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India Maldives Currency Swap Facility : भारत ने बढ़ाई मालदीव की ₹3000 करोड़ की करेंसी स्वैप सुविधा, क्या मुइज़्ज़ू सरकार को आर्थिक संकट से बचाएगा भारत?

भारत ने मालदीव की ₹3,000 करोड़ की करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। RBI और मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी के 2024 के समझौते के तहत यह मदद विदेशी मुद्रा की जरूरतें पूरी करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगी।

India Maldives Currency Swap Facility : भारत ने बढ़ाई मालदीव की ₹3000 करोड़ की करेंसी स्वैप सुविधा, क्या मुइज़्ज़ू सरकार को आर्थिक संकट से बचाएगा भारत?

India Maldives Currency Swap Facility : भारत ने मालदीव सरकार की ₹30 अरब यानी 3,000 करोड़ रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। यह फैसला भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में मालदीव के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है। इस सुविधा से मालदीव को जरूरत के समय भारतीय रुपये उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे उसे नकदी की कमी और विदेशी मुद्रा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।भारत सरकार ने शुक्रवार को जारी आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी। यह सुविधा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी के बीच अक्टूबर 2024 में हुए करेंसी स्वैप समझौते के तहत दी जा रही है। उस समय मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे।

अप्रैल में मिली थी ₹30 अरब की पहली सुविधा

भारत और मालदीव के बीच करेंसी स्वैप की पहली ₹30 अरब की राशि 23 अप्रैल 2026 को उपलब्ध कराई गई थी। अब इस सुविधा को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य मालदीव की वित्तीय जरूरतों के समय उसे भारतीय रुपये की उपलब्धता सुनिश्चित करना और उसकी वित्तीय स्थिरता को समर्थन देना है।यह समझौता सार्क देशों के लिए करेंसी स्वैप व्यवस्था के तहत किया गया है। इसके 2024-27 के फ्रेमवर्क में अनुकूल ब्याज दरों और अन्य रियायतों जैसी सुविधाएं शामिल हैं। RBI ने 2012 में यह फ्रेमवर्क शुरू होने के बाद से मालदीव को कुल 1.1 अरब डॉलर से अधिक की करेंसी स्वैप सहायता दी है।
करेंसी स्वैप व्यवस्था में दो देशों के केंद्रीय बैंक या अधिकृत मौद्रिक संस्थान तय शर्तों के तहत एक-दूसरे की मुद्रा उपलब्ध कराते हैं। इससे किसी देश को भुगतान और विदेशी मुद्रा की जरूरतों के समय अस्थायी राहत मिल सकती है। यह सामान्य अनुदान नहीं, बल्कि तय शर्तों और अवधि वाली वित्तीय व्यवस्था होती है।

ट्रेजरी बॉन्ड और बिल के जरिए भी भारत ने की मदद

भारत ने करेंसी स्वैप सुविधा के अलावा मालदीव की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए उसके सरकारी बॉन्ड और ट्रेजरी बिल में भी निवेश किया है। भारत ने मालदीव के दो लंबी अवधि वाले ट्रेजरी बॉन्ड खरीदे थे, जिनकी कीमत क्रमशः 250 मिलियन डॉलर और 100 मिलियन डॉलर थी।इसके अलावा भारत ने 150 मिलियन डॉलर के तीन ट्रेजरी बिल भी खरीदे थे। इन बिलों का भुगतान मालदीव ने कर दिया है। इन प्रतिभूतियों पर लगा 42.8 मिलियन डॉलर का ब्याज भारत सरकार ने चुकाया था।
सरकारी बयान के मुताबिक, करेंसी स्वैप सुविधा और सरकारी प्रतिभूतियों में भारत के निवेश ने मालदीव की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को भी मजबूती मिली है।

मालदीव के लिए क्यों अहम है भारत की मदद?

मालदीव हिंद महासागर में भारत का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी है। उसकी अर्थव्यवस्था पर्यटन और बाहरी वित्तीय प्रवाह पर काफी निर्भर करती है। ऐसे में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता और समय पर भुगतान करना उसके लिए महत्वपूर्ण है। करेंसी स्वैप जैसी सुविधा जरूरत के समय वित्तीय दबाव कम करने में मदद कर सकती है।भारत की ओर से यह सहायता केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। मालदीव की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच स्थिर आर्थिक संबंध इस व्यापक साझेदारी का हिस्सा हैं।
भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का उद्देश्य पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ाना है। इसके साथ ही भारत की ‘महासागर’ यानी MAHASAGAR - म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन - की सोच भी क्षेत्रीय सुरक्षा और साझा विकास पर जोर देती है।
अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए संयुक्त दृष्टि अपनाई थी। भारत सरकार के ताजा बयान में इसी साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है। करेंसी स्वैप सुविधा को इसी दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा सकता है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

India ने Maldives के लिए ₹30 Billion Currency Swap Facility को Rollover करने की मंजूरी क्यों दी?

भारत ने मालदीव की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने, जरूरत के समय भारतीय रुपये उपलब्ध कराने और दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए इस सुविधा को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति का भी हिस्सा है।

India-Maldives Currency Swap Facility क्या है और यह कैसे काम करती है?

यह RBI और मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी के बीच तय शर्तों के तहत बनाई गई वित्तीय व्यवस्था है। इसके जरिए मालदीव को जरूरत के समय भारतीय रुपये मिल सकते हैं, जिससे भुगतान और नकदी से जुड़ी जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है।

₹30 Billion की Currency Swap Facility से Maldives को क्या फायदा होगा?

इस सुविधा से मालदीव को भारतीय रुपये की उपलब्धता बढ़ाने और वित्तीय दबाव के समय नकदी की जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी। इससे देश की वित्तीय स्थिरता को भी समर्थन मिल सकता है।

RBI और Maldives Monetary Authority की इस Agreement में क्या भूमिका है?

RBI भारत की ओर से और मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी मालदीव की ओर से इस व्यवस्था से जुड़े संस्थान हैं। दोनों के बीच अक्टूबर 2024 में सार्क देशों के करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क के तहत समझौता हुआ था।

India की Currency Swap Facility कितने समय के लिए दी जाती है?

भारत और मालदीव की यह व्यवस्था 2024-27 के करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क के तहत है। हालांकि, किसी विशेष राशि की उपलब्धता, उसकी अवधि और भुगतान की शर्तें संबंधित समझौते के प्रावधानों पर निर्भर करती हैं।

India-Maldives Currency Swap Agreement का दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर क्या असर होगा?

इससे मालदीव को वित्तीय जरूरतों के समय मदद मिल सकती है और भारत के साथ उसका आर्थिक सहयोग मजबूत हो सकता है। यह समझौता दोनों देशों की व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी का भी हिस्सा है।

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