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Supreme Court Opposition Petition Defects: राहुल गांधी की याचिका में 10 से ज्यादा खामियां, ₹200 से अधिक की कोर्ट फीस भी कम; अब आगे क्या?

राहुल गांधी और विपक्ष की SIR विरोधी याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 10 से अधिक खामियां बताईं। इनमें पहचान पत्र, दस्तावेजों और 200 रुपये से अधिक की कोर्ट फीस की कमी शामिल है।

Supreme Court Opposition Petition Defects: राहुल गांधी की याचिका में 10 से ज्यादा खामियां, ₹200 से अधिक की कोर्ट फीस भी कम; अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने पहुंचे राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिका दाखिल होते ही प्रक्रियागत सवालों के घेरे में आ गई। Supreme Court Opposition Petition Defects के तहत रजिस्ट्री ने याचिका में 10 से अधिक खामियां बताई हैं। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति न होना, कुछ पन्नों का अस्पष्ट या गायब होना और 200 रुपये से अधिक की कोर्ट फीस कम होना शामिल है। हालांकि, ये रजिस्ट्री की प्रक्रियागत आपत्तियां हैं; इनका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने याचिका के मुद्दों पर कोई फैसला सुना दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में क्या-क्या कमियां निकालीं?

PTI
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सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका दाखिल करने वाले वकील से कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति जमा करने को कहा है। खड़गे इस मामले में सह-याचिकाकर्ता हैं। इसके अलावा, याचिका के कुछ पन्ने पढ़ने योग्य नहीं थे या उनमें पन्ने गायब थे। रजिस्ट्री ने कोर्ट फीस में भी 200 रुपये से अधिक की कमी बताई। इन आपत्तियों को दूर करने के लिए संबंधित दस्तावेजों और शुल्क से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

Supreme Court Opposition Petition Defects: क्या याचिका खारिज हो जाएगी?

नहीं, केवल प्रक्रियागत खामियां सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि याचिका खारिज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री दाखिल दस्तावेजों की जांच करती है और उनमें कमियां मिलने पर उन्हें दूर करने के लिए कह सकती है। याचिका पर आगे की कार्रवाई इन खामियों को ठीक करने और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने पर निर्भर करेगी।इस मामले में रजिस्ट्री की आपत्तियां याचिका की फाइलिंग से संबंधित हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की वैधता और विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर अदालत का अंतिम रुख अलग विषय है।

SIR को चुनौती क्यों दे रहे हैं राहुल गांधी और विपक्षी नेता?

राहुल गांधी और कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को चुनौती दी है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।याचिका में विशेष रूप से युवाओं, प्रवासी मतदाताओं और वंचित समुदायों के मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताई गई है। विपक्ष ने SIR की वैधता पर सवाल उठाते हुए चुनावी प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की मांग की है। ये याचिका में लगाए गए आरोप हैं, जिन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है।इस मामले में भारतीय निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है।

मंगलवार को सुनवाई की उम्मीद, अब आगे क्या होगा?

रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की उम्मीद थी। इसे SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाओं के साथ सुना जा सकता है।हालांकि, सुनवाई की वास्तविक स्थिति और याचिका की प्रक्रियागत कमियां दूर हुई हैं या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक अदालती अपडेट से की जानी चाहिए। फिलहाल, रजिस्ट्री की आपत्तियों और याचिका के मूल मुद्दे को अलग-अलग समझना जरूरी है।

निष्कर्ष

Supreme Court Opposition Petition Defects का मामला फिलहाल याचिका दाखिल करने की प्रक्रियागत खामियों से जुड़ा है। राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की SIR को चुनौती देने वाली याचिका में कोर्ट फीस, पहचान पत्र और दस्तावेजों से संबंधित आपत्तियां बताई गई हैं। इन कमियों को दूर करने के बाद मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट होगी।

FAQ (Frequently Asked Questions):

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने विपक्ष की याचिका में क्या खामियां बताईं?

रजिस्ट्री ने 10 से अधिक खामियां बताईं। इनमें मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति की मांग, अस्पष्ट या गायब पन्ने और 200 रुपये से अधिक की कोर्ट फीस की कमी शामिल है।

राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं ने याचिका क्यों दायर की?

उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता को चुनौती दी है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए जा रहे हैं।

क्या रजिस्ट्री की आपत्तियों से याचिका खारिज हो जाती है?

प्रक्रियागत खामियां सामने आने का अर्थ अपने आप याचिका खारिज होना नहीं है। संबंधित कमियों को दूर करने के लिए कहा जा सकता है।

इस मामले में किन संस्थाओं और अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है?

याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है।

याचिका पर सुनवाई कब होनी थी?

रिपोर्ट के अनुसार, याचिका पर मंगलवार को SIR से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ सुनवाई होने की उम्मीद थी। सुनवाई की वास्तविक स्थिति के लिए आधिकारिक अदालती अपडेट देखना जरूरी है।

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