India 100% Tariff Risk : रूस से तेल खरीदने वालों पर ट्रंप का 100% टैरिफ, क्या भारत पर भी पड़ेगी मार?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले 10 दिनों में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का फैसला ले सकते हैं। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, भारत को छूट मिलेगी या नहीं, यह अभी तय नहीं है। इस बीच, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत जारी है और बड़े मुद्दों पर सहमति बनने का दावा किया गया है।
India 100% Tariff Risk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले करीब 10 दिनों में भारत समेत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने को लेकर फैसला ले सकते हैं। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 15 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह जानकारी दी। हालांकि, भारत पर टैरिफ लगना अभी तय नहीं है। ट्रम्प को यह भी फैसला करना है कि किन देशों पर कार्रवाई होगी और भारत को कोई छूट मिलेगी या नहीं। इस बीच, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत जारी है और गोर ने कहा है कि बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई की तैयारी
अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए नया कानून बनाया है। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026’ पर ट्रम्प ने 18 सितंबर को हस्ताक्षर किए थे। यह कानून राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वालों पर कार्रवाई करने का अधिकार देता है। इसके तहत 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। हालांकि, कानून बनने का मतलब यह नहीं है कि सभी संबंधित देशों पर अपने आप टैरिफ लागू हो जाएगा। अंतिम फैसला राष्ट्रपति को लेना है।सर्जियो गोर के मुताबिक, अमेरिकी कानून के तहत राष्ट्रपति को कानून पारित होने के 30 दिनों के भीतर इस संबंध में निर्णय लेना है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प अगले करीब 10 दिनों में फैसला कर सकते हैं। अमेरिकी सीनेट में इस कानून को 100 में से 86 सांसदों का समर्थन मिला था।
गोर ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिका का उद्देश्य रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में दबाव बनाना है, न कि सिर्फ रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों को सजा देना। उन्होंने यह भी माना कि देश अपनी ऊर्जा आपूर्ति अचानक बंद नहीं कर सकते और इस मामले में सहयोगियों के साथ मिलकर आगे बढ़ना जरूरी है।

भारत को छूट मिलेगी या नहीं, ट्रम्प करेंगे फैसला
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में प्रस्तावित टैरिफ का असर भारतीय निर्यातकों और अमेरिका के साथ व्यापार पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रम्प भारत पर कार्रवाई करेंगे या उसे किसी तरह की छूट देंगे।जब सर्जियो गोर से पूछा गया कि क्या भारत को प्रतिबंधों से राहत मिल सकती है, तो उन्होंने कहा कि इसका फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प ही करेंगे। उन्होंने भारत को किसी तरह की निश्चित छूट मिलने का संकेत नहीं दिया।
भारत की ओर से पहले भी कहा गया है कि ऊर्जा खरीद का फैसला राष्ट्रीय हित और देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 140 करोड़ से ज्यादा लोगों की ऊर्जा जरूरतें पूरी करना उसकी प्राथमिकता है और भारत अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीदने की नीति जारी रखेगा।
इसलिए India 100% Tariff Risk फिलहाल एक संभावित खतरा है, न कि भारत पर लागू हो चुका नया टैरिफ। इसका वास्तविक असर ट्रम्प के फैसले और उसके बाद जारी होने वाली शर्तों पर निर्भर करेगा।
ट्रेड डील पर बोले- बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है
टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के बीच सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में काफी प्रगति हुई है और बड़े मुद्दों तथा व्यापक ढांचे पर सहमति बन चुकी है। अब कुछ छोटे मुद्दों पर बातचीत बाकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आगे की चर्चा के दौरान नए सवाल सामने आ सकते हैं।

गोर के मुताबिक, दोनों देशों के बीच करीब डेढ़ साल से बातचीत चल रही है। उन्होंने इसे सामान्य व्यापार समझौतों की तुलना में तेज प्रक्रिया बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद पहले की व्यापार व्यवस्था के कुछ हिस्सों पर दोबारा काम करना पड़ा, जिसमें उसे आधार देने वाले कानून को असंवैधानिक ठहराया गया था।भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने पर भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में कारोबार के लिए ज्यादा स्पष्टता मिल सकती है। लेकिन जब तक समझौते की शर्तें और टैरिफ से जुड़े फैसले स्पष्ट नहीं होते, तब तक निर्यातकों के लिए स्थिति पूरी तरह तय नहीं मानी जा सकती।
डिफेंस, IT और चिप मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग बढ़ाने की तैयारी
सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ डिफेंस, आईटी, डेटा सेंटर और चिप मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में कारोबार और निवेश बढ़ाना चाहता है। उनके अनुसार, अमेरिकी कंपनियों का भारत में निवेश दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है और इससे अमेरिका में भी रोजगार पैदा करने में मदद मिल सकती है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर भी गोर ने भारत की संभावनाओं पर भरोसा जताया। उनका कहना था कि भारत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट का बड़ा केंद्र बन सकता है। भारतीय कंपनियों और अमेरिका की प्रमुख टेक कंपनियों के बीच साझेदारी से दोनों देशों को लाभ मिल सकता है।
इस तरह एक तरफ अमेरिका रूस से ऊर्जा खरीदने के मामले में भारत पर दबाव बनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ दोनों देश व्यापार और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में ट्रम्प का फैसला इस रिश्ते की दिशा तय करने में अहम हो सकता है।
भारत के एक्सपोर्ट कारोबार में बड़ी बाधा बन सकता है टैरिफ
निर्यातकों के मुताबिक, अमेरिका की ओर से इस तरह का भारी शुल्क लगाए जाने पर भारत से वहां भेजे जाने वाले सामान की प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं और उनकी मांग प्रभावित हो सकती है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के अध्यक्ष एससी रहलन ने पहले कहा था कि इंजीनियरिंग सेक्टर के कई भारतीय निर्यातकों का अमेरिका में बड़ा कारोबार है। उन्होंने कहा कि नए शुल्क पर फैसला लेते समय अमेरिकी सरकार को इन कारोबारी संबंधों और उनके संभावित प्रभावों को ध्यान में रखना चाहिए।
मुंबई स्थित टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर शरद सराफ ने भी चिंता जताई थी। उनके मुताबिक, टैरिफ के अलावा कारोबार के माहौल में बनी अनिश्चितता भी कंपनियों को प्रभावित करती है।
ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (TPCI) के चेयरमैन मोहित सिंघला ने भी अमेरिकी कदम को भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी चिंता का विषय बताया था।
भारतीय टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग पर ज्यादा असर की आशंका
अमेरिका भारतीय टेक्सटाइल और परिधान निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ लगने पर इस सेक्टर पर खास असर पड़ सकता है। उद्योग संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने भी एक प्रेस रिलीज में चेतावनी दी थी कि अमेरिकी शुल्क से भारत के टेक्सटाइल और परिधान निर्यात को गंभीर नुकसान हो सकता है।इसकी वजह यह है कि ज्यादा टैरिफ लगने पर अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय कपड़े और परिधान महंगे हो सकते हैं। इससे वे दूसरे देशों के सप्लायरों की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि टैरिफ किन उत्पादों पर लागू होता है और दूसरे देशों के उत्पादों पर कितना शुल्क लगाया जाता
है।
भारत के टेक्सटाइल और परिधान निर्यात में हाल के महीनों में मिला-जुला रुझान देखने को मिला है। अगस्त 2026 में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले डॉलर के लिहाज से कुल निर्यात 6.39% बढ़ा।
टेक्सटाइल निर्यात में 13.03% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि परिधान निर्यात 2.74% गिर गया। वहीं, अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान टेक्सटाइल निर्यात 6.94% बढ़ा, लेकिन परिधान निर्यात में 9.10% की गिरावट आई।
इस अवधि में टेक्सटाइल और परिधान का कुल निर्यात सालाना आधार पर 0.24% कम रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि दोनों क्षेत्रों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं है। ऐसे में अमेरिकी बाजार में अतिरिक्त शुल्क लगने पर अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों पर इसका असर भी अलग हो सकता है।
टैरिफ के ऐलान के बाद ही साफ होगी तस्वीर
भारतीय निर्यातकों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी सरकार के अंतिम फैसले को लेकर बनी अनिश्चितता है। टैरिफ की दर, उत्पादों का दायरा और लागू होने की तारीख स्पष्ट होने के बाद ही उद्योगवार नुकसान का आकलन किया जा सकेगा।अगर 100% टैरिफ व्यापक रूप से भारतीय उत्पादों पर लागू होता है, तो इससे अमेरिका में भारतीय सामान की कीमत बढ़ सकती है और निर्यातकों के ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, फिलहाल इसे संभावित असर के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम प्रभाव अमेरिकी सरकार की घोषित नीति और उसके वास्तविक दायरे पर निर्भर करेगा।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Trump भारत पर 100% Tariff लगाने का फैसला कब तक ले सकते हैं?
भारत पर 100% टैरिफ लागू करने की कोई निश्चित तारीख अभी पुष्टि के साथ सामने नहीं आई है।
अमेरिका भारत पर 100% Tariff लगाने की धमकी क्यों दे रहा है?
अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करे, ताकि रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई पर दबाव पड़े।
Trump के 100% Tariff का भारत के Export पर क्या असर पड़ सकता है?
भारतीय सामान अमेरिका में महंगा हो सकता है, जिससे ऑर्डर, निर्यात और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है।
भारत के किन उद्योगों पर अमेरिकी Tariffs का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है?
टेक्सटाइल, गारमेंट्स, रत्न-आभूषण, फुटवियर, चमड़ा, इंजीनियरिंग और कुछ केमिकल उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।
क्या भारत और अमेरिका के बीच Trade Negotiations जारी हैं?
दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होती रही है। अंतिम समझौते और टैरिफ पर फैसले की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।