AI से बनी खबरों पर सरकार की नजर! टीवी चैनलों को चेतावनी, भड़काऊ कंटेंट दिखाया तो हो सकती है कार्रवाई
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीवी चैनलों को एआई का इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने खबरों की सटीकता, संपादकीय निगरानी और कार्यक्रम संहिता के पालन पर जोर देते हुए भड़काऊ, सांप्रदायिक या राष्ट्र-विरोधी सोच को बढ़ावा देने वाले प्रसारणों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
टीवी पर दिखाई जाने वाली खबरों और दृश्यों की विश्वसनीयता को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। I&B Ministry Advisory 2026 के तहत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि तकनीक का उपयोग खबरों की सटीकता, प्रामाणिकता और संवेदनशीलता से समझौता किए बिना केवल सहायक भूमिका में किया जाना चाहिए। बुधवार को जारी सलाह में मंत्रालय ने चैनलों को संपादकीय निगरानी मजबूत करने और प्रसारण से जुड़े कर्मचारियों को निर्धारित नियमों के प्रति जागरूक बनाने को कहा। साथ ही चेतावनी दी कि कार्यक्रम संहिता का उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
I&B Ministry Advisory 2026 में टीवी चैनलों को क्या निर्देश मिले?

I&B Ministry Advisory 2026 में मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के तहत निर्धारित कार्यक्रम संहिता का सख्ती से पालन करने को कहा है।मंत्रालय के अनुसार, खबर जुटाने, संपादन, प्रोडक्शन, प्रसारण और कार्यक्रमों को टेलीकास्ट करने से जुड़े कर्मचारियों को इन नियमों की जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए चैनलों को नियमित रूप से कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता सत्र आयोजित करने की सलाह दी गई है।मंत्रालय ने यह भी कहा कि केवल तकनीकी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। खबरों और कार्यक्रमों की समीक्षा करने वाली संपादकीय टीमों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रसारित सामग्री नियमों के अनुरूप हो।
AI के इस्तेमाल पर सरकार ने क्यों जताई चिंता?
टीवी समाचारों में एआई टूल्स का इस्तेमाल बढ़ने के साथ तस्वीरों, वीडियो और अन्य सामग्री की प्रामाणिकता बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है। मंत्रालय ने इसी संदर्भ में कहा कि एआई का उपयोग केवल सहायक तकनीक के रूप में किया जाना चाहिए।इसका अर्थ है कि एआई से तैयार या संपादित सामग्री प्रसारित करने से पहले उसकी सटीकता और संदर्भ की जांच करना जरूरी है। तकनीक के इस्तेमाल से खबर की वास्तविकता या संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।मंत्रालय ने संपादकीय और कंटेंट समीक्षा की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है, ताकि गलत, भ्रामक या अनुचित सामग्री प्रसारित होने से रोकी जा सके।
सांप्रदायिक और ‘राष्ट्र-विरोधी’ कंटेंट पर भी सख्ती
मंत्रालय ने टीवी चैनलों को ऐसे कार्यक्रमों से बचने की सलाह दी है, जो सांप्रदायिक या राष्ट्र-विरोधी सोच को बढ़ावा दें। इसमें लाइव बहस और पैनल चर्चा जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं।सलाह के मुताबिक, चैनलों को चर्चा में शामिल होने वाले वक्ताओं और प्रतिभागियों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर आपत्तिजनक, अपमानजनक या भड़काऊ सामग्री को प्रसारित होने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे।इन कदमों में आवाज म्यूट करना, अस्वीकरण दिखाना, प्रसारण रोकना या फीड बंद करना शामिल हो सकता है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि अनुचित व्यवहार और भाषा को टीवी प्रसारणों में सामान्य रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम संहिता तोड़ी तो क्या हो सकती है कार्रवाई?
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम संहिता का पालन करना चैनलों की कानूनी जिम्मेदारी है। इसके उल्लंघन पर केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है।मंत्रालय के अनुसार, केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2021 के तहत गठित अंतर-विभागीय समिति (IDC) ने पाया था कि विभिन्न चैनलों पर प्रसारित कुछ सामग्री कार्यक्रम संहिता की भावना के अनुरूप नहीं थी। समिति ने यह भी देखा कि समान विषयों पर मिलते-जुलते समाचार और दृश्य कई चैनलों पर प्रसारित किए जा रहे थे। इसके बाद सभी निजी सैटेलाइट चैनलों को नियमों का सख्ती से पालन करने की सलाह देने की सिफारिश की गई।मंत्रालय की सलाह में पीड़ित की पहचान उजागर करने से बचने पर भी जोर दिया गया है। इसमें नाम के अलावा तस्वीरें, परिवार की जानकारी, निवास क्षेत्र या ऐसे अप्रत्यक्ष विवरण साझा न करने की बात कही गई है, जिनसे पीड़ित की पहचान हो सकती है।
निष्कर्ष
I&B Ministry Advisory 2026 का मुख्य संदेश है कि टीवी चैनलों को तकनीक और संपादकीय स्वतंत्रता का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करना होगा। एआई से तैयार सामग्री की विश्वसनीयता, लाइव बहसों में संपादकीय नियंत्रण और कार्यक्रम संहिता का पालन प्रसारण की अहम जिम्मेदारियां हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
I&B Ministry Advisory 2026 क्यों जारी की गई?
टीवी प्रसारणों में एआई के सावधानीपूर्ण इस्तेमाल, खबरों की विश्वसनीयता और कार्यक्रम संहिता के पालन को सुनिश्चित करने के लिए।
टीवी चैनलों को एआई के इस्तेमाल पर क्या निर्देश दिया गया है?
एआई का इस्तेमाल केवल सहायक भूमिका में करने और खबरों की सटीकता, प्रामाणिकता तथा संवेदनशीलता से समझौता नहीं करने को कहा गया है।
टीवी चैनलों को किन नियमों का पालन करना होगा?
केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के तहत निर्धारित कार्यक्रम संहिता का।
भड़काऊ लाइव बहस को रोकने के लिए चैनल क्या कर सकते हैं?
जरूरत के अनुसार आवाज म्यूट करना, अस्वीकरण देना, प्रसारण बाधित करना या फीड बंद करना जैसे कदम उठा सकते हैं।
कार्यक्रम संहिता के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
मंत्रालय के अनुसार, उल्लंघन होने पर संबंधित अधिनियम और नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।