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Rohit Sharma की चोट और 32 खिलाड़ियों के Rehab से BCCI CoE पर सवाल, रिपोर्ट में क्या सामने आया ?

BCCI Centre of Excellence की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 32 शीर्ष पुरुष क्रिकेटरों ने चोटों के लिए रिहैब कराया। Rohit Sharma की चोट से जुड़ी जानकारी के बाद भारतीय क्रिकेट में फिटनेस प्रबंधन पर सवाल उठे हैं।

Rohit Sharma की चोट और 32 खिलाड़ियों के Rehab से BCCI CoE पर सवाल, रिपोर्ट में क्या सामने आया ?

भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की चोटों और उनकी फिटनेस को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसकी वजह BCCI Centre of Excellence से जुड़ी एक रिपोर्ट है। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 32 शीर्ष पुरुष क्रिकेटरों ने बेंगलुरु स्थित Centre of Excellence में चोटों के लिए रिहैब कराया। इनमें 20 केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ी और 12 टारगेटेड या इंडिया A श्रेणी के खिलाड़ी शामिल थे।

रिपोर्ट में Rohit Sharma की चोट के बाद रिहैब की जानकारी भी सामने आई है। इसके साथ ही BCCI के Injury Management Programme और खिलाड़ियों की रिकवरी व्यवस्था पर चर्चा शुरू हुई है। हालांकि चोटों की संख्या अपने आप यह साबित नहीं करती कि BCCI या CoE की व्यवस्था में लापरवाही हुई है।

Source : HindustanTimes.com
Source : HindustanTimes.com

Rohit Sharma Injury Rehabilitation- CoE में क्यों कराया गया रिहैब ?

रिपोर्ट के मुताबिक Rohit Sharma ने IPL 2026 के बाद हैमस्ट्रिंग की चोट के लिए बेंगलुरु स्थित BCCI Centre of Excellence में रिहैब कराया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि BCCI ने उस समय उनकी रिकवरी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था।

हैमस्ट्रिंग जांघ के पिछले हिस्से में मौजूद मांसपेशियों का समूह है। दौड़ने और तेजी से दिशा बदलने जैसी गतिविधियों के दौरान इस हिस्से पर दबाव पड़ता है। चोट के बाद खिलाड़ी को मैदान पर लौटने से पहले मेडिकल देखभाल और फिटनेस से जुड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

यह जानकारी समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। इससे Rohit Sharma की मौजूदा फिटनेस या किसी आगामी मैच में खेलने की उपलब्धता की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए ताजा आधिकारिक अपडेट जरूरी है।

BCCI Centre of Excellence में 32 और 68 खिलाड़ियों के आंकड़ों का क्या मतलब है ?

रिपोर्ट के अनुसार 32 शीर्ष पुरुष क्रिकेटरों ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच CoE में चोटों के लिए रिहैब कराया। इनमें केंद्रीय अनुबंध वाले 20 खिलाड़ी और टारगेटेड या इंडिया A श्रेणी के 12 खिलाड़ी शामिल थे।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि CoE की Sports Science and Medicine यानी SSM टीम ने पुरुष और महिला क्रिकेट सहित कुल 68 खिलाड़ियों की चोटों का इलाज या प्रबंधन किया। यह आंकड़ा 32 शीर्ष पुरुष खिलाड़ियों वाले आंकड़े से अलग है। इसलिए दोनों संख्याओं को जोड़कर कुल खिलाड़ियों की संख्या बताना सही नहीं होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर चोटें सॉफ्ट टिश्यू से जुड़ी थीं। सॉफ्ट टिश्यू में मांसपेशियां और शरीर के अन्य सहायक ऊतक शामिल होते हैं। रिपोर्ट में Rishabh Pant के पैर में फ्रैक्चर के बाद हुए इलाज का भी उल्लेख किया गया है।

IPL 2026 के बाद भारतीय क्रिकेटरों की चोटों को लेकर चिंता क्यों बढ़ी ?

रिपोर्ट के अनुसार IPL 2026 के बाद खिलाड़ियों की चोटों से जुड़ी चिंताएं और बढ़ीं। रिपोर्ट में कहा गया कि इसके बाद होने वाली सीरीज में भी खिलाड़ियों के चोटिल होने के मामले सामने आए,हालांकि इससे यह साबित नहीं होता कि सभी चोटों की वजह IPL का कार्यभार था। लगातार मैच खेलना, यात्रा, आराम के लिए कम समय मिलना और खिलाड़ी की भूमिका जैसे कई पहलू फिटनेस को प्रभावित कर सकते हैं। तेज गेंदबाजों और ऑलराउंडरों के लिए कार्यभार पर नजर रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।

BCCI की ओर से प्रकाशित जानकारी के मुताबिक CoE तेज गेंदबाजों के कार्यभार की निगरानी के लिए तकनीक और व्यक्तिगत मानकों का इस्तेमाल करता है। CoE प्रमुख VVS Laxman ने यह भी कहा था कि चोट का जोखिम केवल जरूरत से ज्यादा गेंदबाजी करने से नहीं बढ़ता। कुछ परिस्थितियों में मैच की मांग के मुकाबले पर्याप्त गेंदबाजी अभ्यास न होना भी समस्या बन सकता है।
इसलिए भारतीय क्रिकेटरों की चोटों का आकलन करते समय हर खिलाड़ी की मेडिकल स्थिति और अभ्यास तथा मैच के कार्यभार को अलग-अलग समझना जरूरी है।

BCCI Centre of Excellence क्या है और कैसे करता है काम ?

BCCI Centre of Excellence बेंगलुरु में स्थित एक हाई परफॉर्मेंस सेंटर है। यहां क्रिकेट प्रशिक्षण के साथ स्पोर्ट्स साइंस, स्पोर्ट्स मेडिसिन, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग और खिलाड़ियों की फिटनेस पर काम किया जाता है। चोट के बाद खिलाड़ियों को मैदान पर लौटने के लिए तैयार करना भी इसकी जिम्मेदारियों में शामिल है।

BCCI की आधिकारिक वेबसाइट पर 11 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक इंटरव्यू में VVS Laxman ने CoE की रिहैब प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी थी। उनके मुताबिक चोट का निदान होने के बाद खिलाड़ी की रिकवरी अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ती है। इसमें मेडिकल देखभाल और फिजियोथेरेपी के बाद स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग, क्रिकेट से जुड़ी स्किल ट्रेनिंग और धीरे-धीरे कार्यभार बढ़ाना शामिल है।

Laxman ने बताया कि खिलाड़ी को फिट घोषित करने से पहले उसकी शारीरिक क्षमता और खेल से जुड़े मानकों का आकलन किया जाता है। इसके बाद दो Return to Play यानी RTP मैच कराए जाते हैं। इनका उद्देश्य यह जांचना है कि खिलाड़ी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटने के लिए तैयार है या नहीं।
CoE खिलाड़ी की प्रगति के आधार पर रिकवरी कार्यक्रम में बदलाव भी करता है। Laxman के अनुसार हर खिलाड़ी के शरीर की प्रतिक्रिया अलग होती है। इसलिए सभी खिलाड़ियों के लिए रिकवरी की एक निश्चित समयसीमा तय करना संभव नहीं है।

BCCI CoE के बजट में कितनी बढ़ोतरी हुई ?

रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 के लिए BCCI Centre of Excellence का अनुमानित खर्च 127 करोड़ रुपये रखा गया है। इसके मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में वास्तविक खर्च 92 करोड़ रुपये था। दोनों आंकड़ों के बीच 35 करोड़ रुपये का अंतर है।

यह राशि केवल खिलाड़ियों के रिहैब पर खर्च होने वाला पैसा नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार CoE के खर्च में प्रशासनिक लागत, कोर्स और मैचों से जुड़े खर्च भी शामिल हैं। इसलिए पूरे बजट को सिर्फ चोटों के इलाज पर खर्च की गई रकम बताना सही नहीं होगा।

बजट में बढ़ोतरी से अपने आप यह साबित नहीं होता कि खिलाड़ियों का चोट प्रबंधन बेहतर हुआ है या नहीं। इसका आकलन करने के लिए रिकवरी की अवधि, दोबारा चोट लगने के मामले और खिलाड़ियों की मैदान पर वापसी जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।

Indian Cricket Team Fitness Concerns- समन्वय पर क्यों उठे सवाल ?

खिलाड़ियों की चोटों के प्रबंधन में मेडिकल टीम, CoE, टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं के बीच सही समय पर जानकारी साझा करना जरूरी है। अक्टूबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में भारतीय टीम की Sports Science and Medicine इकाई और CoE की मेडिकल टीम के बीच संवाद को लेकर सवाल उठाए गए।

रिपोर्ट के अनुसार BCCI सचिव Devajit Saikia ने बताया कि VVS Laxman वरिष्ठ चयन समिति की बैठकों में शामिल होंगे ताकि खिलाड़ियों की फिटनेस और रिकवरी को लेकर चयनकर्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

दूसरी ओर Laxman ने अगस्त 2026 में कहा था कि CoE, टीम प्रबंधन, मेडिकल स्टाफ और चयन समिति के बीच समन्वय बना हुआ है। इस तरह संवाद व्यवस्था को लेकर सवाल भी रिपोर्ट किए गए हैं और BCCI की ओर से समन्वय बेहतर बनाने के प्रयास भी सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी एक विभाग को खिलाड़ियों की चोटों के लिए जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।

निष्कर्ष

BCCI CoE की सालाना रिपोर्ट पर आधारित जानकारी के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 32 शीर्ष पुरुष क्रिकेटरों ने चोटों के लिए रिहैब कराया। इसी रिपोर्ट में Rohit Sharma के IPL 2026 के बाद हैमस्ट्रिंग चोट के लिए CoE में रिकवरी कराने की जानकारी सामने आई।

इन आंकड़ों ने भारतीय क्रिकेट में चोट प्रबंधन, कार्यभार और मेडिकल टीमों के समन्वय पर चर्चा बढ़ाई है। हालांकि उपलब्ध तथ्यों से यह साबित नहीं होता कि खिलाड़ियों की चोटों के लिए BCCI या CoE की लापरवाही जिम्मेदार थी। इस व्यवस्था का आकलन करने के लिए चोटों के कारणों, रिकवरी और मैदान पर वापसी की प्रक्रिया को भी देखना होगा।

FAQ (Frequently Asked Questions):

BCCI Centre of Excellence Report 2026 में क्या जानकारी सामने आई है ?

रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 32 शीर्ष पुरुष क्रिकेटरों ने CoE में चोटों के लिए रिहैब कराया। रिपोर्ट में Rohit Sharma की चोट के बाद रिकवरी और CoE के बजट से जुड़ी जानकारी भी सामने आई।

Rohit Sharma ने BCCI CoE में Injury Rehabilitation क्यों कराई ?

रिपोर्ट के मुताबिक Rohit Sharma ने IPL 2026 के बाद हैमस्ट्रिंग की चोट के लिए बेंगलुरु स्थित BCCI Centre of Excellence में रिहैब कराया था। उनकी मौजूदा फिटनेस के बारे में जानकारी के लिए ताजा आधिकारिक अपडेट देखना जरूरी है।

BCCI CoE में कितने भारतीय खिलाड़ियों ने Rehab लिया ?

रिपोर्ट के अनुसार 32 शीर्ष पुरुष खिलाड़ियों ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच रिहैब कराया। इसके अलावा CoE की SSM टीम ने पुरुष और महिला क्रिकेट सहित कुल 68 खिलाड़ियों की चोटों का इलाज या प्रबंधन किया।

BCCI Centre of Excellence क्या है ?

BCCI Centre of Excellence बेंगलुरु स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर है। यहां क्रिकेट प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स साइंस, मेडिकल सहायता, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग और चोट के बाद खिलाड़ियों की रिकवरी पर काम किया जाता है।

. भारतीय क्रिकेटरों की चोटों को लेकर चिंता क्यों बढ़ रही है ?

शीर्ष खिलाड़ियों के रिहैब के आंकड़ों और IPL 2026 के बाद चोटों से जुड़ी रिपोर्टों ने कार्यभार प्रबंधन, रिकवरी और मेडिकल टीमों के समन्वय पर चर्चा बढ़ाई है। हालांकि सभी चोटों को किसी एक कारण से जोड़ने के लिए पर्याप्त प्रमाण जरूरी हैं।

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