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Jaishankar G20 Diplomacy Statement : युद्ध नहीं बातचीत से निकलेगा विवादों का हल, G20 में जयशंकर ने क्यों कही ये बात?

G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में एस. जयशंकर ने कहा कि दुनिया के विवादों का हल सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से निकाला जाना चाहिए। उन्होंने व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर हमले रोकने, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और UNCLOS के पालन पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा कि समुद्री असुरक्षा से ईंधन, खाद्य सामग्री और खाद की सप्लाई प्रभावित होती है, जिसका सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ता है।

Jaishankar G20 Diplomacy Statement : युद्ध नहीं बातचीत से निकलेगा विवादों का हल, G20 में जयशंकर ने क्यों कही ये बात?

Jaishankar G20 Diplomacy Statement : भारत ने एक बार फिर दुनिया के देशों से अपील की है कि वे युद्ध और सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत से विवाद सुलझाने की कोशिश करें। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के अटलांटा में हुई G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में कहा कि दुनिया के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों का हल सैन्य ताकत से नहीं निकलेगा। इसके लिए कूटनीति यानी बातचीत और आपसी सहमति को मौका देना जरूरी है। उन्होंने समुद्र में व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों को रोकने, समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की भी बात कही।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में हुई इस बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के सामने सैन्य समाधान काम नहीं करेंगे और कूटनीति को मौका मिलना चाहिए।

जहाजों पर हमलों से ईंधन, खाना और खाद की सप्लाई पर असर

जयशंकर ने बैठक में समुद्र में चलने वाले व्यापारिक जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि समुद्री रास्तों से सामान की आवाजाही सुरक्षित रहनी चाहिए और जहाजों पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत रोके जाने चाहिए। खास तौर पर उन्होंने समुद्र से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के कानून UNCLOS का पालन करने पर जोर दिया।

भारत का कहना है कि जहाजों पर हमलों का असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित नहीं रहता। इससे ईंधन, खाने-पीने की चीजों और खाद की सप्लाई प्रभावित होती है। जब जहाजों की आवाजाही में रुकावट आती है, तो सामान की उपलब्धता कम हो सकती है और उसकी कीमतें भी बढ़ सकती हैं।जयशंकर ने कहा कि इन हमलों का सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों यानी Global South पर पड़ रहा है। इन देशों को ईंधन, खाद्य सामग्री और खाद की कमी के साथ बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम एशिया में फरवरी 2026 में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 22 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। इनमें 14 नाविक शामिल हैं। यह आंकड़ा बताता है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है।

सप्लाई चेन और बाजार में रुकावटों पर भी उठाए सवाल

जयशंकर ने दुनिया के देशों के बीच व्यापार और उद्योग से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि कई देशों के औद्योगिक विकास के रास्ते में रुकावटें पैदा की जा रही हैं। बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान भेजकर, सप्लाई चेन को हथियार की तरह इस्तेमाल करके, दूसरे देशों के लिए बाजार तक पहुंच मुश्किल बनाकर और व्यापार में गलत तरीके अपनाकर उनके विकास को प्रभावित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां बंद होनी चाहिए। साथ ही दुनिया को ऐसे व्यापारिक रास्ते और सप्लाई चेन तैयार करनी चाहिए, जो किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भर न हों। इससे युद्ध, तनाव या किसी दूसरी बड़ी समस्या के समय जरूरी सामान की सप्लाई पूरी तरह नहीं रुकेगी।
जयशंकर ने आतंकवाद के खतरे को भी नजरअंदाज नहीं करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक या रणनीतिक फायदे के लिए आतंकवाद के खतरे को अनदेखा करना सही नहीं है। यह बहुत जोखिम भरा कदम है और इसका नुकसान उन लोगों को भी उठाना पड़ सकता है, जो इसका इस्तेमाल करते हैं।

रुबियो बोले- दुनिया एक अहम मोड़ पर खड़ी है

बैठक की शुरुआत करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि दुनिया इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ी है। उनके मुताबिक, दुनिया कई आर्थिक और राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है। इन संकटों से ऊर्जा और खाद्य बाजार, सप्लाई चेन, व्यापार और समुद्री रास्तों की आजादी पर असर पड़ रहा है।

रुबियो ने कहा कि G20 देशों को मिलकर इन चुनौतियों का सामना करना चाहिए। देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, बाजारों की सुरक्षा करने और व्यापार से जुड़े जोखिम कम करने के लिए साथ काम करना होगा।बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी शामिल हुए। वह मेक्सिको और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के बीच बैठे थे। G20 देशों के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संघर्ष और दूसरे वैश्विक मुद्दों पर मतभेद भी बैठक के अहम पहलुओं में शामिल रहे।
रुबियो ने बैठक के बाद X पर कहा कि समुद्री सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा का सीधा संबंध आर्थिक सुरक्षा से है। उन्होंने बताया कि अमेरिका अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर समुद्री रास्तों की सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और राजनीतिक संकटों से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने पर काम कर रहा है।

अटलांटा के बाद QUAD और कॉमनवेल्थ की बैठकों में शामिल होंगे जयशंकर

G20 विदेश मंत्रियों की बैठक 30 और 31 अक्टूबर को अमेरिका के अटलांटा में आयोजित की गई। इसकी मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की। अमेरिका इस साल 14 और 15 दिसंबर को मियामी में G20 देशों के नेताओं की बैठक भी आयोजित करेगा। इसकी मेजबानी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।जयशंकर अटलांटा में QUAD देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शामिल होंगे। इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे। इस साल होने वाली यह दूसरी QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक है। इसके बाद अगले महीने फिलीपींस में QUAD देशों के नेताओं की बैठक होने की संभावना है।
अटलांटा का दौरा पूरा करने के बाद जयशंकर एंटीगुआ और बारबुडा जाएंगे। वहां 1 से 4 नवंबर तक कॉमनवेल्थ देशों के प्रमुखों की बैठक आयोजित होगी। इसमें भारत की ओर से वह प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

FAQ (Frequently Asked Questions):

G20 बैठक में S Jaishankar ने Military Solutions को लेकर क्या कहा?

एस. जयशंकर ने कहा कि दुनिया के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों और विवादों का हल सैन्य कार्रवाई से नहीं निकलेगा। देशों को युद्ध के बजाय बातचीत और कूटनीति को मौका देना चाहिए।

Jaishankar ने Russia-Ukraine War और West Asia Conflict के संदर्भ में Diplomacy की जरूरत क्यों बताई?

रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से दुनिया के कई देशों पर असर पड़ रहा है। ऐसे हालात में सैन्य कार्रवाई से तनाव और बढ़ सकता है। इसलिए जयशंकर ने विवादों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने पर जोर दिया।

G20 Foreign Ministers Meeting 2026 कहां आयोजित हुई?

G20 विदेश मंत्रियों की बैठक 30 और 31 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के अटलांटा शहर में आयोजित हुई। इसकी मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की।

Jaishankar ने Freedom of Navigation और Civilian Ships पर हमलों का मुद्दा क्यों उठाया?

व्यापारिक जहाजों पर हमलों से समुद्री रास्तों से सामान की आवाजाही प्रभावित होती है। इसका असर ईंधन, खाने-पीने की चीजों और खाद की सप्लाई पर पड़ता है। इसलिए जयशंकर ने समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने और जहाजों पर हमले रोकने की बात कही।

UNCLOS क्या है और समुद्री रास्तों की सुरक्षा में इसकी क्या भूमिका है?

UNCLOS का पूरा नाम United Nations Convention on the Law of the Sea है। यह समुद्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों का समझौता है। इसे 1982 में अपनाया गया था और 1994 में यह लागू हुआ। इसमें समुद्री सीमाओं, समुद्र के इस्तेमाल, जहाजों की आवाजाही और समुद्री संसाधनों से जुड़े नियम शामिल हैं।

West Asia Conflict का Global South देशों पर क्या असर पड़ रहा है?

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इससे ईंधन, खाद्य सामग्री और खाद की सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ रहा है। जयशंकर के मुताबिक, इसका बोझ विकासशील देशों यानी Global South को ज्यादा उठाना पड़ रहा है।

G20 बैठक में भारत ने Maritime Security को लेकर क्या रुख रखा?

भारत ने कहा कि समुद्री रास्तों से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जरूरी है। जहाजों और नाविकों पर हमले बंद होने चाहिए और सभी देशों को समुद्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानून UNCLOS का पालन करना चाहिए।

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