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सोनम वांगचुक के संस्थान की जमीन क्यों हुई रद्द? कोर्ट में सामने आई पूरी कहानी

सोनम वांगचुक के HIAL को Phyang Thang में मिली 1,076 कनाल 1 मरला जमीन का 40 साल का लीज आवंटन विवादों में है। लद्दाख प्रशासन ने इसे कानूनी रूप से 2019 में ही खत्म बताया, जबकि HIAL ने प्रशासनिक देरी का आरोप लगाया है।

सोनम वांगचुक के संस्थान की जमीन क्यों हुई रद्द? कोर्ट में सामने आई पूरी कहानी

लद्दाख में Sonam Wangchuk HIAL Land Lease Row अब हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। लद्दाख प्रशासन ने सोनम वांगचुक के Himalayan Institute of Alternative Learning (HIAL) को Phyang Thang में दी गई 1,076 कनाल और 1 मरला जमीन का आवंटन रद्द करने के फैसले का बचाव किया है। प्रशासन का कहना है कि 40 साल की लीज शर्तों का पालन नहीं होने के कारण आवंटन 5 मई 2019 को ही कानूनी रूप से समाप्त हो गया था। वहीं, वांगचुक का पक्ष है कि लीज डीड में देरी प्रशासन की वजह से हुई।

HIAL Land Lease Controversy में असली विवाद क्या है?

मामला 5 मई 2018 से शुरू होता है, जब HIAL को Phyang Thang में 1,076 कनाल 1 मरला जमीन 40 साल की लीज के लिए आवंटित की गई थी। प्रशासन के मुताबिक यह आवंटन कुछ शर्तों के साथ था। इनमें तय समय के भीतर lease deed को execute करना और जमीन का निर्धारित premium तथा ground rent जमा करना शामिल था।लद्दाख प्रशासन ने हाई कोर्ट में दाखिल 136 पन्नों के हलफनामे में कहा कि HIAL ने निर्धारित अवधि में न तो lease deed execute की और न ही जरूरी land premium और ground rent का भुगतान किया। इसलिए प्रशासन के अनुसार मूल allotment की शर्तों के तहत यह आवंटन 5 मई 2019 को स्वतः समाप्त हो गया।HIAL ने इस फैसले को चुनौती देते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में 21 अगस्त 2025 के cancellation order को चुनौती दी गई है।

Sonam Wangchuk HIAL Land Lease Row में दोनों पक्षों की कहानी अलग क्यों?

यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम हिस्सा है। लद्दाख प्रशासन का कहना है कि HIAL ने समय पर जरूरी भुगतान नहीं किया और lease deed भी execute नहीं की। प्रशासन ने यह भी कहा कि जमीन का औपचारिक कब्जा Tehsildar के जरिए नहीं लिया गया था। उसके मुताबिक HIAL की याचिका merit से रहित है और देरी के कारण भी सुनवाई योग्य नहीं है। दूसरी तरफ, सोनम वांगचुक का दावा है कि लीज डीड में देरी प्रशासन की वजह से हुई। उन्होंने 24 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक पत्र साझा करते हुए कहा कि HIAL ने समय पर lease execution के लिए लगातार प्रयास किए थे। वांगचुक के अनुसार, HIAL ने 5 लिखित अपील, 15 बार व्यक्तिगत मुलाकात और 30 फोन कॉल के जरिए लीज को समय पर पूरा कराने की कोशिश की। उनके द्वारा साझा किए गए फरवरी 2021 के प्रशासनिक पत्र में कहा गया था कि नई lease policy के finalise होने का इंतजार किया जा रहा था और यह देरी अन्य संस्थानों के साथ भी थी। पत्र में HIAL को निर्माण गतिविधियां जारी रखने की अनुमति दिए जाने की बात भी कही गई थी। वांगचुक ने इसी आधार पर आरोप लगाया कि जब प्रशासन खुद प्रक्रिया में देरी कर रहा था, तो बाद में उसी देरी के लिए HIAL को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने इसे लेकर कहा कि जब वह लद्दाख के मुद्दों पर आवाज उठाते हैं तो उन्हें और उनके संस्थान को निशाना बनाया जाता है।

Ladakh Administration HIAL पर और क्या आरोप लगा रहा है?

प्रशासन ने हाई कोर्ट में सिर्फ lease deed और भुगतान का मुद्दा ही नहीं उठाया है। उसके हलफनामे में HIAL की संस्थागत स्थिति और जमीन के इस्तेमाल को लेकर भी कई दावे किए गए हैंप्रशासन के अनुसार, अक्टूबर 2026 में UT Ladakh के Higher Education Department ने प्रमाणित किया कि HIAL कोई recognised university नहीं है और इसके courses University of Ladakh या किसी अन्य statutory body से affiliated नहीं हैं। प्रशासन ने इसे जमीन आवंटन के मूल उद्देश्य से जोड़ते हुए कहा कि वहां प्रस्तावित alternative university की स्थापना नहीं हुई।हलफनामे में प्रशासन ने HIAL और Wangchuk से जुड़े संगठन SECMOL की जमीन को लेकर भी कई आरोप लगाए हैं। इनमें Phey में सरकारी जमीन के इस्तेमाल, स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतें, कथित encroachment और Ice Stupa से जुड़े प्रयोगों के दौरान पारंपरिक irrigation streams के कथित diversion जैसे आरोप शामिल हैं। ये प्रशासन और स्थानीय शिकायतों में किए गए दावे हैं, जिनका HIAL पक्ष खंडन करता है।

'Don't kill the messenger' क्यों बोले Sonam Wangchuk?

जमीन विवाद के बीच सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर प्रशासन पर उन्हें और HIAL को निशाना बनाने का आरोप लगाया।उन्होंने कहा कि जब भी वह लद्दाख में कथित अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं, सरकार की media machinery उनके खिलाफ सक्रिय हो जाती है। इसी संदर्भ में उन्होंने “Don't kill the messenger” कहा।वांगचुक की पत्नी और HIAL की co-founder Gitanjali Angmo ने भी प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि HIAL ने 2018 में जमीन आवंटित होने के कुछ ही समय बाद lease के लिए आवेदन किया था और बाद में भी प्रशासन से संपर्क करता रहा। उनके मुताबिक प्रशासन ने 2020 और 2021 में lease policy finalise नहीं होने की बात कही थी।इस तरह HIAL Land Lease Controversy में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं प्रशासन इसे शर्तों के उल्लंघन और कानूनी रूप से समाप्त हो चुके allotment का मामला बता रहा है, जबकि HIAL प्रशासनिक देरी को विवाद की वजह बता रहा है।

अब हाई कोर्ट में क्या होगा?

फिलहाल मामला जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के सामने है। HIAL ने 21 अगस्त 2025 के cancellation order को चुनौती दी है, जबकि प्रशासन ने अपने हलफनामे में याचिका खारिज करने की मांग की है।इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि जमीन विवाद में अंतिम रूप से किस पक्ष की दलील स्वीकार होगी। कोर्ट के सामने मुख्य सवालों में allotment की शर्तें, lease deed में देरी, जरूरी भुगतान और प्रशासन तथा HIAL के बीच हुई आधिकारिक correspondence जैसे मुद्दे शामिल हैं।

निष्कर्ष

Sonam Wangchuk HIAL Land Lease Row फिलहाल सिर्फ जमीन आवंटन का मामला नहीं रह गया है। इसके केंद्र में lease की कानूनी शर्तें, प्रशासनिक देरी, HIAL की संस्थागत स्थिति और दोनों पक्षों के एक-दूसरे पर लगाए गए आरोप हैं। अंतिम फैसला हाई कोर्ट की सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर होगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Sonam Wangchuk ने Ladakh Issues पर 'Don't Kill the Messenger' क्यों कहा?

वांगचुक का आरोप है कि जब वह लद्दाख के मुद्दों पर आवाज उठाते हैं तो उन्हें और HIAL को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने प्रशासन पर उनके संस्थान की जमीन के मामले को लेकर narrative बनाने का आरोप लगाया है।

HIAL Land Lease Controversy क्या है?

यह Phyang Thang में HIAL को आवंटित 1,076 कनाल 1 मरला जमीन की 40 साल की लीज से जुड़ा विवाद है। प्रशासन का कहना है कि लीज की शर्तें पूरी नहीं हुईं, जबकि HIAL प्रशासनिक देरी का दावा करता है।

Ladakh Administration ने HIAL के Land Allotment को लेकर क्या कार्रवाई की?

प्रशासन ने 21 अगस्त 2025 को allotment cancellation order जारी किया। उसके अनुसार allotment की शर्तें पूरी न होने के कारण जमीन का आवंटन पहले ही 5 मई 2019 को lapse हो चुका था।

Sonam Wangchuk ने Ladakh के मुद्दों पर सरकार पर क्या आरोप लगाए?

वांगचुक ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा लद्दाख में उठाए जाने वाले मुद्दों के बाद उन्हें और HIAL को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने lease execution में प्रशासनिक देरी का भी दावा किया है।

HIAL Land Lease Case की वर्तमान स्थिति क्या है?

मामला जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में लंबित है। HIAL ने 2025 के cancellation order को चुनौती दी है और प्रशासन ने अपने जवाब में allotment रद्द करने के फैसले का बचाव किया है।

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