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India Naxalism End : PM मोदी ने गुजरात में ₹400 करोड़ के प्रोजेक्ट शुरू किए, सशस्त्र नक्सलवाद के अंत का किया ऐलान...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर गुजरात के एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। समारोह में करीब 10 हजार पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने परेड की, जबकि हजारों कलाकारों ने नक्सल प्रभावित रहे 126 जिलों की कहानी और वहां आए बदलाव को प्रस्तुत किया।

India Naxalism End : PM मोदी ने गुजरात में ₹400 करोड़ के प्रोजेक्ट शुरू किए, सशस्त्र नक्सलवाद के अंत का किया ऐलान...

India Naxalism End: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। मौका था सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह का। इस बार समारोह की सबसे बड़ी खासियत देश में सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की उपलब्धियों को दिखाना रही। इसके लिए करीब 10 हजार पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की परेड और हजारों कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। केंद्र सरकार के मुताबिक, मार्च-अप्रैल 2026 में देश में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर शून्य हो गई थी।

एकता नगर में ₹400 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट शुरू

प्रधानमंत्री ने सुबह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनका उद्देश्य इलाके में पर्यटन को बढ़ावा देना, सुविधाएं बेहतर करना और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना है।

जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया, उनमें सीवेज और पानी के ट्रीटमेंट प्लांट, इमारतों पर आकर्षक लाइटिंग, नर्मदा घाट का अपग्रेडेशन और IRCTC का होटल शामिल हैं। इसके अलावा रेनफॉरेस्ट, यूनिटी ट्रेल और इको ट्रेल जैसी सुविधाएं भी शुरू की गईं।प्रधानमंत्री ने जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी, उनमें गोरा-भद्रा रोड का विकास, जीरो वेस्ट स्मार्ट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट, खलवानी इको टूरिज्म डेवलपमेंट और कैक्टस एवं बटरफ्लाई गार्डन का विकास शामिल है। इन परियोजनाओं से एकता नगर और आसपास के पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना है।

126 से घटकर शून्य हुए नक्सल प्रभावित जिले

राष्ट्रीय एकता दिवस 2026 के समारोह में देश से सशस्त्र नक्सलवाद के कमजोर पड़ने और प्रभावित इलाकों में आए बदलाव को प्रमुखता से दिखाया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, साल 2014 में देश के 126 जिले नक्सल प्रभावित थे। अप्रैल 2018 में यह संख्या 90, जुलाई 2021 में 70 और अप्रैल 2024 में 38 रह गई। दिसंबर 2025 तक ऐसे जिलों की संख्या घटकर 8 हो गई थी। मार्च-अप्रैल 2026 में यह संख्या शून्य हो गई।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नक्सलवाद से जुड़े सभी खतरे पूरी तरह खत्म हो गए हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, 37 जिलों को ‘लेगेसी एंड थ्रस्ट’ श्रेणी में रखा गया है। ये जिले अब नक्सल प्रभावित नहीं हैं, लेकिन यहां सुरक्षा और विकास से जुड़े काम जारी रखने की जरूरत है। एक जिले को ‘डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न’ की श्रेणी में रखा गया है। वहां नक्सली हिंसा पर काबू पाने और संगठनात्मक ढांचे को खत्म करने के बाद भी निगरानी जारी रखने की जरूरत बताई गई है।सरकार का कहना है कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में सुरक्षा कार्रवाई के साथ सड़क, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार भी किया गया। इसी रणनीति के तहत सुरक्षा बलों की तैनाती, पुलिस थानों को मजबूत करने और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास पर भी काम हुआ।

10 हजार जवानों की परेड, 126 जिलों के 2 हजार कलाकारों ने दिखाई नक्सल प्रभावित इलाकों की कहानी

राष्ट्रीय एकता दिवस की परेड में करीब 10 हजार पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल हुए। इसमें राज्य पुलिस बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और केंद्रीय पुलिस संगठनों के दस्ते शामिल थे। परेड में उन सुरक्षा बलों की भूमिका को भी दिखाया गया, जिन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया। हर दस्ते के गुजरने के दौरान उसकी उपलब्धियों से जुड़ी छोटी फिल्में LED स्क्रीन पर दिखाई गईं।

कार्यक्रम का एक खास हिस्सा नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) की ओर से तैयार किया गया नाटक था। इसमें करीब 2,000 कलाकार शामिल हुए, जो उन 126 जिलों से आए थे जहां पहले सशस्त्र नक्सलवाद का असर रहा था। कलाकारों ने अपने प्रदर्शन के जरिए बताया कि नक्सल हिंसा के दौरान स्थानीय लोगों को किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता था और अब इन इलाकों में शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में क्या बदलाव आए हैं।इन जिलों से करीब 5,000 लोगों को भी समारोह देखने के लिए बुलाया गया था। वे कलाकारों की प्रस्तुति देखने के साथ अपने अनुभव साझा करने वाले थे। इस साल की परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में करीब 4,700 कलाकारों के शामिल होने की जानकारी दी गई थी।

‘वंदे मातरम्’ थीम पर 15 झांकियां, पहली बार दिखी लोगों की झांकी

इस साल राष्ट्रीय एकता दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की थीम ‘वंदे मातरम्’ रखी गई। यह राष्ट्रीय गीत के 150 साल पूरे होने के मौके से जुड़ी थी। कार्यक्रम में कुल 15 झांकियां शामिल हुईं। इनमें पहली बार एक ऐसी झांकी भी रखी गई, जिसे लोगों की झांकी के रूप में तैयार किया गया था।गुजरात में कई पीढ़ियों से रह रहे अलग-अलग राज्यों के लोगों की सांस्कृतिक पहचान को भी कार्यक्रम में जगह दी गई। करीब 5,000 कलाकारों ने लगभग 50 सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए अपने मूल राज्यों की परंपराएं, लोकनृत्य और कला दिखाई। इसका उद्देश्य देश की सांस्कृतिक विविधता और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सामने लाना था।
समारोह में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के बैंड की प्रस्तुतियां भी हुईं। इसके अलावा नशे के खिलाफ देशव्यापी बाइक रैली को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया। प्रधानमंत्री ने समारोह में शामिल होकर संबोधन दिया।

182 मीटर ऊंचा है स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

एकता नगर में स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है। 182 मीटर ऊंची यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2018 को इसका उद्घाटन किया था। सरदार पटेल को भारत का लौह पुरुष कहा जाता है। आजादी के बाद 562 रियासतों को भारत में मिलाने और देश के राजनीतिक एकीकरण में उनकी अहम भूमिका रही थी।प्रतिमा का मुख्य ढांचा 58 मीटर ऊंचे आधार पर बना है। इसमें 153 मीटर की ऊंचाई पर एक व्यूइंग गैलरी है, जहां से नर्मदा नदी और आसपास की सतपुड़ा तथा विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं का नजारा देखा जा सकता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस हर साल 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इस साल के समारोह में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की उपलब्धियों और प्रभावित इलाकों में हुए बदलाव को विशेष रूप से सामने रखा गया।

FAQ (Frequently Asked Questions):

PM Modi ने 31 अक्टूबर 2026 को कितने रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कई नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें सीवेज और पानी के ट्रीटमेंट प्लांट, नर्मदा घाट का अपग्रेडेशन, IRCTC होटल और इको टूरिज्म से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

भारत को Naxal-Free घोषित करने की तारीख क्या है?

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, मार्च-अप्रैल 2026 में देश में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या शून्य हो गई थी। सरकार ने 31 मार्च 2026 को इस दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि नक्सलवाद से जुड़े सभी खतरे पूरी तरह खत्म हो गए हैं।

केंद्र सरकार ने देश से Armed Naxalism खत्म होने का दावा किस आधार पर किया है?

सरकार के मुताबिक, नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 2014 के 126 से घटकर मार्च-अप्रैल 2026 में शून्य हो गई। इसके साथ ही नक्सली हिंसा में कमी, सुरक्षा अभियानों, नक्सलियों के आत्मसमर्पण और प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को इस उपलब्धि का आधार बताया गया है।

Naxalism से प्रभावित जिलों की संख्या 2014 से 2026 के बीच कितनी बदली?

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2014 में देश के 126 जिले नक्सल प्रभावित थे। मार्च-अप्रैल 2026 में यह संख्या घटकर शून्य हो गई। हालांकि, 37 जिलों में सुरक्षा और विकास से जुड़े काम जारी रखने की जरूरत बताई गई है।

Rashtriya Ekta Diwas 2026 में Naxalism के अंत को कैसे दर्शाया गया?

समारोह में करीब 10 हजार पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने परेड में हिस्सा लिया। इसके अलावा नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के करीब 2,000 कलाकारों ने 126 पूर्व नक्सल प्रभावित जिलों की कहानी को नाटक के जरिए दिखाया। परेड में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया।

Naxal प्रभावित क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार ने कौन-कौन से कदम उठाए?

सरकार ने प्रभावित इलाकों में सड़क और मोबाइल नेटवर्क का विस्तार किया। इसके अलावा स्कूल, कौशल विकास केंद्र, बैंकिंग सुविधाएं और पुलिस ढांचे को मजबूत किया गया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और स्थानीय लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर भी काम किया गया।

Naxalism के खिलाफ अभियान में CRPF और राज्य पुलिस की क्या भूमिका रही?

नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में राज्य पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, जिनमें CRPF भी शामिल है, ने अहम भूमिका निभाई। इन बलों ने सुरक्षा अभियान चलाए, खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई की और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। केंद्र सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त बल, हेलिकॉप्टर, प्रशिक्षण, हथियार और पुलिस ढांचे को मजबूत करने के लिए आर्थिक सहायता भी दी।

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