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US Ban on Chinese Vehicles : अमेरिका में चीनी कारों पर स्थायी प्रतिबंध की मांग, ऑटो कंपनियों ने संसद से क्यों की अपील?

अमेरिकी ऑटो कंपनियों के संगठन ने कांग्रेस से चीनी गाड़ियों पर स्थायी प्रतिबंध लगाने वाला बिल जल्द पास करने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि कनेक्टेड कारों से डेटा चोरी और राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा है। पहले से कुछ तकनीकी प्रतिबंध और भारी टैरिफ लागू हैं।

US Ban on Chinese Vehicles : अमेरिका में चीनी कारों पर स्थायी प्रतिबंध की मांग, ऑटो कंपनियों ने संसद से क्यों की अपील?

US Ban on Chinese Vehicles : अमेरिका में चीनी कारों की एंट्री रोकने को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। जनरल मोटर्स, टोयोटा और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन एलायंस फॉर ऑटोमोटिव इनोवेशन ने अमेरिकी कांग्रेस से चीनी गाड़ियों पर स्थायी प्रतिबंध लगाने वाला कानून जल्द पास करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि चीनी गाड़ियों में लगे कैमरे, माइक्रोफोन, GPS और इंटरनेट से जुड़े सिस्टम के जरिए संवेदनशील डेटा चीन तक पहुंचने का खतरा है। इसके अलावा, चीनी कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी से अमेरिकी ऑटोमोबाइल उद्योग को भी नुकसान हो सकता है।रॉयटर्स की 2 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मांग ऐसे समय की गई है, जब मिडटर्म चुनाव के बाद अमेरिकी सांसद अगले सप्ताह संसद के संक्षिप्त सत्र के लिए लौटेंगे। अमेरिकी ऑटो कंपनियां चाहती हैं कि दिसंबर में मौजूदा सत्र खत्म होने से पहले इस कानून को मंजूरी मिल जाए।

GM, Toyota और Volkswagen जैसी कंपनियां एकजुट

एलायंस फॉर ऑटोमोटिव इनोवेशन के प्रमुख जॉन बोजेला ने कहा कि अमेरिका को चीनी गाड़ियों के बड़े पैमाने पर आयात से बचाने की जरूरत है। उनके मुताबिक, इन गाड़ियों से निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम पैदा हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कंपनियों ने अपने देश में फैक्ट्रियों और रोजगार के लिए लंबे समय से निवेश किया है। ऐसे में चीनी आयात से उन्हें नुकसान पहुंच सकता है।

इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ मोटर व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स (OICA) के अध्यक्ष, और अमेरिका स्थित 'अलायंस फॉर ऑटोमोटिव इनोवेशन' (ऑटो इनोवेटर्स) के अध्यक्ष और CEO, जॉन बोज़ेला 15 अक्टूबर, 2024 को फ्रांस के पेरिस में आयोजित 2024 पेरिस ऑटो शो के दौरान 'पेरिस ऑटोमोटिव समिट' में बोल रहे हैं। (Credit : Reuters)
इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ मोटर व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स (OICA) के अध्यक्ष, और अमेरिका स्थित 'अलायंस फॉर ऑटोमोटिव इनोवेशन' (ऑटो इनोवेटर्स) के अध्यक्ष और CEO, जॉन बोज़ेला 15 अक्टूबर, 2024 को फ्रांस के पेरिस में आयोजित 2024 पेरिस ऑटो शो के दौरान 'पेरिस ऑटोमोटिव समिट' में बोल रहे हैं। (Credit : Reuters)

यह संगठन अमेरिका की कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। इनमें जनरल मोटर्स, टोयोटा और फॉक्सवैगन के अलावा फोर्ड, होंडा, हुंडई और स्टेलेंटिस जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।बोजेला ने यूरोप में चीनी गाड़ियों की बढ़ती बिक्री का उदाहरण देते हुए कहा कि 2026 के शुरुआती आठ महीनों में यूरोपीय संघ (EU) ने चीन से 11 लाख से ज्यादा गाड़ियां आयात कीं। यह संख्या पूरे 2025 में हुए आयात से भी अधिक थी। उनके मुताबिक, अमेरिका को यूरोप जैसी स्थिति बनने से पहले कदम उठाना चाहिए।

संसद में बिल पर तेजी से काम कराने की तैयारी

चीनी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों के सांसदों के समर्थन से आगे बढ़ रही है। सितंबर में सीनेट में इस प्रस्ताव के समर्थकों ने बिल को तेजी से पास कराने की योजना नवंबर तक टाल दी थी। रॉयटर्स के मुताबिक, सीनेट की एक समिति जुलाई में इस बिल को मंजूरी दे चुकी है, जबकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इसके दूसरे संस्करण को 100 से ज्यादा सांसदों का समर्थन मिल चुका है।हालांकि, बिल के पास होने को लेकर समय की चुनौती भी है। कुछ संसदीय अधिकारियों और ऑटोमोबाइल लॉबिस्ट का मानना है कि अगर मिडटर्म चुनाव के बाद डेमोक्रेट्स कांग्रेस में नियंत्रण हासिल करते हैं, तो दिसंबर में सत्र खत्म होने से पहले इस प्रस्ताव को पास कराने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचेगा।
इससे जुड़ा एक औपचारिक विधेयक 'प्रोटेक्टिंग अमेरिका फ्रॉम चाइनीज कार्स एक्ट, 2026' भी है। इसका उद्देश्य विदेशी प्रतिद्वंद्वी देशों से जुड़े कनेक्टेड वाहनों की अमेरिका में एंट्री रोकना है। सीनेट में एलिसा स्लॉटकिन और हाउस में हेली स्टीवंस ने इससे जुड़े विधेयक पेश किए हैं। हालांकि, विधेयक पेश होना और उसका कानून बनना अलग-अलग प्रक्रिया है।

बाइडेन प्रशासन के नियमों से पहले ही लगी हैं कई पाबंदियां

अमेरिका में चीनी गाड़ियों को लेकर पहले से ही सख्त नियम लागू हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने जनवरी 2025 में कनेक्टेड वाहनों से जुड़े हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पर नए प्रतिबंधों को अंतिम रूप दिया था। ये नियम 17 मार्च 2025 से प्रभावी हुए।अमेरिकी वाणिज्य विभाग के ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी (BIS) के मुताबिक, इन नियमों का मकसद चीन और रूस से जुड़े कुछ हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को अमेरिकी कनेक्टेड वाहनों में इस्तेमाल होने से रोकना है। सरकार की चिंता है कि कारों में लगे कैमरे, माइक्रोफोन, GPS और इंटरनेट कनेक्टिविटी के जरिए ड्राइवरों की निजी जानकारी हासिल की जा सकती है। कुछ स्थितियों में इन सिस्टम का इस्तेमाल वाहन को दूर से नियंत्रित करने के लिए भी हो सकता है।
इन नियमों के तहत चीन या रूस से जुड़े कनेक्टेड व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स की गाड़ियों की बिक्री पर मॉडल ईयर 2027 से प्रतिबंध लागू होना है। इसके अलावा, कुछ कनेक्टेड व्हीकल सिस्टम के हार्डवेयर के आयात पर मॉडल ईयर 2030 से रोक का प्रावधान है। इसलिए मौजूदा नियमों को हर चीनी ब्रांड की हर कार पर एक समान और तत्काल लागू पूर्ण प्रतिबंध समझना सही नहीं होगा।
इसके अलावा, अमेरिका ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर 100% से अधिक टैरिफ भी लगा रखा है। इससे अमेरिकी बाजार में चीनी इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री और आयात पहले ही काफी मुश्किल हो गया है।

ट्रंप के बयान से ऑटो कंपनियों की चिंता बढ़ी

सितंबर 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा था कि अगर चीनी कार कंपनियां अमेरिका में ही गाड़ियां बनाती हैं, तो उन्हें इससे आपत्ति नहीं होगी। इस बयान के बाद अमेरिकी ऑटोमोबाइल कंपनियों की चिंता बढ़ गई।कंपनियों को आशंका है कि अगर चीनी वाहन निर्माता अमेरिकी बाजार में उत्पादन शुरू करते हैं, तो मौजूदा कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। वहीं, चीनी कंपनियों को अमेरिकी बाजार में काम करने की अनुमति देने से मौजूदा सुरक्षा नियमों और प्रस्तावित प्रतिबंधों पर भी सवाल उठ सकते हैं।
दूसरी ओर, चीन के विदेश मंत्रालय ने पहले ऐसे प्रस्तावों की आलोचना की है। चीन का कहना है कि अमेरिका को बाजार अर्थव्यवस्था के नियमों और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए। उसने चीनी कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंधों के प्रस्तावों को अनुचित दबाव बताया है।
फिलहाल अमेरिकी कांग्रेस में चीनी गाड़ियों पर स्थायी प्रतिबंध का प्रस्ताव विचाराधीन है। आने वाले संसदीय सत्र में इस पर क्या फैसला होता है, यह तय करेगा कि अमेरिका मौजूदा तकनीकी प्रतिबंधों को और सख्त कानून में बदलता है या नहीं।

FAQ (Frequently Asked Questions):

अमेरिकी ऑटो कंपनियां चीनी गाड़ियों पर स्थायी प्रतिबंध क्यों चाहती हैं?

अमेरिकी ऑटो कंपनियों का कहना है कि चीनी गाड़ियों में लगे कैमरे, माइक्रोफोन, GPS और इंटरनेट कनेक्टिविटी के जरिए ड्राइवरों का संवेदनशील डेटा चीन तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, उनका मानना है कि चीनी कंपनियों के बढ़ते आयात से अमेरिकी वाहन निर्माताओं और घरेलू रोजगार को नुकसान हो सकता है।

अमेरिका में Chinese Vehicles पर बैन लगाने की मांग किसने की है?

यह मांग एलायंस फॉर ऑटोमोटिव इनोवेशन ने की है। यह संगठन जनरल मोटर्स, टोयोटा, फॉक्सवैगन, फोर्ड, होंडा और हुंडई समेत कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन के प्रमुख जॉन बोजेला ने अमेरिकी कांग्रेस से स्थायी प्रतिबंध वाला कानून पास करने की अपील की है।

Alliance for Automotive Innovation क्या है?

एलायंस फॉर ऑटोमोटिव इनोवेशन अमेरिका का एक ऑटोमोबाइल उद्योग संगठन है। यह देश की कई बड़ी वाहन निर्माता कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है और ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े नियमों, नीतियों और कानूनों पर सरकार के सामने उद्योग का पक्ष रखता है।

अमेरिका चीनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को सुरक्षा के लिए खतरा क्यों मानता है?

अमेरिका की चिंता है कि आधुनिक कनेक्टेड कारों में लगे कैमरे, माइक्रोफोन, GPS और इंटरनेट सिस्टम से ड्राइवरों की निजी जानकारी हासिल की जा सकती है। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, चीन या रूस से जुड़े कुछ हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल डेटा चोरी या वाहनों को दूर से नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है।

क्या अमेरिका में चीनी कारों की बिक्री पर पहले से प्रतिबंध है?

अमेरिका में मार्च 2025 से कनेक्टेड वाहनों के कुछ चीनी और रूसी हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर पर प्रतिबंध लागू हैं। मॉडल ईयर 2027 से चीन या रूस से जुड़े कुछ वाहन निर्माताओं की कनेक्टेड गाड़ियों की बिक्री पर भी रोक का प्रावधान है। इसके अलावा, चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100% से अधिक टैरिफ है। हालांकि, इसे हर चीनी कार पर एक समान पूर्ण प्रतिबंध नहीं कहा जा सकता।

चीनी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने वाला अमेरिकी बिल क्या है?

इससे जुड़े प्रस्तावों में 'प्रोटेक्टिंग अमेरिका फ्रॉम चाइनीज कार्स एक्ट, 2026' शामिल है। इसका उद्देश्य विदेशी प्रतिद्वंद्वी देशों से जुड़े कनेक्टेड वाहनों की अमेरिका में एंट्री रोकना है। सीनेट में एलिसा स्लॉटकिन और हाउस में हेली स्टीवंस ने इससे जुड़े विधेयक पेश किए हैं। इन प्रस्तावों को कानून बनने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है।

अमेरिका और चीन के बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर विवाद क्या है?

विवाद की मुख्य वजह चीनी वाहन निर्माताओं की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी, अमेरिकी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं हैं। अमेरिका को आशंका है कि चीनी कनेक्टेड कारों से संवेदनशील डेटा चीन तक पहुंच सकता है। वहीं, चीन का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंध निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।

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