Switzerland North Korea Diplomatic Mission: 6 साल बाद उत्तर कोरिया में खुला स्विट्जरलैंड का राजनयिक दफ्तर, क्या बढ़ेगी दोनों देशों की नजदीकी?
स्विट्जरलैंड ने उत्तर कोरिया के साथ राजनयिक संपर्क बढ़ाने के बावजूद उसके परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध लागू रखने की बात कही है। 1953 से युद्धविराम समझौते की निगरानी में शामिल स्विट्जरलैंड ने 2020 में कोविड-19 के दौरान प्योंगयांग स्थित अपना कार्यालय बंद कर दिया था। अब स्थायी राजनयिक कार्यालय दोबारा शुरू होने से दोनों देशों के बीच सीधा संपर्क बढ़ेगा।
Switzerland North Korea Diplomatic Mission: स्विट्जरलैंड ने उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में अपना राजनयिक कार्यालय दोबारा शुरू कर दिया है। 29 अक्टूबर 2026 को स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस उत्तर कोरिया पहुंचे और इस कदम को दोनों देशों के बीच सीधा संपर्क बढ़ाने की दिशा में अहम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि राजनयिक कार्यालय को दोबारा खोलना उत्तर कोरिया के साथ सीधे बातचीत को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए बातचीत जरूरी है।स्विट्जरलैंड का यह कार्यालय 19 अक्टूबर 2026 से ही काम करना शुरू कर चुका था, जबकि 29 और 30 अक्टूबर को विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान इसका आधिकारिक उद्घाटन किया जा रहा है। यह कार्यालय मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण बंद कर दिया गया था। करीब 6 साल बाद इसे फिर शुरू किया गया है।
स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्यालय का मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया की सरकार के साथ सीधे संपर्क बढ़ाना और राजनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाना है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि प्योंगयांग में दोबारा शुरू किया गया कार्यालय पूर्ण दूतावास का दर्जा रखता है या निचले स्तर का राजनयिक मिशन है। यह कार्यालय चीन की राजधानी बीजिंग स्थित स्विट्जरलैंड के दूतावास के अधीन काम करेगा। उत्तर कोरिया के साथ राजनयिक और कांसुलर संबंधों की जिम्मेदारी भी फिलहाल बीजिंग स्थित दूतावास के पास ही रहेगी।

विदेश मंत्री कैसिस की उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री से होगी मुलाकात
स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस की यात्रा के दौरान उत्तर कोरिया के अधिकारियों के साथ राजनीतिक बातचीत भी होनी है। स्विस विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कैसिस उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन-हुई और सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (WPK) की केंद्रीय समिति के एक प्रतिनिधि से मुलाकात करेंगे।


इस बातचीत में दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच नियमित राजनीतिक सलाह-मशविरा दोबारा शुरू करने पर चर्चा होगी। इसके अलावा कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा और क्षेत्र से जुड़े दूसरे भू-राजनीतिक मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं।हालांकि, उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन से कैसिस की मुलाकात होगी या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उनकी यात्रा के दौरान इस संबंध में कोई औपचारिक कार्यक्रम भी घोषित नहीं किया गया है।
कैसिस शनिवार को दक्षिण कोरिया के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वे दक्षिण कोरियाई अधिकारियों से भी बातचीत करेंगे। इस तरह उनकी तीन दिवसीय यात्रा में उत्तर और दक्षिण कोरिया दोनों के साथ संपर्क बढ़ाने पर जोर रहेगा।
1974 में बने थे दोनों देशों के राजनयिक संबंध
स्विट्जरलैंड और उत्तर कोरिया के बीच राजनयिक संबंध 1974 में स्थापित हुए थे। स्विट्जरलैंड अपनी अंतरराष्ट्रीय तटस्थता यानी न्यूट्रैलिटी पॉलिसी के लिए जाना जाता है। इसी नीति के तहत वह अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा वाले देशों के साथ भी बातचीत और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने पर जोर देता है।

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय के संचार प्रमुख निकोलस बिडो ने समाचार एजेंसी कीस्टोन-एटीएस से कहा कि उत्तर कोरिया कई वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग रहने के बाद अब धीरे-धीरे दूसरे देशों के साथ राजनयिक संपर्क बहाल कर रहा है। स्विट्जरलैंड इसी अवसर का इस्तेमाल कर प्योंगयांग में अपनी मौजूदगी दोबारा मजबूत करना चाहता है।दोनों देशों के बीच 2003 से नियमित राजनीतिक बातचीत भी होती रही है। अब तक स्विट्जरलैंड की सरकार के संघीय परिषद (Federal Council) के केवल एक सदस्य ने उत्तर कोरिया की आधिकारिक यात्रा की थी। वे तत्कालीन विदेश मंत्री मिशेलिन काल्मी-रे थीं, जिन्होंने 2003 में प्योंगयांग का दौरा किया था।
इसके बाद 2014 में उत्तर कोरिया के तत्कालीन विदेश मंत्री री सु-योंग ने स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न का दौरा किया था। अब 23 साल बाद स्विट्जरलैंड के किसी संघीय परिषद सदस्य की उत्तर कोरिया यात्रा हो रही है।
उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध भी लागू रखेगा स्विट्जरलैंड
स्विट्जरलैंड ने साफ किया है कि उत्तर कोरिया के साथ राजनयिक संपर्क बढ़ाने का मतलब संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों में ढील देना नहीं है। निकोलस बिडो के मुताबिक, स्विट्जरलैंड उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों को लागू करता रहेगा।उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड का उद्देश्य अपने सिद्धांतों और मूल्यों को बनाए रखते हुए कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता लाने में योगदान देना है।
दरअसल, स्विट्जरलैंड 1953 से कोरियाई प्रायद्वीप में युद्धविराम समझौते की निगरानी में भी शामिल रहा है। इसी साल उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच युद्धविराम हुआ था, जिसके तहत 38वें समानांतर अक्षांश के आसपास डिमिलिट्राइज्ड जोन (DMZ) बनाया गया। यह क्षेत्र दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों को सीमित करने के लिए बनाया गया था। हालांकि, 1953 में हुए समझौते के बाद औपचारिक शांति संधि नहीं हुई है और तकनीकी रूप से दोनों देश अब भी युद्ध की स्थिति में माने जाते हैं।
इस समझौते की निगरानी के लिए न्यूट्रल नेशंस सुपरवाइजरी कमीशन (NNSC) बनाया गया था। इसमें स्विट्जरलैंड और स्वीडन की भूमिका रही है। फिलहाल स्विट्जरलैंड के पांच सैन्य अधिकारी और स्वीडन के पांच अधिकारी पनमुनजोम में तैनात हैं। यह आयोग सैन्य गतिविधियों का निरीक्षण करता है, कुछ सैन्य जांच प्रक्रियाओं में शामिल होता है और समझौते के पालन पर स्वतंत्र रिपोर्ट देता है।
2020 में बंद हुआ था स्विट्जरलैंड का कार्यालय
प्योंगयांग में स्विट्जरलैंड की राजनयिक मौजूदगी दोबारा शुरू होने से पहले भी वहां उसका विकास और मानवीय सहायता से जुड़ा कार्यालय काम करता था। स्विस एजेंसी फॉर डेवलपमेंट एंड कोऑपरेशन (SDC) ने 1997 में प्योंगयांग में अपना कार्यालय खोला था।इस कार्यालय के जरिए मुख्य रूप से कृषि और पीने के पानी की उपलब्धता से जुड़े प्रोजेक्ट चलाए जाते थे। हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च 2020 में स्विट्जरलैंड ने अपना कार्यालय बंद कर दिया था। इसके बाद उसकी गतिविधियां सीमित हो गई थीं। एजेंसी के आखिरी मानवीय सहायता कार्यक्रम 2024 में समाप्त हुए।
अब नया स्थायी राजनयिक कार्यालय शुरू होने से स्विट्जरलैंड को उत्तर कोरिया के अधिकारियों के साथ सीधे संपर्क बनाए रखने का मौका मिलेगा। यह ऐसे समय में हुआ है, जब उत्तर कोरिया लंबे अंतराल के बाद कुछ देशों के साथ अपने राजनयिक संबंधों को फिर सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है।
स्विट्जरलैंड की यह पहल कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम करने के लिए बातचीत का एक नया रास्ता खोल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के साथ-साथ अमेरिका के बीच भी बातचीत कितनी आगे बढ़ती है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Switzerland ने North Korea में अपनी Diplomatic Mission दोबारा क्यों खोली?
स्विट्जरलैंड ने उत्तर कोरिया के साथ सीधे संपर्क और राजनीतिक बातचीत बढ़ाने के लिए प्योंगयांग में अपना राजनयिक कार्यालय दोबारा खोला है। उसका उद्देश्य कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना है।
Swiss Foreign Minister Ignazio Cassis ने North Korea में शांति के लिए क्या अपील की?
इग्नाजियो कैसिस ने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए बातचीत जरूरी है। उन्होंने राजनयिक कार्यालय दोबारा खोलने को उत्तर कोरिया के साथ सीधे संवाद को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम बताया।
Switzerland और North Korea के बीच राजनयिक संबंध कब स्थापित हुए थे?
दोनों देशों के बीच 1974 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। इसके बाद 2003 से दोनों देशों के बीच नियमित राजनीतिक बातचीत भी होती रही है।
Pyongyang में Swiss Diplomatic Mission कितने समय से बंद थी?
स्विट्जरलैंड का राजनयिक कार्यालय मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण बंद हुआ था। इसे 19 अक्टूबर 2026 को दोबारा शुरू किया गया और 29-30 अक्टूबर को विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान इसका आधिकारिक उद्घाटन किया गया।
Switzerland की Neutrality Policy North Korea के साथ उसके संबंधों को कैसे प्रभावित करती है?
स्विट्जरलैंड की तटस्थता नीति उसे अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा वाले देशों के साथ बातचीत और राजनयिक संपर्क बनाए रखने की सुविधा देती है। इसी नीति के तहत वह उत्तर कोरिया के साथ भी संवाद जारी रखना चाहता है। हालांकि, वह संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का पालन भी करता है।
क्या Switzerland North Korea और Western Countries के बीच बातचीत में मध्यस्थ बन सकता है?
स्विट्जरलैंड का तटस्थ देश होने का इतिहास और कोरियाई युद्धविराम की निगरानी में उसकी भूमिका उसे संभावित मध्यस्थ बनाती है। हालांकि, फिलहाल किसी औपचारिक मध्यस्थता प्रक्रिया की घोषणा नहीं हुई है।
North Korea में Swiss Diplomatic Mission खुलने का Korean Peninsula की शांति पर क्या असर हो सकता है?
इससे स्विट्जरलैंड और उत्तर कोरिया के बीच सीधा संपर्क बढ़ेगा और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत का रास्ता खुल सकता है। स्विट्जरलैंड उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में भी योगदान दे सकता है। हालांकि, इससे तुरंत तनाव खत्म होने की गारंटी नहीं है।