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सऊदी अरब बना रहा है पहले से भी घातक मिसाइलें? सैटेलाइट तस्वीरों से खुला बड़ा राज, ईरान की बढ़ेगी टेंशन!

सऊदी अरब में मिसाइल निर्माण केंद्र के विस्तार के संकेत मिले हैं। अमेरिकी शोधकर्ताओं के सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के मुताबिक, नई सुविधाएं लंबी दूरी तक मार करने वाली ठोस ईंधन वाली मिसाइलों के उत्पादन में मदद कर सकती हैं। इससे मध्य पूर्व में हथियारों की होड़ और अमेरिकी परमाणु समझौते पर चिंताएं बढ़ सकती हैं।

सऊदी अरब बना रहा है पहले से भी घातक मिसाइलें? सैटेलाइट तस्वीरों से खुला बड़ा राज, ईरान की बढ़ेगी टेंशन!

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और हूती विद्रोहियों से खतरे के बीच Saudi Arabia Missile Development को लेकर एक अहम खुलासा सामने आया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर सऊदी अरब के मिसाइल निर्माण परिसर में विस्तार के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि नई सुविधाएं अधिक दूरी तक मार करने वाली या भारी पेलोड ले जाने वाली मिसाइलों के उत्पादन में मदद कर सकती हैं। यह विस्तार रियाद को ईरान से संभावित हमलों के खिलाफ अपनी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में मदद दे सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नई सुविधाओं में किस प्रकार की मिसाइलों का उत्पादन होगा। शोधकर्ताओं के निष्कर्ष सैटेलाइट तस्वीरों और उपलब्ध जानकारियों पर आधारित आकलन हैं, आधिकारिक पुष्टि नहीं।

सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा? मिसाइल प्लांट का तेजी से विस्तार

A satellite image shows the solid propellant motor plant in Al Duwadimi, Saudi Arabia, on September 7, 2025. Reuters File
A satellite image shows the solid propellant motor plant in Al Duwadimi, Saudi Arabia, on September 7, 2025. Reuters File

फिलाडेल्फिया स्थित फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (FPRI) के शोधकर्ता सैम लेयर और माइकल ड्यूट्समैन ने अप्रैल 2025 से सितंबर 2026 के बीच की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया। ये तस्वीरें अमेरिकी कंपनी प्लैनेट लैब्स की थीं।शोधकर्ताओं के मुताबिक, रियाद से लगभग 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित अल-दुवादिमी परिसर में एक नई इमारत बनाई गई है। उनका अनुमान है कि इसमें मिसाइल मोटर के लिए ठोस ईंधन तैयार करने वाले विशेष गड्ढे हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में ईंधन के घटकों को मिसाइल मोटर के आवरण में डालकर जमाया जाता है।नई इमारत मौजूदा संदिग्ध सुविधा से कम से कम दोगुनी बड़ी बताई गई है। इसके आसपास बनी दीवारें संभावित विस्फोट से पड़ोसी संरचनाओं को बचाने के लिए बनाई गई हो सकती हैं। परिसर में एक दूसरी इमारत का निर्माण भी जारी दिखाई दिया, जिसका इस्तेमाल ईंधन सामग्री या तैयार मिसाइल के पुर्जे रखने के लिए हो सकता है।

Saudi Arabia Missile Development: क्या अब बढ़ेगी मिसाइलों की मारक क्षमता?

शोधकर्ताओं का आकलन है कि अल-दुवादिमी परिसर का विस्तार बड़ी ठोस ईंधन वाली मिसाइलों के उत्पादन की दिशा में किया जा रहा हो सकता है। ऐसी मिसाइलें अधिक दूरी तक मार कर सकती हैं या भारी पेलोड ले जा सकती हैं।ठोस ईंधन वाली मिसाइलों का एक बड़ा फायदा यह है कि उन्हें लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर अपेक्षाकृत जल्दी लॉन्च किया जा सकता है। इससे सैन्य बलों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत हो सकती है।FPRI के शोधकर्ता सैम लेयर ने संभावना जताई कि सऊदी अरब ठोस ईंधन वाली डीएफ-15 मिसाइल का उत्पादन कर सकता है। उनके अनुसार, परिसर का विस्तार लंबी दूरी वाली डीएफ-21 या उससे मिलती-जुलती मिसाइलों के उत्पादन में भी मदद कर सकता है। हालांकि, इन संभावनाओं की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

चीन की तकनीक से जुड़ रहे मिसाइल कार्यक्रम के तार?

FPRI के शोधकर्ताओं और लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) तथा CNA के विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, सऊदी अरब के मिसाइल भंडार की कुछ विशेषताएं चीनी तकनीक से जुड़ाव की ओर संकेत करती हैं। शोधकर्ताओं ने अल-दुवादिमी परिसर और चीन के कुछ मिसाइल निर्माण संयंत्रों के बीच समानताएं भी बताई हैं।1991 के एक अवर्गीकृत अमेरिकी खुफिया आकलन के अनुसार, सऊदी अरब ने 1987 में चीन से लगभग 40 तरल ईंधन वाली डीएफ-3 बैलिस्टिक मिसाइलें हासिल की थीं। अप्रैल 2014 में सऊदी अरब ने पहली बार सैन्य परेड में इनमें से दो मिसाइलों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया था।शोधकर्ताओं ने यमन में सऊदी अरब द्वारा दागी गई एक चीनी डिजाइन वाली डीएफ-15 मिसाइल के संभावित मलबे की पहचान करने का दावा भी किया है। उनका आकलन सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों और वीडियो पर आधारित था।रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका लंबे समय से लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाता रहा है। ऐसे में चीन सऊदी अरब के लिए एक संभावित तकनीकी स्रोत बन सकता है।

ईरान से मुकाबले और अमेरिकी परमाणु समझौते पर असर

लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें सऊदी अरब को ईरान के खिलाफ अतिरिक्त सैन्य विकल्प दे सकती हैं। IISS के शोधकर्ता साशा ब्रुचमैन के अनुसार, ऐसी क्षमता से सऊदी अरब को ईरानी हवाई सुरक्षा के बीच अपने अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमानों को जोखिम में डाले बिना लक्ष्य पर हमला करने का विकल्प मिल सकता है।विश्लेषकों का कहना है कि मध्य पूर्व में कई देश अपनी आक्रामक और रक्षात्मक सैन्य क्षमताएं बढ़ा रहे हैं। CNA के विश्लेषक डेकर एवेलेथ ने रॉयटर्स से कहा कि संयुक्त अरब अमीरात और तुर्किये में भी इसी तरह की गतिविधियां देखी जा रही हैं।इस बीच, सऊदी अरब का मिसाइल कार्यक्रम अमेरिका के साथ प्रस्तावित असैन्य परमाणु समझौते पर भी असर डाल सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अमेरिका सऊदी अरब को बिजली उत्पादन के लिए यूरेनियम संवर्धन क्षमता विकसित करने में मदद कर सकता है। समझौते के आलोचकों को आशंका है कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय न होने पर परमाणु प्रसार का जोखिम बढ़ सकता है। सऊदी अरब ने परमाणु हथियार विकसित करने की किसी योजना से इनकार किया है।

निर्माण कब तक पूरा हो सकता है?

FPRI के आकलन के अनुसार, अल-दुवादिमी परिसर में निर्माण अप्रैल 2025 में शुरू हुआ था। दिसंबर 2025 की तस्वीर में इमारत के भीतर दो गहरे गड्ढे दिखाई दिए थे, जबकि 18 सितंबर 2026 की तस्वीर में छत का कुछ हिस्सा अधूरा था।शोधकर्ताओं के मुताबिक, छत का काम पूरा होने में ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए, लेकिन विशेष ढलाई उपकरण लगाने में कई महीने लग सकते हैं। FPRI का अनुमान है कि यह सुविधा 2026 के अंत तक मिसाइल उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार हो सकती है। यह एक अनुमान है, उत्पादन शुरू होने की पुष्टि नहीं।

निष्कर्ष

Saudi Arabia Missile Development से जुड़े नए आकलन संकेत देते हैं कि सऊदी अरब अपनी मिसाइल निर्माण क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा हो सकता है। यदि नई सुविधाओं का इस्तेमाल लंबी दूरी वाली मिसाइलों के उत्पादन में होता है, तो इससे ईरान के साथ सैन्य संतुलन और मध्य पूर्व की हथियारों की होड़ प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, मिसाइल के प्रकार और उत्पादन क्षमता को लेकर अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक पुष्टि और आगे की निगरानी जरूरी है।

FAQ (Frequently Asked Questions):

Saudi Arabia अधिक शक्तिशाली मिसाइलें क्यों विकसित कर रहा है?

विश्लेषकों के अनुसार, इसका संभावित उद्देश्य ईरान से खतरे के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना और क्षेत्रीय सैन्य चुनौतियों का सामना करने के लिए विकल्प मजबूत करना है।

सैटेलाइट तस्वीरों में क्या सामने आया है?

तस्वीरों के विश्लेषण में अल-दुवादिमी परिसर में नई इमारतों और संभावित मिसाइल ईंधन निर्माण सुविधाओं के विस्तार के संकेत मिले हैं।

क्या सऊदी अरब लंबी दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइलें बना रहा है?

शोधकर्ताओं ने डीएफ-15, डीएफ-21 या समान मिसाइलों के संभावित उत्पादन का अनुमान जताया है। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हूती विद्रोहियों से खतरे का इस विस्तार से क्या संबंध है?

रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर मिसाइल क्षमता सऊदी अरब को क्षेत्रीय खतरों और यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों के बीच अपनी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में मदद कर सकती है।

इसका मध्य पूर्व की सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है?

यदि सऊदी अरब की लंबी दूरी वाली मिसाइल क्षमता बढ़ती है, तो ईरान के साथ सैन्य संतुलन प्रभावित हो सकता है और क्षेत्र में हथियारों की प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है।

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