IIT Faculty Reservation Quota : IITs में आरक्षित वर्ग के 1,495 फैकल्टी पद खाली, आवेदन मिलने के बाद भी भर्ती क्यों नहीं हुई?
RTI से खुलासा हुआ है कि सात IITs में SC, ST और OBC वर्ग के 1,495 आरक्षित फैकल्टी पद खाली हैं। IIT खड़गपुर में सबसे ज्यादा 710 पद रिक्त हैं, जबकि हजारों आवेदन मिलने के बावजूद भर्ती नहीं हुई। चयन प्रक्रिया में भेदभाव के आरोप भी उठे हैं।
IIT Faculty Reservation Quota : देश के सात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षित 1,495 फैकल्टी पद खाली हैं। यह जानकारी IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र प्रणव जीवन पी. की ओर से दाखिल RTI के जवाबों में सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक, इन संस्थानों में आरक्षित वर्ग के फैकल्टी सदस्यों की हिस्सेदारी करीब 18 से 20% के बीच है, जबकि इन वर्गों के लिए कुल फैकल्टी पदों में 49.5% आरक्षण का प्रावधान है।सबसे खराब स्थिति IIT खड़गपुर की है। यहां SC, ST और OBC वर्ग के लिए तय 778 पदों में से 710 खाली हैं। यानी करीब 91% पदों पर भर्ती नहीं हुई है। खास बात यह है कि संस्थान को इन पदों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन भी मिले हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब उम्मीदवार आवेदन कर रहे हैं, तो आरक्षित पद लंबे समय से खाली क्यों हैं।
सात IITs में 1,495 आरक्षित पद खाली
RTI के तहत मिली जानकारी में IIT खड़गपुर, IIT रुड़की, IIT (BHU) वाराणसी, IIT जोधपुर, IIT पटना, IIT रोपड़ और IIT तिरुपति के आंकड़े शामिल हैं। इन सात संस्थानों में SC, ST और OBC वर्ग के लिए कुल 2,087 फैकल्टी पद तय किए गए थे, जिनमें से 1,495 खाली हैं।IIT खड़गपुर में 710, IIT रुड़की में 236 और IIT (BHU) वाराणसी में 201 पद खाली हैं। IIT जोधपुर में 127, IIT पटना में 120, IIT रोपड़ में 64 और IIT तिरुपति में 37 पदों पर भर्ती नहीं हुई है।
IIT खड़गपुर में कुल 781 फैकल्टी सदस्यों में केवल 68 SC, ST और OBC वर्ग से हैं। इनमें 20 SC, 46 OBC और 2 ST वर्ग के शिक्षक शामिल हैं। इस तरह संस्थान में इन तीनों वर्गों की हिस्सेदारी सिर्फ 8.7% है। IIT खड़गपुर देश का पहला IIT है।

आवेदन मिले, फिर भी खाली रह गए पद
RTI से मिली जानकारी में यह भी सामने आया है कि आरक्षित पद खाली रहने की वजह सिर्फ उम्मीदवारों की कमी नहीं है। IIT खड़गपुर को 2025 से अब तक SC, ST और OBC वर्ग के फैकल्टी पदों के लिए 2,798 आवेदन मिले। इसके बावजूद संस्थान केवल 128 पद भर पाया और 710 पद खाली रहे।IIT जोधपुर को भी 2025 से अब तक इन वर्गों के उम्मीदवारों से 3,043 आवेदन मिले, लेकिन यहां केवल 74 पद भरे गए। संस्थान में 127 आरक्षित पद अब भी खाली हैं।
RTI दाखिल करने वाले प्रणव जीवन का कहना है कि IITs में फैकल्टी पदों के लिए आने वाले करीब 50% आवेदन SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों से होते हैं। इसके बावजूद संस्थानों में इन वर्गों के शिक्षकों की संख्या काफी कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विभागों में इन समुदायों का कोई फैकल्टी सदस्य नहीं है। ऐसे में भेदभाव या जाति से जुड़ी शिकायत होने पर छात्रों के पास अपनी बात रखने के लिए अपने समुदाय का कोई शिक्षक नहीं होता।
2019 के कानून में कितना आरक्षण तय है?
केंद्र सरकार ने शिक्षकों की सीधी भर्ती में आरक्षण लागू करने के लिए 2019 में Central Educational Institutions (Reservation in Teachers’ Cadre) Act बनाया था। इसके तहत SC वर्ग के लिए 15%, ST के लिए 7.5% और OBC वर्ग के लिए 27% पद आरक्षित रखने का प्रावधान है। इसके अलावा सरकारी अधिसूचना के तहत EWS वर्ग के लिए 10% आरक्षण भी तय किया गया है।इस कानून के मुताबिक आरक्षण की गणना पूरे संस्थान को एक इकाई मानकर की जाती है, न कि हर विभाग या विषय को अलग इकाई मानकर। इसका उद्देश्य केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में अलग-अलग वर्गों को फैकल्टी भर्ती में उचित प्रतिनिधित्व देना है।
IITs को भी इस कानून के प्रावधानों का पालन करने के लिए कहा गया था। शिक्षा मंत्रालय ने नवंबर 2019 में सभी IITs को इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी IITs को फैकल्टी भर्ती में आरक्षण के नियमों का पालन करने का निर्देश दिया था।
चयन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई के समान अवसर केंद्र के पूर्व डीन और जाति व सामाजिक भेदभाव के विशेषज्ञ प्रोफेसर अवथी रमैया ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आरक्षित पदों के लिए आवेदन करने वाले SC, ST और OBC उम्मीदवारों से कई बार दूसरे उम्मीदवारों के मुकाबले कठिन सवाल पूछे जाते हैं। इसके बाद चयन समिति उन्हें 'योग्य नहीं' बताकर खारिज कर देती है।रमैया के मुताबिक, उनके चयन समितियों में विषय विशेषज्ञ और पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल होने के अनुभव में ऐसे मामले सामने आए हैं। उनका कहना है कि इन वर्गों में योग्य उम्मीदवारों की कमी नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में भेदभाव की शिकायतों पर ध्यान देने की जरूरत है।
RTI के जवाबों के मुताबिक, कई IITs में SC/ST सेल और शिकायत निवारण व्यवस्था भी ठीक से काम नहीं कर रही है। IIT पटना ने बताया कि उसके यहां छात्रों के लिए SC/ST सेल नहीं है। IIT रोपड़ में SC/ST सेल और IIT तिरुपति में SC/ST व OBC सेल मौजूद हैं। IIT रुड़की ने जाति आधारित उत्पीड़न से जुड़ी तीन शिकायतों की जानकारी दी। IIT खड़गपुर ने 2024 से अब तक 41 शिकायतें मिलने की बात कही, हालांकि इनमें से केवल तीन शिकायतों की प्रकृति का ब्योरा दिया गया।
IIT खड़गपुर में पांच साल में 10 छात्रों की आत्महत्या
RTI के आंकड़ों में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी जानकारी सामने आई है। IIT खड़गपुर में पिछले पांच साल में 10 छात्रों ने आत्महत्या की। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें दो SC और एक ST वर्ग के छात्र थे।संस्थान में 14,764 छात्रों के लिए 12 नियमित काउंसलर और कॉन्ट्रैक्ट पर एक मनोचिकित्सक है। यानी करीब 1,135 छात्रों पर एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपलब्ध है। जनवरी 2026 में UGC के मसौदा दिशानिर्देशों में हर 500 छात्रों पर एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या मनोवैज्ञानिक रखने का सुझाव दिया गया था।
अन्य संस्थानों में भी स्थिति अलग-अलग है। IIT रुड़की में 10,536 छात्रों के लिए आठ काउंसलर हैं, जबकि IIT (BHU) वाराणसी में 9,500 छात्रों के लिए केवल दो पेशेवर काउंसलर हैं। IIT रोपड़ और IIT तिरुपति में उपलब्ध विशेषज्ञों की संख्या के हिसाब से यह अनुपात 500 छात्रों पर एक से बेहतर है।
यह मुद्दा IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर 2026 को हुई मौत के बाद भी चर्चा में आया। उनके पिता रवींद्र ने आरोप लगाया था कि साहिल को संस्थान में बार-बार जाति आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ा। साहिल की मौत इस साल IIT बॉम्बे में आत्महत्या का तीसरा मामला और देश के IITs में नौवां मामला बताई गई थी। ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के मुताबिक, पिछले 20 साल में 160 IIT छात्रों की आत्महत्या से मौत हुई है।
JNU में भी PhD दाखिले के आरक्षण पर विवाद
IITs के अलावा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में PhD दाखिले के लिए आरक्षण को लेकर भी विवाद सामने आया है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय के 2026-27 के PhD प्रॉस्पेक्टस में आरक्षण के नियमों के मुताबिक सीटें नहीं दी गई हैं।SFI के मुताबिक, JNU ने इस साल कुल 711 नियमित PhD सीटों का विज्ञापन जारी किया है। 7.5% ST आरक्षण के हिसाब से करीब 53 सीटें होनी चाहिए थीं, लेकिन केवल 38 सीटें दी गई हैं। इसी तरह 15% SC आरक्षण के हिसाब से करीब 107 सीटें होनी चाहिए थीं, जबकि प्रॉस्पेक्टस में 103 सीटें दिखाई गई हैं।
SFI ने दिव्यांग उम्मीदवारों यानी बेंचमार्क डिसेबिलिटी वाले लोगों के लिए भी सीटों में कमी का आरोप लगाया है। संगठन के मुताबिक, इस श्रेणी के लिए कम से कम 36 सीटें होनी चाहिए थीं, लेकिन केवल 17 सीटें रखी गई हैं।
SFI ने इन आरोपों को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। ये आंकड़े संगठन के दावे पर आधारित हैं। JNU की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक जवाब सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
IIT में शिक्षकों की भर्ती में कितना आरक्षण लागू है?
Central Educational Institutions (Reservation in Teachers’ Cadre) Act, 2019 के तहत फैकल्टी की सीधी भर्ती में SC वर्ग के लिए 15%, ST के लिए 7.5% और OBC वर्ग के लिए 27% आरक्षण तय है। इसके अलावा EWS वर्ग के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान है।
IIT में SC, ST और OBC के कितने पद खाली हैं?
RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, सात IITs में SC, ST और OBC वर्ग के कुल 1,495 फैकल्टी पद खाली हैं। इन संस्थानों में IIT खड़गपुर, रुड़की, BHU, जोधपुर, पटना, रोपड़ और तिरुपति शामिल हैं।
IIT Kharagpur में आरक्षित वर्ग के कितने फैकल्टी पद खाली हैं?
IIT खड़गपुर में SC, ST और OBC वर्ग के लिए तय 778 पदों में से 710 खाली हैं। संस्थान में इन तीनों वर्गों के केवल 68 फैकल्टी सदस्य कार्यरत हैं।
IIT को आरक्षित पदों के लिए कितने आवेदन मिले?
IIT खड़गपुर को 2025 से अब तक SC, ST और OBC वर्ग के फैकल्टी पदों के लिए 2,798 आवेदन मिले। वहीं IIT जोधपुर को इन वर्गों से 3,043 आवेदन मिले थे।
IIT में फैकल्टी भर्ती का डेटा किस RTI से सामने आया?
यह जानकारी IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र प्रणव जीवन पी. की ओर से दाखिल RTI आवेदन के जवाबों से सामने आई। उन्होंने फैकल्टी की श्रेणीवार संख्या, खाली पदों, आवेदनों, मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं और SC/ST सेल से जुड़ी जानकारी मांगी थी।
Central Educational Institutions Reservation Act 2019 क्या है?
यह केंद्र सरकार का कानून है, जिसे केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की सीधी भर्ती में आरक्षण लागू करने के लिए बनाया गया था। इसके तहत संस्थान को एक इकाई मानकर SC, ST और OBC वर्ग के लिए क्रमशः 15%, 7.5% और 27% आरक्षण तय किया गया है। सरकारी अधिसूचना के तहत EWS के लिए 10% आरक्षण भी लागू है।