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क्या अब अमेरिका की मिसाइल सुरक्षा का डिजिटल कवच बनेगा Google?

Google अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के 185 अरब डॉलर के Golden Dome मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम से जुड़ने के लिए बातचीत कर रहा है। कंपनी डेटा स्टोरेज, नेटवर्किंग और साइबर सुरक्षा में भूमिका निभा सकती है, लेकिन अभी किसी साझेदारी पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

क्या अब अमेरिका की मिसाइल सुरक्षा का डिजिटल कवच बनेगा Google?

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Google अब अमेरिका की महत्वाकांक्षी मिसाइल रक्षा योजना का हिस्सा बन सकता है। Google Golden Dome defence programme को लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी Pentagon के साथ शुरुआती बातचीत कर रहा है। इस संभावित साझेदारी के तहत Google डेटा स्टोरेज, नेटवर्किंग और साइबर सुरक्षा से जुड़ा तकनीकी ढांचा उपलब्ध करा सकता है। Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय करीब 185 अरब डॉलर के Golden Dome प्रोग्राम के लिए एक विशेष इंडस्ट्री कंसोर्टियम तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य उस डेटा और संचार व्यवस्था को सुरक्षित रखना है, जिस पर इस बड़े सैन्य सिस्टम का संचालन निर्भर करेगा। हालांकि, बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और कंसोर्टियम में शामिल होने वाली कंपनियों को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

क्या है Golden Dome और क्यों इतना अहम है यह प्रोजेक्ट?

Golden Dome अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना है। इसका उद्देश्य जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक फैली बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा व्यवस्था तैयार करना है, ताकि अमेरिका को विदेशी हमलों से सुरक्षा मिल सके।इस सिस्टम में अलग-अलग रक्षा तकनीकों, रडार नेटवर्क, हथियार प्रणालियों और सैन्य संचार व्यवस्था को एक-दूसरे से जोड़ने की योजना है। इसके लिए एक मजबूत Command-and-Control सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जो अलग-अलग सैन्य संसाधनों के बीच तालमेल बनाए रखने में मदद करेगा। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इस कार्यक्रम की लागत अगले दशक में करीब 185 अरब डॉलर आंकी है। इतने बड़े प्रोजेक्ट में केवल हथियार और मिसाइल इंटरसेप्टर ही नहीं, बल्कि सुरक्षित डेटा और भरोसेमंद संचार नेटवर्क भी बेहद अहम होंगे।

Pentagon Google Defence Talks: क्या जिम्मेदारी संभाल सकता है Google?

Google और Pentagon के बीच बातचीत का मुख्य फोकस डेटा सुरक्षा और संचार नेटवर्क पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, Google की तकनीक उस डेटा व्यवस्था को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है, जो Golden Dome के सैन्य Command-and-Control सॉफ्टवेयर तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाएगी। इसमें तीन प्रमुख क्षेत्र शामिल हो सकते हैं:

Data Storage: सैन्य सिस्टम से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा को सुरक्षित तरीके से स्टोर करना।

Networking: अलग-अलग रक्षा प्रणालियों के बीच तेज और भरोसेमंद संचार बनाए रखना।

Cybersecurity: साइबर हमलों और संचार नेटवर्क को बाधित करने की कोशिशों से सुरक्षा देना।

इसका महत्व तब और बढ़ जाता है, जब किसी दुश्मन देश की ओर से लैंडलाइन, मोबाइल टावर या दूसरे संचार नेटवर्क को निशाना बनाया जाए। ऐसी स्थिति में भी सैन्य सिस्टम के बीच संपर्क बनाए रखना जरूरी होगा। हालांकि, Google को इन जिम्मेदारियों के लिए औपचारिक रूप से चुना नहीं गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अभी शुरुआती प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है और कंसोर्टियम की संरचना या कंपनियों की सूची पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

Palantir, Anduril और SpaceX समेत कई कंपनियां भी दौड़ में

Golden Dome प्रोजेक्ट किसी एक टेक कंपनी के भरोसे तैयार नहीं किया जा रहा है। इसमें कई बड़ी रक्षा और तकनीकी कंपनियों की भूमिका सामने आ रही है। Palantir और Anduril सैन्य सॉफ्टवेयर से जुड़े काम में शामिल हैं, जबकि SpaceX भी इस व्यापक रक्षा पहल का हिस्सा है। इसके अलावा Scale AI, Swoop Technologies और Alphabet से अलग हुई नेटवर्किंग कंपनी Aalyria Technologies का नाम भी कंसोर्टियम से जुड़ी रिपोर्टों में सामने आया है। इस मॉडल से संकेत मिलता है कि Pentagon इतने बड़े रक्षा प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग कंपनियों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करना चाहता है। यानी किसी एक पारंपरिक रक्षा ठेकेदार के बजाय कई कंपनियां मिलकर अलग-अलग तकनीकी जिम्मेदारियां संभाल सकती हैं।

Google Cloud के पास पहले से हैं अमेरिकी रक्षा क्षेत्र के सुरक्षा प्रमाणन

Google की संभावित भूमिका को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि कंपनी के पास पहले से अमेरिकी रक्षा विभाग के कुछ महत्वपूर्ण Cloud Security Authorisations मौजूद हैं। Google Cloud के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, उसे Defense Information Systems Agency (DISA) से DoD Impact Level 2, 4 और 5 के लिए Provisional Authorisation मिल चुका है। वहीं, Google Distributed Cloud के Air-Gapped विकल्प को Impact Level 6 के लिए भी मंजूरी प्राप्त है, जो SECRET स्तर तक की वर्गीकृत जानकारी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि Golden Dome के पूरे Command-and-Control सिस्टम को Google तुरंत संभाल सकता है। किसी विशेष सैन्य मिशन में तकनीक के इस्तेमाल के लिए संबंधित सेवाओं, सुरक्षा मानकों, सिस्टम इंटीग्रेशन और अलग-अलग अनुमतियों की जरूरत हो सकती है। इसलिए असली सवाल यह होगा कि Google को किस स्तर की जिम्मेदारी मिलती है और क्या उसे इस प्रोजेक्ट के लिए अतिरिक्त तकनीकी ढांचा तैयार करना पड़ेगा?

Google की रक्षा क्षेत्र में बढ़ती भूमिका क्या संकेत देती है?

Google का यह संभावित कदम अमेरिकी रक्षा क्षेत्र में बड़ी टेक कंपनियों की बढ़ती भूमिका को दिखाता है। कंपनी का सैन्य क्षेत्र से जुड़ाव नया नहीं है। 2018 में Project Maven को लेकर Google के कर्मचारियों ने विरोध किया था, जिसके बाद कंपनी ने उस AI प्रोग्राम के अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाया। हालांकि, इसके बाद Google ने सरकारी और रक्षा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। अप्रैल 2026 में कंपनी ने Pentagon के साथ ऐसा समझौता भी किया था, जिसके तहत उसके AI मॉडल का इस्तेमाल वर्गीकृत सैन्य कार्यों में किया जा सकता है।

निष्कर्ष

Google की संभावित भागीदारी सिर्फ एक सरकारी कॉन्ट्रैक्ट नहीं, बल्कि अमेरिकी रक्षा तकनीक में Big Tech की बढ़ती ताकत का संकेत है। हालांकि, Google Golden Dome defence programme में आधिकारिक तौर पर शामिल होगा या नहीं, यह कंसोर्टियम की अंतिम संरचना और Pentagon के फैसले पर निर्भर करेगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

ट्रंप का Golden Dome रक्षा कार्यक्रम क्या है?

Golden Dome अमेरिका की प्रस्तावित बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा परियोजना है। इसका उद्देश्य जमीन और अंतरिक्ष आधारित रक्षा प्रणालियों के जरिए अमेरिका को विदेशी मिसाइल हमलों से सुरक्षित करना है।

Google और Pentagon के बीच किस मुद्दे पर बातचीत हो रही है?

दोनों के बीच डेटा स्टोरेज, नेटवर्किंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े तकनीकी सहयोग पर शुरुआती बातचीत हो रही है।

Golden Dome कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य रडार, हथियार प्रणालियों और दूसरी रक्षा तकनीकों को एकीकृत करके अमेरिका के लिए मजबूत मिसाइल सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है।

इस रक्षा कार्यक्रम में टेक्नोलॉजी कंपनियों की क्या भूमिका हो सकती है?

टेक कंपनियां डेटा सुरक्षा, AI, नेटवर्किंग, साइबर सुरक्षा और सैन्य Command-and-Control सॉफ्टवेयर तैयार करने में मदद कर सकती हैं।

Google की संभावित भागीदारी अमेरिका की रक्षा रणनीति को कैसे प्रभावित कर सकती है?

इससे अमेरिकी रक्षा व्यवस्था में सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क और क्लाउड तकनीक की भूमिका बढ़ सकती है। साथ ही, रक्षा क्षेत्र में बड़ी टेक कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी तेज हो सकती है।

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