Ecommerce Festive Sales फीकी, महंगे स्मार्टफोन-लैपटॉप और घटते डिस्काउंट से ग्राहकों ने खींचे हाथ.!
भारत में Ecommerce Festive Sales 2026 की शुरुआत पिछले साल के मुकाबले कमजोर रही है। Amazon और Flipkart की सेल के शुरुआती 10 दिनों में ऑनलाइन ऑर्डर की डिलीवरी 10–12% कम रही। महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स और कम डिस्काउंट के बीच ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं या सस्ते विकल्प चुन रहे हैं।
भारत में त्योहारी सीजन को ऑनलाइन खरीदारी के लिए सबसे अहम समय माना जाता है। Amazon और Flipkart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष सेल और डिस्काउंट पेश करते हैं। हालांकि, इस साल त्योहारी बिक्री की शुरुआत उम्मीद से कमजोर रही है। स्मार्टफोन, लैपटॉप और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती कीमतों के साथ कम छूट ने ग्राहकों की खरीदारी को प्रभावित किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, Amazon के Great Indian Festival और Flipkart के Big Billion Days के शुरुआती 10 दिनों में ऑनलाइन ऑर्डर की डिलीवरी पिछले साल की समान अवधि से 10–12% कम रही। ई-कॉमर्स कंपनियों, लॉजिस्टिक्स फर्मों और ब्रांडों से जुड़े अधिकारियों ने महंगे उत्पादों और कमजोर मांग को इसकी प्रमुख वजह बताया है।
Ecommerce Festive Sales 2026 में कितनी रही गिरावट?
Datum Intelligence के आंकड़ों के अनुसार, 7 से 10 अक्टूबर 2026 के बीच ऑनलाइन त्योहारी बिक्री का सकल व्यापारिक मूल्य (GMV) लगभग ₹29,800 करोड़ से ₹30,900 करोड़ रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹33,200 करोड़ था। इस तरह शुरुआती चार दिनों में GMV में सालाना आधार पर करीब 7–10% की गिरावट दर्ज की गई।
GMV यानी सकल व्यापारिक मूल्य किसी प्लेटफॉर्म के जरिए बेचे गए सामान के कुल मूल्य को दर्शाता है। यह कंपनी के मुनाफे या शुद्ध राजस्व के बराबर नहीं होता।
शुरुआती आंकड़े भारत में ई-कॉमर्स बिक्री की धीमी रफ्तार की ओर संकेत करते हैं। हालांकि, डिलीवरी की संख्या और GMV अलग-अलग मापदंड हैं। इसलिए दोनों में आई गिरावट की सीधे तुलना नहीं की जानी चाहिए।

महंगे स्मार्टफोन और लैपटॉप ने क्यों प्रभावित की बिक्री?
इस साल त्योहारी खरीदारी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की बढ़ती कीमतें बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की कीमतों में 30–40% तक की बढ़ोतरी हुई है।
इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट की बढ़ती लागत और उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों ने भी कीमतों पर दबाव डाला है। रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े उपकरणों की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप जैसे कंपोनेंट की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसका असर स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों पर पड़ा है।
Counterpoint Research के अनुसार, 2026 की शुरुआती त्योहारी ई-कॉमर्स बिक्री अवधि में स्मार्टफोन की यूनिट बिक्री पिछले साल की समान अवधि से 16% कम रही। वहीं, कंपनी ने पूरे त्योहारी सीजन में स्मार्टफोन की यूनिट बिक्री में सालाना आधार पर 12% गिरावट का अनुमान दिया है। इसके बावजूद औसत बिक्री मूल्य बढ़ने के कारण स्मार्टफोन बाजार का कुल मूल्य 5% बढ़ने की उम्मीद है।
इससे पता चलता है कि ग्राहक कम फोन खरीद सकते हैं, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों के कारण कुल बिक्री मूल्य में वृद्धि संभव है। प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने वाले कुछ ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं या कम कीमत वाले मॉडल चुन रहे हैं।
डिस्काउंट घटने से ग्राहकों को क्यों नहीं मिल रहा ज्यादा फायदा?
त्योहारी सेल के दौरान ग्राहक अक्सर बड़ी छूट की उम्मीद करते हैं। लेकिन इस साल उत्पादों की बढ़ी कीमतों के साथ डिस्काउंट में कमी ने भी खरीदारी को प्रभावित किया है। उद्योग से जुड़े ब्रांड संस्थापकों और अधिकारियों के मुताबिक, इस साल औसत डिस्काउंट पिछले साल की तुलना में 35–40% कम रहे। इसका मतलब यह नहीं है कि हर उत्पाद पर छूट 35–40 प्रतिशत अंक कम हुई है, बल्कि यह पिछले साल के मुकाबले औसत डिस्काउंट में आई कमी को दर्शाता है।
जब किसी उत्पाद की शुरुआती कीमत बढ़ जाती है और उस पर मिलने वाली छूट भी कम हो जाती है, तो ग्राहक को पहले के मुकाबले ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है। ऐसे में ग्राहक केवल ऑफर देखकर खरीदारी करने के बजाय अंतिम कीमत पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
ग्राहक अब कैसे बदल रहे हैं खरीदारी का तरीका?
महंगाई और बढ़ती कीमतों का असर केवल कुल बिक्री के आंकड़ों में नहीं दिख रहा है। ग्राहकों के खरीदारी संबंधी फैसलों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कई ग्राहक महंगे उत्पाद खरीदने का फैसला टाल रहे हैं या कम कीमत वाले विकल्प चुन रहे हैं। इस रुझान के पीछे तीन प्रमुख बदलाव देखे जा सकते हैं।

- खरीदारी टालना: ग्राहक नया स्मार्टफोन, लैपटॉप या घरेलू उपकरण बाद में खरीदने का फैसला कर सकते हैं।
- सस्ते विकल्प चुनना: प्रीमियम मॉडल के बजाय कम कीमत वाले उत्पादों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
- छोटी खरीदारी पर ध्यान देना: बड़े खर्चों के बजाय रोजमर्रा की जरूरतों और कम कीमत वाले सामान पर खर्च किया जा सकता है।
इससे संकेत मिलता है कि ग्राहक कीमत और उपयोगिता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, हर ग्राहक और उत्पाद श्रेणी में मांग का रुझान एक जैसा नहीं है।
Amazon और Flipkart की फेस्टिव सेल का क्या हाल है?
Amazon और Flipkart की त्योहारी सेल भारतीय ई-कॉमर्स बाजार के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। इन अभियानों में स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन और घरेलू सामान की बिक्री पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस साल शुरुआती बिक्री को लेकर कंपनियों और ब्रांडों की ओर से अलग-अलग तस्वीर सामने आई है।
Amazon India के प्रवक्ता ने बताया कि Great Indian Festival 2026 के शुरुआती चरण में प्लेटफॉर्म पर 44 करोड़ से अधिक विजिट दर्ज किए गए। कंपनी के अनुसार, यह उसका अब तक का सबसे बड़ा शुरुआती विजिट आंकड़ा था। इनमें 72% से अधिक विजिट शीर्ष नौ महानगरों के बाहर से आए।कंपनी ने यह भी बताया कि सेल के पहले 24 घंटों में विक्रेताओं ने पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले दोगुने से अधिक यूनिट के ऑर्डर दर्ज किए। इसी अवधि में बेचे गए उत्पादों की कुल संख्या में 70% से अधिक की वृद्धि हुई।
दूसरी ओर, होम और पर्सनल केयर ब्रांड Beco ने बताया कि 8 अक्टूबर को सेल शुरू होने पर उसकी बिक्री सामान्य दिनों के मुकाबले 4–4.5 गुना तक पहुंच गई थी। हालांकि, बाद के दिनों में यह घटकर सामान्य कारोबार के लगभग 1.7–1.8 गुना पर आ गई।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि प्लेटफॉर्म पर आने वाले लोगों की संख्या और लगातार होने वाली खरीदारी का रुझान हमेशा एक जैसा नहीं होता। Amazon ने शुरुआती मांग को मजबूत बताया है, जबकि कुछ ब्रांडों ने शुरुआती तेजी के बाद बिक्री की रफ्तार कम होने की जानकारी दी। Flipkart ने इस विषय पर द इकोनॉमिक टाइम्स के सवालों का जवाब नहीं दिया था।
महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों का कितना असर?
ई-कॉमर्स की बिक्री पर उत्पादों की कीमतों के अलावा व्यापक आर्थिक परिस्थितियों का भी असर पड़ सकता है। सितंबर 2026 में भारत की महंगाई दर बढ़कर 5.54% पहुंच गई। रिपोर्ट में वैश्विक संघर्षों और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को भी महंगाई के दबाव से जोड़ा गया है।
जब परिवारों का रोजमर्रा का खर्च बढ़ता है, तो गैर-जरूरी वस्तुओं पर खर्च करने की गुंजाइश कम हो सकती है। ऐसे में नया फोन, लैपटॉप या टीवी खरीदने का फैसला टल सकता है। इसके अलावा, कच्चे माल की बढ़ती लागत ने कुछ ब्रांडों को प्रचार और डिस्काउंट पर होने वाला खर्च सीमित करने के लिए प्रेरित किया है। इससे त्योहारी ऑफर पहले जितने आकर्षक नहीं रह सकते।
हालांकि, केवल इन कारणों के आधार पर पूरे भारतीय खुदरा बाजार में मांग घटने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अलग-अलग क्षेत्रों और उत्पाद श्रेणियों में स्थिति अलग हो सकती है।
क्या पूरे त्योहारी सीजन में ऑनलाइन बिक्री घटेगी?
शुरुआती बिक्री कमजोर रहने के बावजूद पूरे त्योहारी सीजन की तस्वीर अलग हो सकती है। Datum Intelligence के 2026 Festive Barometer के अनुसार, इस साल भारत की त्योहारी ऑनलाइन बिक्री ₹1.50 लाख करोड़ से ₹1.55 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह 2025 के ₹1.20 लाख करोड़ के स्तर से 25–29% अधिक होगा।
यह अनुमान पूरे सीजन के लिए है, जबकि अक्टूबर के शुरुआती आंकड़े सीमित अवधि की बिक्री से जुड़े हैं। इसलिए इसे वास्तविक बिक्री का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
इस साल दिवाली 8 नवंबर को है, जबकि 2025 में यह 20 अक्टूबर को थी। इस कारण खरीदारी की अवधि भी अलग है। उद्योग से जुड़े कुछ लोगों को उम्मीद है कि दशहरा, करवा चौथ और दिवाली के करीब आने पर मांग में सुधार हो सकता है।
Datum Intelligence का अनुमान यह भी बताता है कि इस साल त्योहारी बिक्री की वृद्धि अधिक ऑर्डर आने से हो सकती है, न कि हर ऑर्डर पर ज्यादा खर्च होने से। यानी कुल बाजार बढ़ने के बावजूद औसत खरीदारी का मूल्य सीमित रह सकता है।
कुछ ब्रांडों को क्विक कॉमर्स से मिली बढ़त
जहां बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर महंगे उत्पादों की मांग दबाव में है, वहीं कुछ ब्रांडों ने क्विक कॉमर्स के माध्यम से अच्छी बिक्री की जानकारी दी है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्यूटी और पर्सनल केयर ब्रांड Pilgrim ने इस त्योहारी सीजन में ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स समेत विभिन्न माध्यमों पर सालाना आधार पर 70–80% वृद्धि की जानकारी दी। कंपनी के संस्थापक के अनुसार, कुछ क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उसकी बिक्री 5–6 गुना तक रही।
यह कंपनी का अपना बताया हुआ प्रदर्शन है। इसे पूरे क्विक कॉमर्स बाजार की वृद्धि नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी यह रुझान बताता है कि सभी उत्पाद श्रेणियों में मांग एक जैसी नहीं है। रोजमर्रा के उपयोग वाले सामान, ब्यूटी उत्पाद और कम कीमत वाली खरीदारी कुछ ब्रांडों के लिए अवसर पैदा कर सकती है।
निष्कर्ष
Ecommerce Festive Sales 2026 की शुरुआत पिछले साल के मुकाबले कमजोर रही है। महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स और कम डिस्काउंट के कारण ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं या किफायती विकल्प चुन रहे हैं। हालांकि, पूरे त्योहारी सीजन में बिक्री बढ़ने का अनुमान है। अंतिम तस्वीर आने वाले हफ्तों की मांग और वास्तविक बिक्री के आंकड़ों से स्पष्ट होगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
भारत में Ecommerce Festive Sales 2026 धीमी क्यों पड़ रही हैं?
शुरुआती सुस्ती के प्रमुख कारणों में महंगे स्मार्टफोन और लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट की बढ़ती लागत, पिछले साल की तुलना में कम डिस्काउंट और ग्राहकों का खरीदारी टालना शामिल हैं।
त्योहारी सीजन में बढ़ती कीमतों का ऑनलाइन खरीदारी पर क्या असर पड़ रहा है?
बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक महंगे उत्पाद खरीदने से पहले अधिक सोच रहे हैं। कुछ ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं, जबकि कुछ कम कीमत वाले मॉडल चुन रहे हैं।
क्या महंगाई के कारण ग्राहक खरीदारी कम कर रहे हैं?
बढ़ते घरेलू खर्च के कारण गैर-जरूरी खरीदारी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इसका असर हर ग्राहक और उत्पाद श्रेणी पर एक जैसा नहीं है।
Amazon और Flipkart की फेस्टिव सेल पर क्या असर पड़ा है?
द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, शुरुआती 10 दिनों में ऑनलाइन ऑर्डर की डिलीवरी पिछले साल से 10–12% कम रही। वहीं, Amazon ने अपनी सेल के शुरुआती चरण में रिकॉर्ड विजिट और मजबूत शुरुआती ऑर्डर की जानकारी दी।
ई-कॉमर्स कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए क्या कर रही हैं?
कंपनियां त्योहारी सेल और विशेष ऑफर के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं। किफायती उत्पाद और सुविधाजनक डिलीवरी भी खरीदारी के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या डिस्काउंट और ऑफर के बावजूद ऑनलाइन बिक्री में गिरावट आ रही है?
शुरुआती आंकड़ों में GMV और डिलीवरी की संख्या में कमजोरी सामने आई है। उद्योग अधिकारियों के अनुसार, औसत डिस्काउंट भी पिछले साल से कम रहे हैं। हालांकि, पूरे त्योहारी सीजन की अंतिम बिक्री का आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है।