Home / Business / 6 पारसी संगठनों ने PM मोदी को लिखा पत्र, टाटा ग्रुप की लिस्टिंग पर क्यों जताई चिंता ?
Business

6 पारसी संगठनों ने PM मोदी को लिखा पत्र, टाटा ग्रुप की लिस्टिंग पर क्यों जताई चिंता ?

Parsi Groups Letter to PM Modi: छह पारसी और जोरोएस्ट्रियन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर टाटा ग्रुप की परोपकारी विरासत और दीर्घकालिक कारोबारी मूल्यों की रक्षा करने की अपील की है। यह पत्र टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग और टाटा ट्रस्ट्स के साथ जारी विवाद के बीच आया है।

6 पारसी संगठनों ने PM मोदी को लिखा पत्र, टाटा ग्रुप की लिस्टिंग पर क्यों जताई चिंता ?

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर जारी विवाद के बीच छह पारसी और जोरोएस्ट्रियन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की अपील की है। 7 अक्टूबर 2026 को लिखे गए इस पत्र की जानकारी 23 अक्टूबर को सामने आई। संगठनों ने टाटा ट्रस्ट्स और टाटा परिवार के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि यह मामला केवल कॉरपोरेट प्रशासन या शेयरधारकों के हितों तक सीमित नहीं है। इसका संबंध टाटा ग्रुप की पहचान, सामाजिक जिम्मेदारियों और परोपकारी विरासत से भी है।

रिपोर्टों के अनुसार, संगठनों ने आशंका जताई कि टाटा संस की लिस्टिंग से समूह के मौजूदा संचालन मॉडल और दीर्घकालिक निवेश की प्राथमिकताओं पर असर पड़ सकता है। उनका तर्क है कि टाटा ग्रुप की पहचान केवल कारोबारी सफलता से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण में उसके योगदान से भी बनी है।

हालांकि, लिस्टिंग से इन मूल्यों पर वास्तव में कितना असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यह संगठनों की ओर से जताई गई चिंता है, कोई स्थापित परिणाम नहीं।

टाटा संस की लिस्टिंग का विवाद क्या है ?

इस पूरे मामले को समझने के लिए टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका जानना जरूरी है।टाटा संस टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। इसके पास समूह की कई प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी है। दूसरी ओर, टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े परोपकारी संस्थान शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में काम करते हैं। विवाद का मुख्य सवाल यह है कि टाटा संस को निजी कंपनी के रूप में रखा जाए या उसके शेयर शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाएं। लिस्टिंग होने पर कंपनी के शेयर आम निवेशकों के लिए बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं।

RBI ने लिस्टिंग को लेकर क्या कहा ?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सितंबर 2022 में टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया था। इस श्रेणी के लिए लागू नियामकीय ढांचे में शेयर बाजार में लिस्टिंग की आवश्यकता शामिल है।

टाटा संस ने मार्च 2024 में RBI से अपना रजिस्ट्रेशन स्वेच्छा से सरेंडर करने की मांग की थी। कंपनी का प्रयास नियामकीय ढांचे से बाहर निकलकर निजी बने रहने का रास्ता तलाशना था।
11 सितंबर 2026 को RBI ने यह आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद टाटा संस के लिए अपर-लेयर NBFC से जुड़े नियमों का पालन करने का सवाल फिर प्रमुख हो गया।

17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने के कदमों को मंजूरी दी। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस कदम का विरोध किया। टाटा ट्रस्ट्स ने स्पष्ट किया कि उसने लिस्टिंग पर सहमति नहीं दी है और अन्य विकल्पों पर विचार करने की मांग की है।

इसके बाद 23 अक्टूबर को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने NDTV World Summit में कहा कि RBI के नियमों के तहत अपर-लेयर में वर्गीकृत NBFC को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना आवश्यक है। उन्होंने किसी एक कंपनी के विवाद पर सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन लागू नियामकीय शर्तों को स्पष्ट किया।

इसी घटनाक्रम के बीच Parsi Groups Appeal to PM Modi सामने आई है। संगठनों ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि टाटा संस के भविष्य से जुड़े निर्णय में समूह के दीर्घकालिक उद्देश्यों और परोपकारी परंपरा को भी महत्व दिया जाए।

पारसी संगठनों की प्रमुख मांगें क्या हैं ?

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संगठनों ने टाटा ग्रुप की मौजूदा पहचान और सामाजिक योगदान को सुरक्षित रखने पर जोर दिया है। उनकी प्रमुख चिंताएं इस प्रकार हैं:

• टाटा ग्रुप की विरासत की रक्षा: समूह की पहचान नैतिक कारोबारी व्यवहार, दीर्घकालिक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी रही है। संगठन इसे बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।

• टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका का संरक्षण: ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी और परोपकारी गतिविधियों को समूह के सामाजिक उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।


• अल्पकालिक बाजार दबाव की आशंका: संगठनों को डर है कि लिस्टिंग के बाद बाजार की अपेक्षाओं का दबाव कंपनी की दीर्घकालिक निवेश योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।

• राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखना: पत्र में कहा गया है कि टाटा ग्रुप का भविष्य केवल कंपनी और उसके शेयरधारकों का मामला नहीं है। इसकी विरासत का संबंध देश के सामाजिक और औद्योगिक विकास से भी है।

ये मांगें संगठनों की ओर से व्यक्त की गई चिंताओं पर आधारित हैं। यह निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा कि शेयर बाजार में लिस्टिंग होने से टाटा ग्रुप की परोपकारी गतिविधियां अनिवार्य रूप से कमजोर हो जाएंगी।

पत्र लिखने वाले छह पारसी संगठन कौन हैं ?

इस पत्र पर भारत और विदेशों में सक्रिय छह पारसी और जोरोएस्ट्रियन संगठनों की ओर से समर्थन जताया गया है। इनके नाम हैं:

1. Bombay Parsi Punchayet (BPP): भारत में पारसी समुदाय की प्रमुख सामाजिक संस्थाओं में से एक।
2. Federation of Parsi Zoroastrian Anjumans of India (FPZAI): भारत में पारसी और जोरोएस्ट्रियन संगठनों का महासंघ।
3. Federation of Zoroastrian Associations of North America (FEZANA): उत्तरी अमेरिका के जोरोएस्ट्रियन संगठनों का महासंघ।
4. Zoroastrian Trust Funds of Europe (ZTFE): यूरोप में जोरोएस्ट्रियन समुदाय से जुड़ी ट्रस्ट संस्था।
5. Global Council of Zoroastrians Trust (GCZT): वैश्विक जोरोएस्ट्रियन समुदाय से जुड़ा संगठन।
6. World Zoroastrian Chamber of Commerce (WZCC): जोरोएस्ट्रियन समुदाय के कारोबारी हितों और नेटवर्क से जुड़ा संगठन।

रिपोर्टों के अनुसार, इन संगठनों ने पत्र में पारसी समुदाय के भारत के विकास में योगदान का उल्लेख किया है। उन्होंने जमशेदजी टाटा, जे.आर.डी. टाटा, वैज्ञानिक होमी भाभा, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और नानी पालखीवाला जैसी हस्तियों का उदाहरण दिया।

पत्र में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल जैसे संस्थानों का भी उल्लेख किया गया है। संगठनों ने इन्हें टाटा परिवार की परोपकारी परंपरा और देश के विकास में योगदान के उदाहरण के रूप में पेश किया है।

भारत के विकास में टाटा ग्रुप की परोपकारी भूमिका

टाटा ग्रुप का इतिहास भारत के औद्योगिक विकास से जुड़ा रहा है। इस्पात, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में समूह की कंपनियों ने कारोबार विकसित किया है। इसके साथ ही टाटा से जुड़े ट्रस्टों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भी योगदान दिया है।

टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी इस विवाद को खास बनाती है। संगठनों के अनुसार, मौजूदा स्वामित्व मॉडल ने समूह को कारोबारी गतिविधियों के साथ सामाजिक कल्याण के उद्देश्यों पर भी ध्यान देने में मदद की है।

हालांकि, लिस्टिंग से समूह के निवेश, संचालन और परोपकारी गतिविधियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन वास्तविक निर्णयों और लागू नियमों के आधार पर ही किया जा सकता है।

पारसी समुदाय की आबादी और सरकारी सहायता

टाटा संस की लिस्टिंग का विवाद और पारसी समुदाय की जनसंख्या संबंधी चुनौतियां अलग विषय हैं। फिर भी पारसी समुदाय की स्थिति इस खबर का व्यापक सामाजिक संदर्भ समझने में मदद करती है।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में पारसी आबादी 2001 की जनगणना में 69,601 थी, जो 2011 में घटकर 57,264 रह गई। ये उपलब्ध जनगणना के आंकड़े हैं, इन्हें 2026 की वर्तमान आबादी नहीं माना जाना चाहिए।

पारसी समुदाय की जनसंख्या में गिरावट से जुड़ी चिंताओं के लिए केंद्र सरकार जियो पारसी योजना (Jiyo Parsi Scheme) चलाती है। इस योजना के तहत पात्र पारसी परिवारों को चिकित्सा सहायता, बच्चों की देखभाल और आश्रित बुजुर्गों की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ जागरूकता और परामर्श कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं।

17 दिसंबर 2025 को लोकसभा में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार, 2020-21 से 2024-25 के बीच योजना के तहत 17.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए और 232 बच्चों का जन्म हुआ। 3 फरवरी 2026 के सरकारी अपडेट के अनुसार, योजना शुरू होने से अब तक 490 से अधिक पारसी बच्चों के जन्म में सहायता मिली थी। दोनों आंकड़े अलग-अलग अवधियों के हैं।
यह योजना पारसी समुदाय की जनसंख्या संबंधी चुनौतियों से जुड़ी है। इसका टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर लिखे गए पत्र से सीधा संबंध नहीं है।

क्या केंद्र सरकार ने पारसी संगठनों की मांग पर कोई फैसला लिया है?

23 अक्टूबर 2026 तक प्रकाशित रिपोर्टों में इस पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय या केंद्र सरकार की ओर से किसी औपचारिक जवाब की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार ने संगठनों की मांग स्वीकार कर ली है या टाटा संस की लिस्टिंग रोकने का निर्णय लिया है।फिलहाल इस मामले में दो प्रमुख पहलू हैं।

पहला, RBI के नियामकीय ढांचे के तहत टाटा संस की लिस्टिंग का सवाल और दूसरा, टाटा ट्रस्ट्स तथा पारसी संगठनों की ओर से समूह की मौजूदा परोपकारी विरासत को सुरक्षित रखने की मांग। आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के फैसलों और नियामकीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।

निष्कर्ष

छह पारसी संगठनों ने PM मोदी से टाटा ग्रुप की परोपकारी विरासत और दीर्घकालिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की है। यह मांग टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और टाटा ट्रस्ट्स के विरोध के बीच सामने आई है। फिलहाल सरकार के औपचारिक जवाब की पुष्टि नहीं हुई है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Parsi Groups ने PM Modi को पत्र लिखकर किस तरह की मदद मांगी है?

छह पारसी और जोरोएस्ट्रियन संगठनों ने प्रधानमंत्री से टाटा ग्रुप की विरासत, टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका और परोपकारी मूल्यों की रक्षा करने की अपील की है। उनकी चिंता टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग से जुड़े दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर है।

पारसी समुदाय किन प्रमुख समस्याओं का सामना कर रहा है?

पारसी समुदाय की प्रमुख जनसांख्यिकीय चुनौती घटती आबादी है। कम जन्म दर और बच्चों की कम संख्या जैसे कारण इस गिरावट से जुड़े हैं। सांस्कृतिक विरासत और समुदाय की सामाजिक जरूरतों को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, प्रधानमंत्री को लिखा गया मौजूदा पत्र मुख्य रूप से टाटा ग्रुप से संबंधित है।

India में Parsi Population घटने के क्या कारण हैं?

सरकारी जानकारी के अनुसार, भारत में पारसी आबादी 2001 में 69,601 से घटकर 2011 में 57,264 रह गई। कम जन्म दर और बच्चों की कम संख्या इस गिरावट से जुड़ी प्रमुख चिंताएं हैं। नए आधिकारिक जनगणना आंकड़ों के बिना वर्तमान आबादी का सटीक आंकड़ा देना उचित नहीं है।

Parsi Community Welfare के लिए सरकार कौन-से कदम उठा सकती है?

केंद्र सरकार जियो पारसी योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को चिकित्सा सहायता, बच्चों की देखभाल, आश्रित बुजुर्गों के लिए सहयोग और जागरूकता कार्यक्रम उपलब्ध कराती है। योजना का उद्देश्य पारसी आबादी में गिरावट को रोकने और उसे स्थिर करने में मदद करना है।

Parsi Organisations की मांगों पर केंद्र सरकार का क्या रुख है?

23 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्टों में इस पत्र पर केंद्र सरकार के किसी औपचारिक जवाब की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए सरकार के अंतिम रुख को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा।

Was this article useful?