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Iran British Air Base Incident : ब्रिटेन के एयरबेस पर हमले की साजिश में ईरान पर शक, क्या दोनों देशों में बढ़ेगा टकराव?

ब्रिटेन ने RAF फेयरफोर्ड एयरबेस के पास संदिग्ध साजिश के लिए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड पर शक जताया। ईरान ने आरोप खारिज कर सबूत मांगे। अमेरिका, ब्रिटेन समेत 29 देशों ने ईरान की कथित विदेशी गतिविधियों की निंदा की।

Iran British Air Base Incident : ब्रिटेन के एयरबेस पर हमले की साजिश में ईरान पर शक, क्या दोनों देशों में बढ़ेगा टकराव?

Iran British Air Base Incident : ब्रिटेन में अमेरिकी लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल वाले रॉयल एयर फोर्स (RAF) फेयरफोर्ड एयरबेस के पास हुई संदिग्ध घटना को लेकर ईरान और ब्रिटेन के बीच तनाव बढ़ गया है। ईरान ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को इस मामले में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए ब्रिटिश सरकार से आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने को कहा। वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने संसद में दावा किया कि इस घटना के पीछे ईरान की भूमिका होने की प्रबल आशंका है और इसे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने लगभग निश्चित रूप से निर्देशित किया था। इस बीच, अमेरिका, ब्रिटेन और 27 अन्य देशों ने ईरान की कथित विदेशी गतिविधियों की निंदा करते हुए संयुक्त बयान जारी किया।

पूरा मामला क्या है?

ब्रिटेन के ग्लॉस्टरशायर स्थित अमेरिकी लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल वाले रॉयल एयर फोर्स (RAF) फेयरफोर्ड एयरबेस के पास संदिग्ध साजिश का मामला सामने आया है। 27 सितंबर 2026 को एयरबेस के आसपास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और कई लोगों को हिरासत में लिया। मामले की जांच के दौरान ड्रोन हमले की साजिश का संदेह जताया गया। 12 अक्टूबर को ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने संसद में कहा कि इस साजिश के पीछे ईरान में बैठे किसी व्यक्ति की भूमिका होने की प्रबल संभावना है और इसका संबंध ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से हो सकता है। ब्रिटेन ने इस मामले में ईरानी राजदूत को तलब किया और दो ईरानी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए।

28 सितंबर, 2026 को ब्रिटेन के ग्लूसेस्टरशायर के फेयरफोर्ड में, RAF फेयरफोर्ड एयरबेस के बाहर सड़क पर हथियारबंद पुलिस अधिकारी पहरा दे रहे हैं। पुलिस ने बेस पर 'बड़ी घटना' घोषित की थी, क्योंकि 'एक्सप्लोसिव्स एक्ट' (विस्फोटक अधिनियम) के तहत अपराधों के शक में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। (Image Credit : Reuters)
28 सितंबर, 2026 को ब्रिटेन के ग्लूसेस्टरशायर के फेयरफोर्ड में, RAF फेयरफोर्ड एयरबेस के बाहर सड़क पर हथियारबंद पुलिस अधिकारी पहरा दे रहे हैं। पुलिस ने बेस पर 'बड़ी घटना' घोषित की थी, क्योंकि 'एक्सप्लोसिव्स एक्ट' (विस्फोटक अधिनियम) के तहत अपराधों के शक में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। (Image Credit : Reuters)

ब्रिटेन ने IRGC को बताया घटना का जिम्मेदार

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने 12 अक्टूबर को संसद में कहा कि सरकार के आकलन के मुताबिक, फेयरफोर्ड एयरबेस से जुड़ी घटना का ईरान में समन्वय किए जाने की प्रबल आशंका है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे ईरान की IRGC के होने की संभावना लगभग निश्चित है। ब्रिटिश सरकार ने चेतावनी दी कि वह अपनी जमीन पर ऐसे सुरक्षा खतरों को बर्दाश्त नहीं करेगी और कथित गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क तथा उनकी फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई करेगी। हालांकि, ईरान ने इन आरोपों को नकारा है और जांच अभी जारी है।ब्रिटिश अधिकारियों के मुताबिक, 27 सितंबर को एयरबेस के पास संदिग्ध गतिविधियों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू की थी। शुरुआती कार्रवाई में पांच लोगों को हिरासत में लिया गया। बाद में जांच के दौरान अन्य संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुल सात लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, हालांकि सभी आरोपियों की भूमिका और कथित साजिश से उनके संबंधों की जांच जारी है। संदिग्ध वाहनों में पेट्रोल मिला था, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार वहां कोई कारगर विस्फोटक उपकरण नहीं मिला। गिरफ्तारी अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।

अमेरिका ने एयरबेस से B-1 बॉम्बर हटाए

RAF फेयरफोर्ड दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड के ग्लॉस्टरशायर में स्थित ब्रिटिश सैन्य एयरबेस है। इसका इस्तेमाल अमेरिकी वायुसेना भी करती है, खासकर लंबी दूरी के रणनीतिक बमवर्षक विमानों के संचालन के लिए। ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान भी इस एयरबेस का इस्तेमाल किया गया था।27 सितंबर की घटना के बाद संभावित हमले की आशंका के चलते अमेरिका ने फेयरफोर्ड से अपने B-1 बॉम्बर विमानों को हटा लिया। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया कि यह कदम ईरान की ओर से संभावित ड्रोन हमले के खतरे को देखते हुए उठाया गया था। हालांकि, इस आशंका और ईरान की कथित भूमिका को लेकर जांच के निष्कर्ष अभी सार्वजनिक रूप से पूरी तरह सामने नहीं आए हैं।

29 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान को चेताया

ब्रिटेन, अमेरिका और 27 अन्य देशों के विदेश मंत्रियों ने 12 अक्टूबर को संयुक्त बयान जारी कर ईरान की कथित हिंसक गतिविधियों की निंदा की। बयान में हत्या की साजिश, आगजनी, तोड़फोड़, साइबर हमलों और दूसरे तरीकों से विरोधी देशों में अस्थिरता फैलाने की गतिविधियों का उल्लेख किया गया।इन देशों ने फेयरफोर्ड एयरबेस की घटना में ईरान की भूमिका के ब्रिटिश आकलन का समर्थन किया। बयान में यह भी कहा गया कि यूरोप में यहूदी समुदायों, ईरानी पत्रकारों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाने वाली घटनाओं के बाद यह मामला सामने आया है। देशों ने चेतावनी दी कि किसी भी देश की ओर से दूसरे देशों में अपने समर्थक समूहों या अन्य माध्यमों के जरिए लोगों को डराने, धमकाने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
संयुक्त बयान में कहा गया कि संबंधित देश अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग बढ़ाएंगे तथा जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। बयान पर ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, कनाडा, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, लातविया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन और स्वीडन के साथ ब्रिटेन और अमेरिका ने हस्ताक्षर किए।

ईरान बोला- आरोप लगाने से पहले सबूत दें

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक, ब्रिटेन में ईरान के राजदूत सैयद अली मूसावी ने फेयरफोर्ड एयरबेस की घटना में तेहरान की भूमिका के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से कहा कि यदि उसके पास ईरान के खिलाफ कोई सबूत है, तो उसे सामने रखा जाए।मूसावी ने ब्रिटिश विदेश कार्यालय के मंत्री स्टीफन डॉटी के साथ बैठक के दौरान भी आरोपों को खारिज किया। ईरान ने यह भी कहा कि वह मामले की जांच में संबंधित संस्थाओं के बीच सहयोग के लिए तैयार है। तेहरान का कहना है कि बिना ठोस सबूत के उस पर आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए।

ब्रिटेन-ईरान तनाव और बढ़ने के संकेत

फेयरफोर्ड की घटना को लेकर दोनों देशों के बयान अलग-अलग हैं। ब्रिटेन इसे ईरान से जुड़ी संभावित साजिश मान रहा है, जबकि तेहरान ने आरोपों को खारिज करते हुए सबूत मांगे हैं और जांच में सहयोग की पेशकश की है। ब्रिटिश सरकार ने ईरान से जुड़े दो लोगों पर प्रतिबंध लगाने की भी घोषणा की है। ऐसे में आगे की जांच और सामने आने वाले सबूत यह तय करने में अहम होंगे कि संदिग्ध घटना के पीछे किसकी भूमिका थी।

FAQ (Frequently Asked Questions):

ईरान ने ब्रिटिश एयरबेस की घटना में अपनी भूमिका से इनकार क्यों किया?

ईरान का कहना है कि ब्रिटेन ने उसके खिलाफ आरोप लगाए हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए हैं। ईरानी राजदूत अली मूसावी ने ब्रिटिश सरकार से आरोपों के समर्थन में प्रमाण देने को कहा है। तेहरान ने जांच में सहयोग की पेशकश भी की है।

ब्रिटेन का कौन-सा एयरबेस इस घटना से जुड़ा है?

यह घटना RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से जुड़ी है। इसका इस्तेमाल ब्रिटिश वायुसेना के साथ अमेरिकी वायुसेना भी करती है।

RAF Fairford एयरबेस कहां स्थित है?

RAF फेयरफोर्ड इंग्लैंड के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में ग्लॉस्टरशायर में स्थित है। यह अमेरिकी रणनीतिक बमवर्षक विमानों के संचालन के लिए भी इस्तेमाल होता रहा है।

ब्रिटिश एयरबेस की घटना की जांच क्यों की जा रही है?

27 सितंबर को एयरबेस के पास संदिग्ध गतिविधियों के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू की थी। अधिकारियों को संभावित साजिश का संदेह है। ब्रिटेन ने ईरान की IRGC पर घटना को निर्देशित करने का आरोप लगाया है, लेकिन ईरान ने इससे इनकार किया है।

ईरान के राजदूत ने इस मामले पर क्या बयान दिया?

राजदूत अली मूसावी ने ईरान की भूमिका के आरोपों को खारिज किया और ब्रिटिश सरकार से सबूत पेश करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान जांच में संबंधित संस्थाओं के बीच सहयोग के लिए तैयार है।

क्या ब्रिटेन ने ईरानी राजदूत को तलब किया है?

12 अक्टूबर को ईरानी राजदूत अली मूसावी ने ब्रिटिश विदेश कार्यालय के मंत्री स्टीफन डॉटी से मुलाकात की। इस बैठक में उन्होंने ईरान के खिलाफ आरोपों को खारिज किया। ब्रिटेन ने घटना को लेकर ईरान पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए हैं और दो ईरानी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा भी की है।

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