चीन-भूटान के बीच सीमा विवाद सुलझाने की तेज हुई कोशिश, क्या डोकलाम पर भी बनेगी बात? भारत की क्यों बढ़ेगी नजर
चीन और भूटान ने थिम्फू में 16वें विशेषज्ञ-स्तरीय बैठक के बाद सीमा विवाद सुलझाने की कोशिशों में सकारात्मक गति बनाए रखने पर सहमति जताई है। डोकलाम और भारत के रणनीतिक हितों के कारण इस बातचीत पर नई दिल्ली की नजर बनी रह सकती है।
चीन और भूटान के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिशों में एक बार फिर तेजी के संकेत मिले हैं। China Bhutan Border Dispute Talks के 16वें दौर की विशेषज्ञ-स्तरीय बैठक भूटान की राजधानी थिम्फू में संपन्न हुई। दोनों देशों ने सीमा वार्ता में हुई प्रगति की समीक्षा की और आगे की बातचीत को गति देने पर सहमति जताई। यह घटनाक्रम भारत के लिए भी अहम है, क्योंकि चीन-भूटान सीमा विवाद में डोकलाम जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं, जिनका भारत की सुरक्षा और पूर्वोत्तर से संपर्क के लिहाज से रणनीतिक महत्व है।
चीन-भूटान की बातचीत में क्या निकला?

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) की रिपोर्ट के अनुसार, तीन दिन चली बैठक गुरुवार को समाप्त हुई। बातचीत की सह-अध्यक्षता चीनी प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख और सीमा एवं समुद्री मामलों के विभाग की महानिदेशक होउ यानची तथा भूटान के अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के सचिव लेथो टी. तांगबी ने की। संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने हाल के वर्षों में सीमा वार्ता के दौरान हुई सकारात्मक प्रगति की समीक्षा की। साथ ही, सीमा वार्ता में तेजी लाने के लिए तीन-चरणीय रोडमैप पर हुए समझौता ज्ञापन को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा की।दोनों देशों ने मौजूदा सकारात्मक माहौल को बनाए रखने और अगली विशेषज्ञ-स्तरीय बैठक आपसी सहमति से तय तारीख पर आयोजित करने का फैसला किया। हालांकि, इस बैठक में सीमा विवाद के अंतिम समाधान या किसी औपचारिक सीमा समझौते की घोषणा नहीं हुई।
China Bhutan Border Dispute Talks: सीमा तय करने के लिए क्या है रोडमैप?
चीन और भूटान ने 2023 में सीमा विवाद पर बातचीत तेज करने के लिए तीन-चरणीय रोडमैप के तहत आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। इसका उद्देश्य सीमा वार्ता को आगे बढ़ाना और विवाद के समाधान की दिशा में प्रक्रिया को गति देना है।हालिया विशेषज्ञ बैठक के साथ दोनों देशों की सीमा निर्धारण और सीमांकन पर बनी संयुक्त तकनीकी टीम की चौथी बैठक भी हुई। यह टीम सीमा के नक्शे तैयार करने और सीमा रेखा को चिह्नित करने से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर काम करती है।अप्रैल में बीजिंग में हुई पिछली तकनीकी बैठक में उन क्षेत्रों में सीमा के संभावित निर्धारण पर चर्चा हुई थी, जहां दोनों पक्षों के बीच विवाद नहीं है। ताजा बैठक में दोनों देशों ने रोडमैप के अगले चरण को लेकर सकारात्मक समझ बनने की बात कही।भूटान और चीन के बीच लगभग 477 किलोमीटर लंबी सीमा है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए अब तक 25 दौर की बातचीत हो चुकी है। इसके बावजूद, सीमा का अंतिम समाधान अभी बाकी है।
डोकलाम विवाद में भारत की चिंता क्यों अहम है?
चीन और भूटान के बीच सीमा विवाद का एक संवेदनशील पहलू डोकलाम क्षेत्र है। भूटान इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है, जबकि चीन के साथ इसे लेकर विवाद रहा है। इस इलाके का भारत के लिए रणनीतिक महत्व है, क्योंकि यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब स्थित है।सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है, भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला संकरा क्षेत्र है।वर्ष 2017 में डोकलाम पठार पर चीन की ओर से सड़क निर्माण की कोशिश के बाद भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध पैदा हो गया था। भारत ने इस निर्माण का विरोध किया था, क्योंकि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी थी। बाद में दोनों पक्षों के बीच गतिरोध समाप्त हुआ और चीन ने सड़क निर्माण की योजना छोड़ दी।वर्ष 2020 में चीन ने भूटान के साकतेंग वन्यजीव अभयारण्य पर भी दावा किया था। यह मामला ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी की बैठक में सामने आया, जब चीन ने इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता का विरोध किया। इसके बाद भूटान ने भारत में स्थित चीनी दूतावास के समक्ष औपचारिक राजनयिक विरोध दर्ज कराया।
चीन-भूटान के रिश्ते और भारत पर संभावित असर
चीन और भूटान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन दोनों देश अधिकारियों की नियमित यात्राओं और सीमा वार्ता के माध्यम से संपर्क बनाए रखते हैं। चीन ने अपने 12 पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद सुलझाए हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और भूटान ऐसे दो पड़ोसी देश हैं, जिनके साथ चीन का सीमा विवाद अभी पूरी तरह नहीं सुलझा है।भारत और चीन के बीच भी 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर विवाद है। दोनों देश सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत के 24 दौर कर चुके हैं।यदि चीन और भूटान के बीच सीमा वार्ता में आगे प्रगति होती है, तो हिमालयी क्षेत्र की कूटनीतिक परिस्थितियों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका भारत की सुरक्षा पर क्या प्रभाव होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि किसी संभावित समझौते में विवादित क्षेत्रों और सीमा निर्धारण से जुड़े मुद्दों को कैसे सुलझाया जाता है। अभी दोनों देशों ने अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की है।
निष्कर्ष
China Bhutan Border Dispute Talks में सकारात्मक गति बनाए रखने पर बनी सहमति चीन और भूटान के बीच सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम है। तीन-चरणीय रोडमैप और संयुक्त तकनीकी टीम की बैठकों से बातचीत आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है। लेकिन डोकलाम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों और दोनों देशों के क्षेत्रीय दावों के कारण अंतिम समाधान आसान नहीं होगा। भारत के लिए भी इस प्रक्रिया पर नजर रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिमालयी सीमा की स्थिति और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा उसके रणनीतिक हितों से सीधे जुड़ी हैं।
FAQ (Frequently Asked Questions):
चीन और भूटान के बीच सीमा विवाद क्या है?
चीन और भूटान के बीच सीमा के कुछ हिस्सों को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश बातचीत और तीन-चरणीय रोडमैप के जरिए सीमा निर्धारण और समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
चीन और भूटान के बीच हालिया बैठक में क्या हुआ?
थिम्फू में हुई 16वीं विशेषज्ञ-स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने सीमा वार्ता में हुई प्रगति की समीक्षा की और सकारात्मक गति बनाए रखने पर सहमति जताई। अंतिम सीमा समझौते की घोषणा नहीं हुई।
डोकलाम भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
डोकलाम का रणनीतिक महत्व सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट होने के कारण है। यह कॉरिडोर भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
क्या चीन-भूटान सीमा समझौते का भारत पर असर पड़ सकता है?
संभावित समझौते का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सीमा का निर्धारण कैसे होता है और डोकलाम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को किस तरह सुलझाया जाता है। फिलहाल अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
क्या चीन और भूटान के बीच राजनयिक संबंध हैं?
दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन अधिकारी नियमित संपर्क और सीमा वार्ता के जरिए बातचीत जारी रखते हैं।