Pakistan Taliban Afghanistan Militants : इशाक डार की तालिबान को खुली चेतावनी: क्या पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकी अब काबुल के लिए बनेंगे खतरा?
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अफगान तालिबान से अपनी जमीन से संचालित आतंकी गतिविधियां रोकने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि TTP जैसे संगठन भविष्य में तालिबान सरकार के लिए भी खतरा बन सकते हैं। सीमा पार हमलों से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बना हुआ है।
Pakistan Taliban Afghanistan Militants : पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से अपनी जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर अफगान अधिकारी इन समूहों को नहीं रोकते, तो भविष्य में यही संगठन तालिबान सरकार के लिए भी खतरा बन सकते हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों, सैन्य कार्रवाई और आतंकियों की मौजूदगी को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है।डार का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान लगातार आरोप लगा रहा है कि उसकी जमीन पर होने वाले आतंकी हमलों की योजना अफगानिस्तान में बनाई जाती है। पाकिस्तान का कहना है कि सीमा पार से होने वाली हिंसा के कारण उसके सैनिकों और आम नागरिकों की जान जा रही है। हालांकि, अफगान तालिबान ने इस ताजा बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
इशाक डार बोले- आतंकियों को नहीं रोका तो तालिबान सरकार भी निशाने पर आएगी
पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने एक थिंक टैंक के कार्यक्रम में कहा कि उन्होंने जुलाई 2025 में काबुल यात्रा के दौरान अफगानिस्तान के प्रधानमंत्री मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद के सामने यह मुद्दा उठाया था। डार के मुताबिक, उन्होंने अफगान नेतृत्व को आगाह किया था कि अगर उसकी जमीन से काम कर रहे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो एक दिन ये समूह तालिबान सरकार के लिए भी खतरा बन जाएंगे।डार ने कहा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में स्थिरता और आर्थिक तरक्की चाहता है, लेकिन सीमा पार से होने वाले हमलों को लगातार नजरअंदाज नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, आतंकी पहाड़ी रास्तों से पाकिस्तान में घुसते हैं, सैनिकों और नागरिकों को निशाना बनाते हैं और फिर सीमा पार अपने ठिकानों पर लौट जाते हैं।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने 2025 में काबुल की तीन यात्राएं की थीं। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, राजनयिक प्रतिनिधित्व को राजदूत स्तर तक ले जाने और अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान को मध्य एशिया से जोड़ने वाली रेलवे लाइन जैसे मुद्दों पर भी काम किया गया। हालांकि, डार के अनुसार सुरक्षा संबंधी विवाद दोनों देशों के रिश्तों में बड़ी बाधा बने हुए हैं।

पाकिस्तान ने TTP और BLA पर लगाए गंभीर आरोप
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में सक्रिय ठिकानों को लेकर खास तौर पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का नाम लिया है। यह संगठन पाकिस्तान में सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ हमले करता रहा है। TTP और अफगानिस्तान की सत्ता में मौजूद तालिबान अलग संगठन हैं, हालांकि दोनों के बीच करीबी संबंध बताए जाते हैं।पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल TTP के लड़ाके भर्ती, ट्रेनिंग और पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाने के लिए करते हैं। डार ने TTP को पाकिस्तान की सबसे गंभीर सुरक्षा चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस संगठन ने स्कूलों, मस्जिदों, बाजारों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।
पाकिस्तान ने प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) पर भी नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों और आर्थिक ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया। इसके अलावा, पाकिस्तान ने अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट का भी उल्लेख किया, जो अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़ा है।
डार ने कहा कि जनवरी से अब तक पाकिस्तान में 2,800 से ज्यादा आतंकी हमले हो चुके हैं, जिनमें करीब 300 लोग मारे गए या घायल हुए हैं। ये आंकड़े पाकिस्तानी पक्ष की ओर से दिए गए हैं।
अफगानिस्तान में 6,000 से ज्यादा TTP लड़ाकों की मौजूदगी का दावा
कार्यक्रम में पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने भी अफगानिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों को बढ़ती हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और स्वतंत्र आकलनों का हवाला देते हुए दावा किया कि अफगानिस्तान में TTP के 6,000 से ज्यादा लड़ाके और कुल मिलाकर 20,000 से अधिक आतंकी मौजूद हैं।तरार के मुताबिक, 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से TTP ने अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाने, लड़ाकों को ट्रेनिंग देने और भर्ती के लिए किया है। हालांकि, इन आरोपों और बताए गए आंकड़ों पर अफगान तालिबान की ओर से इस बयान के बाद तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव केवल बयानों तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच सीमा पर कई बार झड़पें हो चुकी हैं और पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर हवाई हमले भी किए हैं। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) ने सितंबर में बताया था कि इस साल सीमा पार हिंसा के कारण अफगानिस्तान में 1,100 से ज्यादा नागरिकों की मौत हुई या वे घायल हुए। यह आंकड़ा संघर्ष के आम लोगों पर पड़ रहे असर को दिखाता है।
2,600 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाने का काम लगभग पूरा
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ अपनी 2,600 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा पर बाड़ लगाने का काम भी तेज किया था। इशाक डार के अनुसार, इसका लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यह परियोजना 2017 में शुरू की गई थी, जब पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर सीमा पार से हमले हुए थे।पाकिस्तान का कहना है कि सीमा पर बाड़ लगाने से घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी, लेकिन पहाड़ी इलाकों और दुर्गम रास्तों के कारण सुरक्षा चुनौती बनी हुई है। इस्लामाबाद चाहता है कि अफगान तालिबान अपनी जमीन से पाकिस्तान के खिलाफ हमले करने वाले संगठनों पर कार्रवाई करे।
फिलहाल अफगान तालिबान की प्रतिक्रिया सामने नहीं आने से यह स्पष्ट नहीं है कि काबुल पाकिस्तान की मांग पर क्या कदम उठाएगा। दोनों देशों के बीच व्यापार और संपर्क बढ़ाने की कोशिशें जारी रहने के बावजूद आतंकवाद और सीमा सुरक्षा का मुद्दा रिश्तों में तनाव की मुख्य वजह बना हुआ है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
पाकिस्तान ने अफगान तालिबान से क्या मांग की है?
पाकिस्तान ने मांग की है कि अफगान तालिबान अपनी जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करे और उनकी गतिविधियों को रोके।
पाकिस्तान का आरोप है कि आतंकवादी अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं?
पाकिस्तान का आरोप है कि TTP समेत कुछ आतंकी संगठन अफगानिस्तान में ठिकाने बनाकर वहां भर्ती और ट्रेनिंग करते हैं तथा पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाते हैं। यह पाकिस्तान का दावा है।
TTP क्या है और इसका पाकिस्तान से क्या विवाद है?
TTP यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान एक सशस्त्र संगठन है, जो पाकिस्तान की सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ हमले करता रहा है। यह अफगानिस्तान की सत्ता में मौजूद तालिबान से अलग है, हालांकि दोनों के बीच करीबी संबंध बताए जाते हैं।
पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच तनाव क्यों बढ़ रहा है?
सीमा पार हमलों, पाकिस्तान की हवाई कार्रवाई और अफगानिस्तान में आतंकियों की मौजूदगी को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा है। पाकिस्तान चाहता है कि अफगान तालिबान उसके खिलाफ सक्रिय समूहों पर कार्रवाई करे।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने क्या बयान दिया?
डार ने चेतावनी दी कि अगर अफगानिस्तान की जमीन से काम कर रहे आतंकी समूहों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में वे तालिबान सरकार के लिए भी खतरा बन सकते हैं।
क्या अफगान तालिबान ने पाकिस्तान के आरोपों को स्वीकार किया है?
इस बयान के बाद अफगान तालिबान की तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उसने पाकिस्तान के आरोप स्वीकार किए हैं।