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958 सफल उम्मीदवारों की ट्रेनिंग क्यों अटकी? सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से फंसा पूरा बैच

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफल 958 उम्मीदवारों का सेवा आवंटन और फाउंडेशन कोर्स OBC क्रीमी लेयर के नियमों पर कानूनी विवाद के कारण अटका है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि करीब 100 पुराने उम्मीदवारों की पात्रता का सवाल भी लंबित है।

958 सफल उम्मीदवारों की ट्रेनिंग क्यों अटकी? सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से फंसा पूरा बैच

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करना हजारों युवाओं का सपना होता है, लेकिन परीक्षा 2025 में सफल 958 उम्मीदवारों को अभी सेवा आवंटन और प्रशिक्षण का इंतजार है। UPSC Civil Servants OBC Creamy Layer Row के केंद्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की क्रीमी लेयर तय करने के नियम और सुप्रीम कोर्ट का 11 मार्च 2026 का फैसला है। केंद्र सरकार ने इस फैसले को लागू करने के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा है। 24 सितंबर को अदालत ने सरकार की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। 25 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, सरकार अदालत के निर्देशों का इंतजार कर रही है। इसी कारण नई भर्ती के उम्मीदवारों का सेवा आवंटन और प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ पाया है।

UPSC के 958 सफल उम्मीदवारों की ट्रेनिंग क्यों रुकी?

This is the first time since Independence that the Foundation Course has been stalled, leaving an entire batch of future administrators in the cold. (Indian Express )
This is the first time since Independence that the Foundation Course has been stalled, leaving an entire batch of future administrators in the cold. (Indian Express )

सिविल सेवा परीक्षा के जरिए चुने गए अधिकारियों का फाउंडेशन कोर्स आमतौर पर अगस्त के आखिरी सप्ताह या सितंबर की शुरुआत में मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में शुरू होता है। इस वर्ष 958 उम्मीदवारों के लिए प्रशिक्षण अगस्त के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित था, लेकिन यह शुरू नहीं हो सका।सेवा आवंटन यानी Service Allocation भी लंबित है। इसके चलते उम्मीदवारों को यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS) या अन्य केंद्रीय सेवाओं में से कौन-सी सेवा मिलेगी। फाउंडेशन कोर्स शुरू होने की तारीख का महत्व इसलिए भी है क्योंकि सिविल सेवाओं में वरिष्ठता की गणना इससे जुड़ी होती है। देरी से जॉइनिंग, वरिष्ठता और वेतन निर्धारण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। दोबारा मुख्य परीक्षा देने वाले कुछ उम्मीदवारों के लिए दिल्ली में प्रस्तावित संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है।

UPSC Civil Servants OBC Creamy Layer Row: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को OBC क्रीमी लेयर निर्धारित करने से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि OBC उम्मीदवारों की क्रीमी लेयर स्थिति तय करने के लिए केवल माता-पिता की आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। उनके पद और सामाजिक स्थिति जैसे प्रासंगिक मानदंडों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।विवाद की जड़ केंद्र सरकार के 1993 के कार्यालय ज्ञापन और 14 अक्टूबर 2004 के स्पष्टीकरण में है। 1993 के नियमों में आय और संपत्ति की गणना से वेतन तथा कृषि आय को बाहर रखने का प्रावधान था। वहीं, 2004 के स्पष्टीकरण में उन सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) और निजी संस्थानों के कर्मचारियों के बच्चों के लिए वेतन आय को शामिल करने की व्यवस्था की गई, जिनके पदों की सरकारी पदों से समानता का आकलन नहीं हुआ था।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल वेतन के आधार पर निजी क्षेत्र या PSU में कार्यरत माता-पिता के बच्चों को आरक्षण से बाहर करना, उनके पद और स्थिति पर विचार किए बिना, समान स्थिति वाले उम्मीदवारों के साथ असमान व्यवहार हो सकता है। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 में निहित समानता के सिद्धांतों के संदर्भ में देखा।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की?

केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए फैसले के प्रभाव और उसके क्रियान्वयन पर स्पष्टीकरण मांगा था। सरकार की प्रमुख मांगें हैं:

फैसले को इस तरह लागू न किया जाए कि पहले से पूरी हो चुकी नियुक्तियां, प्रवेश, डिग्रियां या अन्य स्थापित अधिकार स्वतः प्रभावित हों।

पदों की समानता तय करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने हेतु दो वर्ष का समय दिया जाए।

अदालत के निर्देशों के बीच UPSC CSE 2025 के 958 उम्मीदवारों का सेवा आवंटन पुराने मानदंडों के आधार पर करने की अनुमति मिले।

सरकार का कहना है कि सेवा आवंटन में देरी का असर प्रशिक्षण, वरिष्ठता और वेतन निर्धारण तक पहुंच सकता है। 24 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टीकरण संबंधी याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। फिलहाल अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।

करीब 100 पुराने OBC उम्मीदवारों की उम्मीद भी दांव पर

इस विवाद का असर केवल 2025 के सफल उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से विभिन्न सिविल सेवा परीक्षाओं में सफल करीब 100 उम्मीदवारों को OBC क्रीमी लेयर में रखे जाने के कारण आरक्षण का लाभ नहीं मिला था। उनका मामला भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके क्रियान्वयन से जुड़ा है।OBC क्रीमी लेयर का उद्देश्य आरक्षण के लाभ उन वर्गों तक पहुंचाना है, जिन्हें इसकी जरूरत है, और सामाजिक-आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके वर्गों को निर्धारित नियमों के अनुसार इससे बाहर रखना है। वर्तमान विवाद में मुख्य सवाल यह है कि अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत माता-पिता के पदों और आय का मूल्यांकन किस तरह किया जाए।सरकार को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक दर्जा देने और OBC उप-वर्गीकरण जैसे कदमों के जरिए पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों पर काम करने के लिए जाना जाता है। हालांकि, क्रीमी लेयर विवाद ने भर्ती और आरक्षण नियमों के क्रियान्वयन को लेकर नई चुनौतियां पैदा की हैं।

निष्कर्ष

UPSC Civil Servants OBC Creamy Layer Row में 958 नए उम्मीदवारों के सेवा आवंटन और फाउंडेशन कोर्स का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण तथा सरकार द्वारा नियम लागू करने के तरीके पर निर्भर है। इस मामले का असर उन करीब 100 पुराने उम्मीदवारों पर भी पड़ सकता है, जिनकी OBC पात्रता विवादित रही है। अदालत का अंतिम निर्णय तय करेगा कि क्रीमी लेयर के मानदंड कैसे लागू होंगे और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता क्या होगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

UPSC Civil Servants OBC Creamy Layer Row के कारण 958 उम्मीदवारों की ट्रेनिंग क्यों रुकी है?

UPSC CSE 2025 के 958 सफल उम्मीदवारों का सेवा आवंटन OBC क्रीमी लेयर मानदंडों पर सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के फैसले के क्रियान्वयन को लेकर लंबित है। केंद्र ने स्पष्टीकरण मांगा है और अदालत के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।

OBC Creamy Layer Criteria क्या है और UPSC भर्ती में इसका क्या महत्व है?

OBC Creamy Layer Criteria उन सामाजिक और आर्थिक मानदंडों से जुड़ा है, जिनके आधार पर तय किया जाता है कि कोई उम्मीदवार OBC आरक्षण का लाभ पाने के योग्य है या नहीं। यह UPSC भर्ती में आरक्षण के तहत पात्रता और सेवा आवंटन को प्रभावित कर सकता है।

Supreme Court OBC Creamy Layer फैसले का UPSC CSE 2025 उम्मीदवारों पर क्या असर पड़ा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्रीमी लेयर तय करने के लिए केवल माता-पिता की आय पर्याप्त आधार नहीं हो सकती। फैसले को लागू करने के तरीके पर केंद्र की स्पष्टीकरण याचिका लंबित रहने से 958 उम्मीदवारों का सेवा आवंटन और फाउंडेशन कोर्स प्रभावित हुआ है।

LBSNAA Foundation Course Delay से नए सिविल सेवकों की वरिष्ठता पर क्या असर पड़ सकता है?

LBSNAA Foundation Course Delay से प्रशिक्षण और जॉइनिंग का कार्यक्रम आगे खिसक सकता है। चूंकि वरिष्ठता की गणना फाउंडेशन कोर्स शुरू होने की तारीख से जुड़ी होती है, इसलिए देरी का असर वरिष्ठता और वेतन निर्धारण पर भी पड़ सकता है।

UPSC Service Allocation 2026 का फैसला कब आएगा?

फिलहाल अंतिम समय-सीमा स्पष्ट नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर 2026 को केंद्र की याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा था। सेवा आवंटन आगे बढ़ने की प्रक्रिया अदालत के स्पष्टीकरण और सरकार के अगले कदमों पर निर्भर करेगी।

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