कमाई बढ़ी, फिर भी 200 नौकरियों पर संकट! Alaska Air में छंटनी की तैयारी, आखिर ईंधन ने कैसे बिगाड़ा पूरा गणित?
Alaska Air Group करीब 200 गैर-कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की छंटनी करने जा रहा है। कंपनी का राजस्व बढ़ने के बावजूद महंगे विमान ईंधन ने मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया है। कंपनी को 2026 में घाटे का अनुमान है।
विमानन उद्योग में बढ़ती लागत का असर अब कर्मचारियों की नौकरियों पर भी दिखने लगा है। Alaska Air job cuts 2026 के तहत Alaska Air Group करीब 200 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रहा है। कंपनी के पास Alaska Airlines और Hawaiian Airlines का स्वामित्व है। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी का राजस्व बढ़ रहा है, लेकिन विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों ने कमाई का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की यह छंटनी उसके कुल कर्मचारियों की संख्या के 1 प्रतिशत से भी कम होगी। इसमें मुख्य रूप से गैर-कॉन्ट्रैक्ट पदों को शामिल किया गया है। कंपनी का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी एयरलाइंस पहले से ही बढ़ती परिचालन लागत और ईंधन की कीमतों से जूझ रही हैं।
Alaska Air Layoffs: किन कर्मचारियों की जाएगी नौकरी?

Reuters के हाथ लगे एक आंतरिक मेमो के मुताबिक, छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों में 125 पद Washington State और 48 पद Hawaii में हैं। कंपनी के फ्रंटलाइन और गैर-प्रबंधकीय कर्मचारियों की नौकरियों को इस कटौती से बाहर रखा गया है।प्रभावित कर्मचारियों का अंतिम कार्यदिवस 13 नवंबर होगा, लेकिन उन्हें 31 दिसंबर तक कंपनी के पेरोल पर रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें सेवरेंस यानी नौकरी समाप्त होने पर मिलने वाला मुआवजा भी दिया जाएगा। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Ben Minicucci ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में कहा कि कंपनी का ओवरहेड खर्च राजस्व की तुलना में तेजी से बढ़ा है। ऐसे में लागत को नियंत्रित करना जरूरी हो गया है।
Alaska Airlines Fuel Costs ने कैसे बिगाड़ा कंपनी का मुनाफा?
Alaska Air की तीसरी तिमाही के नतीजे बताते हैं कि कंपनी की कमाई बढ़ने के बावजूद ईंधन खर्च ने वित्तीय प्रदर्शन पर दबाव डाला है।कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर 4.3 अरब डॉलर पहुंच गया। प्रीमियम सेवाओं से होने वाली कमाई में करीब 25 प्रतिशत और कॉरपोरेट ग्राहकों से मिलने वाले राजस्व में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद कंपनी को GAAP आधार पर 147 मिलियन डॉलर का शुद्ध घाटा हुआ। वहीं, Adjusted Net Loss 35 मिलियन डॉलर रहा। इसकी सबसे बड़ी वजह विमानन ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं। कंपनी ने तीसरी तिमाही में ईंधन की कीमत 3.75 डॉलर प्रति गैलन रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन उसे 3.94 डॉलर प्रति गैलन खर्च करना पड़ा। अब चौथी तिमाही में कंपनी को ईंधन की कीमत 4.65 से 4.85 डॉलर प्रति गैलन तक रहने की आशंका है। कंपनी ने पूरे साल के लिए प्रति शेयर 5 से 5.50 डॉलर के Adjusted Loss का अनुमान जताया है। Reuters के मुताबिक, कंपनी का ईंधन खर्च बजट से 1.8 अरब डॉलर ज्यादा हो सकता है।
ईरान युद्ध से बढ़ी Fuel Price की चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर विमानन ईंधन की कीमतों पर भी पड़ा है।एयरलाइंस के लिए ईंधन सबसे बड़े परिचालन खर्चों में से एक है। इसलिए कीमतों में थोड़ी-सी बढ़ोतरी भी कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित कर सकती है। Reuters के मुताबिक, कंपनी के आंतरिक मेमो में 700 मिलियन डॉलर तक के प्री-टैक्स नुकसान की आशंका जताई गई है। यदि ऐसा होता है, तो महामारी के दौर को छोड़कर 2003 के बाद यह कंपनी का पहला ऐसा नुकसान होगा। यही वजह है कि Alaska Air Group लागत घटाने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम करने जैसे कदम उठा रहा है।
छंटनी के बावजूद विस्तार जारी रखेगी Alaska Air
कर्मचारियों की छंटनी के बीच कंपनी अपनी विस्तार योजनाओं को रोकने के मूड में नहीं है। Alaska Air Group, Hawaiian Airlines के अधिग्रहण के बाद दोनों कंपनियों के संचालन को एकीकृत कर रहा है।अप्रैल में दोनों एयरलाइंस ने अपने बुकिंग और मोबाइल ऐप सिस्टम को एकीकृत किया था। इससे यात्री दोनों कंपनियों के संयुक्त नेटवर्क पर यात्रा की बुकिंग कर सकते हैं। कंपनी ने इसी महीने Seattle से Osaka और Tahiti के लिए सीधी उड़ानों की घोषणा भी की है। CEO Ben Minicucci के मुताबिक, कंपनी अपने विमान बेड़े, ग्राहक अनुभव और नेटवर्क में निवेश जारी रखेगी, लेकिन साथ ही खर्चों पर नियंत्रण भी किया जाएगा।
सिर्फ Alaska Air नहीं, पूरा अमेरिकी Airline Industry दबाव में
ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर केवल Alaska Air तक सीमित नहीं है। Delta, American Airlines और Southwest जैसी बड़ी अमेरिकी एयरलाइंस भी 2026 की कमाई के अनुमानों में कटौती कर चुकी हैं। इसके बावजूद सितंबर तक के सात महीनों में अमेरिकी हवाई किरायों में औसतन करीब 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यानी कंपनियां टिकट महंगे करने के बावजूद बढ़ती लागत से पूरी तरह राहत नहीं पा रही हैं।
निष्कर्ष
Alaska Air job cuts 2026 इस बात का संकेत हैं कि विमानन उद्योग में बढ़ती ईंधन लागत अब कंपनियों के वित्तीय नतीजों से आगे बढ़कर रोजगार पर भी असर डाल रही है। राजस्व बढ़ने के बावजूद Alaska Air को घाटे का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ईंधन की कीमतें घटती हैं या एयरलाइंस को लागत कम करने के लिए और कड़े फैसले लेने पड़ते हैं।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Alaska Air लगभग 200 कर्मचारियों की छंटनी क्यों करने जा रही है?
कंपनी के मुताबिक, उसका ओवरहेड खर्च राजस्व से तेजी से बढ़ा है। महंगे विमान ईंधन और बढ़ती परिचालन लागत के कारण कंपनी खर्च कम करने के लिए छंटनी कर रही है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों का Alaska Air की कमाई पर क्या असर पड़ा है?
तीसरी तिमाही में कंपनी को ईंधन के लिए अनुमान से ज्यादा खर्च करना पड़ा। कंपनी को 147 मिलियन डॉलर का GAAP शुद्ध घाटा हुआ और पूरे साल के लिए भी घाटे का अनुमान है।
Alaska Air में कितनी नौकरियां खत्म होने की संभावना है?
कंपनी करीब 200 गैर-कॉन्ट्रैक्ट पदों में कटौती कर रही है। Reuters के मुताबिक, इनमें 125 पद Washington State और 48 पद Hawaii में हैं।
विमानन कंपनियों के लिए ईंधन की बढ़ती लागत चुनौती क्यों बन रही है?
ईंधन एयरलाइंस के बड़े परिचालन खर्चों में शामिल है। इसकी कीमत बढ़ने से उड़ानों का खर्च बढ़ता है और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ता है।
Alaska Air के इस फैसले का कर्मचारियों और कंपनी के संचालन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
प्रभावित कर्मचारियों को 13 नवंबर के बाद काम नहीं करना होगा, लेकिन वे 31 दिसंबर तक पेरोल पर रहेंगे और उन्हें सेवरेंस मिलेगा। कंपनी का कहना है कि वह लागत घटाने के साथ अपने नेटवर्क और बेड़े में निवेश जारी रखेगी।