Nuclear power AI data centers : अमेरिका AI डेटा सेंटर्स के लिए 3 बंद परमाणु प्लांट फिर शुरू करेगा, क्या AI की बिजली जरूरत पूरी हो पाएगी?
अमेरिका AI डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली मांग पूरी करने के लिए तीन बंद परमाणु बिजली संयंत्र दोबारा शुरू करेगा। ऊर्जा विभाग 4.4 अरब डॉलर तक का कर्ज दे रहा है। इनसे 2.25 गीगावाट बिजली मिलने की उम्मीद है, लेकिन सुरक्षा और लागत पर सवाल हैं।
Nuclear power AI data centers : अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बड़े डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन तीन बंद परमाणु बिजली संयंत्रों को दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रहा है। इन परियोजनाओं पर अमेरिकी ऊर्जा विभाग 4.4 अरब डॉलर तक का कर्ज दे रहा है। तीनों प्लांट दोबारा चालू हुए तो इनसे कुल 2.25 गीगावाट बिजली मिल सकती है, जो करीब 20 लाख घरों और कारोबारों की जरूरत पूरी करने के बराबर है। हालांकि, पुराने संयंत्रों की सुरक्षा, मरम्मत की लागत और सरकारी पैसे के इस्तेमाल को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
AI डेटा सेंटरों के लिए परमाणु बिजली पर दांव
अमेरिका में AI मॉडल, क्लाउड सेवाओं और डेटा सेंटरों का विस्तार तेजी से हो रहा है। इन केंद्रों में बड़ी संख्या में सर्वर लगातार चलते हैं, जिन्हें बिजली की स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति चाहिए। इसी वजह से अमेरिकी सरकार परमाणु ऊर्जा को फिर से बढ़ावा दे रही है। परमाणु बिजली से बड़े पैमाने पर बिजली बनाई जा सकती है और बिजली उत्पादन के दौरान कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है।अमेरिकी ऊर्जा विभाग मिशिगन के पैलिसेड्स प्लांट, पेंसिल्वेनिया के क्रेन क्लीन एनर्जी सेंटर और आयोवा के डुआने अर्नोल्ड एनर्जी सेंटर को दोबारा चालू करने के लिए वित्तीय सहायता दे रहा है। इनकी संयुक्त क्षमता 2.25 गीगावाट है। सरकार का उद्देश्य AI और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बढ़ती मांग के साथ बिजली ग्रिड को मजबूत करना भी है।

तीनों प्लांट पहले क्यों बंद हुए थे?
तीनों संयंत्र अपने लाइसेंस की अवधि समाप्त होने से पहले बंद कर दिए गए थे। उस समय इनके उत्पादन की लागत को अधिक माना जा रहा था। अब बिजली की मांग बढ़ने और टेक कंपनियों के लंबे समय के समझौतों के कारण इन्हें दोबारा शुरू करने की योजना बनी है।हालांकि, किसी वाणिज्यिक परमाणु रिएक्टर के स्थायी रूप से बंद करने और उसे हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद दोबारा बिजली उत्पादन करने का यह एक असाधारण प्रयास है। लंबे समय तक बंद रहे कुछ रिएक्टर पहले शुरू किए गए हैं, लेकिन स्थायी बंदी की प्रक्रिया में पहुंच चुके संयंत्र को दोबारा चालू करना अधिक जटिल होता है।
मिशिगन विश्वविद्यालय के परमाणु इंजीनियरिंग विशेषज्ञ टॉड एलन के मुताबिक, पहले से मौजूद संयंत्र को दोबारा शुरू करना नया बड़ा रिएक्टर बनाने की तुलना में जल्दी और कम खर्चीला हो सकता है। हालांकि, इसके लिए कर्मचारियों की वापसी, प्रशिक्षण, उपकरणों की जांच, रखरखाव, ईंधन की व्यवस्था और नियामक मंजूरी जरूरी है।
पैलिसेड्स प्लांट सबसे आगे, मार्च 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य
मिशिगन स्थित पैलिसेड्स परमाणु प्लांट 1971 से 2022 तक संचालित रहा। इसके मालिक एंटरजी ने 2022 में परमाणु ऊर्जा कारोबार से बाहर निकलने का फैसला किया था, जबकि प्लांट का ऑपरेटिंग लाइसेंस 2031 तक वैध था। बाद में होल्टेक इंटरनेशनल ने इसे खरीदा और इसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन ऐसे कदम नहीं उठाए गए थे जिन्हें वापस लेना असंभव हो।मिशिगन प्रशासन ने परमाणु ऊर्जा से जुड़े रोजगार और बिजली उत्पादन को बनाए रखने के लिए प्लांट दोबारा शुरू करने का समर्थन किया। 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने इसके लिए 1.5 अरब डॉलर से अधिक की ऋण गारंटी को मंजूरी दी थी। ट्रम्प प्रशासन ने भी वित्तीय सहायता जारी रखी। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के मुताबिक, इस परियोजना के लिए 1.52 अरब डॉलर तक की ऋण गारंटी तय की गई है।
होल्टेक ने अगस्त में रिएक्टर में परमाणु ईंधन भरने की प्रक्रिया शुरू की थी। यह रिएक्टर को दोबारा चालू करने से पहले का अहम चरण है। लेकिन ईंधन की एक असेंबली अपनी सीधी स्थिति से झुक गई, जिसके बाद कंपनी ने कारण की जांच के लिए प्रक्रिया रोक दी। बिजली खरीद समझौतों के तहत प्लांट को मार्च 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी का कहना है कि इसके दोबारा संचालन से बिजली की स्थिर आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
माइक्रोसॉफ्ट और गूगल भी खरीदेंगी परमाणु बिजली
पेंसिल्वेनिया में थ्री माइल आइलैंड के क्रेन क्लीन एनर्जी सेंटर को दोबारा शुरू करने की योजना माइक्रोसॉफ्ट के साथ हुए समझौते से जुड़ी है। 1979 में इसी स्थल पर अमेरिका की सबसे गंभीर वाणिज्यिक परमाणु दुर्घटनाओं में से एक हुई थी। उस दुर्घटना में एक रिएक्टर नष्ट हो गया था, जबकि दूसरा काम करने की स्थिति में बचा था।बाद में 2019 में कॉन्स्टेलेशन एनर्जी ने बिजली उत्पादन में नुकसान और राज्य सरकार से सब्सिडी न मिलने के कारण काम कर रहे रिएक्टर को भी बंद कर दिया। कंपनी ने 2024 में घोषणा की कि वह माइक्रोसॉफ्ट के साथ 20 साल के समझौते के तहत इसे दोबारा शुरू करने पर 1.6 अरब डॉलर खर्च करेगी। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने परियोजना के लिए 1 अरब डॉलर का कर्ज दिया है। कंपनी का लक्ष्य 2027 में बिजली उत्पादन फिर शुरू करना है।
आयोवा का डुआने अर्नोल्ड एनर्जी सेंटर राज्य का एकमात्र परमाणु बिजली संयंत्र है। इसने 1975 में काम शुरू किया था और अक्टूबर 2020 में स्थायी रूप से बंद होने वाला था। लेकिन अगस्त 2020 में एक शक्तिशाली तूफान से नुकसान होने के बाद इसे पहले ही बंद कर दिया गया। उस समय पवन ऊर्जा जैसे सस्ते विकल्प अपनाने से उपभोक्ताओं को बिजली खर्च में करीब 30 करोड़ डॉलर की बचत होने का अनुमान था।
अब संयंत्र की मालिक कंपनी नेक्स्टएरा एनर्जी गूगल के साथ मिलकर इसे दोबारा शुरू करना चाहती है। कंपनी का लक्ष्य 2029 की शुरुआत तक बिजली उत्पादन बहाल करना है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने सितंबर 2026 में इसके लिए 1.9 अरब डॉलर तक के कर्ज को अंतिम रूप दिया। गूगल के साथ लंबे समय का बिजली खरीद समझौता इस परियोजना को आर्थिक आधार देता है।
पुराने प्लांट शुरू करने पर सुरक्षा और खर्च की चिंता
तीनों परमाणु संयंत्रों को दोबारा चालू करने को लेकर विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं है। यूनियन ऑफ कंसर्न्ड साइंटिस्ट्स के परमाणु सुरक्षा निदेशक एडविन लाइमन का कहना है कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल सुरक्षा जोखिमों को दूर करने के लिए किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, अमेरिका के ज्यादातर परमाणु प्लांट 1970 से 1990 के बीच बने थे और उन्हें उस समय अनुमानित प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था। जलवायु परिवर्तन के कारण अब अत्यधिक मौसम की घटनाएं अधिक गंभीर हो रही हैं, इसलिए सुरक्षा मानकों की नए सिरे से जांच जरूरी है।दूसरी ओर, हेरिटेज फाउंडेशन के ऊर्जा विशेषज्ञ जैक स्पेंसर ने इन परियोजनाओं के लिए संघीय वित्तीय मदद का विरोध किया है। उनका तर्क है कि जब कंपनियों को बिजली खरीदने वाले ग्राहक मिल रहे हैं और मांग भी मजबूत है, तो सरकारी धन देने की जरूरत नहीं है। इसके विपरीत, अटलांटिक काउंसिल की परमाणु ऊर्जा नीति पहल की प्रमुख जेनिफर गॉर्डन का मानना है कि बिजली की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारी वित्तीय सहायता उपयोगी हो सकती है।
वर्ल्ड न्यूक्लियर एसोसिएशन का कहना है कि बंद हो चुके संयंत्रों को दोबारा चालू करने का स्वागत किया जाना चाहिए, हालांकि बेहतर यह होता कि उन्हें समय से पहले बंद ही नहीं किया जाता। संगठन के मुताबिक, पैलिसेड्स दुनिया का ऐसा पहला परमाणु प्लांट बन सकता है जो स्थायी बंदी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद दोबारा बिजली उत्पादन करे। कनाडा, आर्मेनिया, बेल्जियम, जापान, भारत और दक्षिण कोरिया में भी लंबे समय तक बंद रहे कुछ रिएक्टरों को दोबारा चालू किया गया है या उनका नवीनीकरण हुआ है।
अमेरिका की यह योजना दिखाती है कि AI और डेटा सेंटरों के विस्तार के साथ बिजली की मांग अब ऊर्जा नीति का अहम मुद्दा बन गई है। तीनों प्लांट दोबारा चालू हुए तो बड़ी मात्रा में स्थिर और कम-कार्बन बिजली उपलब्ध हो सकती है। लेकिन अंतिम सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां सुरक्षा, मरम्मत और लाइसेंस से जुड़ी शर्तें कितनी प्रभावी ढंग से पूरी कर पाती हैं।
FAQ (Frequently Asked Questions):
US सरकार तीन बंद Nuclear Power Plants को दोबारा शुरू करने का समर्थन क्यों कर रही है?
AI डेटा सेंटरों, क्लाउड सेवाओं और मैन्युफैक्चरिंग की वजह से अमेरिका में बिजली की मांग बढ़ रही है। बंद परमाणु प्लांट दोबारा शुरू करने से अपेक्षाकृत जल्दी बड़ी मात्रा में स्थिर और कम-कार्बन बिजली मिल सकती है।
AI Data Centers को चलाने के लिए Nuclear Energy की जरूरत क्यों बढ़ रही है?
AI डेटा सेंटरों में हजारों सर्वर लगातार चलते हैं और उन्हें दिन-रात बिजली चाहिए। परमाणु ऊर्जा मौसम पर कम निर्भर करती है और लगातार बिजली उत्पादन कर सकती है, इसलिए इसे डेटा सेंटरों के लिए उपयोगी विकल्प माना जा रहा है।
अमेरिका में दोबारा शुरू किए जाने वाले तीन Nuclear Plants कौन-से हैं?
ये मिशिगन का पैलिसेड्स प्लांट, पेंसिल्वेनिया का क्रेन क्लीन एनर्जी सेंटर और आयोवा का डुआने अर्नोल्ड एनर्जी सेंटर हैं। इनकी कुल क्षमता 2.25 गीगावाट है।
Palisades Nuclear Plant को दोबारा शुरू करने की योजना कब तक है?
पैलिसेड्स प्लांट को मार्च 2027 तक दोबारा चालू करने का लक्ष्य है। हालांकि, ईंधन भरने की प्रक्रिया के दौरान तकनीकी समस्या सामने आने के बाद जांच की गई थी। अंतिम शुरुआत जरूरी सुरक्षा और नियामक मंजूरियों पर निर्भर करेगी।
Microsoft और Google के AI Data Centers को Nuclear Power से कैसे फायदा हो सकता है?
माइक्रोसॉफ्ट का पेंसिल्वेनिया के क्रेन क्लीन एनर्जी सेंटर के साथ 20 साल का समझौता है, जबकि गूगल ने आयोवा के डुआने अर्नोल्ड प्लांट से बिजली खरीदने के लिए समझौता किया है। इससे दोनों कंपनियों को डेटा सेंटरों के लिए लंबे समय तक स्थिर बिजली मिलने में मदद मिल सकती है।
Nuclear Power Plants को Restart करने के लिए US सरकार कितनी Financial Assistance दे रही है?
अमेरिकी ऊर्जा विभाग तीनों परियोजनाओं के लिए कुल 4.4 अरब डॉलर तक का कर्ज दे रहा है। इसमें पैलिसेड्स के लिए 1.52 अरब डॉलर तक की ऋण गारंटी, क्रेन के लिए 1 अरब डॉलर और डुआने अर्नोल्ड के लिए 1.9 अरब डॉलर तक का कर्ज शामिल है।
AI Data Centers के लिए Nuclear Energy इस्तेमाल करने के क्या फायदे और चुनौतियां हैं?
परमाणु ऊर्जा लगातार बिजली दे सकती है और बिजली उत्पादन के दौरान कार्बन उत्सर्जन कम रहता है। लेकिन पुराने संयंत्रों की मरम्मत, सुरक्षा मानकों की जांच, परमाणु ईंधन की व्यवस्था, लाइसेंस और सरकारी वित्तीय सहायता से जुड़े सवाल इसकी प्रमुख चुनौतियां हैं।