United Nations Child Marriage Report : बाल विवाह रोकने में भारत के प्रयासों की UN ने की तारीफ, दुनिया के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
संयुक्त राष्ट्र ने भारत के बाल विवाह रोकने और लड़कियों के अधिकार मजबूत करने के प्रयासों की प्रशंसा की। यूनिसेफ के मुताबिक, शिक्षा में निवेश, सरकारी नीतियों और सामुदायिक भागीदारी से सुधार हुआ है। हालांकि, भारत में 23% महिलाओं की शादी 18 वर्ष से पहले हुई थी।
United Nations Child Marriage Report : बाल विवाह रोकने और लड़कियों के अधिकारों को मजबूत करने के भारत के प्रयासों की संयुक्त राष्ट्र (UN) ने प्रशंसा की है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की उप कार्यकारी निदेशक हन्नान सुलेमान ने कहा कि भारत ने दिखाया है कि लगातार निवेश, समुदाय की भागीदारी और सरकारी नीतियों के जरिए वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। भारत और सिएरा लियोन के संयुक्त राष्ट्र मिशनों ने ‘बालिकाओं में निवेश-हमारे भविष्य को बदलना’ विषय पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया था।सुलेमान ने कहा कि जब लड़कियों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, तो पूरे समाज को इसका फायदा होता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हो रही प्रगति का असर दूसरे देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां दुनिया की सबसे बड़ी किशोर आबादी रहती है। उनके मुताबिक, भारत में किशोरों की संख्या करीब 25.3 करोड़ है।
एक दशक में लड़कियों की शिक्षा में सुधार
UNICEF की उप कार्यकारी निदेशक ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत में लड़कियों की शिक्षा में सुधार हुआ है। यह बदलाव परिवारों में लड़कियों की शिक्षा और उनके महत्व को लेकर बढ़ती समझ को भी दिखाता है। उन्होंने बाल विवाह रोकने के लिए सरकार और समाज की संयुक्त भागीदारी से चलाए जा रहे अभियानों का भी उल्लेख किया।भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने कहा कि बालिकाओं के अधिकारों को मजबूत करने के लिए राजनीतिक नेतृत्व, लंबे समय तक चलने वाले जागरूकता अभियान और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे की अहम भूमिका है। उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना का उदाहरण देते हुए बताया कि इसका उद्देश्य लड़कियों के प्रति सामाजिक भेदभाव कम करना, कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और स्कूलों में लड़कियों का नामांकन बढ़ाना है।
सिएरा लियोन की विदेश मामलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की उप मंत्री जेनेबा बंगुरा ने कहा कि जब किसी लड़की को शिक्षा से वंचित किया जाता है, कम उम्र में शादी के लिए मजबूर किया जाता है या लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है, तो समाज उसकी क्षमता खो देता है। इसके उलट, शिक्षित, स्वस्थ और सुरक्षित लड़की अपने परिवार, समुदाय और देश के विकास में योगदान दे सकती है।
इंजीनियरिंग से AI तक महिलाओं की भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम में हरीश ने अपने छात्र जीवन का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, तब उनकी कक्षा में कोई लड़की नहीं थी, क्योंकि इस विषय को पुरुषों के लिए उपयुक्त माना जाता था। उन्होंने कहा कि आज उसी विश्वविद्यालय में उनकी कक्षा में लगभग 70% छात्राएं हैं। उनके मुताबिक, यह बदलाव दिखाता है कि एक ही पीढ़ी के जीवनकाल में महिलाओं की शिक्षा और भागीदारी में उल्लेखनीय प्रगति हो सकती है।हालांकि, उन्होंने डिजिटल क्षेत्र में लैंगिक असमानता को लेकर चिंता भी जताई। हरीश ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में अक्सर ‘टेक ब्रदर्स’ की चर्चा होती है, लेकिन ‘टेक सिस्टर्स’ को उतना महत्व नहीं मिलता। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में पुरुषों के बढ़ते वर्चस्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे यह प्रभावित हो सकता है कि तकनीक किस तरह विकसित होगी और लोगों के दैनिक जीवन को कैसे प्रभावित करेगी।
उन्होंने साइबर दुनिया को महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। हरीश के अनुसार, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे और दूसरे तकनीकी साधनों का इस्तेमाल लड़कियों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए। उभरते AI क्षेत्र को महिलाओं और लड़कियों के लिए अधिक अनुकूल बनाना भी सरकारों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
भारत में बाल विवाह के आंकड़े क्या बताते हैं?
UNICEF के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत में बाल विवाह की दर में लंबे समय में गिरावट आई है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5), 2019-21 के अनुसार, 20 से 24 वर्ष की आयु की लगभग 23% महिलाओं की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो गई थी। UNICEF की 2023 की रिपोर्ट में भी इस आंकड़े का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में बाल विवाह का अनुभव कर चुकी लड़कियों और महिलाओं की सबसे बड़ी संख्या भारत में है।बाल विवाह का असर सिर्फ लड़की की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहता। कम उम्र में शादी होने से उसकी शिक्षा बीच में छूट सकती है, आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर घट सकते हैं और कम उम्र में गर्भधारण से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। UNICEF के अनुसार, बचपन में शादी करने वाली लड़कियों के लिए पढ़ाई जारी रखना भी अधिक मुश्किल होता है।
बाल विवाह रोकने के लिए भारत में कानून और योजनाएं
भारत में बाल विवाह रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है। इसके तहत लड़की की शादी के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़के के लिए 21 साल निर्धारित है। कानून के तहत बाल विवाह कराने, उसमें मदद करने या उसे बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। कुछ परिस्थितियों में ऐसा विवाह अदालत के आदेश से रद्द कराया जा सकता है, जबकि कानून में बताई गई विशेष परिस्थितियों में विवाह शुरू से ही अमान्य हो सकता है।बाल विवाह रोकने के लिए सरकार ने बाल विवाह निषेध अधिकारियों की व्यवस्था भी की है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी संभावित बाल विवाह रोकने, लोगों को जागरूक करने और संबंधित मामलों में कार्रवाई के लिए कदम उठाने की होती है। इसके अलावा, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाएं लड़कियों की शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक स्थिति को बेहतर बनाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं। सरकार ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के जरिए भी इस कुप्रथा को समाप्त करने पर जोर दिया है।
हालांकि, केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है। गरीबी, शिक्षा की कमी, सामाजिक दबाव और लैंगिक भेदभाव जैसी समस्याएं कई परिवारों को कम उम्र में बेटियों की शादी करने की ओर धकेल सकती हैं। इसलिए लड़कियों की पढ़ाई जारी रखने, परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सहयोग देने तथा स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
UN ने बाल विवाह रोकने के भारत के प्रयासों की प्रशंसा क्यों की?
UNICEF की उप कार्यकारी निदेशक हन्नान सुलेमान ने कहा कि भारत में लगातार निवेश, सरकारी नीतियों और समुदाय की भागीदारी से लड़कियों की शिक्षा में सुधार हुआ है और बाल विवाह रोकने के प्रयासों को गति मिली है।
भारत में Child Marriage रोकने के लिए कौन-से कानून लागू हैं?
भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है। यह बाल विवाह रोकने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान करता है। इसके तहत लड़की की न्यूनतम विवाह आयु 18 साल और लड़के की 21 साल है।
Prohibition of Child Marriage Act क्या है?
यह 2006 में बनाया गया कानून है, जो बाल विवाह रोकने, कुछ परिस्थितियों में विवाह को रद्द कराने और बाल विवाह कराने या उसमें मदद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान करता है।
भारत में बाल विवाह रोकने के लिए Government कौन-सी योजनाएं चला रही है?
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान इस दिशा में प्रमुख पहल हैं। इनके जरिए लड़कियों की शिक्षा, सुरक्षा, जागरूकता और बाल विवाह रोकने के प्रयासों को बढ़ावा दिया जाता है।
बाल विवाह का लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
बाल विवाह के कारण लड़कियों की पढ़ाई छूटने, आर्थिक अवसर कम होने और कम उम्र में गर्भधारण से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है। इससे उनकी स्वतंत्रता और भविष्य के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं।
UN और UNICEF बाल विवाह रोकने के लिए भारत के साथ कैसे काम करते हैं?
UN और UNICEF बाल अधिकारों, लड़कियों की शिक्षा, जागरूकता और बाल विवाह रोकने से जुड़ी नीतियों व कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करते हैं। UNICEF शोध और आंकड़ों के जरिए समस्या को समझने तथा प्रभावी उपायों की पहचान करने में भी सहयोग देता है।