अमेरिकी तकनीक तक पहुंच सीमित करने और अमेरिकी नागरिकों के लिए इसकी सेवाओं पर रोक लगाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा था। अगस्त में सात रिपब्लिकन सीनेटरों ने भी चीनी ओपन-सोर्स AI मॉडल से जुड़े डेटा सुरक्षा जोखिमों की समीक्षा करने की मांग की थी।
DeepSeek की प्राइवेसी पॉलिसी में चीन में डेटा स्टोरेज का जिक्र
डीपसीक की अपनी प्राइवेसी पॉलिसी के मुताबिक, कंपनी यूजर्स से कई तरह की जानकारी जुटाती है। इसमें AI चैट में लिखे गए सवाल, अपलोड की गई फाइलें, अकाउंट से जुड़ी जानकारी और डिवाइस व नेटवर्क संबंधी डेटा शामिल हो सकते हैं। कंपनी की पॉलिसी यह भी कहती है कि यूजर्स की व्यक्तिगत जानकारी चीन में स्थित सर्वर पर स्टोर और प्रोसेस की जाती है।यही बात कई देशों के लिए चिंता का विषय है, खासकर तब जब कर्मचारी सरकारी दस्तावेज, कारोबारी गोपनीय जानकारी या संवेदनशील डेटा AI टूल में डालते हैं। ऐसे मामलों में डेटा कहां स्टोर होता है, किसे उस तक पहुंच मिल सकती है और कितने समय तक उसे रखा जाता है, ये अहम सवाल हैं।
हालांकि, किसी देश में सर्वर होने का मतलब अपने आप यह साबित नहीं करता कि उस देश की सरकार को हर यूजर का डेटा मिल रहा है। सुरक्षा जोखिम का आकलन कंपनी की नीतियों, कानूनी व्यवस्था, तकनीकी सुरक्षा और डेटा तक वास्तविक पहुंच जैसे पहलुओं के आधार पर किया जाता है।
ऑस्ट्रेलिया से भारत तक, कई देशों ने उठाए कदम
डीपसीक को लेकर अलग-अलग देशों ने अपनी सुरक्षा और डेटा संरक्षण नीतियों के आधार पर कदम उठाए हैं। कहीं सरकारी डिवाइस पर इसका इस्तेमाल रोका गया, तो कहीं प्राइवेसी जांच शुरू की गई।
- ऑस्ट्रेलिया: फरवरी 2025 में ऑस्ट्रेलिया ने सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए सभी सरकारी डिवाइस पर डीपसीक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था।
- चेक गणराज्य: जुलाई 2025 में चेक सरकार ने डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण सार्वजनिक प्रशासन में डीपसीक की सेवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगा दी।
- फ्रांस: जनवरी 2025 में फ्रांस की डेटा संरक्षण नियामक संस्था ने डीपसीक से उसके AI सिस्टम की कार्यप्रणाली और यूजर्स की प्राइवेसी पर संभावित प्रभावों को समझने के लिए सवाल करने की बात कही थी।
- जर्मनी: जून 2025 में जर्मनी के एक डेटा संरक्षण अधिकारी ने बताया कि डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते एप्पल और गूगल से अपने ऐप स्टोर से डीपसीक हटाने को कहा गया था।
- भारत: फरवरी 2025 की शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने कर्मचारियों को चैटजीपीटी और डीपसीक सहित AI टूल्स का आधिकारिक काम के लिए इस्तेमाल न करने की सलाह दी थी। मंत्रालय की चिंता सरकारी दस्तावेजों और डेटा की गोपनीयता को लेकर थी।
- इटली: इटली ने शुरुआत में व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल को लेकर पर्याप्त जानकारी न मिलने के कारण डीपसीक ऐप को ब्लॉक किया था। बाद में वहां की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था AGCM ने गलत जानकारी देने के संभावित जोखिमों से जुड़ी जांच को बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं स्वीकार किए जाने के बाद बंद कर दिया।
- नीदरलैंड: जनवरी 2025 में डच डेटा संरक्षण नियामक ने डीपसीक की डेटा जुटाने की प्रक्रिया की जांच शुरू करने की बात कही और यूजर्स को सावधानी बरतने की सलाह दी। जुलाई 2025 के अंत में सरकार ने साइबर सुरक्षा नीति का हवाला देते हुए सरकारी कर्मचारियों के लिए ऐप के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी।
- दक्षिण कोरिया: फरवरी 2025 में व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियमों के पालन से जुड़ी चिंताओं के बाद वहां ऐप के नए डाउनलोड अस्थायी रूप से रोक दिए गए थे। इससे पहले उद्योग मंत्री ने भी कर्मचारियों की डीपसीक तक पहुंच अस्थायी रूप से बंद की थी। अप्रैल 2025 के अंत में सेवा फिर उपलब्ध हो गई।
- ताइवान: फरवरी 2025 में ताइवान ने सरकारी विभागों में डीपसीक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया था। वहां डेटा चीन पहुंचने और AI टूल में संभावित सेंसरशिप को लेकर चिंता जताई गई थी।
- रूस: रूस ने अन्य देशों की तरह डीपसीक पर प्रतिबंध लगाने के बजाय चीनी शोधकर्ताओं के साथ AI परियोजनाओं में सहयोग की दिशा अपनाई। फरवरी 2025 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सरकारी बैंक स्बेरबैंक को चीनी शोधकर्ताओं के साथ संयुक्त AI परियोजनाओं पर काम करने का निर्देश दिया था।
इन फैसलों से स्पष्ट है कि डीपसीक को लेकर दुनिया का रुख एक जैसा नहीं है। कुछ देश डेटा सुरक्षा के कारण प्रतिबंध लगा रहे हैं, जबकि कुछ चीन के साथ AI तकनीक में सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

DeepSeek पर कार्रवाई से अमेरिका-चीन के AI मुकाबले को भी हवा
डीपसीक को लेकर विवाद सिर्फ व्यक्तिगत डेटा तक सीमित नहीं है। अमेरिका और चीन के बीच AI मॉडल, एडवांस्ड चिप्स और तकनीकी क्षमता को लेकर प्रतिस्पर्धा भी तेज है। डीपसीक के कम लागत वाले AI मॉडल ने अमेरिकी टेक कंपनियों के कारोबार और AI में निवेश को लेकर बहस छेड़ी थी। अब सुरक्षा प्रतिबंधों ने इस प्रतिस्पर्धा को एक नया आयाम दिया है।अमेरिकी सरकार का कहना है कि संवेदनशील सरकारी सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। दूसरी ओर, चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने 20 अक्टूबर 2026 को कहा कि डीपसीक पर रोक चीन और अमेरिका के नेताओं के बीच बनी सहमति के खिलाफ है और वॉशिंगटन को इन प्रतिबंधात्मक कदमों को वापस लेना चाहिए।
आम यूजर्स के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है। किसी भी AI टूल में निजी दस्तावेज, पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी या कंपनी का गोपनीय डेटा डालने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी समझना जरूरी है। यह सावधानी सिर्फ डीपसीक नहीं, बल्कि सभी AI सेवाओं पर लागू होती है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Governments और Regulators, DeepSeek AI की जांच क्यों बढ़ा रहे हैं?
कई देशों को आशंका है कि डीपसीक के इस्तेमाल से व्यक्तिगत जानकारी और संवेदनशील सरकारी डेटा की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसकी डेटा स्टोरेज नीति, साइबर सुरक्षा और यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर जांच और प्रतिबंध लगाए गए हैं।
DeepSeek पर User Data Privacy को लेकर क्या चिंताएं हैं?
डीपसीक की प्राइवेसी पॉलिसी के मुताबिक, कंपनी यूजर्स के सवाल, अपलोड की गई फाइलें, अकाउंट और डिवाइस संबंधी जानकारी जुटा सकती है। कंपनी बताती है कि व्यक्तिगत डेटा चीन में स्टोर और प्रोसेस किया जाता है, जिसे लेकर कई देशों ने चिंता जताई है।
US Government ने सरकारी सिस्टम से DeepSeek हटाने का निर्देश क्यों दिया?
अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने संवेदनशील डेटा चीन पहुंचने, सरकारी संस्थानों के बारे में खुफिया जानकारी जुटाए जाने और संभावित साइबर सुरक्षा कमजोरियों के खतरे का हवाला दिया है। यह आदेश संघीय नागरिक एजेंसियों के IT सिस्टम पर लागू है।
DeepSeek के China में Data Storage को लेकर क्या सुरक्षा संबंधी सवाल उठे हैं?
मुख्य चिंता यह है कि यूजर्स की जानकारी चीन में स्टोर होने पर उस डेटा तक किसकी पहुंच हो सकती है और उसे किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, चीन में डेटा स्टोर होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि वहां की सरकार को हर यूजर की जानकारी मिल रही है।
क्या DeepSeek का इस्तेमाल करने से Personal Data को खतरा हो सकता है?
संवेदनशील जानकारी AI टूल में डालने पर डेटा गोपनीयता का जोखिम हो सकता है। इसलिए यूजर्स को निजी दस्तावेज, पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी और गोपनीय कारोबारी डेटा साझा करने से बचना चाहिए। वास्तविक जोखिम सेवा की नीतियों, सुरक्षा व्यवस्था और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करता है।
DeepSeek और ChatGPT की Privacy Policies में क्या अंतर है?
दोनों सेवाओं की डेटा संग्रह, स्टोरेज, इस्तेमाल और नियंत्रण से जुड़ी नीतियां अलग हो सकती हैं। डीपसीक की पॉलिसी में चीन में डेटा स्टोरेज का स्पष्ट उल्लेख है। सही तुलना के लिए दोनों सेवाओं की मौजूदा प्राइवेसी पॉलिसी, डेटा रखने की अवधि और यूजर के नियंत्रण संबंधी प्रावधानों को देखना जरूरी है।
DeepSeek पर लगे प्रतिबंधों का Global AI Industry पर क्या असर पड़ सकता है?
इन प्रतिबंधों से AI कंपनियों पर डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, देशों के बीच AI तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा और सख्त नियमों का दायरा बढ़ने की संभावना है। इससे सरकारी संस्थानों और कारोबारों के लिए AI टूल चुनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।