Home / Health / जलवायु परिवर्तन बनेगा ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी? गर्मी और प्रदूषण से लाखों मौतों के बीच विशेषज्ञों की बड़ी मांग !
Health

जलवायु परिवर्तन बनेगा ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी? गर्मी और प्रदूषण से लाखों मौतों के बीच विशेषज्ञों की बड़ी मांग !

Lancet Countdown Report 2026 में 146 विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को Global Health Emergency घोषित करने की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार 2023 में दुनिया भर में गर्मी से जुड़ी करीब 7.10 लाख मौतें हुईं। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु नीतियों में तेजी लाने पर जोर दिया है।

जलवायु परिवर्तन बनेगा ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी? गर्मी और प्रदूषण से लाखों मौतों के बीच विशेषज्ञों की बड़ी मांग !

जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि दुनियाभर में लोगों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। बढ़ता तापमान, भीषण गर्मी और चरम मौसमी घटनाएं लोगों के स्वास्थ्य और जीवन को प्रभावित कर रही हैं। इसी खतरे को देखते हुए The Lancet की नई रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को औपचारिक रूप से Global Health Emergency यानी वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की मांग की है।

28 अक्टूबर 2026 को जारी Lancet Countdown Report 2026 में 146 विशेषज्ञों ने 71 सहयोगी संस्थानों के साथ मिलकर 54 संकेतकों के आधार पर जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंधों का आकलन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन का बढ़ता असर दुनिया की मौजूदा कार्रवाई की गति से कहीं आगे निकल रहा है। यह रिपोर्ट नवंबर में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के COP31 जलवायु सम्मेलन से पहले जारी की गई है।

Global Health Emergency घोषित करने की मांग क्यों उठी?

Lancet Countdown के शोधकर्ताओं का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को रोकने के लिए मौजूदा प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को इसे वैश्विक स्वास्थ्य संकट के रूप में प्राथमिकता देनी चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2025 के दशक में जलवायु परिवर्तन से जुड़े कई स्वास्थ्य जोखिम पिछले दशक की तुलना में तेजी से बढ़े। पेरिस जलवायु समझौते के बाद स्वच्छ ऊर्जा में निवेश, स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े कानूनों में प्रगति हुई है। हालांकि, ये उपलब्धियां बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को पूरी तरह रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

Lancet Countdown की कार्यकारी निदेशक मरीना रोमानेलो ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन से स्वास्थ्य को होने वाला नुकसान बढ़ रहा है और कई मामलों में इसकी गति तेज हो रही है। विशेषज्ञ चाहते हैं कि स्वास्थ्य को उत्सर्जन में कटौती, जलवायु अनुकूलन और वित्तपोषण से जुड़े फैसलों का प्रमुख हिस्सा बनाया जाए।

ध्यान दें: यह विशेषज्ञों की मांग है। इसका अर्थ यह नहीं है कि WHO ने इस रिपोर्ट के आधार पर जलवायु परिवर्तन को औपचारिक रूप से वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है।

Facebook
Facebook

Lancet Countdown Report 2026 के प्रमुख निष्कर्ष

  • वर्ष 2023 में गर्मी से जुड़ी 7.10 लाख मौतें

रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में दुनियाभर में गर्मी से संबंधित अनुमानित 7.10 लाख मौतें हुईं। इनमें 71.5 प्रतिशत से अधिक मौतें मानव गतिविधियों से हुए जलवायु परिवर्तन से जुड़ी थीं। 2016 से 2023 के बीच गर्मी से संबंधित मौतों का सालाना औसत लगभग 5.40 लाख रहा। इस अवधि में करीब 68 प्रतिशत मौतों को जलवायु परिवर्तन से जोड़ा गया। ये वैज्ञानिक अनुमान हैं और इन्हें केवल जलवायु परिवर्तन से हुई प्रत्यक्ष मौतों की दर्ज संख्या नहीं समझना चाहिए।

अत्यधिक गर्मी से निर्जलीकरण, हीट स्ट्रोक और हृदय तथा किडनी संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों को इसका अधिक जोखिम रहता है।

  • जीवाश्म ईंधन और वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य को खतरा

कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इनके दहन से निकलने वाले प्रदूषक वायु की गुणवत्ता को भी प्रभावित करते हैं। वायु प्रदूषण से सांस और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने से जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण दोनों के स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को कम किया जा सकता है।

इसलिए रिपोर्ट में जलवायु कार्रवाई को केवल तापमान वृद्धि सीमित करने तक नहीं, बल्कि लोगों की सेहत को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में भी देखने पर जोर दिया गया है।

  • बाढ़, सूखा और संक्रामक बीमारियों का जोखिम

जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चरम मौसमी घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरी संसाधनों पर दबाव बढ़ा सकती हैं। सूखे से खाद्य उत्पादन और पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जबकि बाढ़ से पेयजल दूषित होने और स्वच्छता व्यवस्था बाधित होने का खतरा रहता है।

तापमान और वर्षा में बदलाव कुछ क्षेत्रों में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के प्रसार की परिस्थितियां भी बदल सकता है। इससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का जोखिम प्रभावित हो सकता है। हालांकि, इसका असर स्थानीय मौसम, स्वास्थ्य सेवाओं और रोकथाम के उपायों पर निर्भर करता है।

इस तरह Climate Change Health Risks में गर्मी के अलावा खाद्य असुरक्षा, संक्रामक बीमारियां और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान भी शामिल हैं।

WHO ने जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य जोखिमों पर क्या कहा?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया की लगभग 3.6 अरब आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जो जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। WHO का अनुमान है कि 2030 से 2050 के बीच कुपोषण, मलेरिया, डायरिया और गर्मी के तनाव जैसे कारणों से जलवायु परिवर्तन हर साल लगभग 2.50 लाख अतिरिक्त मौतों का कारण बन सकता है। यह भविष्य का अनुमान है, न कि पहले से दर्ज मौतों की संख्या।

WHO ने यह भी बताया है कि कमजोर स्वास्थ्य ढांचे वाले क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना अधिक मुश्किल हो सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी, स्वच्छ पानी, पर्याप्त पोषण और समय पर चेतावनी की व्यवस्था जोखिम कम करने में अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, WHO के इन व्यापक स्वास्थ्य संबंधी निष्कर्षों और Lancet Countdown की नई रिपोर्ट में दी गई औपचारिक आपातकाल की मांग को अलग-अलग समझना जरूरी है।

भारत पर जलवायु परिवर्तन का क्या असर पड़ रहा है?

भारत में भीषण गर्मी और हीटवेव लोगों की सेहत, काम करने की क्षमता और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं। Lancet Countdown Report 2026 पर आधारित Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2025 के दौरान भारत में लगभग आधे हीटवेव दिनों के लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार था।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2021 से 2025 के दौरान रात के समय बढ़े तापमान के कारण लोगों को हर साल औसतन करीब 64 घंटे की नींद का नुकसान हुआ। इसके अलावा, मध्यम स्तर की बाहरी शारीरिक गतिविधि के दौरान गर्मी से स्वास्थ्य जोखिम पैदा होने की अवधि सालाना 2,600 घंटे से अधिक रही। यह 1990 के दशक के सालाना औसत से 200 घंटे से ज्यादा है। इन परिस्थितियों में किसानों, निर्माण श्रमिकों, डिलीवरी कर्मचारियों और अन्य बाहरी कामगारों को विशेष जोखिम हो सकता है। हीट एक्शन प्लान, मौसम की समय पर चेतावनी, अस्पतालों की तैयारी और प्रदूषण नियंत्रण भारत के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।

भारत में भीषण गर्मी और हीटवेव लोगों की सेहत, काम करने की क्षमता और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं। Lancet Countdown Report 2026 पर आधारित Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2025 के दौरान भारत में लगभग आधे हीटवेव दिनों के लिए जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार था।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2021 से 2025 के दौरान रात के समय बढ़े तापमान के कारण लोगों को हर साल औसतन करीब 64 घंटे की नींद का नुकसान हुआ। इसके अलावा, मध्यम स्तर की बाहरी शारीरिक गतिविधि के दौरान गर्मी से स्वास्थ्य जोखिम पैदा होने की अवधि सालाना 2,600 घंटे से अधिक रही। यह 1990 के दशक के सालाना औसत से 200 घंटे से ज्यादा है।

इन परिस्थितियों में किसानों, निर्माण श्रमिकों, डिलीवरी कर्मचारियों और अन्य बाहरी कामगारों को विशेष जोखिम हो सकता है। हीट एक्शन प्लान, मौसम की समय पर चेतावनी, अस्पतालों की तैयारी और प्रदूषण नियंत्रण भारत के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।

Climate Change Health Policy में विशेषज्ञ क्या बदलाव चाहते हैं ?

रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों से निपटने के लिए छह प्रमुख प्राथमिकताओं पर जोर दिया गया है।

• उत्सर्जन में कटौती: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना।
• स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी: अस्पतालों और स्वास्थ्यकर्मियों को हीटवेव, बाढ़ और दूसरी चरम मौसमी घटनाओं से निपटने के लिए तैयार करना।
• वैज्ञानिक शोध में निवेश: जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बीमारियों, मौतों और आर्थिक नुकसान का बेहतर आकलन करना।
• जलवायु वित्त बढ़ाना: कमजोर और विकासशील देशों को स्वास्थ्य सुरक्षा तथा जलवायु अनुकूलन के लिए पर्याप्त सहायता देना।
• नीतियों में स्वास्थ्य को प्राथमिकता: ऊर्जा, परिवहन और उत्सर्जन से जुड़े फैसलों में उनके स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों का आकलन करना।
• अंतरराष्ट्रीय सहयोग: WHO, संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न देशों के बीच समन्वय मजबूत करना।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु कार्रवाई का आकलन केवल उत्सर्जन में कमी के आधार पर नहीं होना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि इन कदमों से लोगों की सेहत को कितना लाभ मिल रहा है और सबसे अधिक जोखिम वाले समुदायों तक सुरक्षा पहुंच रही है या नहीं।

COP31 सम्मेलन से पहले रिपोर्ट का महत्व

नवंबर 2026 में होने वाला COP31 संयुक्त राष्ट्र का जलवायु सम्मेलन है, जिसमें देश उत्सर्जन में कटौती, जलवायु अनुकूलन और वित्तपोषण जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे। Lancet Countdown की मांग है कि जलवायु परिवर्तन को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में औपचारिक मान्यता देने की दिशा में कदम उठाए जाएं। इससे स्वास्थ्य को जलवायु नीतियों में अधिक प्राथमिकता देने की अपील को बल मिल सकता है।

हालांकि, रिपोर्ट की सिफारिश अपने आप किसी अंतरराष्ट्रीय आपातकाल की औपचारिक घोषणा या देशों पर नए कानूनी दायित्व लागू नहीं करती।

निष्कर्ष

Lancet Countdown Report 2026 के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में मान्यता देने और स्वास्थ्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा तथा उत्सर्जन में कटौती के लिए तेज कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और सरकारें इस मांग पर क्या कदम उठाती हैं।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Climate Change को Global Health Emergency घोषित करने की मांग क्यों की जा रही है?

अत्यधिक गर्मी, वायु प्रदूषण, बाढ़, सूखा और संक्रामक बीमारियों का जोखिम स्वास्थ्य पर दबाव बढ़ा रहा है। विशेषज्ञ चाहते हैं कि सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इससे निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई करें।

Lancet Countdown Report 2026 में क्या प्रमुख निष्कर्ष सामने आए हैं?

रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन से जुड़े बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन किया गया है। इसके अनुसार, 2023 में गर्मी से संबंधित करीब 7.10 लाख मौतें हुईं, जिनमें 71.5 प्रतिशत से अधिक मौतें मानव-जनित जलवायु परिवर्तन से जुड़ी थीं।

ग्लोबल वार्मिंग से गर्मी के कारण होने वाली मौतों का खतरा कैसे बढ़ता है?

अत्यधिक गर्मी से निर्जलीकरण, हीट स्ट्रोक और हृदय तथा किडनी संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों पर इसका अधिक असर हो सकता है।

जीवाश्म ईंधन और वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?

जीवाश्म ईंधन जलाने से ग्रीनहाउस गैसों के साथ वायु प्रदूषक भी निकलते हैं। इनके संपर्क से सांस और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। स्वच्छ ऊर्जा अपनाने से उत्सर्जन और प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।

क्या WHO ने जलवायु परिवर्तन को Global Health Emergency घोषित कर दिया है?

नहीं। Lancet Countdown Report 2026 में विशेषज्ञों ने औपचारिक मान्यता देने की मांग की है। रिपोर्ट के आधार पर WHO द्वारा ऐसी घोषणा किए जाने की पुष्टि नहीं होती।

Was this article useful?