राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ज्ञानेश कुमार को नोटिस; जंतर-मंतर पर भी मांगा जवाब
SIR को लेकर विपक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया। राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठे, जबकि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने के मामले में सरकार और पुलिस से जवाब मांगा गया।
देशभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सियासी घमासान अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। Supreme Court SIR Hearing के दौरान अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी को नोटिस जारी किया। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर याचिका दायर की है। सुनवाई में अदालत ने राहुल गांधी के सोमवार को किए गए मार्च और उनके आचरण पर भी टिप्पणी की। साथ ही, दिल्ली के जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाए जाने पर भी जवाब मांगा गया।
SIR Hearing Supreme Court 2026: ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की दो सदस्यीय पीठ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठाए गए हैं।अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को नोटिस जारी किया है। इस मामले में नोटिस जारी होने का अर्थ संबंधित पक्षों से जवाब मांगना है। यह अपने आप में याचिका में लगाए गए आरोपों को सही ठहराने वाला अंतिम फैसला नहीं है।विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और कथित चुनावी अनियमितताओं पर सवाल उठा रहा है। वहीं, मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की सुनवाई पर निर्भर करेगी।
राहुल गांधी के आचरण पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान पीठ ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने के तरीके और उनके आचरण का जिक्र किया। अदालत ने कहा कि राहुल गांधी को अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देना होगा।पीठ ने टिप्पणी की कि किसी को भी न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अदालत ने कहा, “कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं ला सकता।” पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी करने की कार्रवाई अस्थायी आधार पर स्वीकार की जाएगी और यह संबंधित व्यक्ति के आचरण पर स्पष्टीकरण देने की शर्त के अधीन होगी। इस टिप्पणी के बीच यह ध्यान रखना जरूरी है कि अदालत की ओर से आचरण पर सवाल उठाना और याचिका में लगाए गए चुनावी अनियमितताओं के आरोपों पर फैसला देना दो अलग-अलग बातें हैं।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने पर सरकार से जवाब तलब
SIR विवाद के बीच जंतर-मंतर का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट में उठा। याचिका में मांग की गई कि जंतर-मंतर को फिर से अधिसूचित प्रदर्शन स्थल बनाया जाए। अदालत ने दिल्ली सरकार से पूछा कि इस ऐतिहासिक स्थल को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित सूची से हटाने का फैसला क्यों लिया गया।सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राजधानी में प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने की संभावना पर विचार करने के लिए पहले एक समिति गठित की गई थी।सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने तकनीक के दौर में प्रदर्शन स्थल की भूमिका और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच इसके महत्व पर टिप्पणी की। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दलील दी कि इस तर्क के आधार पर तो कोई व्यक्ति केरल से भी प्रदर्शन कर सकता है।जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। इसके अधिसूचित प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और महिला पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 172 और 163 लागू किए जाने को लेकर दिल्ली पुलिस को भी नोटिस जारी किया। सुनवाई में प्रदर्शनकारियों की यह दलील सामने आई कि विरोध दर्ज कराने के लिए प्रदर्शन स्थल आसपास होना चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से तुषार मेहता ने महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन हिंसा और उत्पीड़न से जुड़े मुद्दे पर कहा कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा के पक्ष में है, जिनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोगों में पत्रकारों और सोशल मीडिया के लिए रील बनाने वालों के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। यह सरकार की ओर से अदालत में रखी गई दलील थी; इसे किसी व्यक्ति के पत्रकार या प्रदर्शनकारी होने पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।जंतर-मंतर से जुड़े मामले में अदालत के सामने अब प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से संबंधित सवाल हैं। संबंधित अधिकारियों के जवाब आने के बाद इन मुद्दों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
SIR क्या है और मतदाता सूची को लेकर विवाद क्यों?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अद्यतन करना है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सही तरीके से दर्ज रहें और अपात्र या गलत प्रविष्टियों की पहचान की जा सके।हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची में नामों से संबंधित चिंताएं उठाई हैं। यही वजह है कि Supreme Court SIR Hearing राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बन गई है।मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया लागू चुनावी नियमों के तहत होती है। किसी मतदाता को अपने नाम की स्थिति की जांच करनी चाहिए और नाम या विवरण में गड़बड़ी होने पर निर्वाचन आयोग के निर्धारित माध्यमों से सुधार के लिए आवेदन करना चाहिए। SIR के लिए आवश्यक दस्तावेज संबंधित राज्य और निर्वाचन आयोग के आधिकारिक निर्देशों के अनुसार जांचने चाहिए।
निष्कर्ष
Supreme Court SIR Hearing में चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस, राहुल गांधी के आचरण पर टिप्पणी और जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटाने पर जवाब तलब किए जाने से मामला और अहम हो गया है। फिलहाल, याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। आगे की सुनवाई में संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की टिप्पणियां इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी।
FAQ (Frequently Asked Questions):
Supreme Court में SIR Hearing क्यों हो रही है?
INDIA गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर याचिका दायर की है। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
SIR यानी Special Intensive Revision क्या है?
SIR मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच करना और पात्र मतदाताओं के नाम तथा अन्य विवरणों को सही बनाए रखना है।
सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को नोटिस क्यों दिया?
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान कथित चुनावी अनियमितताओं पर सवाल उठाए गए हैं। इसी याचिका पर अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों से जवाब मांगा है।
जंतर-मंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने जंतर-मंतर को अधिसूचित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा। अदालत ने प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थानों पर विचार और संबंधित प्रशासनिक फैसले के कारणों पर सवाल उठाए।
SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया क्या है?
मतदाता सूची में नाम हटाने या संशोधित करने की कार्रवाई निर्धारित चुनावी नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार होती है। मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति जांचनी चाहिए और किसी त्रुटि की स्थिति में निर्वाचन आयोग के आधिकारिक माध्यमों से शिकायत या सुधार का अनुरोध करना चाहिए।