India-UK Trade Pact के बीच Pernod और Diageo पर शिकंजा? स्कॉच व्हिस्की के आयात में गड़बड़ी की जांच
भारत में Pernod Ricard और Diageo के स्कॉच व्हिस्की आयात की जांच हो रही है। अधिकारियों को संदेह है कि कुछ थोक आयातों का गलत वर्गीकरण कर India-UK Trade Pact के तहत कम सीमा शुल्क चुकाया गया। दोनों कंपनियों ने जांच में सहयोग करने की बात कही है।
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौते के लागू होने के कुछ महीनों बाद ही शराब उद्योग की दो बड़ी कंपनियां जांच के घेरे में आ गई हैं। India UK Trade Pact के तहत स्कॉच व्हिस्की के कुछ आयात पर सीमा शुल्क घटाया गया था, लेकिन अब भारतीय कर अधिकारी जांच कर रहे हैं कि कहीं Pernod Ricard और Diageo ने थोक स्कॉच आयात का गलत वर्गीकरण करके कम शुल्क तो नहीं चुकाया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले से परिचित पांच उद्योग सूत्रों ने जांच की जानकारी दी है। हालांकि, अभी किसी कंपनी के दोषी पाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
Pernod और Diageo के दफ्तरों तक पहुंची जांच

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह कर अधिकारियों ने नई दिल्ली के पास स्थित Pernod Ricard के भारतीय मुख्यालय का अचानक दौरा किया। वहां कंपनी के अधिकारियों से स्कॉच आयात से जुड़े सवाल पूछे गए। तीन सूत्रों ने इसकी जानकारी दी।वहीं, Diageo की भारतीय इकाई United Spirits ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि शुक्रवार को कई स्थानों पर उसके कार्यालयों की तलाशी ली गई। कंपनी ने इसे अधिकारियों की ओर से की जा रही उद्योग-व्यापी कार्रवाई बताया। हालांकि, उसने अपनी शुरुआती सूचना में जांच के विषय का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया।मामले से जुड़े दो अन्य सूत्रों के मुताबिक, Diageo के कुछ स्कॉच आयातों के वर्गीकरण की भी जांच की जा रही है। भारत के राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने इस संबंध में टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।Pernod Ricard ने कहा कि वह DRI के साथ सहयोग कर रही है और मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध करा रही है। Diageo ने भी भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने और स्थानीय कानूनों का पालन करने की बात कही। United Spirits ने अपने खुलासे में कहा कि उसने जरूरी दस्तावेज और स्पष्टीकरण उपलब्ध करा दिए हैं।
India UK Trade Pact में स्कॉच व्हिस्की पर शुल्क का विवाद क्या है?
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू हुआ। इसके तहत कुछ स्कॉच व्हिस्की आयातों पर भारत में सीमा शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया गया।जांच का मुख्य सवाल यह है कि क्या यह शुल्क राहत कंटेनरों में आयात किए जाने वाले थोक स्कॉच कॉन्संट्रेट पर भी लागू होती है। चार सूत्रों के मुताबिक, कर अधिकारियों का मानना है कि इन थोक कॉन्संट्रेट पर शुल्क में मिली राहत लागू नहीं होती। अधिकारियों की चिंता है कि कुछ आयातों को गलत श्रेणी में घोषित किया गया हो सकता है।दोनों कंपनियां भारत में थोक स्कॉच कॉन्संट्रेट आयात करती हैं। इनका इस्तेमाल अन्य सामग्रियों के साथ मिलाकर Royal Stag, Blenders Pride और McDowell’s जैसे ब्रांडों के उत्पाद बनाने में किया जाता है।इसलिए जांच का केंद्र केवल आयात पर लगने वाला शुल्क नहीं, बल्कि यह भी है कि आयातित सामग्री को सीमा शुल्क के लिए किस श्रेणी में घोषित किया गया। फिलहाल यह अधिकारियों का संदेह है, किसी कंपनी के खिलाफ साबित हुआ निष्कर्ष नहीं।
भारत के शराब बाजार में दोनों कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी
फ्रांस की Pernod Ricard और ब्रिटेन की Diageo भारत के लगभग 65 अरब डॉलर के शराब बाजार की प्रमुख कंपनियां हैं। भारत में स्कॉच व्हिस्की की मांग और आयात दोनों कंपनियों के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण हैं।Crisil Ratings के अनुसार, भारत के आयातित स्पिरिट्स बाजार में ब्रिटेन की हिस्सेदारी करीब 75 प्रतिशत है, जिसमें स्कॉच व्हिस्की की बड़ी भूमिका है। ब्रिटिश सरकार ने भी जुलाई में कहा था कि भारत में सीमा शुल्क में बदलाव से व्हिस्की और जिन जैसे ब्रिटेन के प्रमुख उत्पादों को लाभ मिलेगा। वर्ष 2022 में भारत को ब्रिटेन का व्हिस्की निर्यात 20 करोड़ पाउंड से अधिक का था।हालांकि, India UK Trade Pact से मिलने वाली शुल्क राहत के बावजूद आयातकों को सही वर्गीकरण और सीमा शुल्क नियमों का पालन करना जरूरी है। मौजूदा जांच इसी अंतर को लेकर है।
पहले से चुनौतियों का सामना कर रही हैं कंपनियां
Pernod Ricard भारत में पहले से ही प्रतिस्पर्धा-विरोधी मामलों और आयात के मूल्यांकन से जुड़े विवादों का सामना कर रही है। मई 2026 में भारत में कुछ आयातों का कम मूल्यांकन करने के आरोप में कंपनी पर 31.4 करोड़ डॉलर के बकाया कर की मांग की खबर सामने आई थी। कंपनी ने गलत काम करने के आरोपों से इनकार किया है।दूसरी ओर, Diageo ने अगस्त 2026 में अपने कुछ लोकप्रिय पेय पदार्थों के निर्माण में बदलाव करने पर सहमति जताई थी। खाद्य सुरक्षा नियामक ने कुछ राज्यों में नियमों के विपरीत फ्लेवरिंग के इस्तेमाल को लेकर इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया था।ऐसे में स्कॉच आयात से जुड़ी नई जांच दोनों कंपनियों के लिए एक और नियामकीय चुनौती बन सकती है। लेकिन इसका अंतिम परिणाम जांच के निष्कर्षों और अधिकारियों के आगे के कदमों पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
India UK Trade Pact के तहत स्कॉच व्हिस्की पर सीमा शुल्क में कटौती के बाद Pernod Ricard और Diageo के आयात की जांच भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है। फिलहाल अधिकारियों को थोक स्कॉच कॉन्संट्रेट के वर्गीकरण पर संदेह है और दोनों कंपनियां जांच में सहयोग करने की बात कह रही हैं। यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और यदि हुआ, तो उसका वित्तीय परिणाम क्या होगा।
FAQ (Frequently Asked Questions):
India-UK Trade Pact के तहत Pernod Ricard और Diageo की जांच क्यों हो रही है?
अधिकारी जांच कर रहे हैं कि क्या दोनों कंपनियों ने कुछ थोक स्कॉच आयातों का गलत वर्गीकरण करके कम सीमा शुल्क चुकाया।
India-UK Trade Pact कब लागू हुआ?
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू हुआ।
स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क में क्या बदलाव हुआ?
समझौते के तहत कुछ स्कॉच व्हिस्की आयातों पर शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया गया। थोक कॉन्संट्रेट पर इस राहत की लागू होने की स्थिति जांच का विषय है।
Pernod Ricard और Diageo ने क्या कहा है?
दोनों कंपनियों ने भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने की बात कही है। Diageo ने स्थानीय कानूनों का पालन करने की बात भी कही है।
क्या दोनों कंपनियां दोषी साबित हो चुकी हैं?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, जांच जारी है और अभी किसी कंपनी के दोषी पाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।