Pakistan Khyber Pakhtunkhwa Emergency : इमरान खान के गढ़ खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी क्यों लगी, शहबाज सरकार ने क्या वजह बताई?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 11 अक्टूबर 2026 को खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू करने की मंजूरी दी, जिससे इमरान खान की पीटीआई सरकार का नियंत्रण खत्म हो गया। केंद्र ने आतंकवाद को वजह बताया, जबकि पीटीआई ने इसे राजनीतिक कार्रवाई करार दिया।
Pakistan Khyber Pakhtunkhwa Emergency : पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। 11 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने को मंजूरी दे दी। इससे इमरान खान की पार्टी के नेतृत्व वाली निर्वाचित प्रांतीय सरकार का नियंत्रण खत्म हो गया और प्रशासन की जिम्मेदारी केंद्र के अधीन आ गई। शहबाज सरकार ने इस फैसले के पीछे आतंकवाद और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को वजह बताया है, जबकि पीटीआई ने इसे लोकतंत्र और प्रांतीय स्वायत्तता पर हमला करार दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब इमरान खान की रिहाई और अफगानिस्तान सीमा पर सैन्य अभियानों के विरोध में प्रांत में प्रदर्शन हो रहे हैं।

इमरान की पार्टी का मजबूत किला था खैबर पख्तूनख्वा
खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में स्थित प्रांत है, जिसकी सीमा अफगानिस्तान से लगती है। यह इमरान खान की पार्टी का प्रमुख राजनीतिक गढ़ रहा है। पीटीआई 2013 से इस प्रांत की राजनीति में मजबूत स्थिति में रही है। 2024 के आम चुनाव में पार्टी ने प्रांतीय विधानसभा की 60% से अधिक सीटें जीती थीं।इमरान खान अगस्त 2018 से अप्रैल 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे थे। अप्रैल 2022 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उनकी सरकार गिर गई। इसके बाद से उनका शहबाज शरीफ सरकार और सेना के साथ टकराव लगातार बढ़ता रहा है। इमरान 2023 से जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार समेत कई मामले चल रहे हैं। पीटीआई इन मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताती रही है।
2024 के आम चुनाव में इमरान खान समर्थित उम्मीदवारों ने नेशनल असेंबली में सबसे ज्यादा सीटें हासिल की थीं, लेकिन वे केंद्र में सरकार नहीं बना सके। इसके बाद शहबाज शरीफ के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनी। ऐसे में खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई की सरकार पार्टी के लिए एक अहम राजनीतिक आधार बनी हुई थी। अब गवर्नर शासन लागू होने से उसका यह आधार सीधे केंद्र के नियंत्रण में आ गया है।

सरकार बोली- आतंकवाद से निपटने में प्रांतीय प्रशासन नाकाम
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने आपातकाल लगाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय के मुताबिक, कैबिनेट ने प्रांत में सुरक्षा हालात की समीक्षा की और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रांतीय सरकार की कथित उदासीनता को लेकर चिंता जताई।प्रांत में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े आतंकवादी हमले लंबे समय से सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के लिए चुनौती बने हुए हैं। पाकिस्तान सरकार का आरोप है कि प्रांतीय प्रशासन आतंकवाद से निपटने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा था। सरकार ने यह भी कहा कि केंद्र और पीटीआई नेतृत्व के बीच बातचीत नाकाम रहने के बाद यह फैसला लिया गया।
हालांकि, सुरक्षा से जुड़े आंकड़ों की तस्वीर एक जैसी नहीं है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (CRSS) के आंकड़ों में 2026 के पहले नौ महीनों में खैबर पख्तूनख्वा में नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों की मौतों की संख्या 485 रही। यह 2025 की इसी अवधि के मुकाबले 16% कम थी। वहीं, पूरे पाकिस्तान में इस अवधि के दौरान ऐसी मौतों में 9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौतों के ये आंकड़े अपने आप में आतंकवादी गतिविधियों की पूरी स्थिति नहीं बताते, लेकिन इनसे सरकार के सुरक्षा संबंधी दावों पर सवाल जरूर उठते हैं।
मुख्यमंत्री सोहेल आफरीदी और पीटीआई नेताओं की गिरफ्तारी की खबर
गवर्नर शासन की घोषणा के बाद पीटीआई के वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी की खबरें भी सामने आईं। पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष और सांसद जुनैद अकबर से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट पर दावा किया गया कि उन्हें और मुख्यमंत्री सोहेल आफरीदी को हिरासत में लिया गया है।37 वर्षीय सोहेल आफरीदी इमरान खान की रिहाई की मांग और सैन्य अभियानों के विरोध में प्रांत में लॉन्ग मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। पीटीआई का आरोप है कि अफगानिस्तान सीमा के पास चल रहे सैन्य अभियानों में आम नागरिकों की जान जा रही है और संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है।
सरकार के फैसले से कुछ घंटे पहले आफरीदी ने सोशल मीडिया पर कहा था कि उनकी मांगें पूरी होने तक मार्च जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी पीछे नहीं हटेगी और कानूनी तरीके से आंदोलन जारी रखेगी। गिरफ्तारी की खबरों के बाद पीटीआई ने सरकार की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
पीटीआई का आरोप- आतंकवाद बहाना, निशाने पर चुनी हुई सरकार
पीटीआई ने गवर्नर शासन को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि प्रांतीय सरकार को हटाने से आतंकवाद की समस्या हल नहीं होगी। पार्टी अध्यक्ष गौहर अली खान ने कहा कि प्रांत के अधिकार कमजोर करके शांति और स्थिरता नहीं लाई जा सकती।पीटीआई प्रवक्ता शेख वकास अकरम ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सोहेल आफरीदी और जुनैद अकबर की गिरफ्तारी से सरकार की राजनीतिक मंशा सामने आ गई है। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के बजाय पीटीआई को कमजोर करने और जनता के जनादेश की अनदेखी करने के लिए की गई है।
इमरान खान के करीबी सहयोगी जुल्फिकार बुखारी ने भी फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इससे हिंसा और अस्थिरता बढ़ सकती है। पीटीआई का कहना है कि केंद्र सरकार के साथ बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का रास्ता मौजूद था, लेकिन गवर्नर शासन लागू करके सरकार ने राजनीतिक समझौते की संभावना को कमजोर किया है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार का तर्क है कि प्रांतीय प्रशासन आतंकवाद से निपटने में अपेक्षित भूमिका नहीं निभा रहा था। इस तरह विवाद अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचित सरकार के अधिकार और केंद्र के हस्तक्षेप तक पहुंच गया है।
पाकिस्तान के संविधान में गवर्नर शासन का प्रावधान
पाकिस्तान सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत आपातकाल और गवर्नर शासन लागू किया है। अनुच्छेद 232 युद्ध, बाहरी आक्रमण या ऐसी गंभीर स्थिति में आपातकाल की घोषणा का प्रावधान करता है, जिसमें देश या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा खतरे में हो। वहीं, अनुच्छेद 234 उस स्थिति से जुड़ा है, जब किसी प्रांत की सरकार संविधान के मुताबिक काम करने में असमर्थ मानी जाती है।गवर्नर शासन के दौरान राष्ट्रपति प्रांतीय सरकार के कुछ या सभी अधिकार अपने पास ले सकते हैं या उन्हें प्रांत के गवर्नर को सौंप सकते हैं। इस व्यवस्था में प्रांतीय विधानसभा की शक्तियों का इस्तेमाल भी संसद के अधिकार के तहत किया जा सकता है।
संविधान के अनुच्छेद 234 के अनुसार, इस घोषणा को संसद की संयुक्त बैठक के सामने रखना होता है। मंजूरी नहीं मिलने पर यह दो महीने बाद समाप्त हो जाती है। मंजूरी मिलने पर इसे एक बार में अधिकतम दो महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है, लेकिन सामान्य स्थिति में इसकी कुल अवधि छह महीने से ज्यादा नहीं हो सकती। यह व्यवस्था अपने आप में स्थायी रूप से प्रांतीय सरकार को खत्म करने के बराबर नहीं है; इसकी संवैधानिक शर्तें और समयसीमा लागू रहती हैं।
इमरान की रिहाई के लिए आंदोलन से बढ़ा टकराव
अक्टूबर की शुरुआत से खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की रिहाई की मांग और अफगानिस्तान सीमा के पास सैन्य अभियानों के विरोध में प्रदर्शन हो रहे थे। पीटीआई के नेतृत्व में निकाले जा रहे लॉन्ग मार्च का उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना था। पार्टी और केंद्र सरकार के बीच बातचीत के दो दौर नाकाम रहने के बाद आंदोलन तेज हुआ।विवाद का एक मुद्दा इमरान खान से मुलाकात की मांग भी थी। पीटीआई चाहती थी कि प्रदर्शन खत्म करने से पहले उसके नेताओं को जेल में बंद इमरान खान से मिलने दिया जाए, जबकि सरकार की शर्त थी कि पार्टी पहले आंदोलन समाप्त करे। इस बीच केंद्र ने इस्लामाबाद में सुरक्षा बढ़ाई और मार्च के संभावित रास्तों पर अवरोध लगाए।
अब गवर्नर शासन लागू होने से राजनीतिक टकराव और गहरा गया है। सरकार इसे आतंकवाद से निपटने के लिए जरूरी कदम बता रही है, जबकि पीटीआई इसे अपने राजनीतिक प्रभाव को खत्म करने की कोशिश मानती है। आने वाले समय में संसद की मंजूरी, सुरक्षा स्थिति और केंद्र-प्रांत के बीच राजनीतिक बातचीत से तय होगा कि खैबर पख्तूनख्वा में शासन व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है।
FAQ (Frequently Asked Questions):
पाकिस्तान ने इमरान खान की पार्टी की सरकार क्यों हटाई?
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में प्रांतीय प्रशासन की कथित नाकामी को वजह बताया है। पीटीआई का आरोप है कि सुरक्षा को बहाना बनाकर उसकी निर्वाचित सरकार को हटाया गया।
खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि प्रांत के प्रशासनिक अधिकार केंद्र के नियंत्रण में आ जाते हैं और गवर्नर को प्रांतीय सरकार के अधिकार सौंपे जा सकते हैं। पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 234 के तहत इस व्यवस्था की समयसीमा और संसदीय मंजूरी से जुड़ी शर्तें हैं।
क्या इमरान खान की पार्टी ने फैसले का विरोध किया है?
हां। पीटीआई ने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा है कि इससे प्रांतीय स्वायत्तता कमजोर होगी और हिंसा बढ़ सकती है। पार्टी ने सरकार पर राजनीतिक विरोध को दबाने का आरोप लगाया है।
खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद की स्थिति कैसी है?
प्रांत में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े हमले लंबे समय से सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं। हालांकि, CRSS के आंकड़ों के मुताबिक 2026 के पहले नौ महीनों में प्रांत में नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों की मौतें पिछले साल की समान अवधि से 16% कम थीं।
इमरान खान कब से जेल में हैं?
इमरान खान 2023 से जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार समेत कई मामले चल रहे हैं। पीटीआई इन मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताती है, जबकि कानूनी मामलों का फैसला संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।