सरकारी डेटा विदेशी क्लाउड से होगा शिफ्ट? DPDP Act से पहले केंद्र की बड़ी तैयारी !
केंद्र सरकार करीब 4.8 लाख ओपन डेटासेट सहित सरकारी जानकारी को स्वदेशी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर होस्ट करने की योजना पर काम कर रही है। (DPDP) Digital Personal Data Protection Act एक्ट के चरणबद्ध क्रियान्वयन से पहले डेटा सुरक्षा और घरेलू नियंत्रण पर जोर है।
भारत सरकार सरकारी जानकारी के भंडारण और सुरक्षा को लेकर स्वदेशी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रही है। रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार करीब 4.8 लाख ओपन डेटासेट सहित सरकारी डेटा को Indigenous Cloud Infrastructure पर होस्ट करने की संभावनाओं पर काम कर रही है। इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण सरकारी जानकारी के भंडारण और प्रसंस्करण पर घरेलू नियंत्रण मजबूत करना और विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं पर निर्भरता कम करना है।
इस संभावित Government Data Migration India प्रक्रिया के तहत Shakti DB जैसे स्वदेशी तकनीकी विकल्पों की क्षमताओं पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि इस चर्चा को सभी सरकारी डेटासेट के स्थानांतरण का अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने डेटासेट स्थानांतरित किए जाएंगे और इसके लिए कौन सी व्यवस्था अपनाई जाएगी।
Shakti DB को लेकर क्या चर्चा हुई ?
रिपोर्ट के अनुसार 7 अक्टूबर 2026 को हुई एक बैठक में Shakti DB की क्षमताओं और सरकारी कामकाज में मौजूदा क्लाउड सेवाओं के संभावित विकल्प के रूप में इसकी उपयोगिता पर चर्चा हुई। बैठक में सरकारी डेटा के प्रबंधन से जुड़े सुरक्षा उपायों और प्रशासनिक नियमों पर भी विचार किया गया।
किसी भी तकनीकी विकल्प को बड़े स्तर पर अपनाने से पहले उसकी भंडारण क्षमता साइबर सुरक्षा विभिन्न प्रणालियों के साथ तालमेल और सेवाओं की निरंतरता का आकलन जरूरी है। इसके अलावा यह भी तय करना होगा कि अलग-अलग श्रेणियों की सरकारी जानकारी तक किसे और किन परिस्थितियों में पहुंच मिलेगी।
इस लिहाज से यह चर्चा Government Cloud Computing India और घरेलू तकनीकी क्षमताओं के विकास से जुड़ी व्यापक कोशिश का हिस्सा है। हालांकि Shakti DB की भूमिका और प्रस्तावित बदलाव का अंतिम स्वरूप आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

सरकारी डेटा के कितने डेटासेट हो सकते हैं शामिल ?
रिपोर्ट में करीब 4.8 लाख ओपन डेटासेट का उल्लेख है। इसके अलावा विभिन्न मंत्रालयों के व्यापक डेटा तंत्र में लगभग 16,000 डेटासेट का भी जिक्र किया गया है। उपलब्ध जानकारी इन दोनों आंकड़ों के बीच सीधा संबंध स्पष्ट नहीं करती। इसलिए इन्हें एक ही कुल संख्या या एक ही श्रेणी के डेटासेट के रूप में नहीं देखना चाहिए।
ओपन डेटासेट और संवेदनशील सरकारी रिकॉर्ड में महत्वपूर्ण अंतर होता है। ओपन डेटासेट को तय नियमों के तहत आम लोगों शोधकर्ताओं और संस्थानों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके विपरीत नागरिकों की निजी जानकारी और संवेदनशील सरकारी रिकॉर्ड तक पहुंच सीमित रखने की जरूरत होती है।
इसलिए किसी भी Public Sector Cloud Migration में केवल डेटा को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित करना पर्याप्त नहीं होगा। डेटा का वर्गीकरण पहुंच से जुड़े नियम सुरक्षा मानक और जिम्मेदारियां भी तय करनी होंगी। यही व्यवस्था Government Data Security India को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

विदेशी क्लाउड पर निर्भरता कम करने की जरूरत क्यों ?
क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर इंटरनेट के माध्यम से डेटा संग्रहित करने उसे संसाधित करने और डिजिटल सेवाएं चलाने की सुविधा देता है। सरकारी विभाग भी विभिन्न डिजिटल प्रणालियों और नागरिक सेवाओं के संचालन के लिए क्लाउड तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।
विदेशी सेवा प्रदाताओं पर निर्भरता कम करने की कोशिश के पीछे भारत की डेटा संप्रभुता यानी India Data Sovereignty का विचार महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ है कि देश अपने महत्वपूर्ण डेटा के प्रबंधन और उस पर लागू नियमों के संबंध में पर्याप्त नियंत्रण बनाए रख सके।
Domestic Cloud Infrastructure और Indian Cloud Service Providers को बढ़ावा देने से घरेलू तकनीकी क्षमता विकसित करने और महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं पर नियंत्रण मजबूत करने में मदद मिल सकती है। इससे भारत के डेटा सेंटर और क्लाउड सेवा क्षेत्र के विकास को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
हालांकि केवल भारतीय क्लाउड सेवा का इस्तेमाल करने से डेटा अपने आप सुरक्षित नहीं हो जाता। मजबूत साइबर सुरक्षा नियमित निगरानी अनधिकृत पहुंच रोकने के उपाय और स्पष्ट जवाबदेही भी जरूरी हैं। इसलिए किसी भी India Cloud Computing Policy में तकनीकी क्षमता के साथ सुरक्षा और संचालन के मानकों पर ध्यान देना आवश्यक है।
DPDP Act लागू होने से पहले यह कदम क्यों अहम है ?
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 यानी Digital Personal Data Protection Act डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इसका उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा करना और डेटा के वैध इस्तेमाल के लिए नियम तय करना है।इस कानून से जुड़े नियम नवंबर 2025 में अधिसूचित किए गए थे। इनके क्रियान्वयन के लिए चरणबद्ध समयसीमा तय की गई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार कानून के प्रमुख अनुपालन संबंधी प्रावधान 13 मई 2027 से लागू होने निर्धारित हैं।
ऐसे में Data Protection Compliance India और Government Data Security India के लिहाज से सरकारी विभागों के लिए अपनी डेटा प्रबंधन प्रणालियों की समीक्षा करना महत्वपूर्ण है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि व्यक्तिगत जानकारी का संग्रह इस्तेमाल भंडारण और सुरक्षा लागू कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
यहां Data Localization India और डेटा सुरक्षा के बीच अंतर समझना जरूरी है। डेटा को भारतीय सर्वर पर रखना और डेटा संरक्षण कानून का पालन करना दो अलग बातें हैं। केवल घरेलू सर्वर का इस्तेमाल करने से कानून के सभी दायित्व पूरे नहीं हो जाते। डेटा का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हो रहा है उस तक किसकी पहुंच है और उसे अनधिकृत इस्तेमाल से कैसे बचाया जा रहा है ये सभी पहलू महत्वपूर्ण हैं।
भारत में पहले से मौजूद है सरकारी क्लाउड व्यवस्था
भारत में सरकारी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का काम पहले से चल रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 2014 में MeghRaj नाम से सरकारी क्लाउड पहल शुरू की थी।सरकारी जानकारी के अनुसार जून 2026 तक MeghRaj क्लाउड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले सरकारी विभागों की संख्या बढ़कर 2,323 हो गई थी।
DigiLocker MyGov और राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म भी भारत के व्यापक सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारत में Government Digital Infrastructure का विकास पहले से जारी है। मौजूदा चर्चा को सरकारी क्लाउड सेवाओं की शुरुआत के बजाय घरेलू तकनीकी क्षमता बढ़ाने और डेटा के भंडारण तथा प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करने की संभावित कोशिश के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

निष्कर्ष
सरकारी डेटा को स्वदेशी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर होस्ट करने की संभावित योजना भारत की डेटा संप्रभुता और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी बहस को महत्वपूर्ण बनाती है। Shakti DB जैसे विकल्पों की उपयोगिता का आकलन इस दिशा में अहम हो सकता है। हालांकि योजना का वास्तविक प्रभाव उसके अंतिम स्वरूप सुरक्षा मानकों और लागू कानूनी दायित्वों के पालन पर निर्भर करेगा।
FAQ (Frequently Asked Questions):
भारत सरकार अपने डेटासेट को Indigenous Cloud Infrastructure पर क्यों शिफ्ट करना चाहती है ?
इस संभावित पहल का उद्देश्य सरकारी डेटा के भंडारण और प्रसंस्करण पर घरेलू नियंत्रण मजबूत करना और विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं पर निर्भरता कम करना है। इसके साथ डेटा सुरक्षा और सरकारी प्रणालियों की विश्वसनीयता भी महत्वपूर्ण होगी।
Indigenous Cloud Infrastructure क्या होता है ?
Indigenous Cloud Infrastructure से आशय स्वदेशी तकनीकी क्षमता पर आधारित क्लाउड व्यवस्था से है। इसके जरिए डेटा संग्रहित किया जा सकता है डिजिटल सेवाएं चलाई जा सकती हैं और जानकारी को संसाधित किया जा सकता है। इसकी सुरक्षा तकनीकी मानकों और प्रबंधन व्यवस्था पर निर्भर करती है।
डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के क्रियान्वयन से पहले Government Data Migration क्यों अहम है ?
सरकारी विभागों को अपनी डेटा प्रबंधन प्रणालियों और सुरक्षा उपायों की समीक्षा करनी पड़ सकती है। हालांकि डेटा माइग्रेशन अपने आप में DPDP Act के अनुपालन की अनिवार्य शर्त नहीं है। कानून के लागू प्रावधानों के अनुसार डेटा का प्रबंधन करना जरूरी होगा।
भारत के Digital Personal Data Protection Act का उद्देश्य क्या है?
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए कानूनी ढांचा तैयार करता है। इसका उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा और वैध उद्देश्यों के लिए डेटा के इस्तेमाल के बीच संतुलन स्थापित करना है।
सरकारी डेटा को भारतीय क्लाउड सर्वर पर रखने के क्या फायदे हो सकते हैं ?
इससे घरेलू तकनीकी क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है और महत्वपूर्ण डेटा के प्रबंधन पर भारत का नियंत्रण मजबूत हो सकता है। हालांकि वास्तविक लाभ साइबर सुरक्षा सेवा की विश्वसनीयता और जवाबदेही की व्यवस्था पर निर्भर करेंगे।
Data Sovereignty क्या है और भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
Data Sovereignty यानी डेटा संप्रभुता का अर्थ है डेटा के प्रबंधन और उस पर लागू नियमों के संबंध में किसी देश का नियंत्रण। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सरकारी जानकारी की सुरक्षा घरेलू तकनीकी क्षमता और डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दों को दिशा मिलती है।