Europe Heatwave Deaths : 2026 की गर्मी में यूरोप में 50 हजार मौतें, ग्लोबल वॉर्मिंग ने कैसे बढ़ाया खतरा?
2026 की गर्मियों में यूरोप के 30 देशों के 854 शहरों में गर्मी से जुड़ी अनुमानित 50,391 मौतें हुईं। वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक, इनमें से 32,619 मौतों के पीछे इंसानों के कारण हुआ जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार था। कुल मौतों का यह आंकड़ा 2022 के मुकाबले करीब 71% अधिक रहा।
Europe Heatwave Deaths 2026 : यूरोप में 2026 की गर्मियों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का असर जानलेवा साबित हुआ। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक, जून से अगस्त के बीच 30 यूरोपीय देशों के 854 शहरों में गर्मी से जुड़ी अनुमानित 50,391 मौतें हुईं। इनमें से 32,619 मौतों के लिए इंसानों के कारण हुए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार माना गया है। यानी अध्ययन के अनुसार, गर्मी से हुई करीब 65% मौतों के पीछे ग्लोबल वॉर्मिंग की भूमिका रही। यह आंकड़ा 2022 की गर्मियों के अनुमानित 29,480 मौतों से करीब 71% ज्यादा है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह संख्या वास्तविक नुकसान से कम हो सकती है, क्योंकि अध्ययन में मई की जानलेवा गर्मी और यूरोप के सभी इलाकों को शामिल नहीं किया गया।
2022 का रिकॉर्ड टूटा, जून-जुलाई की गर्मी सबसे जानलेवा रही
यह अध्ययन इम्पीरियल कॉलेज लंदन और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने किया। इसमें यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ ब्रिटेन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के 854 शहरी इलाकों का विश्लेषण किया गया। ये इलाके संबंधित देशों की करीब 40% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।शोध के मुताबिक, 17 जून से 1 जुलाई के बीच चली भीषण गर्मी की लहर के दौरान कुल अनुमानित मौतों में से करीब एक-तिहाई मौतें हुईं। इस अवधि में औसत तापमान सामान्य से लगभग 5.3 डिग्री सेल्सियस अधिक था। पश्चिमी यूरोप में पूरी गर्मियों का औसत तापमान 1991-2020 के औसत से करीब 2.9 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। कुछ इलाकों में तापमान सामान्य से 12 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर पहुंच गया था।
इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में गर्मी से सबसे ज्यादा मौतें होने का अनुमान है। दक्षिणी और पश्चिमी यूरोप के साथ उत्तरी यूरोप के उन हिस्सों में भी इसका गंभीर असर दिखा, जहां आमतौर पर गर्मियां अपेक्षाकृत ठंडी रहती हैं। ब्रिटेन के 135 शहरी इलाकों में ही करीब 4,500 गर्मी से जुड़ी मौतों का अनुमान लगाया गया।

बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित, युवाओं की भी गई जान
अध्ययन में उम्र के हिसाब से मौतों का विश्लेषण भी किया गया। अनुमान के मुताबिक, गर्मी से जान गंवाने वालों में आधे से ज्यादा लोग 85 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे। हालांकि, इसका असर केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। 20 से 44 साल की उम्र के 800 से ज्यादा लोगों की मौत भी गर्मी से जुड़ी बताई गई है। कुल आंकड़ों में 65 वर्ष से कम उम्र के लोगों की मौतें भी हजारों में होने का अनुमान है।

तेज गर्मी शरीर पर गंभीर दबाव डाल सकती है। इससे डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और दिल व सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ता है। बुजुर्गों, पहले से बीमार लोगों और उन लोगों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है, जिनके घरों या कार्यस्थलों में गर्मी से बचने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।शोधकर्ताओं का कहना है कि यूरोप के कई शहरों का बुनियादी ढांचा मौजूदा तापमान के हिसाब से तैयार नहीं है। जिन इलाकों में पहले ऐसी भीषण गर्मी कम पड़ती थी, वहां भी अब लोगों को उससे निपटने के लिए बेहतर व्यवस्था की जरूरत है।
जलवायु परिवर्तन से कैसे बढ़ीं मौतें?
शोधकर्ताओं ने यह समझने के लिए कंप्यूटर मॉडल का इस्तेमाल किया कि अगर इंसानों की गतिविधियों से जलवायु गर्म नहीं हुई होती, तो इस गर्मी में कितनी मौतें होतीं। इसके लिए उन्होंने वास्तविक तापमान की तुलना उस काल्पनिक स्थिति से की, जिसमें इंसानों के कारण होने वाली ग्लोबल वॉर्मिंग नहीं हुई होती।इसके बाद दोनों परिस्थितियों के तापमान को अलग-अलग शहरों और उम्र के समूहों में गर्मी तथा मौतों के संबंध से जुड़े पहले के वैज्ञानिक आंकड़ों के साथ मिलाया गया। दोनों अनुमानों के बीच का अंतर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अतिरिक्त मौतों के रूप में निकाला गया।
इस तरीके से शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि कुल 50,391 मौतों में से 32,619 मौतों का संबंध इंसानों के कारण हुए जलवायु परिवर्तन से था। वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि गर्मी से होने वाली मौतों में जलवायु परिवर्तन की अनुमानित हिस्सेदारी 2000 के शुरुआती वर्षों में करीब 40-45% थी, जो हाल के वर्षों में बढ़कर लगभग दो-तिहाई हो गई है।
हालांकि, इन आंकड़ों को सीधे दर्ज मौतों की संख्या नहीं समझना चाहिए। कई मामलों में मौत का प्रमाणपत्र गर्मी को कारण के रूप में दर्ज नहीं करता, जबकि अत्यधिक तापमान किसी व्यक्ति की मौत में अहम भूमिका निभा सकता है। इसलिए शोधकर्ताओं ने सांख्यिकीय मॉडल से अनुमान लगाया। विशेषज्ञों ने इस तरीके को उपयोगी माना है, लेकिन यह भी कहा है कि मॉडल से निकले आंकड़ों में कुछ अनिश्चितताएं रहती हैं।
गर्मी से बचाव के लिए चेतावनी और बेहतर व्यवस्था जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल तापमान का रिकॉर्ड रखना पर्याप्त नहीं है। शहरों को गर्मी के खतरों से निपटने के लिए पहले से तैयारी करनी होगी। इसके लिए समय रहते हीट अलर्ट जारी करना, अस्पतालों और घरों में ठंडक की व्यवस्था बेहतर बनाना और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना जरूरी है।शहरों में पेड़-पौधे और हरित क्षेत्र बढ़ाने, छाया वाली सार्वजनिक जगहें बनाने तथा बुजुर्गों और अकेले रहने वाले लोगों की नियमित देखभाल से भी जोखिम घटाया जा सकता है। कम कार्बन उत्सर्जन वाले कूलिंग विकल्पों तक लोगों की पहुंच बढ़ाना भी अहम है।
लेकिन शोधकर्ताओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव के उपायों के साथ जीवाश्म ईंधन - कोयला, तेल और गैस - के इस्तेमाल से होने वाले उत्सर्जन को तेजी से घटाना भी जरूरी है। केवल गर्मी के असर से निपटना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि जलवायु परिवर्तन को बढ़ाने वाले कारण बने रहे तो आने वाले वर्षों में भीषण गर्मी और उससे जुड़ी मौतों का खतरा बढ़ सकता है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Europe में Summer 2026 के दौरान Heatwave से कितने लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया?
अध्ययन के मुताबिक, जून से अगस्त 2026 के बीच यूरोप के 854 शहरों में गर्मी से जुड़ी 50,391 मौतों का अनुमान लगाया गया। इनमें से 32,619 मौतों को इंसानों के कारण हुए जलवायु परिवर्तन से जोड़ा गया है।
यूरोप में Heat-Related Deaths बढ़ने के पीछे Climate Change की क्या भूमिका रही?
जीवाश्म ईंधन जलाने से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है, जिससे धरती का औसत तापमान बढ़ रहा है। अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन ने गर्मी की तीव्रता बढ़ाई और अनुमानित मौतों में करीब 65% का योगदान दिया।
2026 की गर्मियों में Europe के किन देशों में Heatwave से सबसे ज्यादा मौतें हुईं?
अध्ययन में इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में गर्मी से सबसे ज्यादा मौतों का अनुमान लगाया गया। दक्षिणी और पश्चिमी यूरोप के अलावा ब्रिटेन जैसे उत्तरी क्षेत्रों में भी गंभीर असर सामने आया।
Climate Change के कारण हुई Heatwave Deaths का अनुमान वैज्ञानिकों ने कैसे लगाया?
शोधकर्ताओं ने वास्तविक तापमान की तुलना उस काल्पनिक स्थिति से की, जिसमें इंसानों के कारण जलवायु परिवर्तन नहीं हुआ होता। इसके बाद तापमान और मौतों के बीच संबंध से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर दोनों परिस्थितियों में मौतों का अनुमान लगाया और उनके अंतर को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी मौतों के रूप में गिना।
Europe के शहरों में Extreme Heat का बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों पर क्या असर पड़ा?
अध्ययन में अनुमानित मौतों में आधे से ज्यादा लोग 85 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे। अत्यधिक गर्मी से डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और दिल व सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, युवाओं की मौतें भी दर्ज अनुमान में शामिल थीं।
Heatwave से होने वाली मौतों को कम करने के लिए European Cities क्या कदम उठा सकते हैं?
शहरों में समय पर हीट अलर्ट, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, ठंडक की सुलभ व्यवस्था, पेड़-पौधे और छायादार सार्वजनिक स्थान बढ़ाने चाहिए। बुजुर्गों और अन्य जोखिम वाले लोगों की देखभाल के साथ ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना भी जरूरी है।