Houthi-China Missile Link : हूती विद्रोहियों को चीन से मिली मिसाइल बनाने की तकनीक - क्या इजरायल और सऊदी अरब होंगे निशाने पर?
ब्रिटेन की संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोही चीन से आए मिसाइल पुर्जों की मदद से ईरान की खैबर शिकन जैसी बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी मिसाइल विकसित होने पर सऊदी अरब और इजराइल तक उनकी पहुंच बढ़ सकती है। हालांकि, मिसाइल के सफल निर्माण की पुष्टि नहीं हुई है और चीन सरकार की सीधी भूमिका भी साबित नहीं हुई है।
Houthi-China Missile Link : यमन के हूती विद्रोही चीन से मंगाए गए पुर्जों की मदद से ईरान की खैबर शिकन जैसी बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन की संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की 14 अक्टूबर 2026 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के अधिकारियों ने चीन से आई दो संदिग्ध खेपों में मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले खास पुर्जे पकड़े थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की मिसाइल तैयार करने में सफल होने पर हूतियों की सऊदी अरब और इजराइल के दूर स्थित ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता बढ़ सकती है। हालांकि, रिपोर्ट से यह साबित नहीं होता कि चीन की सरकार ने जानबूझकर हूतियों को हथियार बनाने के लिए सामान भेजा था।
मिसाइल के पुर्जे चीन से आए, होदेइदा बंदरगाह पहुंचने थे
CAR की रिपोर्ट यमन के अधिकारियों की ओर से जुलाई में सामने लाई गई जानकारी पर आधारित है। अधिकारियों ने चीन से भेजी गई दो खेपों को पकड़ा था, जिन्हें यमन के होदेइदा बंदरगाह पहुंचाया जाना था। रिपोर्ट के अनुसार, खेप में ऐसे पुर्जे थे जिनका इस्तेमाल मिसाइल के रॉकेट मोटर और उसे उड़ान के दौरान स्थिर रखने वाले हिस्सों में किया जा सकता है।इनमें मिसाइल के पिछले हिस्से में लगने वाले मोटर कवर, नोजल से जुड़े पुर्जे, रॉकेट मोटर को चालू करने वाले उपकरण और स्थिरता बनाए रखने वाले फिन कोर शामिल थे। इसके अलावा फेनोलिक रेजिन नाम का पदार्थ भी मिला। इसका इस्तेमाल ऐसी सुरक्षा परत बनाने में होता है, जो वायुमंडल में तेज रफ्तार से उड़ते समय मिसाइल को अत्यधिक गर्मी से बचाती है।
CAR के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के मुताबिक, पुर्जों और दूसरे सामान का संयोजन संकेत देता है कि हूती ईरान में डिजाइन की गई एक खास मिसाइल प्रणाली तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये सामान सामान्य नागरिक उपयोग के लिए बनाए गए पुर्जों जैसे नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों की स्थानीय स्तर पर हथियार बनाने की महत्वाकांक्षा पहले के अनुमान से ज्यादा बड़ी है।
खैबर शिकन मिसाइल की मारक क्षमता करीब 2,000 किमी
ईरान ने 9 फरवरी 2022 को खैबर शिकन बैलिस्टिक मिसाइल को सार्वजनिक रूप से पेश किया था। इसे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने विकसित किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इसकी मारक क्षमता करीब 2,000 किलोमीटर बताई जाती है। इसलिए इसी तरह की मिसाइल बनाने में सफल होने पर हूती सऊदी अरब और इजराइल के बड़े हिस्से को अपनी पहुंच में ला सकते हैं।हालांकि, चीन से मिले पुर्जों के आधार पर हूतियों ने ऐसी मिसाइल पूरी तरह बना ली है या उसका सफल परीक्षण कर लिया है, इसकी पुष्टि रिपोर्ट नहीं करती। फिलहाल सामने आई जानकारी हथियार बनाने की कोशिश और उससे जुड़ी आपूर्ति पर केंद्रित है।

तैयार हथियारों की तस्करी से आगे बढ़ रहे हूती
हूती करीब दो दशक पहले यमन में एक विद्रोही संगठन के रूप में उभरे थे। शुरुआती दौर में उनके पास यमन की सेना से हासिल सोवियत दौर के और उत्तर कोरिया में बने हथियार थे। समय के साथ उन्हें आधुनिक मिसाइलों, ड्रोन और दूसरी सैन्य तकनीकों तक पहुंच मिली।सऊदी अरब के साथ मौजूदा संघर्ष में हूती बैलिस्टिक मिसाइलों और लंबी दूरी तक उड़ने वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे पहले भी इजराइल की ओर मिसाइलें और ड्रोन दाग चुके हैं। अब रिपोर्ट में सामने आया है कि संगठन केवल बाहर से तैयार हथियार हासिल करने के बजाय अलग-अलग देशों से पुर्जे जुटाकर अपने नियंत्रण वाले इलाकों में हथियार जोड़ने और बनाने की क्षमता बढ़ा रहा है।
अमेरिकी थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेहनाम बेन तालेब्लू के मुताबिक, सैन्य जरूरतों के लिए कई स्रोतों से सामान जुटाना किसी संगठन को फायदा देता है। ईरान पर प्रतिबंधों और आपूर्ति में रुकावट के बीच हूतियों के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशना इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हूती अभी भी आधुनिक मिसाइलों के नेविगेशन और नियंत्रण जैसे जटिल सिस्टम के लिए ईरान पर निर्भर हैं। हालांकि, आयातित पुर्जों को स्थानीय स्तर पर जोड़ने की क्षमता बढ़ने से वे कुछ हथियारों का बड़ा हिस्सा खुद तैयार कर सकते हैं। अमेरिकी थिंक टैंक सेंचुरी फाउंडेशन की एक रिपोर्ट में भी हूतियों की आपूर्ति व्यवस्था में तस्करों और दूसरे देशों के कारोबारी नेटवर्क की भूमिका का उल्लेख किया गया है।
ईरान पर निर्भरता घटाने के लिए दूसरे देशों से जुटा रहे सामग्री
ईरान अब तक हूतियों को हथियारों की तकनीक, डिजाइन और पुर्जे उपलब्ध कराने वाला प्रमुख देश रहा है। हालांकि, CAR की रिपोर्ट के अनुसार, हूती अब चीन समेत दूसरे देशों से भी जरूरी सामग्री हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिकी थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज (FDD) के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेहनाम बेन तालेब्लू के मुताबिक, सैन्य योजना के लिहाज से जरूरी सामग्री हासिल करने के कई रास्ते होना फायदेमंद है। उनके अनुसार, ईरान पर लगे प्रतिबंधों और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के बीच हूती वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं।वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंचुरी फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों तक हथियारों की आपूर्ति अब कई देशों और व्यक्तियों से जुड़े नेटवर्क के जरिए पहुंच रही है। इनमें यमन के तस्कर और पूर्वी चीन के निर्यात केंद्रों से जुड़े कारोबारी भी शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हूती अभी भी मिसाइलों के नेविगेशन और नियंत्रण प्रणाली जैसे जटिल पुर्जों के लिए ईरान पर निर्भर हैं। वे दूसरे देशों से हासिल सामग्री के जरिए कुछ हथियार जोड़ सकते हैं, लेकिन अत्याधुनिक हथियारों की पूरी तकनीक खुद विकसित करने में अभी सक्षम नहीं हैं।
चीन के लिए बढ़ सकती है कूटनीतिक मुश्किल
चीन, ईरान और सऊदी अरब, दोनों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। वर्ष 2023 में उसने दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में भी भूमिका निभाई थी। सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हूती हमलों की चीन निंदा कर चुका है और उसने संघर्ष कम करने की अपील की है।ऐसे में चीन से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं के जरिए मिसाइल के पुर्जे हूतियों तक पहुंचने की रिपोर्ट बीजिंग के लिए कूटनीतिक चुनौती बन सकती है। सऊदी अरब चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। मध्य पूर्व के विशेषज्ञ क्रिस्टियन उलरिचसन के मुताबिक, सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे और एयरपोर्ट पर हमलों के बाद इस मामले में चीन पर दबाव बढ़ सकता है।
चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू चांग ने रिपोर्ट के विशिष्ट आरोपों पर सीधे टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन कर रहा है और सैन्य उत्पादों के निर्यात के मामले में जिम्मेदार रुख अपनाता है। चीन दोहरे इस्तेमाल वाली वस्तुओं के निर्यात पर नियंत्रण रखने की बात भी कहता रहा है।
15 अक्टूबर को यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की विदेश मंत्री अफरा अल-जुबा ने बताया कि इस मामले में चीन से बातचीत की गई है। उनके अनुसार, चीन ने जानकारी लेकर जांच करने में रुचि दिखाई। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि संदिग्ध खेप भेजने के पीछे चीनी सरकार की कोई भूमिका थी या नहीं।

हूतियों की बढ़ती सैन्य ताकत से क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
यमन में हूतियों और सरकार समर्थित बलों के बीच संघर्ष का असर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास भी पड़ता है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार और तेल की आवाजाही के लिए अहम है। सऊदी अरब और यमन सरकार ने हाल में हूतियों को इस क्षेत्र से पीछे धकेलने के लिए सैन्य अभियान तेज किए हैं।अगर हूती आयातित पुर्जों के सहारे आधुनिक मिसाइलें बनाने की क्षमता बढ़ाते हैं, तो इससे सऊदी अरब की सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव पर असर पड़ सकता है। लेकिन किसी मिसाइल की वास्तविक क्षमता केवल उसके डिजाइन से तय नहीं होती। उसके सफल निर्माण, परीक्षण, सटीक निशाना लगाने की तकनीक और एयर डिफेंस को भेदने की क्षमता की भी पुष्टि जरूरी होती है।
फिलहाल CAR की रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि हूती हथियारों की आपूर्ति के लिए ईरान पर अपनी निर्भरता कुछ हद तक कम करने और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई नेटवर्क का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। चीन से जुड़े पुर्जों की बरामदगी इसी बदलाव का संकेत है, लेकिन इससे चीन की सरकार की सीधी संलिप्तता साबित नहीं होती।
FAQ (Frequently Asked Questions):
हूतियों की मिसाइल बनाने की तैयारी को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
ब्रिटेन की संस्था CAR के मुताबिक, हूती चीन से मिले पुर्जों की मदद से ईरान की खैबर शिकन जैसी बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मिसाइल के सफल निर्माण या परीक्षण की पुष्टि रिपोर्ट में नहीं की गई है।
खैबर शिकन मिसाइल की मारक क्षमता कितनी है?
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की खैबर शिकन मिसाइल की मारक क्षमता करीब 2,000 किलोमीटर है। इसी तरह की मिसाइल हूतियों को सऊदी अरब और इजराइल के दूर स्थित ठिकानों तक पहुंचने में मदद कर सकती है।
चीन से आई खेप में क्या मिला था?
खेप में रॉकेट मोटर के हिस्से, मिसाइल को स्थिर रखने वाले पुर्जे, मोटर चालू करने वाले उपकरण और फेनोलिक रेजिन मिला था। इस पदार्थ का इस्तेमाल मिसाइल को उड़ान के दौरान अत्यधिक गर्मी से बचाने वाली परत बनाने में होता है।
क्या चीन की सरकार ने हूतियों को मिसाइल के पुर्जे भेजे थे?
इसकी पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट में चीन से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं और वहां से आई खेपों का उल्लेख है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि चीन की सरकार ने जानबूझकर हूतियों को हथियार बनाने के लिए सामान भेजा।
हूती हथियार बनाने के लिए ईरान पर निर्भरता क्यों कम करना चाहते हैं?
कई देशों से पुर्जे जुटाने से आपूर्ति में रुकावट आने पर भी हथियार बनाने का काम जारी रखा जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक, आधुनिक मिसाइलों के जटिल नेविगेशन और नियंत्रण सिस्टम के लिए हूती अभी भी ईरान पर निर्भर हो सकते हैं।