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Iran Russia Hybrid Campaigns in Britain : रूस का हाइब्रिड वॉर और ईरान की ब्रिटिश सैन्य ठिकानों पर हमले की साजिश: क्या विदेशी खतरों से घिर गया है ब्रिटेन?

ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI5 के प्रमुख केन मैक्कलम ने चेतावनी दी कि ईरान और रूस से जुड़े हाइब्रिड हमलों का खतरा बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, पिछले दशक में विदेशी सरकारों से जुड़े सुरक्षा मामलों की संख्या चार गुना हुई है।

Iran Russia Hybrid Campaigns in Britain : रूस का हाइब्रिड वॉर और ईरान की ब्रिटिश सैन्य ठिकानों पर हमले की साजिश: क्या विदेशी खतरों से घिर गया है ब्रिटेन?

Iran Russia Hybrid Campaigns in Britain : ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI5 के प्रमुख केन मैक्कलम ने चेतावनी दी है कि ईरान अब ब्रिटेन में सैन्य ठिकानों जैसे बड़े लक्ष्यों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि रूस यूक्रेन के सहयोगी देशों के खिलाफ हाइब्रिड वॉरफेयर तेज कर रहा है। 13 अक्टूबर 2026 को अपने सालाना संबोधन में मैक्कलम ने कहा कि पिछले 10 साल में विदेशी सरकारों से जुड़े सुरक्षा खतरों के मामलों की संख्या चार गुना हो गई है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के गलत इस्तेमाल को भी गंभीर चिंता बताया और आशंका जताई कि आतंकवादी संगठन इसकी मदद से जैविक हथियार या नए रोगजनक विकसित करने की कोशिश कर सकते हैं।

RAF फेयरफोर्ड एयरबेस पर संदिग्ध साजिश के बाद अलर्ट

मैक्कलम का बयान ऐसे समय आया है, जब ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस को निशाना बनाने की संदिग्ध साजिश की जांच चल रही है। यह एयरबेस अमेरिकी बमवर्षक विमानों के इस्तेमाल के लिए महत्वपूर्ण है। इन विमानों का इस्तेमाल ईरान पर हमले करने के लिए भी किया गया था।

MI5 के डायरेक्टर जनरल केन मैक्कलम 13 अक्टूबर 2026 को लंदन में UK की सिक्योरिटी सर्विस के हेडक्वार्टर, टेम्स हाउस में भाषण देते हैं।
MI5 के डायरेक्टर जनरल केन मैक्कलम 13 अक्टूबर 2026 को लंदन में UK की सिक्योरिटी सर्विस के हेडक्वार्टर, टेम्स हाउस में भाषण देते हैं।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने इससे पहले कहा था कि इस साजिश के पीछे ईरान का होना बेहद संभावित है। सुरक्षा अलर्ट के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एयरबेस से अमेरिकी विमानों को हटाने की पुष्टि की थी। हालांकि, विमान हटाने के फैसले और खतरे के आकलन को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बयानों में अंतर भी सामने आया। ईरान ने इस घटना में शामिल होने के आरोपों को खारिज किया है।मैक्कलम ने कहा कि जांच जारी होने के कारण वह फेयरफोर्ड मामले पर विस्तृत जानकारी नहीं दे सकते। हालांकि, उनके मुताबिक, इस साल ईरान से जुड़ी गतिविधियों में एक अहम बदलाव देखने को मिला है। अब सैन्य ठिकानों जैसे अधिक सुरक्षित और महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बनाने की महत्वाकांक्षा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि फेयरफोर्ड की घटना अकेली नहीं है और ब्रिटेन के अलावा दूसरे देशों में भी इस तरह के मामले सामने आए हैं।
MI5 प्रमुख के अनुसार, पिछले एक साल में ईरान से जुड़ी गतिविधियों की जांच के सिलसिले में 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन में ऐसे अभियानों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अपराधियों और सहयोगियों की क्षमता सीमित रही है। हालांकि, ईरान के नजदीकी क्षेत्रों में उसकी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी पारंपरिक और हाइब्रिड तकनीकों का अधिक आक्रामक तरीके से इस्तेमाल करने का अनुभव रखती है।

रूस को बताया ब्रिटेन की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा राज्य-आधारित खतरा

मैक्कलम ने रूस को ब्रिटेन और उसके सहयोगी देशों के लिए प्रमुख आक्रामक खतरा बताया। उनके मुताबिक, रूस ऐसे तरीके अपना रहा है जो सीधे पारंपरिक युद्ध की सीमा तक नहीं पहुंचते, लेकिन दूसरे देशों की सुरक्षा और स्थिरता को प्रभावित करते हैं। इसमें साइबर हमले, संदिग्ध ड्रोन गतिविधियां, तोड़फोड़ और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।उन्होंने जर्मनी के लीपजिग/हाले एयरपोर्ट पर एक मालवाहक विमान को ड्रोन से निशाना बनाने की कथित कोशिश और पोलैंड के ऊर्जा ढांचे पर साइबर हमले का जिक्र किया। मैक्कलम ने कहा कि यूक्रेन में रूस की सैन्य प्रगति सीमित और महंगी साबित हो रही है, ऐसे में यूरोप के दूसरे देशों को अस्थिर करने की कोशिशों को गंभीरता से देखना चाहिए। रूस ने जर्मनी में हुई घटना से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें मनगढ़ंत बताया है।
रूस के लंदन स्थित दूतावास ने भी पश्चिमी देशों के आरोपों पर आपत्ति जताई। उसका कहना है कि बिना सबूत हर साइबर घटना, ड्रोन की गड़बड़ी या आपराधिक मामले के लिए मॉस्को को जिम्मेदार ठहराना गलत है। दूतावास ने आरोप लगाया कि रूस के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से सुरक्षा शक्तियों के विस्तार और सैन्यीकरण को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है।

10 साल में चार गुना बढ़े विदेशी खतरों से जुड़े मामले

MI5 प्रमुख के मुताबिक, विदेशी सरकारों से जुड़े सुरक्षा खतरों के मामलों का बोझ पिछले एक दशक में चार गुना बढ़ा है। अब एजेंसी इनसे निपटने के लिए शीत युद्ध के दौर की तुलना में भी अधिक संसाधन लगा रही है।ऐसे मामलों में जासूसी, तोड़फोड़, साइबर हमले, लोगों को डराने या प्रभावित करने की कोशिश और दूसरे देशों के हितों के लिए गुप्त गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। मैक्कलम ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मतलब केवल सैन्य ठिकानों और सरकारी संस्थानों की रक्षा करना नहीं है। बिजली आपूर्ति, कारोबार, धार्मिक समुदायों और आम नागरिकों को निशाना बनाने वाली गतिविधियां भी सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती हैं।

हाइब्रिड वॉरफेयर का मतलब

हाइब्रिड वॉरफेयर ऐसी रणनीति है, जिसमें किसी देश को कमजोर करने के लिए केवल सेना का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके बजाय साइबर हमले, दुष्प्रचार, जासूसी, तोड़फोड़, ड्रोन और स्थानीय अपराधियों या दूसरे समूहों के जरिए दबाव बनाने जैसे तरीकों को मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य कई बार सीधे युद्ध की स्थिति पैदा किए बिना विरोधी देश की व्यवस्था, अर्थव्यवस्था या जनता के भरोसे को नुकसान पहुंचाना होता है।ब्रिटेन की चिंता यह है कि ऐसी गतिविधियों के पीछे किसी विदेशी सरकार की भूमिका का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। हमले छोटे या अलग-अलग घटनाओं जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन उनका असर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

AI से जैविक हथियार बनाने का खतरा

मैक्कलम ने कहा कि एआई साइबर हमले करने वालों और उनसे बचाव करने वालों के बीच मुकाबले को और तेज कर रहा है। आतंकवादी संगठन इसका इस्तेमाल किसी जगह की निगरानी, हमले की योजना और अपने तरीकों को बेहतर बनाने के लिए कर सकते हैं।हालांकि, उनकी सबसे बड़ी चिंता एआई के जरिए जैविक हथियार विकसित करने या नए रोगजनक बनाने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह खतरा अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है, लेकिन इसके संभावित नतीजे गंभीर हो सकते हैं। ऐसी तकनीक का गलत इस्तेमाल होने पर नुकसान किसी एक ठिकाने तक सीमित रहने के बजाय बड़ी आबादी तक पहुंच सकता है।
इस चुनौती से निपटने के लिए ब्रिटेन ने 2026 में एआई थ्रेट असेसमेंट सेंटर (AITAC) शुरू किया है। यह MI5 के तहत काम करता है और इसमें एआई सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तथा अपराधों की जांच से जुड़ी विशेषज्ञता को एक साथ लाया गया है। इसका उद्देश्य एआई के वास्तविक खतरों का आकलन करना और यह समझना है कि अपराधी या विदेशी ताकतें इस तकनीक का इस्तेमाल किस तरह कर सकती हैं।
फिलहाल ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसियों के सामने ईरान से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों, रूस की हाइब्रिड रणनीतियों और एआई के संभावित दुरुपयोग जैसी अलग-अलग चुनौतियां हैं। MI5 का कहना है कि इन खतरों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी जुटाने, पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई करने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

1. UK Spy Chief ने Iran और Russia के Hybrid Campaigns को लेकर क्या चेतावनी दी है?

MI5 प्रमुख केन मैक्कलम ने कहा कि ईरान ब्रिटेन में सैन्य ठिकानों जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने रूस पर यूक्रेन के सहयोगी देशों के खिलाफ हाइब्रिड वॉरफेयर तेज करने का भी आरोप लगाया। दोनों देशों ने अपने ऊपर लगाए गए विभिन्न आरोपों को खारिज किया है।

2. Hybrid Warfare क्या होता है?

हाइब्रिड वॉरफेयर में साइबर हमले, जासूसी, दुष्प्रचार, तोड़फोड़ और ड्रोन जैसी गतिविधियों का इस्तेमाल करके किसी देश की सुरक्षा या व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जाती है। इसमें पारंपरिक सैन्य हमले के बिना भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

3. Iran और Russia Britain को निशाना बनाने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं?

MI5 के अनुसार, ईरान से जुड़ी गतिविधियों में अपराधियों और सहयोगियों के जरिए हमले करने की कोशिशें शामिल रही हैं। रूस के मामले में साइबर हमले, ड्रोन से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियां और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की पुष्टि हर मामले में स्वतंत्र रूप से होना जरूरी है।

4. क्या Hybrid Campaigns में Cyberattacks और Disinformation भी शामिल हैं?

हां। साइबर हमले और दुष्प्रचार हाइब्रिड वॉरफेयर के प्रमुख तरीके हो सकते हैं। इनके जरिए सरकारी नेटवर्क, ऊर्जा आपूर्ति, कारोबार या लोगों के भरोसे को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है।

5. Britain की National Security के लिए इन अभियानों को खतरा क्यों माना जा रहा है?

ऐसी गतिविधियां बिजली और संचार व्यवस्था, सैन्य ठिकानों, कारोबार तथा आम नागरिकों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। इनके पीछे किसका हाथ है, यह पता लगाना भी मुश्किल हो सकता है। MI5 के मुताबिक, पिछले 10 साल में राज्य-आधारित खतरों से जुड़े मामलों की संख्या चार गुना हुई है।

6. UK Intelligence Agencies विदेशी खतरों से निपटने के लिए क्या कर रही हैं?

ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियां पुलिस और दूसरी सुरक्षा संस्थाओं के साथ मिलकर संदिग्ध गतिविधियों की जांच कर रही हैं। इसके अलावा साइबर सुरक्षा, खुफिया जानकारी जुटाने और एआई के दुरुपयोग से जुड़े खतरों का आकलन करने पर जोर दिया जा रहा है। 2026 में शुरू किया गया एआई थ्रेट असेसमेंट सेंटर भी इसी दिशा में काम कर रहा है।

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