TMC छोड़ने के महीनों बाद यूसुफ पठान को बड़ी राहत, ₹20.53 करोड़ के विवादित प्लॉट पर गुजरात सरकार का फैसला
गुजरात सरकार ने पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा में 978 वर्ग मीटर के विवादित प्लॉट के आवंटन को मंजूरी दी है। हालांकि, नगर निगम की स्थायी समिति की अंतिम मंजूरी और भुगतान की राशि तय होना अभी बाकी है।
गुजरात की राजनीति और वडोदरा में जमीन आवंटन से जुड़े एक पुराने विवाद में नया मोड़ आया है। पूर्व क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को करीब 14 साल से अटके Yusuf Pathan land allotment case में राहत मिली है। गुजरात की भाजपा सरकार ने वडोदरा में उनके घर के पास स्थित 978 वर्ग मीटर के विवादित भूखंड के आवंटन को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इस जमीन पर कब्जा पाने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। अंतिम मंजूरी स्थानीय नगर निगम की स्थायी समिति से मिलनी बाकी है।यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कुछ महीने पहले यूसुफ पठान समेत 19 अन्य सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय किया था। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद जमीन आवंटन का मामला भी चर्चा में आ गया है।
₹20.53 करोड़ की जमीन, लेकिन भुगतान की रकम अभी तय नहीं

वडोदरा के तांदलजा इलाके में स्थित इस 978 वर्ग मीटर के भूखंड की अनुमानित कीमत 20.53 करोड़ रुपये आंकी गई है। यानी जमीन का अनुमानित मूल्य करीब 2.10 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है।राज्य सरकार ने आवंटन को मंजूरी देते हुए जरूरी आदेश जारी कर दिए हैं। अब वडोदरा नगर निगम इस प्रस्ताव को अपनी स्थायी समिति के सामने रखेगा। नगर निगम आयुक्त अरुण बाबू के अनुसार, राज्य सरकार की मंजूरी मिल चुकी है और अगला कदम समिति के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करना है।हालांकि, यूसुफ पठान को इस जमीन के लिए कितनी रकम चुकानी होगी, यह अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। नगर निगम राज्य सरकार के आदेश की जांच करने के बाद भुगतान की राशि निर्धारित करेगा। समिति की मंजूरी मिलने के बाद ही आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
Yusuf Pathan land allotment case: 2012 से क्यों अटका था मामला?
इस विवाद की शुरुआत साल 2012 में हुई थी। उस समय यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम को पत्र लिखकर अपने बंगले से सटे 978 वर्ग मीटर के भूखंड का आवंटन करने की मांग की थी। उसी साल 30 मार्च और 8 जून को हुई बैठकों में इस प्रस्ताव पर चर्चा भी हुई।इसके बाद नगर निगम ने बिना सार्वजनिक नीलामी के 99 साल की लीज पर जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन 2014 में गुजरात सरकार ने सार्वजनिक नीलामी के बिना जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद यह मामला लंबे समय तक अटका रहा।साल 2024 में नगर निगम ने पहले प्रस्ताव के खारिज होने का हवाला देते हुए जमीन पर कथित अतिक्रमण हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया। यूसुफ पठान ने इस फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट की सख्ती से अपील वापस लेने तक क्या हुआ?
21 अगस्त 2025 को गुजरात हाईकोर्ट ने यूसुफ पठान की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील दायर की।8 जून 2026 को सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि जब जमीन का कानूनी रूप से आवंटन नहीं हुआ था और जरूरी भुगतान भी नहीं किया गया था, तो उस पर कब्जा कैसे हो गया। अदालत ने इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल किए।यूसुफ पठान के वकील ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को जमीन आवंटित करने से जुड़ी राज्य सरकार की नीति का हवाला देते हुए आगे की दलीलें पेश करने के लिए समय मांगा। इसके बाद 31 अगस्त 2026 को यूसुफ पठान ने हाईकोर्ट से अपनी अपील वापस ले ली।
अब आगे क्या होगा?
राज्य सरकार की मंजूरी के बाद अब गेंद वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति के पाले में है। समिति प्रस्ताव पर विचार करेगी और भुगतान की राशि तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही जमीन के आवंटन और उस पर कब्जा लेने का रास्ता साफ हो सकेगा।फिलहाल, सरकार की मंजूरी को जमीन का आवंटन पूरा हो जाना नहीं माना जा सकता। कीमत, भुगतान और नगर निगम की अंतिम स्वीकृति जैसे अहम चरण अभी बाकी हैं।
निष्कर्ष
यूसुफ पठान के लिए 14 साल से लंबित जमीन विवाद में गुजरात सरकार की मंजूरी एक अहम घटनाक्रम है। लेकिन Yusuf Pathan land allotment case में अंतिम फैसला अभी बाकी है। स्थायी समिति की मंजूरी और भुगतान की शर्तें तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि 20.53 करोड़ रुपये अनुमानित मूल्य वाली इस जमीन का आवंटन किस रूप में पूरा होता है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
यूसुफ पठान को गुजरात सरकार ने किस जमीन के आवंटन की मंजूरी दी है?
वडोदरा के तांदलजा इलाके में उनके घर के पास स्थित 978 वर्ग मीटर के भूखंड के आवंटन को मंजूरी दी गई है।
इस जमीन की अनुमानित कीमत कितनी है?
इस भूखंड की अनुमानित कीमत 20.53 करोड़ रुपये आंकी गई है।
क्या यूसुफ पठान को जमीन का कब्जा मिल गया है?
नगर निगम की स्थायी समिति की अंतिम मंजूरी और भुगतान की राशि तय होने की प्रक्रिया अभी बाकी है।
जमीन आवंटन का विवाद कब शुरू हुआ था?
यूसुफ पठान ने 2012 में इस जमीन के आवंटन की मांग की थी। 2014 में गुजरात सरकार ने बिना सार्वजनिक नीलामी के आवंटन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
यूसुफ पठान ने हाईकोर्ट में अपील कब वापस ली?
उन्होंने 31 अगस्त 2026 को अपनी अपील वापस ले ली थी।