Strait of Hormuz Tolls : होर्मुज पर ईरान के दावे के खिलाफ 60 देश एकजुट, क्या रोक पाएंगे समुद्री टोल?
यूरोपीय संघ की पहल पर 60 देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य समेत अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अवैध शुल्क और टोल लगाने का विरोध किया। ईरान के नियंत्रण संबंधी दावों के बीच जहाजों की आवाजाही घटी है और अमेरिका से बातचीत में गतिरोध बना हुआ है।
Strait of Hormuz Tolls : अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर तनाव बढ़ गया है। यूरोपीय संघ (EU) की पहल पर 60 देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों पर अवैध शुल्क और टोल लगाने का विरोध करने की घोषणा की है। 12 अक्टूबर 2026 को घोषित इस पहल में यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों के साथ 33 अन्य देश शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्रिटेन, कनाडा और सिंगापुर भी इसका हिस्सा हैं। यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का दावा कर रहा है और वहां से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर शर्तें लगाने की बात कह रहा है।यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने इस पहल को ‘नो फीस, नो टोल्स’ नाम दिया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते सभी देशों के लिए खुले रहने चाहिए, न कि केवल उनके लिए जो शुल्क चुका सकते हैं। इस घोषणा का उद्देश्य समुद्री मार्गों को किसी देश की कमाई या राजनीतिक दबाव बनाने का जरिया बनने से रोकना है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर दुनिया की नजर
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG के व्यापार में इसकी अहम भूमिका है। युद्ध शुरू होने से पहले वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था।इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहता। तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं। समुद्री परिवहन, बीमा और माल ढुलाई महंगी होने से खाद्य पदार्थों से लेकर औद्योगिक सामान तक की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
यही वजह है कि होर्मुज से जहाजों की आवाजाही और उन पर शुल्क लगाने का विवाद अब क्षेत्रीय तनाव से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय व्यापार का मुद्दा बन गया है।

EU की घोषणा में अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला
60 देशों की साझा घोषणा में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि यानी UNCLOS का उल्लेख किया गया है। यह संधि समुद्र में गतिविधियों और समुद्री अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा तय करती है।घोषणा में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाले जलडमरूमध्यों में वैध समुद्री आवागमन को बाधित करने वाले अवैध शुल्क, टोल, भेदभावपूर्ण पाबंदियों और पहले से अनुमति लेने जैसी शर्तों का विरोध किया जाएगा। देशों ने समुद्री सुरक्षा और नौवहन व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, खासकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO), के साथ काम करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
हालांकि, इस घोषणा का अर्थ यह नहीं है कि सभी देशों ने ईरान के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई करने पर सहमति दी है। यह मुख्य रूप से कूटनीतिक पहल है, जिसका जोर अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता पर है।
ईरान ने होर्मुज पर नियंत्रण का दावा किया
ईरान का कहना है कि मौजूदा संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर के सलाहकार मोहम्मदरेजा नकदी ने दावा किया कि जिन रास्तों को ईरान अवैध मानता है, उन्हें जल्द बंद किया जा सकता है। उन्होंने ओमान के तट के पास से गुजरने वाले एक दक्षिणी रास्ते का भी जिक्र किया।नकदी के मुताबिक, इन रास्तों का इस्तेमाल छोटी नावों के जरिए तेल की तस्करी और बड़े टैंकरों में तेल स्थानांतरित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जलडमरूमध्य को लेकर मौजूदा स्थिति जारी रह सकती है।
ये ईरानी अधिकारियों के दावे हैं। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ की घोषणा में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले समुद्री रास्तों पर वैध आवागमन को एकतरफा शर्तों के जरिए बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट
होर्मुज में तनाव का असर जहाजों की आवाजाही के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। शिपिंग डेटा और विश्लेषण करने वाली कंपनी केप्लर के अनुसार, 6 अक्टूबर को केवल सात मालवाहक जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरे। यह 23 जुलाई के बाद दर्ज सबसे कम संख्या थी। 7 अक्टूबर को यह संख्या बढ़कर 10 हुई, लेकिन फिर भी रविवार और सोमवार को दर्ज 20 से अधिक जहाजों के मुकाबले काफी कम रही।युद्ध से पहले हर दिन लगभग 125 बड़े वाणिज्यिक जहाज इस रास्ते से गुजरते थे। टैंकरों पर हमलों, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और परिवहन की मुश्किलों ने इस आवाजाही को प्रभावित किया है। कुछ तेल निर्यातकों ने वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल भी किया है।
इस व्यवधान के कारण समुद्री परिवहन और बीमा की लागत बढ़ने का खतरा है। यदि जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर और गहरा हो सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में भी अड़चन
होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बीच सहमति नहीं बन पाई है। 11 अक्टूबर को ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने जलडमरूमध्य खोलने से जुड़ी ईरान की सात शर्तों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया को अपर्याप्त बताया था।ईरान की मांगों में संघर्ष समाप्त करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना और ईरान की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करना शामिल है। रेजाई के अनुसार, अमेरिका ने कुछ मांगें स्वीकार की हैं, लेकिन कई मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ईरान ने संकेत दिया है कि शर्तें पूरी होने तक वह जलडमरूमध्य खोलने के लिए तैयार नहीं है।
इस तरह एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मतभेद बने हुए हैं, वहीं दूसरी ओर 60 देशों की घोषणा ने समुद्री मार्गों पर शुल्क और पाबंदियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय विरोध को स्पष्ट कर दिया है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
60 देशों ने Shipping Tolls के खिलाफ EU Declaration का समर्थन क्यों किया?
इन देशों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों की वैध आवाजाही को सुरक्षित रखना और अवैध शुल्क, भेदभावपूर्ण पाबंदियों तथा एकतरफा शर्तों का विरोध करना है। होर्मुज में व्यवधान के कारण ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर पड़ने वाले असर ने इस पहल को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
Strait of Hormuz कहां स्थित है?
यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
Strait of Hormuz वैश्विक तेल व्यापार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
युद्ध से पहले दुनिया की लगभग पांचवीं तेल और LNG आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती थी। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर ऊर्जा की कीमतें, माल ढुलाई और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हो सकती हैं।
ईरान Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क क्यों लगाना चाहता है?
ईरान ने जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और जहाजों की आवाजाही पर शर्तें लगाने का दावा किया है। मौजूदा संघर्ष के बीच वह अपनी मांगें मनवाने के लिए इस मार्ग पर नियंत्रण को रणनीतिक दबाव के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि, शुल्क लगाने के पीछे ईरान की आधिकारिक नीति और उसके कानूनी आधार को अलग से समझना जरूरी है।
EU Declaration में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को लेकर क्या कहा गया है?
घोषणा में अवैध टोल, शुल्क, भेदभावपूर्ण पाबंदियों और वैध नौवहन को रोकने वाली शर्तों का विरोध किया गया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा और आवाजाही की स्वतंत्रता बनाए रखने की बात भी कही गई है।
UNCLOS क्या है और इसका Maritime Navigation से क्या संबंध है?
UNCLOS यानी संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि समुद्र में देशों के अधिकारों और जिम्मेदारियों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा है। इसमें अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने के अधिकारों और नौवहन से जुड़े नियमों का प्रावधान है।