CBI Bank Recruitment Scam: आंखों की स्कैनिंग से कैसे पकड़े गए 172 फर्जी बैंक अधिकारी? 2020 से 2024 तक के रिकॉर्ड खंगाले
CBI ने बैंक भर्ती फर्जीवाड़े की जांच में 2020–2024 के रिकॉर्ड और आइरिस स्कैन का मिलान कर 257 संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान की। इनमें 172 बैंक कर्मचारी थे। मामले में चार गिरफ्तारियां हुई हैं।
बैंक में नौकरी पाने के लिए फर्जीवाड़ा करने वालों का पुराना खेल अब आंखों की पहचान से खुल रहा है। CBI Bank Recruitment Scam की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 2020 से 2024 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं के रिकॉर्ड दोबारा खंगाले। जांच में 257 संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान हुई, जिन पर धोखाधड़ी से नौकरी हासिल करने का संदेह है। इनमें से 172 अलग-अलग बैंकों में काम कर रहे थे। मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 135 अन्य को आरोपी बनाया गया है।
बैंक भर्ती घोटाले में 6 राज्यों में CBI की कार्रवाई, चार गिरफ्तार

CBI ने इस मामले में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में छापेमारी और अन्य कार्रवाई की है। अधिकारियों के मुताबिक, 8 अक्टूबर को CBI की मुंबई स्थित स्पेशल टास्क ब्रांच ने कई राज्यों में एक साथ छापे मारे थे।यह जांच इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR के बाद शुरू हुई। IBPS बैंक भर्ती परीक्षाओं के लिए चयन प्रक्रिया से जुड़ी संस्था है। शिकायत के बाद उम्मीदवारों की तस्वीरों और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की दोबारा जांच की गई, जिसमें कथित फर्जीवाड़े के संकेत मिले।मध्य प्रदेश में एक ग्रामीण बैंक के 19 कर्मचारियों को मामले की जांच के बाद पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
CBI Bank Recruitment Scam: आंखों की स्कैनिंग से कैसे खुला फर्जीवाड़ा?
इस जांच की सबसे अहम कड़ी उम्मीदवारों की आइरिस स्कैन यानी आंखों की पुतली के पैटर्न से पहचान करना है। IBPS ने भर्ती परीक्षाओं में शामिल उम्मीदवारों की तस्वीरों और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड का दोबारा मिलान किया। इस दौरान ऐसे मामले सामने आए, जिनमें परीक्षा देने वाले व्यक्ति की पहचान और नौकरी पाने वाले उम्मीदवार के रिकॉर्ड में अंतर था।जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों ने परीक्षा दी थी। आरोप है कि फर्जी उम्मीदवारों ने बैंक भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में परीक्षा और इंटरव्यू देकर चयन हासिल किया।आंखों की स्कैनिंग से पुराने परीक्षा रिकॉर्ड और नौकरी पाने वाले लोगों की पहचान के बीच संबंध स्थापित करने में मदद मिली। इसी आधार पर 257 संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान की गई, जिनमें 172 के बैंकों में कार्यरत होने की जानकारी सामने आई।
पांच साल पुराने रिकॉर्ड की जांच से कैसे सामने आया मामला?
CBI ने केवल हाल की परीक्षाओं पर ध्यान देने के बजाय वर्ष 2020 से 2024 तक आयोजित भर्ती परीक्षाओं के रिकॉर्ड दोबारा जांचे। इस प्रक्रिया में परीक्षा के दौरान लिए गए आइरिस स्कैन का मिलान किया गया।कुछ स्कैन गिरफ्तार आरोपियों से मेल खाते पाए गए, जबकि संबंधित रिकॉर्ड में उन पहचानों को बैंक में नौकरी हासिल करने वाले उम्मीदवारों से जोड़ा गया था। इस तरह पुराने बायोमेट्रिक डेटा की मदद से कथित फर्जीवाड़े की कड़ियां सामने आईं।जांच का दायरा अब अन्य संदिग्ध कर्मचारियों तक भी बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, संदिग्ध या आरोपी बनाए जाने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।
नौकरी जाने से लेकर गिरफ्तारी तक का खतरा, IBPS ने उठाया कदम
मामले में IBPS ने पहचाने गए कर्मचारियों और अन्य संदिग्धों को परीक्षाओं में शामिल होने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। संबंधित बैंकों को अपने सेवा नियमों के तहत उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। इसके अलावा, जांच में उनकी भूमिका के आधार पर आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। CBI अब देशभर में अन्य संभावित फर्जी नियुक्तियों की तलाश कर रही है।
निष्कर्ष
CBI Bank Recruitment Scam ने बैंक भर्ती प्रक्रिया में पहचान सत्यापन और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की अहमियत को सामने रखा है। 2020 से 2024 तक के रिकॉर्ड की जांच और आइरिस स्कैन के मिलान से 257 संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान हुई। अब जांच का फोकस अन्य संभावित फर्जी नियुक्तियों और आरोपियों की भूमिका पर है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
CBI Bank Recruitment Scam क्या है?
यह बैंक भर्ती परीक्षाओं में कथित पहचान संबंधी धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें कुछ उम्मीदवारों की जगह दूसरे लोगों के परीक्षा देने और इसके जरिए नौकरी हासिल करने का संदेह है।
CBI ने इस मामले में कितने संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान की?
जांच में 257 संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान हुई। इनमें से 172 अलग-अलग बैंकों में कार्यरत थे।
बैंक भर्ती घोटाले का खुलासा कैसे हुआ?
IBPS ने उम्मीदवारों की तस्वीरों और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की दोबारा जांच की। 2020 से 2024 के परीक्षा रिकॉर्ड में आइरिस स्कैन का मिलान करने से कथित गड़बड़ियों का पता चला।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
दी गई रिपोर्ट के अनुसार, CBI ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है और 135 अन्य को आरोपी बनाया है।
संदिग्ध बैंक कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?
IBPS ने संबंधित कर्मचारियों और अन्य संदिग्धों को परीक्षाओं से स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया है। बैंकों को सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करने को कहा गया है। मध्य प्रदेश में एक ग्रामीण बैंक के 19 कर्मचारी निलंबित किए जा चुके हैं।