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Israeli Spyware Ads Investigation : इजरायली कंपनी ने 1.20 लाख वेबसाइटों और 75 हजार ऐप्स पर चलाए जासूसी वाले विज्ञापन, क्या आपकी भी हो रही थी जासूसी?

इजरायली विज्ञापन कंपनी डिस्कवर-टेक पर 1.20 लाख वेबसाइटों और 75 हजार ऐप्स के जरिए यूजर्स की निगरानी और स्पाइवेयर पहुंचाने में मदद के आरोप लगे हैं। जांच में कैंडिरू से संबंध सामने आए, जिसके बाद गूगल समेत कई कंपनियों ने कार्रवाई की।

Israeli Spyware Ads Investigation : इजरायली कंपनी ने 1.20 लाख वेबसाइटों और 75 हजार ऐप्स पर चलाए जासूसी वाले विज्ञापन, क्या आपकी भी हो रही थी जासूसी?

Israeli Spyware Ads Investigation : इजरायली डिजिटल विज्ञापन कंपनी डिस्कवर-टेक पर ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए इंटरनेट यूजर्स की निगरानी करने और कुछ डिवाइसों तक स्पाइवेयर पहुंचाने में मदद करने के आरोप लगे हैं। कनाडा के साइबर रिसर्च समूह सिटिजन लैब और अमेरिकी विज्ञापन सुरक्षा कंपनी कॉन्फिएंट की अलग-अलग जांच में सामने आया कि कंपनी के विज्ञापन 1.20 लाख से ज्यादा वेबसाइटों और 75 हजार ऐप्स तक पहुंचे। इन विज्ञापनों के जरिए यूजर्स की पहचान और ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक किया जा सकता था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, कुछ विज्ञापनों का इस्तेमाल इजरायली स्पाइवेयर कंपनी कैंडिरू के सॉफ्टवेयर को टारगेट डिवाइसों तक पहुंचाने के लिए भी किया गया। यह मामला ऑनलाइन विज्ञापन नेटवर्क के जरिए होने वाली डिजिटल जासूसी और इंटरनेट यूजर्स की प्राइवेसी पर गंभीर सवाल उठाता है।

फोन और ईयरबड्स के विज्ञापनों के पीछे छिपी थी निगरानी की व्यवस्था

सिटिजन लैब के मुताबिक, डिस्कवर-टेक के विज्ञापन सामान्य उत्पादों, जैसे मोबाइल फोन और ईयरबड्स, को प्रमोट करने वाले दिखाई देते थे। लेकिन कंपनी के विज्ञापन नेटवर्क का इस्तेमाल कुछ यूजर्स की पहचान करने, उनकी गतिविधियों को ट्रैक करने और चुनिंदा डिवाइसों पर साइबर हमले में मदद के लिए किया जा सकता था।जांचकर्ताओं के अनुसार, कुछ मामलों में विज्ञापन को वेबसाइट पर लोड होना ही निगरानी शुरू करने के लिए पर्याप्त था। यूजर को विज्ञापन पर क्लिक करने या कोई लिंक खोलने की जरूरत नहीं थी। इस तरह की तकनीक को ‘जीरो-क्लिक’ हमले से जोड़ा जाता है, जिसमें यूजर की सीधी कार्रवाई के बिना डिवाइस को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डिस्कवर-टेक के सभी विज्ञापन स्पाइवेयर वाले थे। कॉन्फिएंट ने कहा कि कैंडिरू से जुड़े संदिग्ध विज्ञापन कंपनी के कुल विज्ञापनों का बहुत छोटा हिस्सा थे।

हर दिन 1 करोड़ विज्ञापन दिखाने का दावा

कॉन्फिएंट के सह-संस्थापक जेरोम डांगू के मुताबिक, डिस्कवर-टेक दुनियाभर में रोजाना कम से कम 1 करोड़ विज्ञापन दिखा रही थी। कंपनी के विज्ञापन नेटवर्क और डेटा साझा करने की व्यवस्था के कारण यूजर्स को विज्ञापन दिखने के बाद भी अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ट्रैक किया जा सकता था।इस प्रक्रिया में ‘कुकी मैचिंग’ नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिए अलग-अलग विज्ञापन कंपनियां अपने पास मौजूद यूजर पहचान से जुड़े डेटा का मिलान कर सकती हैं। इससे किसी व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधियों को विभिन्न वेबसाइटों और ऐप्स के बीच जोड़ना आसान हो सकता है।
डांगू ने अनुमान जताया कि डिस्कवर-टेक के विज्ञापनों का संपर्क दुनियाभर में करोड़ों नहीं, बल्कि सैकड़ों करोड़ लोगों तक पहुंचा हो सकता है। यह शोधकर्ता का अनुमान है, न कि इतने लोगों के डिवाइस में स्पाइवेयर मिलने की पुष्टि।

अल जजीरा के 45 विंडोज डिवाइसों से जुड़ा मामला

सिटिजन लैब ने बताया कि डिस्कवर-टेक के विज्ञापनों के जरिए कैंडिरू का स्पाइवेयर कतर के न्यूज चैनल अल जजीरा के डिवाइसों तक पहुंचाया गया था। रिसर्च समूह के मुताबिक, 2024 से 2025 के बीच चैनल के 45 विंडोज डिवाइसों के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि हुई। समूह ने यह निष्कर्ष अल जजीरा की ओर से साझा किए गए नेटवर्क लॉग की जांच के आधार पर निकाला।अल जजीरा ने अपने बयान में कर्मचारियों को निशाना बनाकर किए गए स्पाइवेयर हमलों की निंदा की और कहा कि वह अपने कर्मचारियों तथा सिस्टम की सुरक्षा के लिए कदम उठा रहा है। चैनल ने यह भी कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
कैंडिरू को अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने 2021 में ब्लैकलिस्ट किया था। अमेरिकी सरकार का आरोप था कि कंपनी का स्पाइवेयर सरकारी अधिकारियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को निशाना बनाने में इस्तेमाल किया गया। नई जांच में कैंडिरू के साथ-साथ अन्य निगरानी कंपनियों के विज्ञापन नेटवर्क तक पहुंच बनाने का भी जिक्र है।

पेंटागन, संयुक्त राष्ट्र और NATO के नेटवर्क तक पहुंचे विज्ञापन

कॉन्फिएंट के मुताबिक, डिस्कवर-टेक के विज्ञापन कई संवेदनशील नेटवर्कों पर दिखाई दिए। इनमें पेंटागन, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) से जुड़े नेटवर्क शामिल बताए गए। सिटिजन लैब ने संयुक्त राष्ट्र, NATO, यूरोपीय आयोग और एक दर्जन से ज्यादा देशों की सरकारी संस्थाओं के नेटवर्क पर भी ऐसे विज्ञापन दिखने के साक्ष्य मिलने की बात कही।रिसर्च में एनवीडिया, ब्रॉडकॉम, माइक्रोन और सैनडिस्क जैसी चिप कंपनियों के नेटवर्क का भी उल्लेख है। इसके अलावा मेक्सिको, इजरायल और यूरोप के कुछ मीडिया संगठनों के नेटवर्क पर भी विज्ञापन दिखे। रिपोर्ट के अनुसार, फलस्तीन के क्षेत्रों में डिस्कवर-टेक के विज्ञापन विशेष रूप से बड़ी संख्या में दिखाई दिए।
हालांकि, किसी संवेदनशील संस्थान के नेटवर्क पर विज्ञापन दिखाई देना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उस संस्था का सिस्टम हैक हो गया। शोधकर्ताओं ने विज्ञापनों की पहुंच और डिवाइसों में स्पाइवेयर की पुष्टि को अलग-अलग निष्कर्षों के रूप में पेश किया है।

Google और दूसरी कंपनियों ने डिस्कवर-टेक को हटाया

जांच सामने आने के बाद ऑनलाइन विज्ञापन उद्योग की कई कंपनियों ने डिस्कवर-टेक के खिलाफ कदम उठाए। गूगल ने कहा कि उसने सिटिजन लैब और कॉन्फिएंट की जांच में सहयोग किया और अपनी नीतियों का व्यवस्थित उल्लंघन करने के कारण डिस्कवर-टेक को अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म से हटा दिया।यूरोप के डिजिटल मार्केटिंग और विज्ञापन उद्योग से जुड़े संगठन IAB यूरोप ने भी ऑडिट में नीतियों के उल्लंघन का पता चलने के बाद कंपनी को अपने मंजूरशुदा वैश्विक वेंडरों की सूची से निलंबित कर दिया। कॉमकास्ट की विज्ञापन तकनीक इकाई बीस्वैक्स ने भी हाल की गतिविधियों के बाद डिस्कवर-टेक को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने की जानकारी दी। रूस की यांडेक्स ने इस मामले पर भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
डिस्कवर-टेक की स्थापना 2020 में हुई थी। कंपनी और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेकल बोनी से संपर्क करने की कोशिशों का जवाब नहीं मिला। रॉयटर्स के मुताबिक, कैंडिरू के मालिकों से भी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। इसलिए जांच में लगाए गए आरोपों पर इन कंपनियों का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

ऑनलाइन विज्ञापन से जासूसी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब डिजिटल विज्ञापन से जुटाए जाने वाले लोकेशन और यूजर डेटा के सुरक्षा जोखिमों पर चिंता बढ़ रही है। विज्ञापन कंपनियां लोगों की पसंद, गतिविधियों और डिवाइस से जुड़े डेटा का इस्तेमाल विज्ञापन दिखाने के लिए करती हैं। लेकिन यही व्यवस्था गलत हाथों में पहुंचने पर लोगों की पहचान उजागर करने या चुनिंदा व्यक्तियों को निशाना बनाने का जरिया बन सकती है।रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग को पहले भी ऐसी सूचनाएं मिली थीं कि युद्ध क्षेत्रों में तैनात अमेरिकी सैनिकों को विज्ञापन तकनीक कंपनियों और डेटा ब्रोकरों से मिले लोकेशन डेटा के जरिए निशाना बनाया गया। इसके बाद अमेरिकी सेना की कुछ शाखाओं ने चुनिंदा डिवाइसों पर विज्ञापन ट्रैकिंग बंद कर दी।
डिस्कवर-टेक मामले ने यह सवाल फिर खड़ा किया है कि विज्ञापन नेटवर्क पर निगरानी कितनी प्रभावी है और यूजर्स की जानकारी का इस्तेमाल किस सीमा तक किया जा सकता है। सामान्य विज्ञापन अपने आप में स्पाइवेयर नहीं होते, लेकिन इस जांच से पता चलता है कि व्यापक विज्ञापन नेटवर्क का दुरुपयोग साइबर जासूसी के लिए किया जा सकता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Israeli Firm Discover-Tech पर Online Ads के जरिए जासूसी करने के क्या आरोप हैं?

सिटिजन लैब और कॉन्फिएंट की जांच के मुताबिक, डिस्कवर-टेक ने ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए यूजर्स की पहचान और गतिविधियों को ट्रैक करने में मदद की। कुछ विज्ञापनों का इस्तेमाल कैंडिरू के स्पाइवेयर को चुनिंदा डिवाइसों तक पहुंचाने के लिए भी किया गया। ये जांचकर्ताओं के निष्कर्ष हैं; कंपनी की ओर से इन आरोपों पर सार्वजनिक जवाब नहीं मिला।

120,000 Websites पर चलने वाले Ads का Spyware से क्या संबंध बताया गया है?

सिटिजन लैब के अनुसार, डिस्कवर-टेक के विज्ञापन 1.20 लाख से ज्यादा वेबसाइटों और 75 हजार ऐप्स तक पहुंचे। इनमें से कुछ विज्ञापनों का इस्तेमाल यूजर्स को ट्रैक करने और कुछ मामलों में स्पाइवेयर पहुंचाने में मदद के लिए किया गया। सभी वेबसाइटों या विज्ञापनों को संक्रमित नहीं बताया गया है।

Spyware क्या होता है और यह किसी Device में कैसे पहुंच सकता है?

स्पाइवेयर ऐसा सॉफ्टवेयर है जो किसी डिवाइस की गतिविधियों या निजी जानकारी पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह किसी सुरक्षा खामी, संदिग्ध फाइल, लिंक या खास तौर पर तैयार किए गए विज्ञापन के जरिए डिवाइस तक पहुंच सकता है। कुछ हमलों में यूजर को लिंक पर क्लिक करने की जरूरत भी नहीं पड़ती।

Zero-Click Spyware Attack क्या है और यह सामान्य Cyberattack से कैसे अलग है?

जीरो-क्लिक स्पाइवेयर हमले में डिवाइस को निशाना बनाने के लिए यूजर का लिंक पर क्लिक करना या फाइल डाउनलोड करना जरूरी नहीं होता। सामान्य साइबर हमलों में अक्सर यूजर की किसी कार्रवाई का फायदा उठाया जाता है, जबकि जीरो-क्लिक हमले में तकनीकी खामियों या अन्य तरीकों से बिना सीधी कार्रवाई के डिवाइस से समझौता किया जा सकता है।

Candiru Spyware का Discover-Tech Investigation में क्या संबंध सामने आया?

जांचकर्ताओं के मुताबिक, डिस्कवर-टेक के कुछ विज्ञापनों का इस्तेमाल कैंडिरू के स्पाइवेयर को डिवाइसों तक पहुंचाने में मदद के लिए किया गया। सिटिजन लैब ने 2024 से 2025 के बीच अल जजीरा के 45 विंडोज डिवाइसों से जुड़े मामले की पुष्टि करने की बात कही। कैंडिरू को अमेरिका ने 2021 में ब्लैकलिस्ट किया था।

इस Spyware Investigation में Al Jazeera के Devices को लेकर क्या खुलासा हुआ है?

सिटिजन लैब के मुताबिक, 2024 से 2025 के बीच अल जजीरा के 45 विंडोज डिवाइसों से छेड़छाड़ हुई, जिसमें कैंडिरू के स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया गया था। रिसर्च समूह ने अल जजीरा की ओर से साझा किए गए नेटवर्क लॉग के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला। चैनल ने हमलों की निंदा करते हुए कर्मचारियों और अपने सिस्टम की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की बात कही।

क्या Online Advertisements के जरिए Mobile और Computer Users की जासूसी हो सकती है?

हां, खास परिस्थितियों में ऑनलाइन विज्ञापन नेटवर्क का इस्तेमाल यूजर्स की पहचान, लोकेशन या गतिविधियों को ट्रैक करने और चुनिंदा डिवाइसों पर हमला करने में किया जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य ऑनलाइन विज्ञापन खतरनाक होते हैं। जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि विज्ञापन नेटवर्क और उससे जुड़े डेटा का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।

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