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CJP प्रदर्शन के बीच ₹599 में पत्रकार बनने का खेल! फर्जी प्रेस आईडी बेचने वाली वेबसाइटों का कैसे हुआ खुलासा?

इंडिया टुडे की पड़ताल में सामने आया कि कुछ वेबसाइटें ₹599 से लेकर ₹25,000 तक में प्रेस आईडी, रिपोर्टर प्रोफाइल और अन्य पत्रकारिता संबंधी सुविधाएं देने का दावा कर रही थीं। CJP विरोध प्रदर्शनों के दौरान ऐसे कथित पत्रकारों की मौजूदगी ने पहचान और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

CJP प्रदर्शन के बीच ₹599 में पत्रकार बनने का खेल! फर्जी प्रेस आईडी बेचने वाली वेबसाइटों का कैसे हुआ खुलासा?

पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल पूछना और जनता तक सच्चाई पहुंचाना है, लेकिन क्या पत्रकार होने की पहचान महज ₹599 में खरीदी जा सकती है? Fake Press IDs Sold During CJP Protest मामले में इंडिया टुडे की पड़ताल ने इसी सवाल को सामने रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोग प्रेस कार्ड और माइक लेकर रिपोर्टिंग करते दिखे। जांच में ऐसे ऑनलाइन मंचों का पता चला, जो कम कीमत पर पत्रकारिता से जुड़े पहचान पत्र और दूसरी सुविधाएं देने का दावा कर रहे थे।

CJP प्रदर्शन के दौरान कैसे सामने आया फर्जी पत्रकारों का मामला?

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज करते समय इंडिया टुडे ने एक ऐसे व्यक्ति को देखा, जिसके माइक पर ‘इंडियन प्रेस यूनियन’ का लोगो लगा था। संगठन की डिजिटल मौजूदगी की पड़ताल में उसकी वेबसाइट पर प्रेस आईडी, माइक और पत्रकारिता से जुड़े अन्य सामान व सेवाएं उपलब्ध होने की जानकारी मिली।रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला केवल एक वेबसाइट तक सीमित नहीं था। आगे की जांच में कम से कम पांच अन्य वेबसाइटें भी मिलीं, जो प्रेस पहचान पत्र बेचने का विज्ञापन कर रही थीं।इससे पहले नीट पेपर लीक को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में कई युवा रिपोर्टरों को जमीनी कवरेज के कारण पहचान मिली थी। बाद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर हुए प्रदर्शनों में भी बड़ी संख्या में लोग कैमरे और माइक लेकर पहुंचे। इसी बीच यह सवाल उठा कि इनमें से कौन वास्तव में पत्रकारिता कर रहा था और कौन केवल पत्रकार होने का रूप पेश कर रहा था।

Fake Press IDs Sold During CJP Protest: ₹599 से ₹25,000 तक के दावे

इंडिया टुडे ने छह वेबसाइटों की पड़ताल की, जिनमें से चार पर प्रेस पहचान पत्र और संबंधित सेवाओं की कीमतें स्पष्ट रूप से दी गई थीं। हिंद मीडिया नेटवर्क ₹599 में प्रेस आईडी, प्रमाणपत्र और ऑनलाइन रिपोर्टर प्रोफाइल उपलब्ध कराने का दावा कर रहा था, जबकि एनईईडी24 न्यूज़ पर ₹999 में पहचान पत्र और रिपोर्टर प्रोफाइल पेज की पेशकश की गई थी। एशियन यूनियन प्रेस ₹999 में प्रेस आईडी, सदस्यता प्रमाणपत्र और लेख प्रकाशित करने की सुविधा दे रहा था। वहीं, इंडियन प्रेस यूनियन ने ₹1,799 में छपे हुए प्रेस कार्ड और कार स्टीकर की पेशकश की थी। इसके अलावा, हिंद मीडिया नेटवर्क ₹3,500 में माइक किट और एनईईडी24 न्यूज़ एक साल की कथित वैधता के साथ ₹25,000 में स्टेट ब्यूरो चीफ का पद देने का दावा कर रहा था।

Indian Press Union Controversy: बिना जवाबदेही के पत्रकारिता कितनी खतरनाक?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन प्रेस यूनियन से जुड़े लोगों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर मिले, जिनमें वे CJP Protest 2.0 के दौरान रिपोर्टिंग करते दिखाई दिए। उनके निजी इंस्टाग्राम और यूट्यूब चैनलों पर पोस्ट किए गए वीडियो को लाखों बार देखे जाने का दावा भी रिपोर्ट में किया गया है।रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इंडियन प्रेस यूनियन की वेबसाइट पर साक्षात्कार, प्रेस कॉन्फ्रेंस और कार्यक्रमों की ऐसी तस्वीरें दिखाई गईं, जो देखने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से बनाई गई प्रतीत होती थीं। संगठन वर्ष 2016 से काम करने का दावा करता था, लेकिन इंडिया टुडे को इस दावे की पुष्टि करने वाला प्रमाण नहीं मिला।ऐसे पहचान पत्रों का दुरुपयोग कई तरह से हो सकता है। कोई व्यक्ति विवाद में दूसरे पक्ष पर दबाव बनाने, संवेदनशील जानकारी हासिल करने या प्रतिबंधित स्थानों तक पहुंचने के लिए पत्रकार होने का दिखावा कर सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में सामने आए आरोपों को प्रत्येक कार्डधारक के खिलाफ प्रमाण नहीं माना जा सकता।

क्या प्रेस आईडी कार्ड से कोई भी बन सकता है पत्रकार?

केवल प्रेस कार्ड या माइक रखने से किसी व्यक्ति को स्वतः आधिकारिक पत्रकार का दर्जा नहीं मिल जाता। पहचान पत्र की विश्वसनीयता जारी करने वाले संगठन, उसकी वास्तविक गतिविधियों और सत्यापन प्रक्रिया पर निर्भर करती है। किसी स्थान पर प्रवेश की अनुमति भी संबंधित अधिकारियों और लागू नियमों के अधीन होती है।पत्रकारिता की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है कि संस्थान अपने रिपोर्टरों की पहचान सत्यापित करें, संपादकीय निगरानी रखें और गलत रिपोर्टिंग की स्थिति में जवाबदेही तय करें। पाठकों को भी किसी व्यक्ति की बात पर भरोसा करने से पहले उसके समाचार मंच और दावों की जांच करनी चाहिए।

निष्कर्ष

Fake Press IDs Sold During CJP Protest का मामला पत्रकारिता की पहचान और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है। जब प्रेस कार्ड, रिपोर्टर प्रोफाइल और माइक जैसी चीजें पैसे लेकर उपलब्ध कराने का दावा किया जाए, तो सत्यापन और जवाबदेही पहले से अधिक जरूरी हो जाते हैं। पत्रकारिता केवल पहचान पत्र से नहीं, बल्कि तथ्य-जांच, निष्पक्षता और जिम्मेदार रिपोर्टिंग से विश्वसनीय बनती है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

CJP प्रदर्शन के दौरान ₹599 में फर्जी प्रेस आईडी बेचने का मामला क्या है?

इंडिया टुडे की पड़ताल में ऐसी वेबसाइटें सामने आईं, जो ₹599 से प्रेस आईडी और रिपोर्टर प्रोफाइल जैसी सुविधाएं देने का विज्ञापन कर रही थीं।

ऑनलाइन प्रेस आईडी कितने रुपये में बेची जा रही थीं?

रिपोर्ट में ₹599, ₹999, ₹1,799 और ₹25,000 तक की कीमतों वाली अलग-अलग पेशकशों का उल्लेख किया गया है।

क्या प्रेस आईडी कार्ड से आधिकारिक पत्रकार का दर्जा मिल जाता है?

केवल कार्ड होने से आधिकारिक मान्यता या प्रतिबंधित स्थानों में प्रवेश का अधिकार नहीं मिलता।

फर्जी पत्रकारों की पहचान कैसे जांचें?

संबंधित समाचार संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट, रिपोर्टर की पहचान, प्रकाशित खबरों और संगठन की विश्वसनीयता की जांच करें। जरूरत पड़ने पर संबंधित संस्थान से पुष्टि करें।

प्रेस आईडी का दुरुपयोग कैसे हो सकता है?

इसका इस्तेमाल लोगों पर दबाव बनाने, जानकारी हासिल करने या पत्रकार होने का झूठा आभास पैदा करने के लिए किया जा सकता है। वास्तविक दुरुपयोग की पुष्टि तथ्यों और जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए।

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