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बिजली संकट से निपटने के लिए ₹14,500 करोड़ का मेगा प्लान! 92 GWh ऊर्जा स्टोर करेगी सरकार, जानिए कैसे बदलेगा पूरा सिस्टम

केंद्रीय कैबिनेट ने 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए ₹14,500 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। इसका मकसद सौर और पवन ऊर्जा को स्टोर कर जरूरत के समय देश को भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है।

बिजली संकट से निपटने के लिए ₹14,500 करोड़ का मेगा प्लान! 92 GWh ऊर्जा स्टोर करेगी सरकार, जानिए कैसे बदलेगा पूरा सिस्टम

भारत में बिजली की बढ़ती मांग और नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ते जोर के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ₹14,500 Crore Energy Storage Scheme को मंजूरी दी है। इसके तहत देशभर में 92 GWh की नई ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलने वाली इस योजना का उद्देश्य बिजली को जरूरत के समय इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रखना, ग्रिड को मजबूत करना और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाना है।

₹14,500 करोड़ की Energy Storage Scheme क्या है?

Energy storage capacity will be allocated through a tariff-based competitive bidding process.
Energy storage capacity will be allocated through a tariff-based competitive bidding process.

इस योजना के तहत सरकार Viability Gap Funding (VGF) यानी परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता देगी। इसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल ₹14,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सरकारी बयान के मुताबिक, इस योजना से 92 GWh की नई ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी। यह देश की मौजूदा ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता के मुकाबले करीब 170 प्रतिशत अतिरिक्त क्षमता के बराबर होगी। भारत को 2031-32 तक कुल 411 GWh ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता की जरूरत का अनुमान है। ऐसे में यह योजना उस लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

92 GWh ऊर्जा कैसे स्टोर होगी? समझिए पूरा गणित

योजना के तहत तीन तरह की ऊर्जा भंडारण तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा:

60 GWh पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज: पानी को ऊंचाई पर बने जलाशय में पंप करके ऊर्जा स्टोर की जाएगी। जरूरत पड़ने पर पानी नीचे छोड़कर टरबाइन से बिजली बनाई जाएगी।

30 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS): बड़ी बैटरियों में बिजली स्टोर होगी और मांग बढ़ने या उत्पादन घटने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

2 GWh वैकल्पिक तकनीक: अन्य ऊर्जा भंडारण तकनीकों के जरिए क्षमता विकसित की जाएगी।

इन परियोजनाओं पर कुल अनुमानित निवेश ₹97,600 करोड़ होगा। सरकार की VGF सहायता से परियोजनाओं की लागत और वित्तीय जोखिम का दबाव कम करने में मदद मिलेगी, जिससे निवेश आकर्षित करना आसान हो सकता है।

Battery Energy Storage System India: घरेलू कंपनियों को भी मिलेगा बढ़ावा

इस योजना का एक अहम उद्देश्य भारत में बैटरी निर्माण के घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता घटाना है। इसके लिए बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं में कम से कम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री (Domestic Content Requirement) अनिवार्य होगी। यानी इन परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले निर्धारित घटकों का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा देश में निर्मित होना चाहिए। परियोजनाओं के लिए ऊर्जा भंडारण क्षमता का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया से होगा। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां बैटरी और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाओं के लिए VGF सहायता प्राप्त कर सकेंगी। वहीं, वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों वाली परियोजनाएं सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की संस्थाएं विकसित कर सकेंगी।

सौर और पवन ऊर्जा को मिलेगा फायदा, बिजली आपूर्ति होगी मजबूत

सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और समय पर निर्भर करता है। दिन में सौर ऊर्जा अधिक बन सकती है, लेकिन रात में इसका उत्पादन नहीं होता। इसी तरह हवा की उपलब्धता के अनुसार पवन ऊर्जा का उत्पादन घटता-बढ़ता रहता है। ऊर्जा भंडारण प्रणाली इस समस्या का समाधान करने में मदद करती है। जब बिजली का उत्पादन मांग से अधिक होगा, तब अतिरिक्त बिजली स्टोर की जा सकेगी। मांग बढ़ने या नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन घटने पर इसी बिजली को ग्रिड में वापस भेजा जा सकेगा। इससे ग्रिड की स्थिरता बेहतर करने, नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक इस्तेमाल करने और चौबीसों घंटे भरोसेमंद बिजली आपूर्ति में मदद मिलेगी। साथ ही, बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने के लिए पारंपरिक बिजली उत्पादन पर निर्भरता घट सकती है।

निष्कर्ष

India Grid Scale Energy Storage 2026 के तहत मंजूर ₹14,500 करोड़ की योजना भारत के बिजली क्षेत्र को अधिक लचीला और मजबूत बनाने की दिशा में अहम पहल है। 92 GWh नई भंडारण क्षमता, घरेलू बैटरी निर्माण और पंप्ड हाइड्रो परियोजनाओं से नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा। हालांकि, योजना का वास्तविक असर परियोजनाओं के समय पर निर्माण, निवेश और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

₹14,500 करोड़ की Energy Storage Scheme क्या है?

यह केंद्र सरकार की VGF योजना है, जिसके तहत 2026-27 से 2030-31 तक ₹14,500 करोड़ की वित्तीय सहायता देकर देश में 92 GWh नई ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने में मदद की जाएगी।

भारत में 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य क्या है?

इसका उद्देश्य अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके जरूरत के समय उपलब्ध कराना, सौर और पवन ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल करना तथा 2031-32 तक अनुमानित 411 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना है।

Battery Energy Storage System (BESS) क्या होता है?

BESS एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें बड़ी बैटरियों के जरिए बिजली स्टोर की जाती है। जरूरत पड़ने पर यह बिजली वापस ग्रिड में भेजी जा सकती है। योजना में इसके लिए 30 GWh क्षमता विकसित करने का प्रस्ताव है।

इस योजना में बैटरी और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को कितना समर्थन मिलेगा?

योजना के तहत 60 GWh पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज, 30 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज और 2 GWh वैकल्पिक तकनीकों की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। कुल ₹14,500 करोड़ की VGF सहायता दी जाएगी।

ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ने से भारत को क्या लाभ होगा?

इससे नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल, ग्रिड की स्थिरता और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, घरेलू बैटरी निर्माण को बढ़ावा और आयात पर निर्भरता कम करने का अवसर मिलेगा।

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